Update 02

मेरा 2 bhk फ्लैट आज तैयार था खेल के लिए। रमेश मंजू से छुपा के पीने आया था और मै मंजू को सब प्लान बता चुका था। मै और रमेश ऊपर वाले फ्लैट के ड्राइंग रूम में बैठे और इधर उधर की बातों के साथ पैक लेना शुरू किया। मेरा ध्यान खुद पीने में कम और रमेश को पिलाने में ज्यादा था। 3-4 पैक के बाद रमेश को चढ़ने लगी। उसके बाद मैंने टीवी पर पोर्न स्टार्ट कर दिया। रमेश पूरे नशे में था और पोर्न देखते देखते वो आपे से बाहर होने लगा। मैंने शिल्पी की ब्रा पैंटी ला रखी थी। मैंने वो ब्रा पैंटी उसके सामने चमकाई, वो नशे में उसे मुझसे छीन कर चूमने लगा, फिर उसने पैंटी से अपने लंड को रगड़ते हुए अपना वीर्य निकला और वही सो गया। मैंने मंजू को कॉल कर के ऊपर बुला लिया और रमेश को ड्राइंग रूम में छोड़ कर दूसरे रूम में मंजू के साथ खुद को लॉक कर लिया। मंजू को आज मैंने सेक्सी नाईटी में आने को कहा था और मेरे कहे अनुसार उसने घुटने तक आती लगभग ट्रांसपेरेंट नाईटी पहन रखा था। देखते ही मेरा मन खुश हो गया। उसके आते ही मैंने उसके सामने रमेश के पिछवाड़े पर दो तीन लात जमाए। मंजू का मेरे ऊपर विश्वास बढ़ता जा रहा था। रूम में आते ही मैंने उसको किस किया और एक पैक मैंने मंजू को भी पिलाया। एक पैक पीते ही मंजू पर शुरूर चाह गया।

फिर मैंने मंजू की ट्रांसपेरेंट नाईटी उतारी, उसने उसके नीचे कुछ नहीं पहना था। इसलिए नाईटी उतारते ही वो पूरी नंगी हो गई और मैंने बरमुडे में था उसी हालत में छत पर आ गया। छत की बाउंड्री ऊँची थी इसलिए किसी को कुछ दीखता नहीं ऊपर से रात के 12 बज चुके थे। मंजू नंगी थी खुले आसमान के नीचे जो की काफी रोमांचित कर रहा था। छत पर एक कुर्सी पड़ी थी, मै उसपर तेजी से जा के बैठ गया। मंजू जो काफी शर्मा रही थी, उसके मैंने घुटने के बल मेरे पास आने को कहा। पहली बार तो उसने मना किया लेकिन मेरे जोर से बोलने पर वो चुपचाप घुटने पर चलते हुए मेरी कुर्सी तक आई, फिर मैंने उसको अपना दोनों हाथ पीछे कर अपने होंठो से मेरा बारमुदा नीचे उतारकर लंड चूसने को कहा। मंजू किसी तरह खुद को संभालती हुई ममेरे शॉर्ट्स को नीचे उतारा और लंड तक अपने मुँह को ले गई। मैंने अपने दोनों पैर फैला दिया और उसके बीच खड़े मेरे लंड को मंजू चूसती रही। बीच बीच में मै उसके टल्ली पड़े चूतिये रमेश का मजा लेता रहा। मंजू के थोड़ी देर लंड चूसने के बाद मैंने उसको अपने गोद में बिठा लिया और उसके बूब्स को चूसने लगा। मै जोर से निप्पल्स को अपने दांतो से खींच रहा था जो मंजू को बेचैन कर रही थी। फिर मैंने मंजू को उल्टा किया और उसको गर्दन के पास किस गया। गर्दन के पास किस करते ही मंजू सिहर गई और मेरा मजा बढ़ता गया।

उसकी पूरी पीठ चूमने के बाद मैंने उसको वही घोड़ी बना दिया और उसके गांड के पास अपने लंड को घुमाने लगा। उसकी गांड का छेद एक दम छोटा था और रमेश ने कभी उसकी गांड नहीं मारी थी। मैंने उसके छोटे छेद में लंड घुसाने की कोशिश की, लंड घुसा नहीं लेकिन मंजू के आँखों में आशू आ गए। वो रोते हुए मुझसे छोड़ देने की भीँख मांगने लगी। मैंने गुस्से में उसकी ओर देखा और उसको बाहर ही खड़े रहने को कहकर अंदर चला गया। अंदर मै वैसेलिन लेने गया था जिसको ढूंढने में मुझे 2-3 मिनट लग गए। मंजू को लगा की मै गुस्सा हो गया हूँ और अब उसको नंगा ही बाहर रखूँगा रात भर। ये सोचकर उसकी हालत खराब हो गई थी। मै जब वैसेलिन लेकर वापिस आया तो उसके जान में जान आई। वो मेरे सामने दोनों कान पकड़ कर खड़ी थी

मैंने अपना गुस्से वाला चेहरा बनाएं रखा और जाकर कुर्सी पर बैठ गया। मैंने मंजू को अपनी तरफ बुलाया। मै खुद को बहुत गुस्से में दिखा रहा था लेकिन सच तो था की मै मंजू को अपने कंट्रोल में ले रहा था। मंजू मेरे पास आई और मैंने उसको अपने जांघ पर बिठाया। फिर उसके बालो को अपने हाथ में लपेटते हुए मैंने उसका चेहरा अपनी ओर टेढ़ा कियाऔर धमकाता हुआ कहा की जो मै कहूँ वो चुपचाप कर। मंजू सॉरी सॉरी बोलती रही फिर मेरे सामने हल्के से सिर हिलाया। फिर मैंने उसे अपने जांघ से नीचे उतार दिया तो मेरे सामने जमीन पर बैठी रही और बोली की आप जो कहोगे मै मानूंगी लेकिन प्लीज मुझे वहाँ ना करो। थोड़ी देर उसके मनाने के बाद भी मैंने कहा की मै जो कहूंगा तुझे मानना ही होगा और तेरी गांड आज ही मारूंगा। मंजू समझ चुकी थी आज उसके गांड में लंड जा कर ही रहेगा।

फिर मै कुर्सी से उठा तो मंजू भी उठने लगी तो मैंने उसे धक्का दें कर नीचे ही बैठने को कहा। मंजू ये समझ रही थी की मै बहुत गुस्से में हूँ। अंदर उसका चुतिया पति नशे मे टुल है और मै बाहर खुले आसमान के नीचे राज के साथ नंगी। साथ ही रमेश को काबू मे रखने का प्लान भी उसको मालूम था इसलिए उसको यह समझ आ चुका था कि राज अब जो चाहेगा वो करेगा।

उसकी आँखों मे आँशु थे तो मैंने उसको अपने पास इशारे से बुलाया। मै छत कि रेलिंग पर खड़ा था। दबी सहमी मेरे पास वो आई तो मैंने उसको गले से लगा लिया। मेरे गले से लगते ही वो और रोने लगी तो मैंने उसको समझाते हुए कहा कि पहली बार का दर्द बर्दाश्त करो, दूसरी बार दर्द हुआ तो फिर गांड मे लंड नहीं डालूंगा। किसी तरह अपने मन को समझा कर उसने हाँ बोला। अब मैंने अपने हाथों से उसको वैसेलीन दिखाया और कुर्सी के पास जा के घोड़ी बन जाने को कहा। बिल्कुल आज्ञाकारी बच्ची की तरह वो घोड़ी बन गई। मै मन ही मन खुश हुआ और फिर कुर्सी पर जा के बैठ गया। कुर्सी पर बैठकर मैंने उसके गांड के छेद पर काफी वैसेलीन लगाया और अपने लंड पर भी। फिर मै अपने लंड को उसके गांड के पास घुमाने लगा। गांड के मुँह पर मै हल्का हल्का अंदर की ओर अपना लंड भेज रहा था और तभी अचानक से एक जोर का झटका दिया और मेरा लंड उसकी गांड के अंदर था।

उसके गांड मे मेरा लंड जाते ही मंजू की चीख बहुत जोर से निकल पड़ी। मैंने अपने हाथों से उसके मुँह को दबाया। इधर मेरा लंड भी मानो अंदर जाने मे खुरच सा गया था। उसकी गांड पूरी तरह या कुछ ज्यादा ही टाइट थी। मै फिर जोर लगाकर अपने लंड का धक्का उसके गांड के अंदर मार रहा था जिसे मंजू की हालत भी खराब हो रही थी। थोड़ी देर धक्के मारने के बाद मैंने लंड से वीर्य को गांड मे ही निकाल कर अपने लंड को उसके गांड से बाहर निकाला। मंजू को घोड़ी पोजीशन मे गांड मारने मे मुझे बहुत मजा आया। गांड से मेरे लंड के बाहर निकलते ही वो वही निढाल हो कर बैठ गई। दर्द की वजह से उसके आँखों से आँशु रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

मौके की नजाकत को समझते हुए मैंने मंजू को गोद मे उठा कर नीचे उसके फ्लैट मे ले आया और उसके बेड पर उसको लिटा दिया। मै भी साथ मे बेड पर लेट गया और तभी मंजू मेरे पास आकर मेरे छाती पर अपना सिर रखकर लेट गई। मैं उसके आँखों मे मेरे प्रति समर्पण देख पा रहा था, मानो कह रही हो जैसे चाहते हो मैंने वैसा कर दिया। मैंने उसके माथे पर किस किया और उसने अपनी आँखे बंद कर ली। फिर मै उसके एक हाथ को पकड़ के नीचे की ओर ले गया और अपना लंड उसको पकड़ा दिया। वो मेरे लंड को सहलाते हुए आराम करना चाहती थी और मैंने भी उसको आराम करने दिया। सुबह के चार बजने वाले थे और मै नीचे नंगा ही आया था इसलिए मै जल्दी से ऊपर चला गया इससे पहले ही मॉर्निंग वाक करने वाले सड़क पर नजर आने लगते।

अब ऊपर जा कर मैंने देखा रमेश अधनंगा पी के टुल सोया हुआ है और मेरे तुरुप के इक्के ने अपना काम कर दिया था। तुरुप के इक्के की वजह से मैंने मंजू की चुदाई खुले आसमान मे की थी। मैंने तजल्दी से कपड़े पहने और अपने तुरुप के इक्के को बाहर छोड़ कर आया जहाँ से वो ऑटो पकड़ कर चली गई। आकर मैंने प्लान के मुताबिक पूरी रिकॉर्डिंग सेव की और अपने रूम मे जा कर लेट गया या यूँ कहूँ रमेश के उठने का इंतज़ार करने लगा। लगभग साथ बजे होंगे जब रमेश की नींद खुली, खुद को अधनंगा और हाथो मे एक अनजान पैंटी देखकर उसके होश उड़ गए। रमेश अब कुछ समझ नहीं पा रहा था और उसको सबसे बड़ी टेंशन थी कि वो अब नीचे कैसे जाएगा। वो वैसे ही मेरे कमरे मे आया और बोला की अब मै नीचे कैसे जाऊ।

मै (राज )- मुझसे क्या पूछ रहे हो। नीचे जाओ अपने पैर से

रमेश - ये तुमने क्या करा दिया मुझसे मंजू जानेगी मैंने पी है तो वो मुझे छोड़ देगी

मै - सिर्फ पी होती तो बात थी, तुमने बहुत कुछ किया है और उस अनजान पैंटी को उसके सामने लहरा दी।

यह देखते ही रमेश मेरे पैरो पर गिर गया और बोला की प्लीज मुझे बचा लो। आप जैसा बोलोगे मै वैसा करूंगा।

मैंने अपना पैर उसके चंगुल से खींचा और बोला की अब नहीं आज से मै जैसा कहूंगा वैसा ही करना होगा वरना.....

मै आगे कुछ बोलता उससे पहले रमेश बोल पड़ा बिल्कुल जैसा आप कहोगे वैसा करूंगा। मैंने बोला चल अब मेरे पैर दबा और वो चुपचाप मेरे पैर दबाने लगा। रमेश मेरे जाल मे फंस चुका था और अब मंजू और शिल्पी को चोदने मे रमेश नाम का खतरा भी खत्म हो चुका था। इधर मैंने मंजू को जगते ही मुझे मैसेज करने को कहा और बोला की ऊपर मत आना।

मै मंजू के मैसेज का इंतजार कर रहा था और उधर रमेश चुतिया मेरे पैर दबाये जा रहा था। तभी आठ बजे उसका मैसेज आया गुड मॉर्निंग का।

मैंने बोला फटाफट रेडी हो जा मै नौ बजे तक नीचे आऊंगा रमेश के साथ। रमेश से तुम ज्यादा सवाल जवाब मत करना। उसके बाद लगभग नौ बजे मै रमेश के साथ ऐसे नीचे आया जैसे कहीं बाहर से आया हूँ। मंजू ने मुझे देखते ही स्माइल दी और अंदर आने को कहा और मै अंदर सोफे पर बैठ गया। रमेश को मैंने वही पर खड़े होने का इशारा किया। वो डर के मारे चुपचाप खड़ा था। फिर मैंने मंजू से कहा कि रात एक पार्टी मे जाना था जो थोड़ा दूर था इसलिए मै रमेश को साथ ले गया था। मंजू ने बस फॉर्मेलिटी मे रमेश से बोला कि रात बार रुकना था तो बता तो देते। रमेश ने कुछ नहीं बोला और मैंने रमेश को इशारा किया की वहाँ से जाए। रमेश चुपचाप घर के अंदर चला गया शायद वो थोड़ा आराम करना चाहता था और मुझे भी नींद आ रही थी। मैंने मंजू को उसके जाते ही गले लगाया और बोला की 2 बजे के लगभग ऊपर लंच लेकर आना।

मै ऊपर आके सो गया, मुझे बहुत तेज नींद आ रही थी। पिछले कुछ महीने से मेरी जिंदगी की रफ्तार बदल चुकी थी और मै हाथ आए इस मौके का पूरा लाभ उठाना चाहता था।

मै गहरी नींद मे सोया था, तभी मंजू की कॉल आई। वो ऊपर आने को पूछ रही थी लेकिन मैंने उसे डांटते हुए कहा की पूछना क्यूँ था, आ जाना था ऊपर। फिर मंजू एक सलवार समीज पहन कर मेरे लिए स्वादिष्ट खाना ले कर ऊपर आ गई। आते ही उसने मुझे किस किया और मैंने भी उसके गालों पर किस किया। फिर मैंने उससे रमेश के बारे मे पूछा तो बोली थोड़ी देर आराम करके दुकान खोल दिया उसने। मै मन ही मन खुश था। मै रेडी हुआ और मंजू ने अपने हाथों से मुझे खाना खिलाया। मुझे बिल्कुल राजा महाराजा वाली फीलिंग आ रही थी और आज कल वीकेंड की वजह से छुट्टी भी थी।

खाना खाने के बाद मैंने मंजू को अपने साथ लेटने को कहा। मंजू जाने के लिए हड़बड़ाई तो मैंने उससे कहा की अब चूतिये रमेश की ज्यादा परवाह मत करो। फिर मैंने मंजू को गेट अंदर से लॉक है चेक करने को कहा। मंजू गेट चेक कर के आई तो मैंने उसको अपने पास लिटा लिया। फिर मै उसके समीज के ऊपर से ही उसके बूब्स को मसल रहा था और वो मेरे शॉर्ट्स के ऊपर से मेरे लंड को मसल रही थी। थोड़ी देर मसलने के बाद मैंने सोचा की चुत आज रात मे मारूंगा और मैंने मंजू को बोल दिया की आज नीचे पार्टी होगी।

फिर शाम को मैंने रमेश को फोन किया और ऊपर बुलाया। रमेश डरता हुआ मेरे पास आया तो मैंने उसको अपने बेड पर ही पैरो के पास बैठने को कहा। रमेश चुपचाप मेरी बातों को फॉलो करता हुआ मेरे पैर के पास बैठ गया। फिर मैंने अपने वॉलेट से 2000 के दो नोट निकाले और रमेश को देते हुआ कहा की आज नीचे पार्टी होगी, कोल्ड ड्रिंक्स और स्नैक्स लेते आना। रमेश घबरा गया और बोला नीचे तो मैंने जोर से कहा नीचे ही। रमेश चुपचाप नीचे आ गया।

कोल्ड ड्रिंक्स और बाकी पार्टी का सामान ले कर रमेश ले आया और उसने मुझे फोन किया। मैंने उससे कहा की ठीक है मै आता हूँ थोड़ी देर मे। फिर मैंने मंजू को फोन कर कोई सेक्सी नाईटी पहनने को कहा। मै एक सैंडो टीशर्ट और बिना अंडरवियर के शॉर्ट्स पहन कर नीचे आ गया। रमेश को उम्मीद थी कि मेरे हाथों मे शराब कि बोतल होगी लेकिन मेरे खाली हाथ देखकर उसने पूछा कि पार्टी कैसे होगी मैंने कहा देखते जाओ कैसे होगी पार्टी।

अब मै रमेश के घर के अंदर गया तो देखा मंजू ने एक सिल्की सा बदन से चिपका नाईटी पहन रखा है। ये देखकर मै बहुत खुश हुआ। मैंने मंजू से कहा कि आज नीचे पार्टी करनी है और मंजू ने हाँ कहा।

मै सोफे पर बैठा था और रमेश अभी भी खड़ा था। मैंने मंजू और रमेश से कहा पार्टी के आइटम्स निकाले तो रमेश ने सब सामान निकाला और मंजू ने अच्छे से टेबल पर रखा। रमेश को मैंने सामने वाले सोफे पर बैठने का इशारा किया और रमेश जा के बैठ गया। अब मंजू खड़ी थी और मैं 3 सीट वाले सोफे पर बैठा था मैं खिसक कर मंजू से कहा कि तुम भी बैठो। मंजू मेरे बगल मे आ के बैठ गई। मंजू और रमेश दोनों बेचैन थे और मुझसे डरे थे कि मैं क्या करने वाला हूँ। वो दोनों पार्टी का मजा कम और मेरे इंस्ट्रक्शन ज्यादा फॉलो कर रहे थे।

पार्टी की शुरुआत कोल्ड ड्रिंक्स और स्नैक्स के साथ हुई। सबने कोल्ड ड्रिंक पी, इसी बीच मैंने मंजू और रमेश दोनों की नजर से बचाते हुए नशे वाली गोली रमेश के कोल्ड ड्रिंक्स मे डाल दी। जैसे ही रमेश ने वो गोली डली हुई कोल्ड ड्रिंक पी मैंने बोला अभी तो पार्टी शुरू हुई है।

रमेश पर कोल्ड ड्रिंक का असर होना शुरू हो गया था। तभी मैंने ट्रुथ और डेयर गेम स्टार्ट किया। पहला चांस रमेश का आया, और रमेश ने डर के डेयर चूना क्योंकि ट्रुथ मे कुछ उलटे सवाल पूछ सकता था। उसको मैंने टास्क दिया की कान पकड़ कर दस उठक बैठक करें। रमेश ने चुपचाप उठक बैठक किया। अब मंजू की बारी आई और मंजू ने भी डेयर ही चूना। मंजू को मैंने टास्क दिया कि मुझे होंठो पर आके किस करें। मंजू रमेश के सामने मुझे किस करने से घबरा रही थी। मैंने बोला की टास्क है तो करना होगा। रमेश नशे मे झूम रहा था और बोल रहा था करो। उसको शायद पता नहीं था की टास्क क्या है। मंजू डरती हुई मेरे करीब आई और मुझे किस किया। रमेश सामने नशे मे था और मैंने मंजू का डर निकालने के लिए उसके सामने ही मंजू के होंठ से अपने होंठ को लगाकर किस करता रहा।

मैं मंजू को सोफे पर किस कर रहा था, हम दोनों के होंठ एक दूसरे का रसपान कर रहे थे वही दूसरी ओर रमेश अपने नशे मे मदमस्त था। कोल्ड ड्रिंक मे डाली नशे की गोली अपना रंग दिखा रही थी। मंजू को नशे की गोली का पता नहीं था इसलिए वो मुझे किस करने मे घबरा रही थी वही मैं इस मौके का इस्तेमाल मंजू के मन से डर हटाने के लिए कर रहा था। रमेश को नशा पूरी तरह चढ़ रहा था और वो लगभग सोने वाला था तो मंजू उसे पकड़ कर बैडरूम मे सुला दी। मैंने जाकर बेडरूम का दरवाजा आगे से लॉक कर दिया। अब ड्राइंग रूम मे मैं और मंजू थे। मैं सोफे पर बैठा था और मंजू रूम को साफ कर रही थी।

रूम को साफ कर के मंजू मेरे पास आई। मैंने मंजू के दोनों टांगो को फैलाकर अपनी गोद मे बिठा लिया। हम दोनों का चेहरा एक दूसरे के सामने था। इसी पोजीशन मे मैंने मंजू की नाईटी ऊपर उठा दी और उसके बूब्स को अपने होंठो से चाटने लगा। फिर मैंने अपने दांतो से उसके निप्पल्स को भींचा जिससे उसकी आन्हे निकल गई। इस तरह बूब्स चूसने के बाद मैंने उसी पोजीशन मे अपना शॉर्ट्स नीचे उतारा। मेरी गोद मे होने के कारण मेरा लंड मंजू के चुत को टच कर रहा था। ब्लो जॉब से लंड खड़ा हो चुका था, उसी पोजीशन मे मंजू के बूब्स को चूसते चूसते मैंने नीचे उसके चुत मे अपना लंड धकेल दिया। ये मेरी पसंदीदा पोजीशन थी और मंजू भी खूब उछल रही थी। हर धक्के के साथ मंजू उछलती और उससे भी तेज उसके बूब्स उछलते।

मैंने अपने दोनों हाथों से उसके चूतड़ों को पकड़ रखा था ताकि वो गिरे नहीं। थोड़ी देर जम कर धक्के मारने के बाद मैंने अपना लंड का पानी मंजू की चुत मे छोड़ दिया और उसको नीचे उतारा। मंजू को मैंने जमीन पर बिठा दिया। मंजू भी मेरे पैरो के सामने बैठी रही। फिर मैं उसको नंगा गोद मे उठाया और छत पे अपने फ्लैट मे ले आया। छत पर मैंने मंजू को गोद से बेड पर गिराया और उसके ऊपर लेट गया। मंजू के होंठो को मैं चूमने लगा फिर मैंने उसको नीचे किया और अपना लंड उसको चूसने को दे दिया। मंजू पूरे जोश से मुझे मजे दिलाती हुई मेरा लंड चूसती रही। मेरे लंड को चूसने के बाद वो मेरे पास आ कर गले से लिपट गई।

इसी तरह कुछ मिनट बीतने के बाद मैं सेकेंड राउंड की तैयारी करने लगा। इस बार मैंने मंजू को अपने लंड के ऊपर बिठाया और जोर se धक्के मारने लगा। मंजू भी सेक्सी आवाजे निकाल रही थी। फिर मैंने उसकी गांड भी मारी। आज उसने कम नखरे के साथ मेरा लंड अपनी गांड मे लिया। उसकी गांड काफी ज्यादा टाइट थी इस वजह से काफी ज्यादा मजा आया। फिर हम दोनों काफी देर तक नंगे ही एक दूसरे से चिपक कर लेटे रहे। फिर सुबह के लगभग तीन - चार बजे मैं मंजू को नीचे छोड़ आया और वापिस आ के ऊपर सो गया।

अब अगले दिन रविवार को मैं उठा और फ्रेश हुआ। मुझे उम्मीद थी की मंजू सुबह सुबह आ कर मुझे उठाएगी। उसके नहीं आने से मुझे गुस्सा भी आ रहा था तभी मंजू मुझे ब्रेकफास्ट लेकर छत पर आती हुई दिखाई दी। मुझे गुस्से मे देख सॉरी बोलती हुई बोली की आज सुबह लेट से नींद खुली। उसने मुझे मनाते हुए किस किया और मैंने जवाब मे उसको गोद मे उठाकर बेड पर पटक दिया और उसको किस करने लगा। किस करते करते मैंने उसकी समीज उतारी और ब्रा के ऊपर से बूब्स मसलने लगा। फिर मैंने उसको पीछे मोड़ा और गर्दन के पास किस किया। वहाँ पर किस करते ही मंजू मचल सी गई और फिर हमने मॉर्निग सेक्स का राउंड पूरा कर लिया। उसके बाद फ्रेश होकर हम दोनों ने साथ मे ब्रेकफास्ट किया।

कल रात के बाद मंजू भी रमेश से बेपरवाह नजर आ रही थी जो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। इस तरह जब मौका मिलता रहा हम दोनों अगले तीन -चार दिन सेक्स का मजा लेते रहे। फिर मुझे मंजू ने बताया की आज शाम को उसका भाई शिल्पी और मनीष को लेकर वापिस आ रहा है। उस रात हम दोनों एक दूसरे से दूर रहे।

अगले दिन सुबह ना शिल्पी ट्यूशन के लिए आई और ना मंजू मॉर्निंग सेक्स के लिए। मेरा बिल्कुल मन नहीं लग रहा था और जी कर रहा था नीचे जा कर दोनों को चोद दूँ लेकिन समय की नजाकत को समझते हुए खुद पर कण्ट्रोल किया। शाम को मैंने ऑफिस से शिल्पी को कॉल किया और अपने ऑफिस के पास गार्डन मे बुलाया। शिल्पी भी घर पर बहाना बनाकर मुझसे मिलने गार्डन मे आ गई।

हल्का अंधेरा हो रहा था और मैं नहीं चाहता था की कोई मुझे शिल्पी के साथ गार्डन मे देखे, इसलिए मैं आगे आगे चल रहा था और शिल्पी मुझे फॉलो कर रही थी। गार्डन के अंदर मुझे एक बेंच दिखा जहाँ हम दोनों आराम से बैठ सकते थे, मैं उस बेंच पर जा कर बैठ गया और पीछे पीछे शिल्पी भी मेरे करीब आ कर बैठ गई। शिल्पी के पास आते ही मैंने उसको कस कर गले से लगा लिया। शिल्पी ने मुझसे गले लगे हुए मिस यू कहा और मैंने भी उसको जवाब मे मिस यू डार्लिंग बोला। इस आलिंगन के बाद मैंने उसके होंठो को चुम लिया और हम दोनों काफी देर तक एक दूसरे के होंठो को चूमते रहे मानो आज खा ही जाएंगे।​
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