Update 08

काव्या यह देख कर हैरान रह गयी कि रफीक इस समय उसके सामने क्या कर रहा है और उससे भी ज्यादा वो इतना परेशान क्यो है ? आखिर कार काव्या एक प्रोफेशनल डॉक्टर है उसको अपने सामने वाले के शारिरिक भाव समझ मे आ जाते है। पर यहा समस्या यह नही थी कि रफीक सामने खड़ा है यह काव्या के लिए यह मुसीबत थी कि वह एक रुमाल ओर सिर्फ रुमाल लपेटे हुए एक अनजान और ऐसे व्यक्ति के सामने खदी थी जिसको वह जानती भी नही है। फिर काव्या उस अनजान व्यक्ति को बोलती है कि को हो तुम मेरे रूम मे क्या कर रहे हो ? काव्या को कुछ शक तो हो गया था रफीक की हालत देख कर की जरूर इसने कुछ गलत किया या तो चोरी या फिर नही नही ये मैं क्या सोच रही हु। रफीक जवाब देता है कि मैडम जी मैं रफीक हु नजमा का बेटा और इस घर का नोकर। फिर काव्या को ध्यान आता है कि दादी ने बताया था कि नजमा और उसका बेटा यहा पर रहते है उसके दादा किशोरीलाल जी के समय से। फिर काव्या बोली कि तुम इस समय यह क्या कर रहे हो और हाफ क्यो रहे हो और शायद तुम इससे पहले भी रूम मे आ चुके हो। यह सुन कर रफीक के पैरों मे से जमीन खिसक गयीं और उसका मुंह खुला रह गया पर उसने थोड़ी हिम्मत करके हा बोल दिया। अब इसका विपरीत काव्या को यह सुनके आश्चर्य लगा और एयर कंडीशनर मैं उसके पसीने निकलने लगे। फिर काव्या अब रफीक से आँखे नही मिला पा रही थी और यही हाल इधर रफीक का भी था उसको भी काफी डर लग रहा था। फिर इसी बीच रफीक के फोन की वही "रिंकिया के पापा" वाली रिंगटोन बजी और काव्या थोड़ी हिम्मत से बोली कि तुमको शर्म नही आयी कि मैं इस कमरे मे सो रही थी और तुम गुस आये कमरे मे और उठाया भी नही। पर यही सुन कर रफीक थोड़ा आश्चर्य हुआ पर उसका दिमाग मे कुछ सूजा और काव्या की बात की बीच मैं काटते हुए बोला कि मैडम पर हम आये थे तब तो इस कमरे मे कोई नही था यहाँ तक कि आप भी नही थी और हम तो सुबह को आये थे आपका कमरा साफ करने हमको हमारी अम्मी ने बोला था। इसमे काहे की शर्म । फिर काव्या बोली कि तुमारा यह फोन यहाँ क्या कर रहा है ? मैडम जी हम सुबह को जब साफ सफाई कर रहे थे तो यह शायद हमारी जैब से निकल कर गिर गया तभी से हम इसको खोज रहे पर मिल ही नही रहा था ।

और साफ सफाई करना यह तो हमारा काम है। फिर रफीक तेजी से आगे आकर काव्या के पास खड़ा हो गया और उसके हाथ से फ़ोन लेने लगा। अचानक से हुए इस बदलाव और रफीक की हिम्मत से काव्या को अजीब लगा । पर काव्या एक खुले विचारों वाली थी उसको इतना इससे फर्क नही पड़ा ओर रफीक जल्दी से फ़ोन लेकर जाने लगा। और जाते जाते रफीक बोला की मैडम जी कुछ काम हो तो बोल देना। रफीक के जाने के बाद कई सवाल काव्या के दिमाग मे चल रहे थे ? पर अभी फिलहाल काव्या को रुमाल हटा कर कपड़े पहनने थे। काव्या काल और सफेद कलर का स्लीवलेस सलवार और चूड़ीदार कुर्ता पहन कर तैयार हो चुकि थी तभी उसको आयने मैं खुदको देखा और एक अजीब चीज नोट करी जो उसने कमरे मे पहली बार आने पर भी करी थी कि कमरा तभी भी गन्दा था और अभी भी गन्दा है फिर रफीक सुबह को क्या करने आया था और उसने सफाई तो बिलकुल नही करी है तभी उसको किसी के आने की आवाज़ आती है ओर फिर वह सब छोड़ को आ रहा है यह देखने लगती है तभी नजमा उसके कमरे मे आती है और बोलती है बीबीजी नमस्ते मैं नजमा ।

फिर काव्या बोलती है अरे आप है नजमा जी आपके खाने की तारीफ काफी सुनी है दादी से। फिर नजमा यह सुन कर थोड़ा खुश हो जाती है कि उसको किसी ने जी करके बुलाया। यहाँ गाँव मे लोग उसको पीठ पीछे पता क्या क्या नही बोलते थे माल , रंडी और किशोरीलाल की रखेल ना जाने क्या क्या। फिर नजमा बोली नही मैडम यह तो हमारा काम । पर नजमा काव्या को देख कर थोड़ा आश्चर्य और अलग से महसूस कर रही थी कभी उसने इतनी गोरी और वेल मेन्टेन वाली औरत नही देखी थी उसको लगता था कि ऐसे औरते सिर्फ सिनेमा और पिक्चर मे होती है। क्योंकि यहाँ गाँव मे अधिकतर औरते काली , सावली , मोटी या हद से ज्यादा पतली थी। कुछ गाँव की बड़े घर की औरतों को छोड़ कर जिनसे वो कभी नही मिली थी। एक पल के लिये नजमा काव्या को एक अपसरा की तरह देखने लगीं मानो जैसे उसको उपर वाले ने बडे ध्यान से समय लेकर बनाया है। नजमा का यह विचार था कि कोई साधारण से घरेलू सलवार सूट मे भी इतना सुन्दर ओर आकर्षित कैसे लग सकता है ? तभी काव्या बोली बोलो नजमा जी क्या हुआ ? आप कहाँ खो गयी ? " नजमा अपने खयालो से बहार आती है और कहती है मैडम जी क्या आप किसी सिनेमा की अदाकार या हीरोइन है क्या पर आपकी दादी जी तो कह रही थी कि आप एक डॉक्टर है ?

यह सुन कर काव्या बहुत अच्छा और थोड़ी सी हसी आती है कि जब से वो गाँव के माहौल मैं आयी है तब से उसको कितनी तारीफ सुनने को मिल रही है भले ही वो सुलेमान हो या सत्तू या फिर सामने खड़ी नजमा । शहर मे काव्या को इतनी ज्यादा तारीफ सुनने की आदत नही थी या कहो उसे अपनी खूबसूरती की तारिफ सुनना ज्यादा पसन्द भी नही था पर गाँव के माहौल उसे अब यह सब अच्छा लग रहा था। तभी काव्या बोलती है क्या नजमा जी आप भी मैं भी आपके जैसी तो हूँ खामखा आप इतना चढ़ा रहे है। फिर इन्ही बातो के साथ दोनो नीचे आ गयी और काव्या ने दादी को प्रणाम किया और दादी बोली कि काव्या आराम हो गया ? यही सुनते काव्या ने हॉ मे गर्दन हिलायी ओर हा बोला फिर ऐसी ही कुछ नयी पुरानी बातों के साथ काव्या और दादी ने खाना खा लिया ओर फिर काव्या खाना खा कर बोली कि दादी अब मैं थोड़ा बाहर घूम आती हु आप भी चलो यह सुन कर दादी की हसी निकल जाती है और कहती है बेटी ये गाँव है आपका शहर नही जो रात को यह स्ट्रीट लाइट या रोड लाइट मिलेगी यहाँ सिर्फ अँधेरा मिलेगा कुछ है लाइट है यहाँ पर वो भी काफी अन्तर मे है। यह सुन कर काव्य थोड़ी निराश हो जाती है पर दादी बोलती है काव्या पर तुमको गुमना या थोड़ा चलना ही है तो हमारे बँगले के बाहर घुम लो ये नजमा भी खड़ी रहेगी ? काव्या दादी की बात को काट नही पायी और हा बोल दिया। फिर नजमा ने रफीक को कॉल लगाया और गुस्से मे बोली कहा रे तू खाना नही है क्या जल्दी आजा। फिर नजमा अपना बचा हुआ खाना खोली मे रख आयी जो वो बाद मे रफीक के साथ खाने वाली थी।

और काव्या के साथ बाहर खड़ी हो गयी। काव्या बंगले के गेट के आस पास ही चल रही थी ओर सीढियो पर बैठी नजमा से बात कर रही थी और नजमा से गाँव के बारे मे जानकारी ले रही थी तभी सायकल पर सवार होकर रफीक और बीजू आते है तभी गेट के पास पहुँचने से पहले बीजू काव्या को इधर उधर धिरे धिरे चलते हुए देख लेता है और बोलता है इसकी माँ की आँख क्या माल है एक दम हीरोइन कंचा माल शहर की महँगी रंडी और बड़े घर की रांड बहुओ जैसा माल यहाँ क्या कर रहा है ? तभी रफीक अंदर देखता है तो उसको सिर्फ उसकी माँ दिखती है क्योंकि रफीक बीजू से पीछे था और उसका देखने का एंगल अलग था तभी रफीक बोलता है साले तुझको कितनी बार बोला है कि मेरी अम्मी के खिलाफ मैं तेरे ये गन्दे शब्द नही सुनुगा तभी बीजू उसकी तरफ देख कर बोलता है चूतिये तेरी अम्मी को कोन देख रहा है मैं तो वो खूबसूरत माल को देख रहा हु जो तेरी अम्मी के साथ खड़ी है क्या फिगर है साली का एक दम वो पोर्न स्टार जैसी ।

फिर रफीक आगे आकर देखता है तो उसको काव्या दिखती है और उसको अचानक गुस्सा आ जाता है काव्या के बारे मे अश्लील शब्द सुन कर वो चिल्ला के बोलता है मादरचोद रंडी की औलाद चुप हो जा वरना तेरी गान्ड मार दूँगा बेटिचूड़ । ये सुनकर तो मानो बीजू को यकीन ही नही हो रहा था कि रफीक ये बोल रहा है ? हमेशा चुप रहने वाला और अपनी अम्मी के बारे मे गन्दी गालिया सुन कर भी चुप रहने वाला रफीक आज इतना कैसे बोल गया ये विश्वास ही नही हो रहा था बीजू को। पर रफीक की आवाज़ इतनी तेज थी कि अन्दर काव्या और नजमा दोनो को सुनाई दे गयी और उन्होंने दोनों को देख लिया। फिर नजमा ने आवाज मेरी दोनो को और बोली क्या हुआ दोनो को क्यो झगड रहे हो। अन्दर आ जाओ यह सुन कर तो मानो बीजू तो खुशी से फुला न समाया और गेट खोल कर अन्दर आ गया और उसके पीछे रफीक भी। पर रफीक बिलकुल नही चाहता था कि बीजू एक और बार भी काव्या को देखे ओर अन्दर आये। पर अब वो कुछ नही कर सकता था। फिर दोनों काव्या और नजमा के पास आकर खड़े हो गये थे फिर नजमा बोली क्या रे तुम दोनों का साथ मे रहते हो और लड़ाई जगड़ा करते हो ।

फिर नजमा कहती है ये सब छोड़ो तुम दोनों इनसे मिलो ये है काव्य बीबी जी किशोरीलाल जी की पोती है ओर शहर की बहुत बड़ी डॉक्टर साहिब है। यह सुनके बीजू खुश हो जाता है और बोलता है कि यही वो डॉक्टर मैडम है जो हमारे गाँव का इलाज करने आने वाली थी ? यह बात काटते हुए काव्या बोली नही मैं वो नही हु मैं सिर्फ मेरी दादी के साथ कुछ दिन रहने आयी हु। यह सुनके बीजू बोलता ओके मैडम जी वैसे मेरा नाम बीजू है और अपना हाथ आगे लाता है काव्या से हाथ मिलाने के लिये यह देख कर काव्या को थोड़ा अजीब लगता है पर वो बीजू से हाथ मिला लेती है और अब हाल यह था कि काव्या का हाथ बीजू के हाथ मे था और यह देख कर रफीक को काफी गुस्सा आता है और एक जलन की भावना पैदा हो जाती है कि ये बीजु मादरजात ने कैसे किया । इधर बीजू जानता था कि शहर की पढ़ी लिखी लडकिया और औरते हाथ मिलाने से ज्यादा कतराती नही है यह तो गाँव वालों कि परेशानी है तभी काव्या बोलती है कि मैं डॉ काव्या अग्रवाल । पर अब बात यह थी कि बीजू काव्या का हाथ नही छोड़ रहा था यह देख कर रफीक बीच मैं पड़ा और बोला बीजू जा तेरी मम्मी तुझको बुला रही जल्दी आना यू बोला था तभी बीजू रफीक की चुटिया बाटे सुन कर काव्या का हाथ छोड़ता है और गन्दी हसी निकाल कर खड़ा हो जाता है।

अब काव्या भी थोड़ा सही महसुस नहीं कर रही थी बीजू और रफीक के बीच में, उसको इन दोनों की बकवास के बीच में कुछ भी मजा नहीं आ रहा था I उसको बस सुबह की सुलेमान की गंदी हरकते और रफीक की बात याद आ रही थी कि वो मेरे रूम में आखिर कर क्या रहा था ? किसकी परमिशन से वो मेरे कमरे में आया था अगर मैंने रणधीर अंकल को बता दिया तो क्या हाल करेगे रफीक का. आपको हम रणधीर अग्रवाल के बारे में बता देते है रणधीर काव्या के पिता जी का सगा छोटा भाई था l रणधीर के पिताजी यानी काव्या के दादाजी के गुजरने के बाद रणधीर ने ही पूरे गाँव की जमीदार का काम सम्भाल रखा था l रणधीर अग्रवाल की उम्र 48 साल होगी l रणधीर भी काफी बलिष्ठ था. रणधीर की शादी उषा अग्रवाल से हुई थी पर किसी कारणों से उषा शहर में ही रहती थी उषा को गाँव में रहना पसन्द भी नहीं था और वेसे भी उसकी सरकारी नौकरी होने की वज़ह से उसको शहर में ही रहना होता था. रणधीर हर सप्ताह उषा से मिलने जाता था. अभी भी उषा के पास है इसलिए वो काव्या को लेने नहीं आ पाया था. रणधीर का खौफ था पूरे गाँव में एक तो वो सरपंच था गांव का ऊपर से उसने गाँव के अधिकतर किसानो और गरीबों को ब्याज पर रूपया दे रखा था. इसलिए गांव का कोई भी आदमी रणधीर से नहीं उलझता और ना ही बहस करता था.

रणधीर को गाँव के कुछ लोगों से काफी नफरत थी उनमे से एक रहीम चाचा भी थे जो उसके हवेली के पास ही रहता था. जब भी रणधीर घर पर होता तो रहीम की हिम्मत नहीं होती कि वो नजमा को चोदने हवेली आ जाये या हवेली के आसपास भी दिखे और अपनी गंध फैलाये. रणधीर को कोई औलाद नहीं थी ऐसा नहीं कि वो नहीं कर सकता था पर उषा और रणधीर ने मिलकर कोई औलाद नहीं करने का निर्णय लिया था शायद कुछ कारण ही रहा होगा या कोई ऐसा राज जो अभी तक कोई नहीं जानता होगा. पर कुछ भी बोलो रणधीर ने काव्या को बचपन से खिलाया था रणधीर काव्या को अपनी बेटी ही मानता था यहां तक उसने अपनी सारी प्रॉपर्टी भी वसीयत में काव्या के नाम कर दी थी उसके मरने के बाद सारी प्रॉपर्टी काव्या की ही होगी. रणधीर काफी समझदारी था वो गाँव के बाकी लोगों के मुकाबले थोड़ा ज्यादा पढ़ा लिखा था. रणधीर के साथ उसके बाउंसर, नौकर या वसुली करने वाले दो और लोग थे गोतम यादव और रमेश सिंह जो रणधीर के पीछे ही घूमते थे रणधीर के सभी आदेश मानते थे सभी जगह वसूली भी वहीं करने जाते थे.

गोतम यादव इसकी बॉडी ठीक थी ये हर जगह अपना दिमाग लगाता था गोतम को मार से ज्यादा प्यार से काम निकालने में भरोसा रखता था वहीं रमेश सिंह मानो चलता फिरता सांड या बॉडी बिल्डर था. रमेश को गुस्सा काफी आता था बात-बात पर गालियां देता था. रमेश अपने सारे काम मार कर और डरा धमका कर ही करवाता था पर इन दोनों की हवेली में कोई एंट्री या हवेली आने की इजाजत नहीं थी इनकी क्या पूरे गाँव मैं किसी भी आदमी या औरत को हवेली में आने की इजाजत नहीं थी. चलो अब आते है वापस काव्या के पास.... काव्या सोच ही रही थी कि तभी रफीक बीजू को लेकर वहाँ से निकल जाता है बीजू को जाने की तो कोई इच्छा नहीं थी पर रफीक की जलन और ऊपर रणधीर का डर यही सोच के बीजू को लेकर निकल गया. अब काव्या काफी सही महसूस कर रही है उसको घुटन से राहत मिल गयी थी.

नजमा - क्या हुआ मैडम क्या सोच में खो गयी हमारा गाँव आपको अच्छा नहीं लगा क्या ?

काव्या - नहीं ऐसा कुछ नहीं है मैं तो बस के सफर से काफी थक गयी थी वहीं सोच रही थी और वेसे भी ये गाँव मेरा भी है मुझको क्यों नहीं अच्छा लगेगा.

काव्या मन में क्या में नजमा से पूछ लू की रफीक मेरे कमरे में कैसे आया था क्यों आया था ? और ये सुलेमान कैसा इन्सान है ? सही में उसकी बीवी को कोई मुसीबत है या नहीं. तभी काव्या को ध्यान आता है कि नजमा क्या सोचेंगी मेरे बारे में की मैं उसके बेटे के बारे क्या पूछ रही हू कहीं उसे कुछ गलत लग गया तो. चलो बाद में खुद ही पता लगा लुंगी.

नजमा - क्या मैडम आप भी इतना सफर करके थक गयी. चलो आपका मूड फ्रेस करने के लिए कल में आपको गाँव घूमती हू आप भी देखना की हमारा गाँव कितना सुन्दर है.

काव्या यह सुन कर काफी खुश भी हुई और उसको अच्छा भी लगा पर

काव्या - नहीं नहीं तुम कहां परेशान होगी नजमा मेरे रणधीर अंकल घुमा देगे उन्होंने मुझे मेरे लास्ट जन्म दिन पर बोला था तुम आओ मैं तुमको पूरा गाँव और खेतों में घुमाता हु.

नजमा - हाँ पर खुली जीप में घूमने से ज्यादा मजा आयेगा पर मेरे साथ भी मजा आयेगा वो तुम्हें सारी जगह नहीं ले जा पायेगे और तुम बाकी औरतों से भी कैसे मिल पाओगी सेठ जी के साथ और वेसे भी सेठ जी कल कहा आने वाले है वो तो परसों आयेगे फिर भी मैडम जी आपकी मर्जी...!

नजमा की गाँव में कोई इज्जत या सम्मान नहीं करता था सभी गाँव की औरते उसको अपने पास भी नहीं भटकने देती थी. नजमा तो काव्या के दादाजी की वज़ह से अभी तक इस गाँव में थी वो भी हवेली की नौकरानी बन के वरना गाँव वाले तो कबसे निकाल देते. नजमा चाहती थी कि काव्या के साथ गाँव घूम कर वो गाँव के औरतों के बीच थोड़ी इज़्ज़त बना सके. पर काव्या को भी एक कामवाली के साथ गाँव घुमना अजीब लग रहा था पर वो नजमा को ना नहीं बोल पायी उसकी शक्ल देख कर फिर भी उसने हामी भर दी और वहा से उठ कर अपने कमरे में चली गयी. काव्या को ये भी अजीब लगा कि उसके रणधीर अंकल ना ही उसको लेने आये ना ही उसको अब तुरंत मिलने आ रहे है फिर उसने सोचा होगा कुछ जरूरी काम इसलिए नहीं आ पाये होगे. यही सब आज के दिन की बाते सोच कर काव्या सो गयी.

एक चमकीली धूप की सुबह की किरणों के साथ काव्या की नीन्द खुली. काव्या को काफी फ्रेश महसूस हो रहा था एक दम तरो ताजा. शहर की ट्रैफ़िक के शोर गुल से दूर गाँव में पक्षियों की चह चह की आवाज के साथ काव्या को लगा कि उसका दिन काफी शानदार जाने वाला है. अब काव्या के फ्रेश और नहाने के बाद काव्या एक फुल बिना आस्तीन का यानी बिना बाजू की ब्लाउज काले रंग की और डार्क ओरेंज रंग की साड़ी पहन कर काव्या डाइनिंग टेबल पर बैठ गयी. काव्या की दादी भी पास में ही बैठी थी. नजमा ने तुरंत नाश्ता लगा दिया. जैसे ही नजमा ने काव्या को देखा मानो उसके तो होश ही उड़ गये. कि काव्या ने इतना सेक्सी सी साड़ी पहनी है मानो नजमा के अन्दर एक आग सी लग गयी काव्या की बिना बाजू वाले ब्लाउज को देख कर और उसका गौरा बदन से आती सेक्सी सी महक से पर नजमा ने खुद को शान्त किया और कोने में खड़ी हो गयी उसकी जहा औकात थी इस हवेली में. काव्या और उसकी दादी दोनों नाश्ता कर रहे थे और कुछ नयी पुरानी बाते कर रहे थे तभी उसकी दादी ने पूछा काव्या बेटी आज का प्लान है आज क्या करोगी अपनी कोई नॉवेल या बुक लायी हो.

काव्या - नहीं दादी आज तो प्लान नजमा के साथ गाँव घूमने का है नजमा ने ही मुझको बोला था कि वो यहा की औरतों के साथ जान पहचान भी करवाएगी. क्यों नजमा...नजमा फिर हा में सर हिलाती है.

दादी - बेटी तेरे चाचा आपको गाँव घुमा देगे इसके साथ घुमना कहा जरूरी है..... अब दादी की आवाज में कठोर पन था और लग रहा था मानो कि वो नहीं चाहती हो की काव्या कही हवेली के बाहर जाये वो भी इस नजमा के साथ तो बिलकुल नहीं.

दादी - क्या हुआ काव्या तुमको कोई खास काम है क्या गाँव में. जरूरी हो तो बोल दो.

काव्या - नजमा को देखते हुए नहीं दादी ऐसा कुछ नहीं है पर मेरे पास गाँव में रहने के लिये दिन कम है फिर हॉस्पिटल भी जॉइन करना है वापस और रणधीर अंकल का भी पता नही कब आयेगे वो भी. इसलिये सोचा कि थोड़ा गाँव ही घूम लू.

दादी काव्या की किसी भी बात को दादी ना नहीं बोलना चाहती थी पर दादी ने दिल पर पत्थर रख कर सिर्फ काव्या की खुशी के लिये हाँ बोल दिया पर एक शर्त रखी कि तुम वापस 2 घण्टे में वापस आ जाना. मुझको कुछ काम है काव्या बेटी तुमसे और अपना ध्याना रखना. दादी जानती थी कि अगर रणधीर को पता चल गया कि काव्या पैदल गाँव घुमने गयी है वो भी इस घटिया औरत नजमा के साथ तो वो बहुत बहस करेगा आ कर. अब काव्या दादी की 2 घण्टे वालीं बात सुन कर काफी आश्चर्य में आ गयी पर वो एक डॉक्टर थी उसको अपनी दादी के हाव भाव कुछ कुछ समझ आ रहे थे इसलिये उसने कोई भी कारण या क्यों नही पूछा और हाँ बोल कर बाहर आ गयी पिछे पिछे नजमा भी आ गयी सारे बर्तन जमा कर रसोई में.

नजमा - मैडम चलो आपको सबसे पहले तो गाँव की नदी दिखाने ले जाती हूँ आपको देख कर बहुत सुकून मिलेगा.

काव्या - देख लो नजमा ताई तुम ही जानों सबसे बढिया क्या है मेरे पास तो सिर्फ 2 घण्टे है उसमें ही अधिकतर कवर करना है.

हाँ चलो मैडम, नजमा को ताई शब्द सुन कर मानो एक अलग सी ताकत आ गयी हो. नजमा को कोई इज़्ज़त नहीं देता था उसको लोग नाम से बुला ले वो ही बड़ी बात थी. पर वो काफी खुश हो गयी.

काव्या को गाँव के कुछ लोग ऐसे गुर रहे थे मानो अभी उसका बिना बाहों वाला ब्लाउज और साड़ी निकाल कर उसका यही रोड के बीचो बीच उसका बलात्कार कर दे. साली को मसल के रख दे. पर किसी में इतनी हिम्मत नहीं होती कि वो ऐसा कुछ कर पाये. थोड़ा आगे चलते चलते दो रास्ते आ गये. एक रास्ता बिलकुल कच्चा था और एक बिलकुल सही था.

नजमा - मैडम ये दोनों रास्ते नदी की तरफ जा रहे है बोलो आप कौनसा रास्ते से जाना पसन्द करोगी.

काव्या - मैं क्या कोई भी यह सही वाले रास्ते से जाना पसन्द करेगा.

पर यह सुन कर नजमा को थोड़ा गुस्सा सा आ गया वो बोली नहीं मैडम रास्ते में क्या रखा है हम तो ये कच्चे वाले रास्ते से जाते है. यह सुन कर काव्या को काफी अजीब लगा वो अब तो यह सही वाले रास्ते से जाना चाहती थी. पर नजमा को ये कच्चे रास्ते से जाना था.

चलो अब आपको बताते है कि राज क्या है इन दोनों पक्के और कच्चे रास्ते का दरसल जो पक्का वाला रास्ता था वहां गाँव के ऊंची हि*दू जाति के पढ़े लिखे धनवान लोग रहते थे. जिनके घर भी काफी बड़े थे और गाँव मैं बहुत मान सम्मान और इज्जत थी. और जहां इज़्ज़त है वहां नजमा जैसी औरतों का क्या काम. उसको वहां की कोई भी औरत बोलती भी नहीं है ना ही उसको उस कॉलोनी में ज्यादा घुसने भी नही दिया जाता था. घर में तो बहुत दूर की बात. और जो कच्चा वाला रास्ता था वहां पर गाँव के लेबर क्लास लोग, नीची जाति के लोग रहते है और उसके आगे मुस्ल*म एरिया था. वेसे तो वहां पर भी नजमा की कोई सम्मान नहीं करता था सिर्फ चार-पाँच लोगों को छोड़ कर. पर वह एरिया नजमा को पसन्द था.

काव्या - नहीं नजमा ताई मैं तो यही से जाऊँगी. मुझको रास्ता भी सही लग रहा है और यहा से आते जाते लोग भी.

नजमा - ठीक है मैडम आप जैसा कहे..... आखिर कार नजमा थी तो नौकरानी ही और वो काव्या को बताती भी कैसे की जहां उसको रोड की कुतिया जितनी भी इज़्ज़त नहीं मिलती उसको वहां जाना पड़ रहा है....​
Next page: Update 09
Previous page: Update 07