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आखिरकार, ज़ैनब आज अपने बाप अब्बास से चुद ही गई। इतनी मजेदार चुदाई उसकी आज तक नहीं हुई थी। वो पशीने से लथपथ थी। अब्बास भी अपनी बेटी रूपी इस अप्सरा को अपने मन मुताबिक चोदकर निढाल पड़ा था।
ज़ैनब ऐसे ही नंगी लेटी रही। उसकी चूत में अभी भी अब्बास का वीर्य और खुद उसकी चूत का पानी मिलकर बाहर बह रहा था और बेंड को गीला कर रहा था। ज़ैनब के जिस्म में तो जैसे जान ही नहीं थी। ३ बार उसकी चूत से पानी निकला था। एक बार तो वो खुद नहाते वक़्त निकाली थी
और तीन बार अब्बास ने चोदते हुए निकाल दिया।
ज़ैनब मन में- "उफफ्फ... ऐसे भी कहीं चदाई होती है। इतनी देर तक। एक तो इतना बड़ा घोड़े का लण्ड है और उसमें इतनी देर तक चोदते रहे। मेरी तो चूत छिल गई है। पूरा बदन दर्द कर रहा है। लेकिन एक बात की खुशी है की में इनका साथ दे पाई। मुझे ख़ुशी है कि मेरे अब्बा को आज मुझे चोद कर मजा तो आया होगा ना? संतुष्ट तो हए होंगे? पता नहीं, लेकिन इतने में भी अगर कोई संतुष्ट ना हो तो अब क्या जान निकल के मानेगा?
थोड़ी देर में अब्बास बेड से उठा। उसका लण्ड इतनी पुरजोर चुदाई के बाद ढीला था। लेकिन उसकी जांघों के बीच ऐसे लटक रहा था जैसे कोई काला नाग झल रहा हो। उस झूलते लण्ड को देखकर ज़ैनब की चूत में फिर से आग भर गई। अब्बास ने प्यार से लेटी हुई ज़ैनब को देखा। ज़ैनब शर्मा गईं।
ज़ैनब अब्बास से पूछना चाहती थी- "कैसा लगा मुझे चोदकर? अब तो आप खुश हैं ना? अब तो आप संतुष्ट हैं ना? अब तो आप रिलैक्स रहेंगे ना?" लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हई। वो अभी भी एक संस्कारी औरत थी जो सेक्स के बारे में ज्यादा बात नहीं कर सकती थी।
ज़ैनब भी बेड से उठ गई। उसका पूरा मेकप बिगड़ा हुआ था। आँखों का काजल और लिपस्टिक फैल गया था और बाल बिखरे हुए थे। वो बहुत ही संडक्टिव लग रही थी। अब्बास पूरी तरह झड़ने के बाद अपनी बेटी के ऊपर ही निढाल होकर ढेर हो गया और उसका लंड सिकुड़कर ज़ैनब की चूत से निकल गया | ज़ैनब की चूत से उसके अब्बा का लंड निकलते ही उसकी चूत से वीरज निकलकर बेड पर गिरने लगा |
"ओह्ह्ह्ह आई लव यू अब्बा", ज़ैनब ने अपने अब्बा को जोर से अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों को चूमने लगी |
"ओह्ह्ह्ह बेटी आज मुझे जो मज़ा तुमने दिया है, उसका एहसान मैं कभी नहीं भुला सकता", अब्बास ने अपनी बेटी के होंठों को चूमने के बाद उसकी साइड में लेटते हुए कहा और अपनी बेटी की गोरी चुचियों से खेलने लगा |
"आआहाह अब्बा इसमें एहसान की क्या बात है, मैं आपकी ही बेटी हूँ और मैं आपकी मेहनत से ही पैदा हुई हूँ, इसलिए मुझपर सबसे ज्यादा हक आपका ही है", ज़ैनब ने अपने अब्बा के बालों में हाथ डालकर उसके मुंह को अपनी चुचियों पर दबाते हुए कहा |
ज़ैनब के ऐसा करने से अब्बास का मुंह उसकी बेटी की दोनों चुचियों के बीच आ गया | अब्बास भी अपनी बेटी की दोनों चुचियों को अपने दोनों हाथों में थामकर जोर से दबाते हुए उन्हें चूमने और चाटने लगा | दोनों बाप बेटी कुछ देर तक ऐसे ही मस्ती करते रहे और कुछ देर बाद ज़ैनब अपने अब्बा से अलग होते हुए बाथरूम जाने लगी |
ज़ैनब बिलकुल नंगी ही वहां से उठकर बाथरूम जा रही थी | ज़ैनब के बाथरूम जाते हुए अब्बास की नज़रें अपनी बेटी के नंगे जिस्म को घुर रही थी |
ज़ैनब के बाथरूम घुसने के बाद अब्बास भी बेड से उठते हुए अपनी बेटी के पास बाथरूम जाने लगा | अंदर से नल खोलने की आवाज आई। अब्बास उसके पीछे-पीछे गया तो पाया कि ज़ैनब यूं ही बैठ कर सुसु कर रही थी। अब्बास को यूं देख कर ज़ैनब शर्मा गई। ज़ैनब यह नहीं चाहती थी कि अब्बास उसे सुसु करते हुए देखे ।
ज़ैनब बाथरूम में निचे बैठकर पेशाब कर रही थी |
"अब्बा आप यहाँ? कुछ तो शर्म कीजिये", ज़ैनब ने अचानक अपने अब्बा को नंगा ही बाथरूम में दाखिल होता देखकर झूठमूठ के गुस्से से कहा |
ज़ैनब ने मुंह बनाया तो अब्बास ने कहा कि, "मुझे भी पेशाब करना है"। ज़ैनब चुप हो गयी. उसे लगा के जैसे इतनी दमदार चुदाई के बाद उसे पेशाब लगी है तो उसी तरह उसके अब्बा को भी तो पेशाब लगी होगी. इसलिए वो चुप रही और शर्म के मरे मुँह नीचे को करके पेशाब करने लगी। अब्बास उसके पीछे गया और वो भी नीचे बैठ गया और अपना हाथ पीछे से ज़ैनब के नितंबों के नीचे से से होते हुए उसकी योनि पर रख दिया। ज़ैनब इस अचानक हमले से चमक गई। उसकी पेशाब की धार अब्बास के हाथों से होते हुए जमीन पर जा रही थी। उसका गरम-गरम पेशाब और उसकी कोमल चूत गजब का एहसास दे रहे थी। अब्बास ने उसकी चूत को अपने हाथों से मलना शुरू किया, और एक ऊंगली उसकी चूत में डाल दी। वह पेशाब करती रही और अब्बास मलता रहा।
फिर वह खड़ी हुई और अपने बाप को प्यार से एक चपत लगाते हुए अब्बास के हाथों को पकड़ कर एक मग पानी उसके हाथों में डाला। फिर अपनी चूत पर डाला और कहा, "यह क्या था?"
अब्बास ने कहा, "ज़ैनब अब जो कुछ तुम्हारा है, वह मेरा है"। फिर अब्बास ने उसे अपनी ओर खींचा और गले लगा लिया।अब्बास का खड़ा लिंग ज़ैनब की नाभि पर चिपक गया था।अब्बास ने उसके कमर को जोर से सटा लिया, और उसके एक पैर को उठा कर अपनी कमर पर बांध दिया। वह समझ नहीं पाई तब तक उसके अब्बा ने उसे गोद में उठा लिया।
अब उसने खुद ही दूसरा पैर अब्बास के कमर पर बांध दिया।अब्बास ने ज़ैनब के नितंबों को उठा कर लिंग को उसकी योनि पर एडजस्ट किया। उसे लगा कि अब्बास उसे दोबारा चोदने वाला था। पर अब्बास ने अपने पेशाब की धार उसकी योनि पर छोड़ दी। ज़ैनब मुझसे लिपट गई और उसके शोहर रुपी अब्बा की गर्म पेशाब की धार उसकी चूत से होते हुए उसकी जांघों से बहने लगी। अब्बास ने जितना हो सके तेज पेशाब करना शुरू किया, और शावर को चला दिया। दोनों भीगने लगे।
पानी की एक-एक बूंद का एहसास और अपनी ज़ैनब के जिस्म की गर्माहट साथ ही पेशाब की धार कमाल कर गई। पेशाब रुकने के बाद ज़ैनब ने अपनी आँखें खोली और अपने अब्बा से बोली
"अब्बा आप तो नौजवान लड़कों से भी ज्यादा जवान और शरारती हैं, बस अब मुझे उतारिये मुझे कमरे में जाना है. "
पर अब्बास ने अपनी नंगी बेटी को गोद में से उतारा और उसका हाथ पकड़ कर उसे बाहर जाने से रोकते हुए बोले
"अरे बेटी अब तुमसे क्या शर्म? मैं तो बस अपनी बेटी के साथ नहाना चाहता हूँ", अब्बास ने बाथरूम में अन्दर शावर को ओन करते हुए कहा |
"अब्बा मुझे शर्म आ रही है, मैं आपके साथ नहीं नहा पाऊँगी, मैं जा रही हूँ", ज़ैनब ने अपने अब्बा से कहा और उठकर वहां से जाने लगी |
बेटी क्यों इतना शर्मा रही हो, बस कुछ ही देर की तो बात है"? अब्बास ने अपनी बेटी को कलाई से पकड़कर अपने साथ शावर के निचे खड़ा करते हुए कहा |
"ज़ैनब ने भी अब कोई विरोध नहीं किया और शावर के पानी से अपने पिता के साथ नहाने लगी | अब्बास ने नहाते हुए साबुन उठा लिया और अपनी बेटी की पीठ पर मलने लगा | अब्बास साबुन को ज़ैनब की चिकनी पीठ पर मलते हुए निचे होते हुए उसके दोनों चूतडों तक आ गया और अपनी बेटी के दोनों नर्म चूतडों पर साबुन को मलते हुए उन्हें अपने दुसरे हाथ से दबाने लगा |
"अआहाहह्ह्ह अब्बा क्या कर रहे हो, बस साबुन लगा लिया ना", ज़ैनब ने सिसकते हुए कहा |
"बेटी थोडा झुक जाओ, तुम्हारा हाथ इधर नहीं पहुच पाता, इस लिए यहाँ पर थोड़ी गंदगी है, मैं इसे साफ कर देता हूँ", अब्बास ने अपनी ऊँगली को ज़ैनब के चूतडों के बीच फेरते हुए कहा |
"ओह्ह्हह्ह्ह्ह अब्बा" ज़ैनब ने थोडा झुकते हुए सिसककर कहा | अब्बास अब साबुन को अपनी बेटी की गांड के छेद से निचे लेजाकर उसकी चूत तक मलने लगा | अब्बास के ऐसा करने से ज़ैनब के मुंह से जोर की सिसकियाँ निकल रही थी | अब्बास थोड़ी देर तक अपनी बेटी के चूतडों को सही तरीके से साफ करने के बाद उठकर खड़ा हो गया |
अब्बास अब साबुन को अपनी बेटी की दोनों बड़ी बड़ी गोरी चुचियों पर मलने लगा | अब्बास साबुन को अपनी बेटी की चुचियों पर मलते हुए उन्हें अपने हाथ से भी दबा रहा था |
"आह्ह्ह्हह्ह अब्बा क्या कर रहें हैं आप?" अब्बास का ऐसा करने से ज़ैनब के मुंह से बहुत जोर की सिसकियाँ निकल रही थी | अब्बास अब साबुन को ज़ैनब के चिकने गोरे पेट पर मलते हुए निचे ले जाने लगा |अब्बास का हाथ अब उसकी बेटी की चूत की हलकी झांटों तक आ गया था | ज़ैनब ने मज़े के मारे अपनी आँखें बंद कर ली थी | वो अपने पिता की हरकतों से बहुत ज्यादा गर्म हो चुकी थी | अब्बास अब साबुन को अपनी बेटी की चूत पे मल रहा था और ज़ैनब मज़े से सिसक रही थी |
अब्बास ने कुछ देर तक अपनी बेटी की चूत को साबुन से साफ़ करने के बाद साबुन को निचे रख दिया और ज़ैनब की चूत को गोर से देखते हुए अपने होंठों को उसकी चूत पर रख दिया |
"ओह्ह्हह्ह्ह्ह अब्बा क्या कर दिया आपने", अपने अब्बा के होंठों को अचानक अपनी चूत पर महसूस करते ही ज़ैनब ने जोर से सिसकते हुए कहा |
अब्बास अपनी बेटी को कोई जवाब दिए बगैर उसकी चूत को चूमते और चाटते हुए उसकी चूत पर गिरता हुआ पानी भी चाटने लगा | ज़ैनब की हालत बहुत खराब हो चुकी थी | उसका पूरा बदन तप कर आग बन चूका था | अब्बास ने अचानक अपनी एक ऊँगली को अपनी बेटी की चूत के छेद में डालते हुए उसकी चूत के दाने को अपने मुंह में ले लिया और उसे बहुत जोर से चूसने लगा |
ज़ैनब अपने पिता की यह हरकत बर्दाश्त न कर सकी और उसका पूरा जिस्म कांपने लगा |
"आहाह्ह्ह्हह इश..... अब्बा ओह्ह्ह्ह", ज़ैनब ने जोर से सिसकते हुए अपने अब्बा को बालों से पकड़कर अपनी चूत पर दबा दिया और उसकी चूत झटके खाते हुए पानी छोड़ने लगी | अब्बास अपनी बेटी की चूत का रस शावर के गिरते हुए पानी के साथ चाटने लगा |
ज़ैनब कुछ देर तक यूँ ही अपनी आँखें बंद करके झड़ने लगी |
"बेटी क्या हुआ, मज़ा आया?" कुछ देर बाद जब ज़ैनब ने अपनी आखें खोली तो अब्बास ने उठकर उसके सामने खड़ा होते हुए पूछा |
"अब्बा...." ज़ैनब ने अपने अब्बा को अपनी बाँहों में भर लिया और दोनों बाप बेटी एक दुसरे के होंठों को चूमने लगे | कुछ देर तक ऐसे ही एक दुसरे के होंठों से खेलने के बाद अब्बास ने ज़ैनब को गोद से उतारा और उसके चूचों को चूसने लगा। उसके एक हाथ उसके नितम्ब के छेद को रगड़ रहा था, और दूसरा हाथ उसकी पीठ को सहला रहा था। अब्बास ने ज़ैनब को चूमते हुए उसे नहलाना शुरू किया। उसने बड़े प्यार से अपने बाप के पूरे शरीर को साफ किया और उसे गले लगा लिया।
दोनो ने तौलिया से एक-दूसरे को पोंछा। इस बार ज़ैनब ने शरारती अंदाज में अब्बास के लंड को पकड़ कर उसे बाहर की ओर चलने का इशारा किया। बस उसके पीछे-पीछे अब्बास बाहर आ गया और पलंग पर गया और लेट गया। ज़ैनब भी उसके बगल में लेट गई, और अब्बास के लिंग को सहलाते हुए उसकी छाती पर अपना सर रख कर अब्बास से बातें करने लगी।
थोड़ी देर बातें करते रहने के बाद अब्बास ने ज़ैनब से कहा कि, "अपने छुटकु को प्यार नहीं करोगी"? अब्बास अपने इतने बड़े लण्ड को प्यार से छुटकु कह रहा था । ज़ैनब ने शर्म के मरे कोई जवाब नहीं दिया पर उसकी आँखों के प्यार से अब्बास समझ गया और उसका सिर अपने लंड की ओर किया। उसने बड़े प्यार से अपने अब्बा के लंड का अग्र भाग मुंह में लिया, और चूसते हुए आंख मारी। अब्बास ने फिर उसे कहा, "पूरा लेलो मेरी जान"। तो ज़ैनब ने अपने अब्बा के लंड को अपने मुंह में भर कर धीरे-धीरे अपनी गर्म सांसे उस पर छोड़ते हुए चूसने लगी।
थोड़ी देर बाद ज़ैनब ने कहा
"अब्बा बहुत रात हो चुकी है लगभघ रात के २ बजने वाले है. हलाला का काम तो बहुत हो चूका है, चलो थोड़ी देर सो जाते हैं. "
दोनों कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे। फिर वह अब्बास से अलग हुई और उसके लिंग को सिकुड़ा हुआ देख कर हंसने लगी, और उसे चूम लिया। फिर दोनों एक-दूसरे की आगोश में गहरी नींद में सो गए।
ज़ैनब और अब्बास दोनों रात के भयंकर चुदाई के कारण बहुत थक गए थे तो दोनों घोड़े बेच कर सोते रहे.
सुबह पहले ज़ैनब के आँख खुली, उसकी चूत में रात के चुदाई के कारन अभी भी दर्द हो रहा था. पर उसे पेशाब लगी थी. तो वो उठकर बाथरूम में पेशाब करने चली गयी.
पेशाब करते हुए उसे रात के चुदाई और इसी बाथरूम में इकठे नहाने और चूत चाटने वाली घटना याद आ गयी. अपने बाप के साथ बितायी पिछली रात को यद् करके उसकी चूत फिर से गीली हो गयी.
पेशाब करने के बाद उसने अपनी चूत को पोंछा और नंगी ही बैडरूम में वापिस आ गयी.
उसने देखा की अब्बास अभी भी सो रहा था. वो भी पूरा नंगा था और उसका लण्ड नींद में भी उसे उस्मान से बहुत बड़ा और मोटा लग रहा था. अपने अब्बा के मोटे लण्ड को देख कर वो सोच रही थी- "ये आदमी है की कोई भूत प्रेत है। ऐसे भी कोई चुदाई करता है क्या? एक ही रात में तीन बार। मेरी तो जान निकाल दी। कितने अरमानों में सजी थी की सुहागरात मनाऊँगी। मुझे लगा था की सुहागरात को महसूस करेंगे अब्बास। दुल्हन के कपड़े उतारेंगे और फिर चोदकर साथ में सो जाएंगे। लेकिन इन्होंने तो हद ही कर दी। इनकी भी क्या गलती है भला, जिसे कोई औरत एक रात के लिये मिलेंगी तो क्या करेंगा? अब्बास को लगा है की मैं बस आज की रात के लिए ही उनकी थी, तो रात भर में ही पूरी तरह मुझे पा लेना चाहते थें। और इसी चक्कर में मेरी चूत के चीथड़े उड़ा दिए। लेकिन क्या मस्त लण्ड है, मजा आ गया। भले चूत छिल गई, जिश्म दर्द कर रहा है, लेकिन चुदवाने में मजा आ गया। आहह.... कितना अंदर तक जाता है लण्ड... जब वो धक्का लगा रहे थे तो मेरे तो पेट में चुभ रहा था। और जब वीर्य गिराया चूत में ता लगा की एकदम आग भर दिए हों अंदर गहराई में। तभी तो एक बार चुदवाने के बाद मैं दूसरी बार के लिए भी तैयार थी और दूसरी बार के बाद और दो बार के लिए। अभी सुबह का समय है उस्मान के आने और फिर तलाक लेने में तो थोड़ा टाइम है तो एक और बार चुदवा ही लें क्या? छिल जाएगी चूत तो छिल जाएगी, लेकिन मजा आ जाएगा। नहीं नहीं, अब अगर उन्होंने मुझे चोदा तो मैं मर ही जाऊँगी। और कौन सा वो भागे जा रहे हैं। उन्हें भी यहीं रहना है और मुझे भी। देखा नहीं कितने प्यासे हैं अब्बास। तभी तो रात में पागलों की तरह कर रहे थे। अब चाहे जो भी हो मुझे उनसे चुदवाते रहना है। तभी उन्हें भी सुकून मिलेगा और मुझे भी। मेरी चूत को अब वही लण्ड चाहिए। अब चाहे मेरा मेरे अब्बा अब्बास से तलाक हो भी जाये पर में फिर भी उनसे अपना यह रिश्ता कभी ख़तम नहीं करुँगी. मेरे अब्बा बेचारे बीवी के बिना मुठ मार कर ही गुजारा कर रहे हैं अब तो जो भी हो जाये मैं उन्हें अब कभी भी चूत के लिए तड़पने नहीं दूँगी.
यह सोच कर ही उसके होंठों पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गयी. वो उठ कर किचन में गयी और अपने और अब्बास के लिए चाय बना कर ले आयी. उसने चाय एक साइड में टेबल पर रखी और और अब्बास के ऊपर आकर अपने दोनों हाथों को अब्बास के अगल बगल में रखी और उसपे अपने जिश्म का भार देते हए अब्बास के ऊपर झकने लगी। अपनी लटकती चूचियों को अब्बास के सीने पै सटा दी और रगड़तें हए थोड़ा ऊपर हो गई। अब वो अब्बास के ठीक ऊपर थी और सिर्फ उसकी चूचियों का भार अब्बास के सीने में पड़ रहा था। अब्बास अपने जिस्म का सारा भार अपने हाथों पे रखी थी। (इस स्थिति मैं वो दोने पूरे नंगे थे ).
ज़ैनब अपने अब्बा अब्बास के ऊपर झुक गई और उसके होंठ पे अपने होंठ रखकर चूमकर कहा- "गुड मानिंग अब्बा...".
अब्बास नींद में था।
अब्बास की नींद खुल गयी. अपने नंगी बेटी को अपने ऊपर इस तरह झुके हुए देख कर और अपने होठों पे ज़ैनब के मुलायम होठों का स्पर्श पाकर उसके भी जिस्म में करेंट दौड़ गया। उसका रोम-रोम सिहर उठा और लण्ड एक झटके में सलामी देने के लिए उठकर खड़ा हो गया। अब अब्बास ज़ैनब को पकड़कर उसे अपनी बाहों में भरकर चूम सकता था, और चोद भी सकता था। ज़ैनब इसके लिए तैयार थी और अब्बास जो भी करता ज़ैनब उसका साथ देती, और वो अब्बास के लिए बोनस ही होता।
ज़ैनब फिर से गुड मॉर्निंग की और बोली- "अब्बाजान उठिए, चाय तैयार है."
ज़ैनब इस उम्मीद में उठने लगी की अब्बास उसे उठने नहीं देगा और अपनी बाहों में भरकर उसके होठों को चूमने चूसने लगेगा और उसके जिस्म पे छा जाएगा। इसीलिए तो वो नंगी ही आई थी ताकी अब्बास उसकी नर्म चूचियों को महसूस कर पाए और उसे कोई रुकावट ना लगे।
लेकिन अब्बास में ऐसा कुछ नहीं किया और अब्बास को उठकर अलग हो जाने दिया। वो भी गुड मार्निंग बोलता हुआ उठ बैठा और तब तक मायूस ज़ैनब उस चाय का कप पकड़ा दी।
उसने ज़ैनबको अपने पास बुलाया तो ज़ैनब उसके गोद में बैठ गईं। ज़ैनब अब्बास के कंधे पे सिर रख दी थी और अब्बास से चिपक गई थी। अब्बास का हाथ ज़ैनब की कमर पे था।
अब्बास ने अब्बास के गर्दन पे किस की और मादक आवाज में बोली- "अब तो आप खुश हैं ना अब्बा, अब तो आपको कोई तकलीफ नहीं है ना?"
अब्बास ज़ैनब के नंगी कमर और पीठ का सहलाता हुआ बोला- " ज़ैनब तुम्हें पाकर कौन खुश नहीं होगा। तुम तो ऊपर बाले की नियामत हो जो मुझे मिली। मैं ऊपर वाले का और तुम्हारा बहुत-बहुत शुकरगुजार हैं."
ज़ैनब अब्बास के जिश्म में और चिपकने की कोशिश करने लगी, और बोली- " मैं तो बहुत डर रही थी की पता नहीं मैं कर पाऊँगी या नहीं ठीक से? मैं आपका साथ तो दे पाई न अब्बा? आपका संतुष्ट कर पाई ना?"
अब्बास भी ज़ैनब को अपने जिश्म पे दबाता हुआ बोला- "तुमनें तो मुझे खुश कर दिया। तुमने बहुत बड़ा काम किया है मेरे लिए। मैं बहुत खुश हैं। आज का दिन मेरी जिंदगी का सबसे हसीन दिन है। लेकिन मैं डर भी रहा हूँ की वक़्त धीरे-धीरे फिसलता जा रहा है। चंद घंटे हैं मेरे पास, फिर तुम मेरी बाहों से गायब हो जाओंगी। फिर तुम मेरे लिए सपना हो जाओगी। फिर आज के बिताए इस हसीन लम्हों को याद करते हुए मुझे बाकी दिन गुजारने होंगे. अभी थोड़ी ही देर में तुम्हारा उस्मान आ जायेगा और मुझे तुम्हे तलाक देना पड़ेगा. और फिर तुम उसकी बीवी हो जाओगी. "
बोलते हये अब्बास ज़ैनब के होठों को चूमने लगा और कस के उसे अपने में चिपकाने लगा, जैसे कोशिश कर रहा हो की उसे खुद में समा लें, कोशिश कर रहा हो की ये लम्हा यहीं रुक जाए।
ज़ैनब अब्बास की तरफ घूमकर उससे चिपक कर बैठी हुई थी। ज़ैनब का पूरा जिस्म अब्बास के जिस्म से सट रहा था। उसकी चूचियां अब्बास के जिस्म में दब रही थी। अब्बास की मुस्कराहट रूक गई थी।
अब्बास अपना चेहरा ऊपर की और अब्बास के चेहरा को अपने हाथों से अपनी तरफ घुमाते हुए उसकी आँखों में देखती हुई बोली- "आप खुश हैं ना अब्बास?"
अब्बास ने अपनी नजरें नीची कर ली।
अब्बास अपने जिश्म को थोड़ा ऊपर उठाई और अपनी चूचियों को अब्बास के बदन से रगड़ती हुई उसके नीचे के होठों को चूमने लगी। सिर्फ उसकी नंगी चूची अब्बास के बदन को टच कर रही थी, लेकिन अब्बास पूरी तरह से ज़ैनब के जिस्म को महसूस कर पा रहा था। अब्बास होठ चूमती रही लेकिन अब्बास ने साथ नहीं दिया। ज़ैनब को लगा की कुछ गड़बड़ है। वो उठकर अब्बास की जांघों पे बैठ गई और फिर से अब्बास से चिपक गई। वो फिर से अब्बास के होठों को चूमी और फिर हँसती हुई शरारत भरे अंदाज ने बोली- "क्या हुआ अब्बा?"
अब्बास कुछ नहीं बोला। ज़ैनब उसके सीने से लग गई और इमोशनल अंदाज में बोली- "क्या हुआ अब्बा, मुझसे कोई गलती हुई क्या?"
अब्बास ने अब्बास की पीठ पे हाथ रखा और सहलाता हुआ बोला "गलती तुमसे नहीं मुझसे हई है। मैं बहशी बन गया था रात में..."
ज़ैनब अब्बास के जिश्म को सहलाते हुए बोली- "तो क्या हुआ? इस टाइम में तो कुछ भी हो जाता है। और फिर आप तो बहुत दिन से खुद को दबाए बैठे हैं."
अब्बास- "नहीं ज़ैनब, में जानवर बन गया था कल। तुमने मुझपे भरोसा करके, मेरा दर्द समझ कर अपना जिस्म मुझे सौंपा और मैं जानवरों की तरह तुम्हारे जिश्म को चोदता रहा। तुम्हे मेरे जैसे बड़े और लम्बे लण्ड को लेने की आदत नहीं है पर मैं अपने होश खो बैठा था। मुझे माफ कर दो ज़ैनब.."
अब्बास- "मैं तो आपको बोली ही हूँ की जैसे मन करें वैसे करिए। रोकिए मत खुद को। अपने अंदर के दर्द को बह जाने दीजिए। आपके अंदर का गुबार निकलने दीजिए बाहर.".
अब्बास. "ज़ैनब, चाहे मेरा तुमसे हलाला निकाह हुआ है. पर फिर भी तुम मेरी बेटी हो. और एक बाप होने के नाते मेरा यह फर्ज है की अपनी बेटी के दुःख का ध्यान रखूं पर पर मैं सेक्स करते हुए तुम्हारे दर्द का ध्यान नहीं रखा. मुझे बहुत अफ़सोस है. "
ज़ैनब- "ये कैसी बातें कर रहे हैं आप अब्बा? सेक्स करते वक़्त ता काई भी वहशी बन जाता है। और आप तो वर्षों के बाद सेक्स किए हैं। अगर कोई आदमी बहुत भूखा हो और उसके सामने लजीज पकवान थाली में सजाकर पेश किया जाए तो वो क्या करेंगा, बोलिए?" ज़ैनब थोड़ा गुस्से में बोली।
अब्बास कुछ नहीं बोला।
ज़ैनब फिर से उसके सीने से लगती हई बोली- "प्लीज अब्बा, आप इतना मत सोचिए। खुद को बाँधकर मत रखिए अब। जो होता है होने दीजिए। जब मन करें मुझे पाइए। अगर अब भी आप सोचते रहेंगे और दर्द में ही रहेंगे "
अब्बास फिर बोला - "तुम ने मेरे लिए इतना किया, ये बहुत है। तुमने मेरा पूरा साथ दिया। खुद को पूरी तरह समर्पित कर दी मुझे। मैं खुश किश्मत हूँ की तुम जैसी हूर जितनी सुन्दर बेटी का जिस्म पा सका.".
ज़ैनब अब्बास के जिस्म को सहला रही थी।
फिर से अब्बास के जिस्म से चिपक गई। उसकी नंगी चूचियां अब्बास के जिश्म से दब रही थी। वो अब्बास के होंठ चूमने लगी।
ज़ैनब बोली- "मुझे खुशी है की मेरी मेहनत कम आई। मैं आपको पसंद आई और खुद को पूरी तरह आपको साँप पाई। आप खुश हुए संतुष्ट हए यही बड़ी बात है मेरे लिए की मेरा जिश्म किसी के काम आ सका.."
अब्बास बोला- "मैं तो ऊपर वाले का शुकर गुजार हैं की उन्होंने मुझे तुम्हें दिया। लेकिन एक अफसोस है की मेरे पास बस एक ही रात है। अफसोस है की बस इसी एक रात के सहारे मुझे सारी जिंदगी गुजारनी है। तुम फिर से उस्मान के पास चली जाओगी। तुम तो दरिया का वो मीठा पानी हो जिसे इंसान जितना पिता जाए प्यास उतनी बढ़ती जाती है। लेकिन ये भी कम नहीं जो तुमने मुझे दिया..' अब्बास गहरी सांस लेता हुआ ये बात बोला था।
ज़ैनब ने अब्बास की ओर देखा। अब्बास का चेहरा शांत और उदास हो गया था। ज़ैनब उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों में पकड़ी और होंठ को चूमते हुए बोली- "आप ऐसा क्यों कह रहे हैं? आपको को और तरसने की जरूरत नहीं है। आपको उदास रहने की जरुरत नहीं है। आप जब चाहे मुझे पा सकते हैं। मैं आपकी है पूरी तरह। सिर्फ आज की रात के लिए नहीं बल्कि हर रात के लिए..."
अब्बास ऐसे हँसा जैसे किसी बच्चे में उसे कोई चुटकुला सुनकर हँसाने की कोशिश की हो। बोला- "नहीं अब्बास, तुम्हारी आने वाली जिंदगी तुम्हारे होने वाली शोहर उस्मान के लिए हैं. अब मुझे तो बाकि की जिंदगी इस बीत चुकी रात को याद कर कर के और मुठ मार मार कर ही बितानी है. अभी थोड़ी देर में उस्मान आ जाएगा और मुझे तुम्हे तलाक देना पड़ेगा और फिर तुम उस्मान की हो जाओगी. "
ज़ैनब बोली- "हाँ, लेकिन इसका मतलब ये नहीं की आपको तरसने की जरूरत है। आप जब चाहेंगे में आपके लिए हाजिर हैं। अब यह नहीं हो सकता कि आप तरसते ही रहे,अब मेरा एक बार आपके साथ जो रिश्ता बन चूका है उसे न तो मैं भुला सकती हूँ और न ही आप. इसलिए चाहे अल्लाह मुझे दोजख में डाल दे पर अब मेरे तन और मन पर मेरे अब्बू का ही हक़ रहेगा. में चाहे दुनिया के नजरों में उस्मान की बीवी होउंगी पर असल में मेरे दिल पर आप का ही राज रहेगा।
मैं आपके पास आती रहूंगी एक बेटी के तरह और आपको अपने जिस्म का सुख सदा देती रहूंगी. दुनिया की नजरों में मैं आपकी बेटी होउंगी और हमारी दोनों की नजरों में हम मियां बीवी ही रहेंगे और आप जब भी चाहे मेरे साथ शारीरिक सम्बन्ध बना सकते है. मैं अपने प्यारे अब्बा के लिए सदा त्यार रहूंगी. "
अब्बास- "नहीं, उस्मान ने मुझे एक रात के लिए तुम्हें दिया है। मैं उसके साथ गलत नहीं करना चाहता.."
ज़ैनब- "वो मेरा काम है। लेकिन आपको तड़पने तरसने की जरूरत नहीं है। मैं आपको अपने जिश्म पै पूरा अधिकार दे चुकी हूँ। आप जब चाहे मुझं पा सकते हैं..."
अब्बास फिर हल्का सा मुस्करा दिया, और बोला- "अच्छा। मेरे लिए इतना सब करोगी..."
ज़ैनब : " हाँ अब्बा। अब हम दोनों का रिश्ता मौत तक का है. जिंदगी के लिए समझ लीजिये कि मैं आपकी बीवी हूँ और मेरे शरीर पर आप का पूरा हक़ है. मुझे दुःख है तो सिर्फ इस बात का कि में अपने शरीर का सुख आपको शादी से पहले न दे पायी. आप मुझे पाना चाहते थे और में भी त्यार थी पर शायद अल्लाह को उस समय यह मंजूर नहीं था. वरना मेरी सील तोड़ने का मौका मैं तो आप को ही देना चाहती थी. पर वो सील उस्मान की किस्मत मैं लिखी थी."
अब्बास उसे बाँहों में भर कर बोला
" ज़ैनब! यह ठीक है कि मैं तुम्हरी चूत की सील नहीं तोड़ पाया. पर औरत के शरीर में पीछे भी एक छेद होता है, यानि गांड का छेड़. क्या उसकी सील भी उस्मान ने तोड़ दी है या गांड में तुम अभी भी कुंवारी ही हो,"
यह सुन ज़ैनब तो शर्म से लाल ही हो गयी। वो समझ गयी की उसके अब्बा का मन अब उसकी गांड पर आ गया है और वो उसकी गांड मारना चाहते है.
वो शरमाते हुए बोली
"अब्बू आप कैसी बातें कर रहे है. उस्मान ने तो मेरे पीछे वाले छेद पर कभी ऊँगली भी नहीं रखी। पीछे के तरफ से तो मैं कुंवारी ही हूँ. मैं अब आप को अपनी आगे वाले छेद (वो अभी भी अपने अब्बा से चूत शब्द बोलने में शर्मा रही थी) की तो सील तोड़ने का मौका नहीं दे सकती पर आप चाहें तो आप मेरे पीछे वाले छेद की सील तोड़ सकते हैं और अपनी बेटी की पीछे वाली चुदाई के पहले मालिक हो सकते है. मैं जानती हूँ की आपका यह (अपने अब्बा के लण्ड को हाथ में पकड़ कर हिलाते हुए ) हथियार मेरे लिए बहुत बड़ा और मोटा है पर आप मेरे गांड मार लीजिये। देखा जायेगा पर आज तो मैं आपके इस अरमान को पूरा कर कर ही रहूंगी, "
अब्बास तो ख़ुशी के मरे उछल ही पड़ा.
वो ख़ुशी से हकलाता हुआ सा बोला. "मेरी प्यारी बेटी ज़ैनब. क्या सच में आज तक उस्मान ने कभी भी तुम्हारी गांड नहीं मरी. क्या सच में तुम गांड के तरफ से कुंवारी हो. क्या तुम मुझे अपनी गांड मार कर अपनी गांड की सील तोड़ने का मौका दोगी.? कया मैं तुम्हारी गांड का उद्धघाटन करने वाला पहला शख्स होऊंगा.?"
ज़ैनब अपने बाप को प्यार से चूम कर बोली. "हाँ अब्बाजान, आज तक उस्मान ने मुझे पिछले छेद में कभी ऊँगली तक नहीं डाली है. पीछे तो मैं बिलकुल कुंवारी हूँ. हे अल्लाह तू कितना रेहमत वाला है, कि मेरी गांड आज तक मेरे अपने अब्बा के लिए तूने बचा कर रखी है. आज मैं अपने अब्बा को अपनी पिछली सील तुड़वाने का मौका दे रही हूँ. "
अब्बास का लण्ड तो ख़ुशी के मरे फटने को आ रहा था. ज़ैनब ने उसे हाथ में पकड़ लिया. वो समझ गयी कि उसके बाप का लण्ड उसकी गांड मारने की आशा के कारण इतना उछाल रहा है. वो प्यार से अपने अब्बा का लण्ड सहलाती हुई बोली.
"अब्बाजान। मैं आज बहुत खुश हूँ की मैं अपने अब्बू को अपनी गांड का उद्धघाटन करने का मौका दे सकी. पर आप तो जानते ही है कि आपका लण्ड कितना बड़ा और मोटा है. मैं तो अपनी इतनी खुल चुकी और इतनी बार चुद चुकी चूत मैं भी इसे बड़ी दिक्कत और मुश्किल से ले पायी थी. तो आप समझ सकते है कि मुझे इस को पिछले छेद में, जिसमे आज तक किसी की एक ऊँगली भी नहीं घुसी है, लेना मुश्किल होगा. इसलिए मेरी आप से बस एक ही गुजारिश है की इसे जरा धीरे धीरे से और तेल लगा कर डालना, मैं आपका साथ देने की पूरी कोशिश करुँगी. "
अब्बास ने भी ज़ैनब की गांड की दरार में अपनी ऊँगली सहलाते हुए कहा।
"ज़ैनब चाहे मेरा तुमसे हलाला निकाह हुआ है पर फिर भी तुम मेरी बेटी हो. एक बाप कैसे अपनी प्यारी बेटी को तकलीफ दे सकता है. तुम बिलकुल भी चिंता न करो. मैं खूब सारा तेल लगा कर ही तुम्हारी गांड का उद्धघाटन करूँगा और सील तोडूंगा. अगर तुम्हे जरा भी ज्यादा तकलीफ हुई जिसे तुम सहन न कर पायी तो मुझे बता देना मैं तुरंत अपना लण्ड तुम्हारी गांड से निकल लूँगा. ठीक है न?"
जैनब ने ख़ुशी से हां में सर हिलाया.
ज़ैनब- आप जितना देर चाहें मेरी गांड मार लीजिये मैं उफ़ तक नहीं करुँगी. लेकिन मुझे अपनी गांड मे आपका मोटा लंड चाहिए।
अब्बास- अच्छा ठीक है और ज़ैनब की गदराई गान्ड को दबोचते हुए, लेकिन बेटी तुम्हारी गान्ड मे ज़्यादा दर्द ना हो इसके लिए मुझे तेल लगा कर तुम्हारी गान्ड को चिकना बनाना पड़ेगा।
अब्बास अपनी बेटी की नंगी गदराई जवानी उसके मोटे-मोटे कसे हुए दूध और फूली हुई चूत को देख कर मस्त हो जाता है।
और खुद भी अपने सारे कपड़े उतार कर पूरा नंगा हो जाता है उसका मोटा लंड सर उठाए खड़ा रहता है और वह अपनी बेटी के पास जाकर उसकी नंगी गदराई जवानी को अपनी बाँहो मे भर कर पागलो की तरह चूमने लगता है।
दोनो बाप बेटी एक दूसरे से पूरे नंगे खड़े होकर चिपके हुए एक दूसरे की गान्ड और पीठ को सहलाते हुए एक दूसरे के मुँह, होंठ को चूमने लगते है।
अब्बास- बेटी चलो ड्रेसिंग टेबल के शीशे मे एक दूसरे को नंगा देख कर मज़ा लेते है।
ज़ैनब-अपने अब्बा के लंड को अपने हाथो से पकड़ कर अपनी गान्ड मटकाती हुई धीरे-धीरे अब्बास के लंड को अपने हाथो से खिचते हुए ड्रेसिंग टेबल की ओर जाने लगती है और अब्बास अपनी बेटी के गदराए चुतडो की मस्तानी थिरकन को देखता हुआ चल देता है।
ड्रेसिंग टेबल के शीशे के सामने जाकर दोनो एक दूसरे से नंगे ही चिपक जाते है और शीशे मे एक दूसरे का चेहरा देख कर मुस्कुराते हुए एक दूसरे के नंगे बदन को सहलाने लगते है।
ज़ैनब अपनी मोटी गदराई गान्ड को शीशे के सामने करके थोड़ा अपनी गान्ड को बाहर निकाल कर अपने अब्बा को दिखाती है और अब्बास अपनी बेटी की मस्तानी गान्ड को शीशे मे देखते हुए उसकी गदराई गान्ड के मोटे-मोटे पाटो को सहलाता हुआ अपनी बेटी की गहरी गुदा मे अपने हाथ की उंगलिया फेर-फेर कर सहलाने लगता है और ज़ैनब अपने अब्बा के मोटे लंड के टोपे को खोल कर उसके टोपे को सहलाने लगती है।
तभी अब्बास ड्रेसिंग टेबल के उपर रखी ऑमंड ड्रॉप्स की शीशी को उठा कर उससे तेल निकाल कर अपनी बेटी की मोटी गान्ड की दरार मे तेल लगा कर उसकी गदराई मोटी गान्ड के छेद मे अपनी उंगली घुसा-घुसा कर तेल लगाने लगता है तभी ज़ैनब अपनी हथेली को आगे करके अब्बास को अपने हाथ मे तेल डालने का इशारा करती है और अब्बास उसके हाथो मे तेल डाल देता है और ज़ैनब अपने हाथो मे तेल लेकर अपने अब्बा के मोटे लंड मे तेल लगा-लगा कर उसे सहलाने लगती है।
अब्बास अपनी बेटी के मोटे गदराए चुतडो को पूरा तेल से भिगो देता है और खूब कस-कस कर अपनी बेटी के मस्ताने चुतडो की मालिश करने लगता है।
वह जितनी ज़ोर से अपनी उंगलियो को अपनी बेटी की गान्ड की छेद मे भरता है ज़ैनब भी उतनी ही तेज तरीके से अपने हाथो को अपने अब्बा के लंड पर कस-कस कर तेल मलने लगती है।