Update 03

शिल्पी ने स्किन टाइट जीन्स और क्रॉप टॉप पहना था। उसके होंठो को चूसने के बाद मैंने उसको अपने गोद मे बिठा लिया और उसके बूब्स को मसला। उसके बूब्स को मैंने काफी जोर से मसला जिससे उसकी आह निकल गई। उसके बाद मैंने उस कल का प्लान बताया और फिर उसको घर के लिए भेज दिया

फिर मैं मार्केट जा के शिल्पी के लिए एक सेक्सी वन पीस ख़रीदा और रात को थोड़ी लेट से घर आया। घर आते आते लगभग 9 बज गए थे और मंजू गेट पर ही मेरा इंतजार कर रही थी। मंजू और मैं एक दूसरे को देख कर मुस्कुराए और मंजू मुझे जल्दी से फ्रेश होने को बोली। मेरे छत पर आने के लगभग 15 मिनट बाद मंजू डिनर ले कर छत पर आ गई। डिनर तो बहाना था, आते ही मंजू मुझसे गले लग कर चिपक गई और सुबह ना आने के लिए मुझे सॉरी बोलने लगी। मैंने ओके बोल के बैठ गया तो उसने मुझे अपने हाथों से खिलाया। खाने के बाद उसने मेरे शॉर्ट्स को नीचे किया और मेरे लंड के चारो ओर अपनी जीभ फेरने लगी। उसके वहा पर जीभ फेरने से पूरे शरीर मे हलचल होने लगी। फिर उसने मेरा लंड अपने मुँह मे ले लिया, मैं भी जोश मे आकर उसके सर को पकड़ा और अपने लंड से जोर जोर से झटका उसके मुँह मे देने लगा। थोड़ी देर मे मैंने लंड का पूरा वीर्य उसके मुँह मे छोड़ दिया। उसके बाद मैंने उसकी नाईटी ऊपर की और उसके चुत मे अपना लंड डाल दिया। मंजू आज बिना पैंटी के नाईटी पहने आई थी।यह एक रेगुलर सेक्स था जो कर के मंजू नीचे चली गई और मैं भी कल का प्लान सोचते सोचते सो गया।

आज सुबह हुई और शिल्पी सुबह 7:30 बजे घर से कॉलेज के नाम से निकल गई। उसके जाते ही मंजू ऊपर ब्रेकफास्ट लेकर आई। आज अभी मुझे मंजू के ब्रेकफास्ट मे कोई दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन मंजू मुझे अपने हाँथो से खिलाना चाहती थी। जल्दी जल्दी मैं ब्रेकफास्ट कर के निकला। अपने मीटिंग पॉइंट पर मैं शिल्पी से मिला और शिल्पी की साइकिल लेकर चला गया। उसकी साइकिल अपने ऑफिस मे रखकर मैं अपने फ्रेंड की कार लेकर वापिस शिल्पी के पास आ गया। शिल्पी अपने कॉलेज यूनिफार्म यानी शार्ट स्कर्ट और शर्ट मे थी।

कार की ड्राइविंग सीट पर मैं था और बगल मे शिल्पी। इस तरह सुबह 8 बजे हम दोनों दिल्ली की ओर कार से चल पड़े। शिल्पी को मैंने टेढ़ा होकर बैठने को कहा और अपना एक हाथ उसके जांघ पर रखकर हाथ फेरने लगा। कभी मैं उसके जांघो पर हाथ फेरता कभी उसके बूब्स पर। इस बीच रास्ते मे वन पीस जो ख़रीदा था मैंने निकाल कर शिल्पी को बदलने को कहा। अब शिल्पी को चलती कार मे कपड़े बदलना था। शिल्पी ने अपनी शर्ट खोली और वन पीस पहन लिया। फिर उसने नीचे से स्कर्ट भी उतार कर कार के पीछे वाली सीट पर रख दिया। इस तरह 9 :30 बजे मैं दिल्ली पहुँचा जहाँ मैंने एक 5 स्टार होटल मे सूट बुक करा रखा था।

होटल के रिसेप्शन पर बुकिंग और आईडी कार्ड्स दिखा कर हमने चेक इन किया।

मैं और शिल्पी चेक इन के बाद अपने सुइट मे पहुँच गए। सुइट बहुत ही मस्त था और साथ मे प्राइवेट स्विमिंग पूल भी था जो सिर्फ सुइट बुकिंग वाले यूज़ कर सकते थे। शिल्पी ने कभी अच्छा होटल नहीं देखा था, फाइव स्टार सुइट को देखकर उसकी आँखे चौधिया गई।

थोड़ी देर बाद हमें होटल की ओर से वेलकम ड्रिंक और स्नैक्स सर्व किया गया। हमने उसे फिनिश किया और उसके बाद सुइट को dnd मे डाल दिया। सुइट मे एक बड़ा सा सोफा था जिसपे कोई आराम से लेट सकता था। मैं शिल्पी को गोद मे ले कर उस सोफे पर बैठ गया। शिल्पी मेरे ऊपर लेटी थी और मैं उसको किस किए जा रहा था। वन पीस ड्रेस की वजह से किस करते वक्त मेरे हाथ उसके कमर को सहला रहे थे। एक तरफ मेरे होंठ उसके होंठो को चूस रहे थे दूसरी तरफ मेरे हाथ उसके चूतड़ों को मसल रहे थे। लगातार किस करते वक्त ही मैंने उसकी पैंटी नीचे खिसका दी। फिर उसी पोजीशन मे मैंने उसके वन पीस को निकाला। अब शिल्पी सिर्फ ब्रा मे मेरे शरीर पर लेटी थी। उसके होंठो को चूसने के साथ ही मैंने शिल्पी के गांड के छेद को चेक किया। शिल्पी की गांड का छेद उसकी माँ के जैसा बहुत टाइट था, मैं समझ गया आज ये भी मंजू की तरह रोने वाली है।

फिर मैंने शिल्पी को खड़ा किया और उसकी पीठ के पास पीछे से चिपक कर उसकी गर्दन पर किस किया। गर्दन से किस करना स्टार्ट कर मैंने उसकी जांघो तक किस किया। शिल्पी की नंगी और चिकनी जांघो को चाटने मे बहुत ही जबरदस्त मजा आ रहा था। 19 साल की इस कमसिन कली के अंग अंग मे मुझे यौवन का रंग भड़ना था।

फिर मैंने उसको अपनी ओर सीधा किया और बेड पर लिटा दिया। बेड पर लिटा कर मैंने उसकी चुत के आस पास जीभ से चाटना शुरू किया। शिल्पी लगातार सिसकारिया लिए जा रही थी। मैंने उसके चुत के आगे हिस्से को चाटने के बाद उसकी चुत मे दो ऊँगली डाल कर अंदर बाहर करने लगा। मेरी ऊँगली की रफ्तार तेज होने से शिल्पी की चुत ने पानी छोड़ दिया। उसके बाद मैंने मसाज आयल से उसके चुत के ऊपर रगड़ना शुरू किया, उसकी सिसकारिया सुइट की दीवालो को तोड़ रही थी। चुत के मसाज के बाद मैंने उसको पलटा और उसकी गांड के ऊपर मसाज आयल डाला जो की उसके गांड के अंदर तक गया। उसकी गांड की छेद कुछ ज्यादा ही टाइट थी इसलिए मैंने उसमे पहले एक ऊँगली डाली और उसके बाद मोमबत्ती अंदर डाला। शिल्पी की सिसकारिया बढ़ती जा रही थी और वो अब तक दो बार पानी छोड़ चुकी थी।

उसकी चुत और गांड की मसाज के बाद बारी थी उसके बूब्स के मसाज की। उसके संतरे जैसे बूब्स को बड़ा करने की मेरी जिम्मेदारी थी और मैं उसको बखूबी निभाना चाहता था। मैंने उसकी ब्रा का हुक पीछे से खोला लेकिन उसके बदन से ब्रा हटाया नहीं। मैं अपना हाथ उसके बूब्स के पास ले जाकर उसका मसाज करने लगा। आस पास मसाज करते हुए मैं ब्रा के अंदर हाथ ले गया और उसके बूब्स को मसलने लगा। उसके छोटे छोटे बूब्स मेरे एक हाथ मे समाए जा रहे थे। फिर मैंने ब्रा को उसके बदन से अलग किया और दोनों बूब्स पर मसाज आयल लगाया। मसाज आयल लगा के मसाज करने से उसके बूब्स के साइज बड़े नजर आने लगे।

अब मैंने ब्रा और पैंटी छुपा के कवर्ड मे रख दिया। शिल्पी मेरे मसाज से मदहोश हो चुकी थी और अपनी चुत मे मेरा लंड लेने के लिए तड़प रही थी। तभी इंटरकॉम पर घंटी बजी। मैंने कॉल रिसीव किया तो वो लंच के लिए कॉल था। मैंने लंच रूम डिलीवरी के लिए बोला और शिल्पी को अपने गले से लगा के बैठ गया। अभी मुझे थोड़ी देर इंतजार करना था जब तक लंच डिलीवर ना हो जाए।

शिल्पी ने स्टाफ के आने से पहले अपने कपड़े पहनने का सोचा तो मैंने उसको मना कर दिया। उसने अपनी ब्रा पैंटी ढूंढी तो मैंने बोला की मैंने रख दिया है और अब यहां से निकलते वक्त ही कपड़े पहनना हैं। तभी सुइट नॉक हुआ। मैंने अंदर आने को बोला और वो लंच का सब सामान रखने लगे। वो दो स्टाफ थे और उनसे मजे लेने के लिए शिल्पी को मैं बेड पर लेटे लेटे किस करता रहा। उन दोनों को शिल्पी की नंगी पीठ पूरी दिख रही थी और दोनों ये देखकर अपने आप को किसी तरह कण्ट्रोल कर रहे थे।

दोनों स्टॉफ शिल्पी को देखने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते थे और मैं भी उनसे थोड़ा मजा लेना चाहता था इसलिए मैंने अपने शरीर पर लिपटी चादर ऊपर की ओर खींच ली जिससे शिल्पी का पैर घुटने तक दिखने लगा। टेबल पर लंच अरेंज करने के बाद दोनों स्टॉफ तिरछी नजर से शिल्पी की ओर देखते हुए पूछें की कोई और सर्विस चाहिए तो मैंने ना बोला। बेचारे शिल्पी की नंगी पीठ को देख रहे थे और मैं उन दोनों की बेचैनी को। उनका मन हो की शायद थोड़ी देर रुक कर नयन सुख ले ले लेकिन मैंने उन्हें वापिस भेज दिया।

अब शिल्पी मेरा शिकार थी और मैं ज्यादा टाइम वेस्ट नहीं करना चाह रहा था। उनके जाते ही मैंने चादर फेकी और शिल्पी की चुत पर ऊँगली फेड़ी। शिल्पी इस वक्त अपने होश खो चुकी थी। मैंने उसको अपने गोद में बिठाये उसकी चुत के मुँह पर अपना लंड ले गया और एक तेज झटका मारा। मेरा लंड शिल्पी की चुत के अंदर था। शिल्पी की चुत में मै पूरी रफ्तार से धक्का मार रहा था। शिल्पी में पूरे जोर से उछल रही थी जिससे उसके बूब्स भी खूब उछल रहे थे जो की माहौल को काफी रोमांटिक बना रहा था। मैं जोर जोर से धक्के मारता रहा और अपना वीर्य शिल्पी की चुत में छोड़ दिया। उसके बाद मैं उसकी गांड की ओर मुड़ा। उसको बेड पर ही मैंने घोड़ी बना दिया और उसकी गांड पर फिर से मसाज ऑइल डाला। उसके गांड के छेद में मसाज ऑइल जाने से वहां काफी चिकना हो गया था। मैंने उसकी गांड में ऊँगली डाल कर देखा की वह लंड लेने को कितना तैयार हैं। उसकी गांड की छेद में मैं दो ऊँगली काफी मुश्किल से ले जा पा रहा था, मतलब साफ था वो जबरदस्त दर्द लेने वाली थी। मसाज ऑइल के चिकनेपन का फायदा उठाते हुए मैं उसके गांड के पास अपने लंड को रगड़ने लगा। उसी चिकनाहट में मेरा लंड हल्का सा उसकी गांड में गया। धीरे धीरे मै उसको अंदर भेज रहा था और तभी एक तेज झटका मारा और मेरा आधा से अधिक लंड शिल्पी की गांड में दाखिल हो चुका था। मदहोश शिल्पी को अचानक से बहुत ज्यादा दर्द हुआ और वो जोर से चीँख पड़ी। मै भी इसके लिए तैयार था इसलिए तुरंत उसके मुँह को अपने हाँथो से बंद किया। शिल्पी की चीख रुकने का नाम नहीं ले रही थी और मै भी अपने लंड को तेजी से धक्के मार रहा था। अपना वीर्य भी मै उसकी गांड में गिरा दिया फिर अपने लंड को बाहर निकाला।

शिल्पी पूरी तरह निढाल हो कर मेरे बांहो में आकर गिर गई। फिर हम दोनों नंगे ही बाथरूम में गए और बाथ टब में मैंने शिल्पी को अपने गोद में बिठा लिया। टब में मै शिल्पी के बूब्स को लगातार मसल रहा था, फिर मैंने शिल्पी को पलटा और अपना लंड उसको चूसने के लिए दिया। उसने बड़े ही स्टाइल से अपने हाथों से मेरे लंड पर अपना हाथ फेड़ा और लंड को अपने कब्जे में ले लिया। फिर उसने मेरे लंड को अपने मुँह में पूरा अंदर ले कर अच्छे से चूसा जैसे आइसक्रीम खा रही हो। फिर बाथटब में ही मैंने उसके चुत में लंड को घुसा दिया और एक राउंड सेक्स का और किया। शिल्पी की इसमें हालत खराब थी और मै बहुत ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहता था। फिर हम दोनों ने शॉवर लिया और आकर बेड पर लेट गए। इस तरह लगभग 5 बज गए थे। शिल्पी ने मंजू को फोन किया की वो कुछ नोट्स लेने के लिए फ्रेंड के घर आ गई हैं और लौटने में लेट हो जाएगी।

फिर हम दोनों ने कपड़े पहने और दिल्ली से वापस मेरठ की ओर चल दिए। रास्ते में शिल्पी ने कॉलेज यूनिफार्म पहन ली, फिर मेरे ऑफिस जा कर उसकी साइकिल उसको दी और लगभग 8 बजे शिल्पी अपने घर पर पहुँच गई। उसके थोड़ी देर बाद मैंने मंजू को फोन किया और बोला की आज ऑफिस में काम हैं 10 बजे तक घर आऊंगा, तुम्हे आज रात ऊपर ही रहना हैं मेरे फ्लैट में। मंजू को मैंने नींद वाली गोली दे रखी थी जो वो रमेश को खिला देती।

10:30 बजे के बाद मंजू ने मुझे कॉल किया की वो रमेश को गोली दे चुकी हैं और वो सो रहा हैं। शिल्पी भी आज कॉलेज से लेट आई, आते ही वो भी सो गई हैं शायद ज्यादा थक गई होगी। मंजू यह मुझे मासूमियत से बता रही थी लेकिन मै जानता था शिल्पी क्यों थक गई थी। फिर मैंने मंजू से कहा की मै 15 मिनट में आ रहा हूँ और मै चाहता हूँ की तुम मुझे बिकनी में अपने घर के गेट पर मिलो।

जैसा मैंने कहा था मै मंजू को अपने प्रति पूर्ण समर्पित करना चाहता था ताकि वो मेरी गुलाम मेरी रखैल बन कर रहे। आज उसका इम्तिहान था और मै देखना चाहता था वो कितनी तैयार हैं। रात के लगभग 11 बजे मै घर पहुँचा तो देखा मंजू गेट पर एक कोने से चिपकी खड़ी हैं। मंजू ने एक ट्रांसपेरेंट नाईटी पहन रखी हैं जिसके अंदर सिर्फ ब्रा और पैंटी हैं जो बाहर से ही दिख रहे हैं। यह देखकर मै बहुत ही खुश हुआ। बाइक पार्क कर मै सीड़ियो से अपने फ्लैट की ओर बढ़ा और मंजू भी पीछे पीछे आ गई।

जैसे ही मै फ्लैट में अंदर आया, मंजू भी फ्लैट के अंदर आ गई और गेट बंद कर लिया। आज उसका पति रमेश नीचे सो रहा था और पूरी रात वो ऊपर मेरे साथ रहती। मफ्लैट के अंदर आते ही मैंने उसके गले लगाया और बोला की आज उसके समर्पण का इम्तहान हैं। मंजू ने कहा की मै अब आपकी हूँ और आप जो कहो वो करने को तैयार हैं। मै मुस्कुराया और कहा ठीक हैं देखते हैं। यह कहने के बाद मैंने मसाज ऑइल का एक नया पैकेट मंजू के हाथ में दिया और बोला आज मुझे खुश कर दो।

फिर हम दोनों बेडरूम में आ गए। मै बेड पर लेट गया और मंजू ने अपने होंठो से मेरे पैर को चूमा और अपना हाथ मेरे कमर के पास ले आई। मेरे लंड पर जीन्स के ऊपर से हाथ फेरते हुए उसने मेरे जीन्स का बटन खोला और जीन्स को नीचे की ओर खींचा। जीन्स मेरे घुटने के पास आ कर रुक गया और मेरे कमर पर सिर्फ अंडरवियर था। अंडरवियर के ऊपर से हलकी ऊँगली फेरती हुई मंजू मेरी ओर देखा और अपने जीभ को होंठो से काट लिया। फिर उसने जीन्स को नीचे कर निकाला और मेरे कमर के पास आ कर चूमने लगी। मेरे कमर से घुटने तक को चूमने के बाद वो अपने हाथ को मेरे छाती के पास ले आई और मेरे शर्ट्स के बटन्स को खोल दिया। मैंने भी शर्ट को निकाल दिया। उसने तुरंत बनियान भी निकाल दिया। अब मेरे शरीर पर सिर्फ मेरा अंडरवियर था। मंजू ने उसको निकालने की कोई जल्दी नहीं दिखाई तो मै भी सोचने लगा ये अब आगे क्या करेगी।

ये क्या मंजू ने अपनी ट्रांसपेरेंट नाईटी खुद से नीचे उतारी और उसको रोल कर मेरे आँखों पर पट्टी लगा दी। मै अंडरवियर में और मंजू ब्रा पैंटी में थी लेकिन मेरे आँखों में पट्टी बँधी थी और मेरा मन बंद आँखों से यह अनुमान लगाने में व्यस्त था की अब मंजू आगे क्या करेगी।

मैं बेड पर लेटा था और मंजू मेरे ऊपर नंगी बैठी थी। मैं अभी अंडरवियर में था लेकिन फिर भी मेरा लंड उसके चुत को अच्छी तरह महसूस कर पा रहा था। मंजू मेरी पूरी छाती को चूम रही थी या कहूँ को काट कर रही थी जिससे मेरा लंड मानो उफन रहा हो। और वों लंड बेचारा मजबूर बाहर भी नहीं आ पा रहा था।

मंजू मेरे लंड के ऊपर से उठ गई लेकिन मेरे आँखों पर पट्टी बँधी थी इसलिए मैं कुछ देख नहीं पा रहा था। मैं कुछ अंदाजा लगाता तभी मुझे मंजू के ओठ मेरे घुटने पर महसूस हुए और मंजू घुटने से कमर की ओर मुझे चूमने लगी। फिर धीरे धीरे चूमते हुए वों ऊपर की ओर आयी और अपने होंठो से मेरे अंडरवियर को नीचे किया। फिर उसने जबरदस्त तरीके से मेरे लंड को चूमा और उसके बाद लंड को अपने मुँह में ले लिया। मेरे लंड इस वक्त पूरे फॉर्म में था और मानो वों उसके कंठ तक पहुँच रहा था। वों लगातार मेरे लंड को अपने मुँह में अंदर बाहर करती रही फिर उसने मेरे लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला।

उसके बाद उसने मेरे लंड पर हल्का हल्का तेल लगाना शुरू किया जिससे मानो मेरा लंड का सुपारा फट जाएगा। मेरे लंड का रोमांच अपने चरम पर था और तभी मैंने बँधी पट्टी से ही मंजू को पकड़ा और अपने लंड के ऊपर बैठा लिया। मेरा लंड एक झटके में मंजू के चुत के अंदर था। मैंने फिर उसकी जमकर चुदाई की। फिर मंजू में मेरे आँखों से पट्टी हटा दी जो मेरे लिया इशारा था की अब लंड को कहा घुसाना है।

मैंने मंजू को अपने करीब कुछ देर प्यार से लिटाया, इधर उधर की बात की और फिर अपने हाथों से तेल लेकर उसके गांड के आसपास रगड़ा। फिर अपना लंड उसके गांड के पास जाकर रगँड़ने लगा। धीरे धीरे रगड़ते हुए मैंने अपने लंड को उसके गांड में प्रवेश करा दिया और मंजू की चीख निकली हालांकि वों पिछली बार से कम थी। इस बार मैंने काफी अच्छे से उसके गांड में लंड को अंदर बाहर किया और वीर्य छोड़ दिया

वीर्य छोड़ते ही मैं वहाँ लेट गया और मंजू जल्दी से नंगी ही बाथरूम की ओर दौरी ओर खुद को साफ किया। वैसे तो मैं पहले मंजिल पर रहता था लेकिन यह ग्राउंड फ्लोर से पूरी तरह जुड़ा था लेकिन शायद मंजू को कोई होश नहीं था वों नंगी ही बाथरूम गई और खुद को साफ कर बाहर आयी।

आकर मैं नंगा लेटा था वैसे ही वों आकर मेरे सीने पर अपना सर रखकर लेट गई। नीचे रमेश था जिसकी टेंशन भी थी शायद उसे इसलिए वों थोड़ी देर मेरे साथ लेटने के बाद नाईटी पहनी और नीचे चली गई।

मंजू और शिल्पी के साथ मेरी लाइफ मजे से चल रही थी लेकिन रमेश और उसके बेटे की बंदिश मुझे अब खटकने लगी थी। अब दोनों माल मेरे काबू में थे लेकिन मुझे इनका खुल कर मजा लेना था। और अब मैं इन दोनों को रास्ते से कैसे हटाऊ ये सोचने लगा।

फिर मैं भी कुछ सोचते सोचते सो गया। अगले दिन मैं नंगा ही सोया था तभी शिल्पी ट्यूशन के बहाने छत पर आयी। मंजू के जाने के बाद मैं रात को गेट बंद करना भूल गया था और सब कुछ अस्त व्यस्त ही था। शिल्पी के आने का मुझे पता ही नहीं चला। शिल्पी आकर मेरे बगल में लेट गई और मेरे लंड के साथ खेलने लगी। जब वों मेरे लंड के साथ खेल रही थी तभी कुछ देर में मेरी नींद खुली और मैं उसे देखकर चौंक गया। कमरे के हालात पर शिल्पी कोई सवाल ना पूछ ले मैं यही सोच रहा था और मेरे मुँह से निकल पड़ा, शिल्पी तुम।

शिल्पी - हाँ मैं, क्यों किसी और को बुलाना था क्या

मैं - नहीं नहीं यार, तुम्ही तो चाहिए मुझे।

यह कह कर मैंने उसको अपने बाहों में भर लिया और होंठो को किस किया। फिर शिल्पी ने मुझसे कहा कि गेट खुला छोड़ कर ऐसे कोई सोता है क्या?

मैं मुस्कुरा कर रह गया और जाकर चेक किया कि अभी तो गेट बंद है ना।

गेट बंद देखकर मैं निश्चिंत हुआ और मुड़ा तो देखा शिल्पी भी मेरे पीछे पीछे आ कर खड़ी है। मैंने उसे गले से लगाया और उसके होंठो को चूमने लगा। शिल्पी मेरे कहे अनुसार एक छोटी पैंट और शार्ट टॉप में अब आती थी और साथ ही ब्रा पैंटी बिना पहने। उसकी सूती पैंट जो बिना पैंटी के ऐसी लगती मानो कुछ है ही नहीं। ऊपर से ही मैं उसके कमर पर हाथ फेर रहा था। शिल्पी के होंठो को चूसते चूसते मैंने उसके अपने गोद में उठा लिया और मैं आकर सोफे पर बैठ गया। मैंने फिर उसके बूब्स दबाए और थोड़ी देर टाइम पास किया और फिर उसे नीचे भेज दिया क्योंकि उसका मेरे फ्लैट में ज्यादा देर रखना खतरे से कम नहीं था।

उसके जाते ही मैंने कमरे से सबसे पहले तेल के डिब्बे को हटाया और मंजू को कॉल लगाया और कहा की आज कमरे की सफाई करवा दे।

इधर मैं तैयार हो कर बैंक निकल गया लेकिन पूरे दिन कुछ प्लान सोचने लगा कि रमेश और मनीष से कैसे आजादी पाऊ।

मंजू और शिल्पी के साथ मैं बहुत मजेदार जिंदगी जी रहा था लेकिन रमेश और मनीष उसमे दो अनचाहे किरदार थे। उनदोनो के रहते मैं सेक्स का खुला खेल नहीं खेल पा रहा था।

शिल्पी और मंजू मेरे साथ खूब मजे लेती और मेरे सामने खुल के अपनी सेक्स लाइफ को एन्जॉय कर रही थी लेकिन ओ दोनों अपने रिश्ते तो छुपा के रखना चाहती थी और मैं चाहता था कि मैं रिश्तों का खुल कर मजा लू बिना किसी डर के और ये दोनों मेरी रखैल बन कर रहें।

इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण किरदार था रमेश ओ साला पूरे दिन दुकान में रहता जिस वजह से उसके निगाहो से बचना था मुझे। यही सब मैं सोच ही रहा था कि मेरे एक दोस्त का मुझे फोन आया। उसने बैंक के ATMs में लगे सिक्योरिटी एजेंसी का कॉन्ट्रैक्ट ले रखा था। उसे सहारनपुर में एक भरोसे का सुपरवाइजर चाहिए था। मेरे दिमाग में यह आईडिया आया कि रमेश हर वक्त दुकान सही से नहीं चल रहा है ये रोते रहता है क्यों ना उसे ही सहारनपुर भेज दूँ।

मैं शाम में घर गया और मंजू को छत पर बुलाया। मंजू लगभग आठ बजे डिनर ले के छत पर मेरे फ्लैट में आ गई। मंजू ने एक झिल्लीदार नाईटी पहनी हुई थी जिसमे उसके अंग अंग उभर कर सामने आ रहें थे। मैंने उसे बोल भी रखा था कि घर पर हर वक्त सेक्सी कपड़े पहने।

आते ही ओ मेरे गले लगी और मैंने भी उसको प्यार से उसके गालों पर किस कीया। फिर मैं बाथरूम में फ्रेश होने गया और ओ किचन में जा कर डिनर को प्लेट में सेट करने लगी। बाथरूम से नहा कर मैं एक तौलिया लपेटा हुआ बाहर निकला। तब तक मंजू ने डिनर टेबल पर डिनर रखा और मैंने खाते खाते उसे सिक्योरिटी सुपरवाइजर की जॉब बतायी। मंजू ने मुझे बताया कि रमेश ने भी उससे दो तीन बार बोला है कि दुकान सही से नहीं चल रही है। मैंने बोला कि मैं रमेश से बात करूंगा और मंजू को सीखा दिया कि उसे क्या करना है क्योंकि मैं यह जानता था कि रमेश मुझसे बात करने के बाद मंजू से बात करेगा तभी कोई फैसला लेगा।

डिनर के बाद मैं और मंजू थोड़ी देर छत पर टहलते रहें और फिर मंजू नीचे चले गई। मैं भी कुछ इधर उधर का काम किया और सो गया।

अगली सुबह का इंतजार था, सुबह मैं नींद में ही था कि शिल्पी मेरे फ्लैट में आ गई। मैं रात में फ्लैट को लॉक नहीं करता ताकि शिल्पी सुबह मुझे बिना जगाये मेरे पास आ जाए।

सुबह लगभग 7 बजे होंगे, शिल्पी ट्यूशन के नाम पर ऊपर मेरे फ्लैट में आ गई। शिल्पी ने शॉर्ट्स और क्रॉप टॉप पहना था। आते ही उसने फ्लैट को अंदर से लॉक किया और मेरे माथे पर किस किया। मेरी नींद खुल गई थी तो मैंने अपने दोनों हाथों से शिल्पी को कमर के पास पकड़ा और अपने ऊपर लिटा लिया। शिल्पी और मेरा चेहरा एक दूसरे के सामने था और मेरे दोनों हाथों से मैंने शिल्पी को जकड़ रखा था। शिल्पी मेरे चेहरे को चूम रही थी और मैं उसके शॉर्ट्स के ऊपर से उसके चूतड को दबा रहा था। शॉर्ट्स के पतले कपड़े से ऐसा लग रहा था मानो ये उसकी नंगी जाँघ हो।

उसके जांघो से खेलते खेलते मैंने अपना एक हाथ उसके शॉर्ट्स के अंदर डाल दिया और यह देख मैं चौंक गया कि शिल्पी ने शॉर्ट्स के नीचे कुछ भी नहीं पहन रखा था। फिर मैंने उसके बेड पर पलटा और उसके बूब्स को जोर जोर से दबाने लगा। शिल्पी जितनी जोर से आन्हे भरती, मैं उतने ही तेजी से बूब्स दबाए जा रहा था। इसके बाद मैने शिल्पी के टॉप को निकाल फेंका और जैसी मेरी उम्मीद थी, शिल्पी ने टॉप के नीचे ब्रा भी नहीं पहन रखा था। शिल्पी के छोटे छोटे नीम्बू जैसे बूब्स को मैंने अपने हाथों में समेट रखा था। बूब्स के निप्पल्स को मैंने रगड़ा और फिर उसके बूब्स को अपने होंठो से चूसने लगा। बूब्स को चूसने से शिल्पी लगातार अपनी चरम सुख को पा रही थी। काफी देर बूब्स को चूसने के बाद मैंने उसे अपने गोद में उठा लिया और जा के सोफे पर बैठ गया।

मैं सोफे पर बैठ गया और शिल्पी जो पूरी तरह नंगी थी, उसे नीचे जमीन पर बिठा दिया और उसे मैंने लंड चूसने का इशारा किया। शिल्पी ने तुरंत बिना वक्त गवाएं मेरा शॉर्ट्स नीचे उतारा और मेरे लंड को अपने जीभ से चाटने लगी। मैंने अपने हाथों से शिल्पी के बालो को पकड़ रखा था। मेरे लंड को चाटते चाटते शिल्पी ने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया। मैं उसके सर को तेजी से हिला रहा था जिसकी वजह से उसके मुँह के अंदर मेरा लंड तेजी से अंदर बाहर हो रहा था। ऐसा करते करते मेरे लंड ने वीर्य छोड़ दिया। शिल्पी चाह रही थी वीर्य को बाहर गिरा दे लेकिन मैंने अपने लंड को उसके मुँह से निकलने ही नहीं दिया और उसने मेरा वीर्य पी लिया।

अब मैंने अपने दोनों हाथो से शिल्पी को गोद में उठाया और अपने लंड के ऊपर उसे बिठा लिया। अब मेरे लंड के ऊपर शिल्पी बैठी थी और मेरे लंड को अच्छे से पता था कि अब उसका लक्ष्य कहाँ है।

शिल्पी के चुत में मैंने अपना लंड घुसेड़ दिया और पूरे जोर से उसकी चुदाई की। शिल्पी अपना पानी छोड़ चुकी थी और एक राउंड की चुदाई के बाद मैंने शिल्पी को नीचे जाने का इशारा किया। एक समझदार रखैल की तरह ओ समझ गई और कपड़े पहन कर नीचे चली गई।

फिर मैं तैयार हुआ और रमेश को फोन कर ऊपर अपने फ्लैट में बुलाया। रमेश मेरे हुक्म को अच्छे से मानता था और मैंने उसे कर्ज भी दे रखा था। ओ डरा सहमा मेरे फ्लैट में आया और मुझे नमस्ते बोला।

आओ रमेश, क्या हाल है।

रमेश - जी बस सब ठीक है।

मैं - अच्छा और दुकान कैसा चल रहा है

रमेश - दुकान तो सही नहीं चल रही है।

मैं - क्यों

रमेश - बस आजकल सब ऑनलाइन या बड़े दुकान से समान मंगवा लेते है जहाँ उन्हें अच्छा डिस्काउंट मिल जाता है इसलिए बिक्री बहुत कम है।

मैं - देखो रमेश मेरे पास एक उपाय है जिससे तुम्हारी परेशानी कम हो सकती है। तुम चाहो तो मैं उसमे तुम्हारी मदद कर सकता हूँ।

रमेश - जी बिल्कुल बताइए

मैं - देखो मैं अपने जानने वाले के थ्रू atms के सिक्योरिटी सुपरवाइजर में तुम्हारी नौकरी लगवा सकता हूँ।

रमेश - क्या काम करना होगा और पैसे क्या मिलेंगे।

मैं - तुम एक काम करो मैं अपने दोस्त के पास भेज देता हूँ, तुम उसके पास जा कर सब जानकारी ले लो। फिर मुझे सोच के बताना कि तुम्हे क्या करना है।

रमेश मुझे धन्यवाद देने के लिए मेरे पैर छूना चाहा लेकिन मैंने उसे रोक दिया और अपने दोस्त के पास भेज दिया।

फिर मैंने अपने दोस्त अमन को फोन किया और बोला कि रमेश को भेज रहा हूँ और उसको सब जानकारी देना और उसका मन समझना लेकिन अपनी तरफ से कुछ कन्फर्म मत करना।

अब मैं रमेश को अमन के पास भेज नीचे रमेश के फ्लैट में आ गया। मंजू अभी फ्लैट में अकेली थी। मुझे सामने देख मंजू मुस्कुराई और आकर गले लगी। मैंने भी उसको गले लगाया और फिर मैं सोफे पर बैठ गया।

मंजू ने अभी सलवार सूट पहना था जिसमे ओ काफी अच्छी लग रही थी। मैंने मंजू को अपने पास नीचे जमीन पर बिठाया और मेरे पैरो को चूमने को कहा। मंजू मेरे पैर पर अपना माथा लगाकर चुपचाप चूम रही थी तभी मैंने अपना अंगूठा उसके मुँह के अंदर डाल दिया। ओ चुपचाप मेरे अंगूठे को चूसने लगी। थोड़ी देर इसे चूसने के बाद मैंने अपने जीन्स से लंड को बाहर निकाला और मंजू को चूसने को दे दिया। मंजू अच्छे से मेरे लंड को चूसने लगी। ओ पूरी तेज गति से लंड को अपने मुँह में चूसती कि क्या कहना। मैं भी साथ में उसके सर को तेजी से हिलाएं जा रहा था जिससे मजा दुगुना हो रहा था।

लंड चुसवाने से मेरे लंड ने वीर्य छोड़ दिया जिसे मंजू चुपचाप पी गई। फिर उसने अपने जीभ से मेरे लंड को अच्छे से साफ किया और फिर मैंने अपने लंड को अपनी जीन्स के अंदर कैद कर लिया। फिर मंजू मेरे दाहिने घुटने पर बैठ गई और मेरे गले से लग गई। फिर हम दोनों रमेश और अमन की बात करने लगे। तभी अमन का फोन आया कि रमेश से उसकी बात हो गई है और रमेश वहाँ से निकल गया है। मैं फिर ऊपर अपने फ्लैट में आ गया। मुझे रमेश के रिएक्शन का इंतजार था।

थोड़ी देर बाद रमेश और मंजू ऊपर मेरे फ्लैट में आए। मैंने फॉर्मेलिटी निभाते हुए पूछा आओ रमेश, तुम दोनों अभी?

रमेश - हाँ ओ अभी आपके दोस्त से मिलकर आया हूँ।
मैं - अच्छा बताओ कैसी रही बातचीत
रमेश - अच्छी रही, सैलरी भी अच्छी है और सुपरवाइजर का काम भी अच्छा है वहाँ लेकिन एक दिक्कत है।
मैं - अरे जब सब अच्छा है फिर क्या दिक्कत है?
रमेश ने मंजू की ओर देखा और कहाँ कि ये नौकरी सहारनपुर में है।

मैं मन ही मन मुस्कुराया और सोचा कि अब आया उट पहाड़ के नीचे। मैंने बोला तो क्या क्या हुआ कोई दिक्कत है इसमें?

मंजू - हाँ, ये बोल रहें थे कि मेरठ में ही मिल जाता तो ज्यादा अच्छा होता।
मैं - अच्छा
रमेश - देख लीजिए मेरठ हो जाए तो और उसने मेरे सामने हाथ जोड़ लिए।

अरे रमेश परेशान मत हो अभी सहारनपुर जाओ और फिर अपना मौका देखकर ट्रांसफर करवा लेना। रमेश को समझाया और फिर रमेश सहारनपुर जाने के लिए तैयार हो गया।

रमेश और मंजू ने मेरा शुक्रिया कहाँ और वे फिर नीचे अपने फ्लैट में चले गए।
अगले दिन बुधवार था और रमेश की जॉइनिंग फॉर्मेलिटीज शुरू हो गई और रमेश रविवार को सहारनपुर के लिए निकल गया।
मैं मन ही मन बहुत खुश था कि चलो एक रोड़ा खत्म किया, अब मनीष के बारे में सोचते है।

रमेश दोपहर में लगभग दो बजे सहारनपुर के लिए निकला। उस वक्त घर पर मंजू, शिल्पी और मनीष थे। नीचे वाला फ्लैट जिसमे रमेश अपने परिवार सहित रहता था उसमे तीन बेडरूम थे। शिल्पी और मनीष अलग अलग बेडरूम में सोते थे और मंजू अलग बेडरूम में। उसके जाने के बाद मैं उन तीनो के साथ नीचे हाल में ही बैठा था।

हाल में सब लोग खामोश बैठे थे, मैंने उस चुप्पी को तोड़ा।

मैं - और मनीष क्या चल रहा है तुम्हारा

मनीष - कुछ नहीं भैया, सब ठीक है।

मैं मन ही मन बोला साला तेरी मां और बहन एक कर रखी है और तू भैया बोल रहा है।

मैं - अच्छा है, पढ़ाई पर ध्यान दो।

मंजू - हाँ मैं तो बोलती हूँ उससे कि मन लगाकर पढ़ाई करें।

मनीष - करता तो हूँ ही।

मैं - हाँ ठीक है। शिल्पी जरा देखना इसकी पढ़ाई कैसी चल रही है।

फिर मैंने मंजू से कहाँ कि मुझे सर दर्द हो रहा है जरा सर दबा देना।

मंजू सिर हिलाते हुए उठी और बाम ले कर मेरे पास आयी। मैं हाल में रखे बेड पर लेट गया लेकिन मुझे सर दर्द तो हो ही नहीं रहा था। मैंने बोला बाम मत लगाओ, ऐसे ही सर दबा दो।

मंजू अपने अपने सॉफ्ट सॉफ्ट हाथों से मेरा सर दबा रही थी। मुझे काफी अच्छा लग रहा था। फिर मैंने शिल्पी और मनीष से कहाँ कि तुम भी जरा मेरे पैर दबा दो। शिल्पी चुपचाप मेरे पैर दबाने आ गई लेकिन मनीष थोड़ा हिचका। मैंने मनीष को कहाँ क्या हुआ मनीष तो ओ पैर दबाने आ गया।

जाते वक्त रमेश सबके सामने मेरे हाथ जोड़कर गया था और कहाँ था सबका ख्याल रखने को। मैं बस मनीष को अपने काबू में रखना चाहता था। अब मंजू मेरा सर दबा रही थी और ओ दोनों मेरे दोनों पैर। उनके नर्म एहसास से मेरे दोनों टांगो के बीच लंड खुद को काबू में नहीं कर पा रहा था और टेंट जैसा बन कर खड़ा हो रहा था जिसे मैं बार बार एडजस्ट करने की कोशिश करता। मंजू और शिल्पी तो इसे देखकर मुस्कुरा रहें होंगे लेकिन मनीष क्या सोचेगा?

थोड़ी देर में मुझे नींद आ गई और मैं वही सो गया। लगभग 3-3:30 बज रहें होंगे। धीरे धीरे ओ तीनो भी अपने अपने कमरे में जा कर सो गए। रमेश के जाने के बाद दुकान बंद थी और मेन गेट बंद करते ही पूरा घर अंदर से पैक हो जाता। मंजू ने अंदर से मेन गेट लॉक कर दिया था।

लगभग 5 बजे रमेश ने मंजू को फोन किया कि ओ वहाँ पहुँच गया है। मंजू यह बताने मेरे पास आयी। इसके साथ मैं भी उठ गया।

थोड़ी देर में शिल्पी और मनीष भी उठ गए। शिल्पी ने चाय बनायी और हम सब ने मिलकर चाय पी। उसके बाद इधर उधर की बातें होती रही फिर डिनर के लिए शिल्पी ने कहाँ कि क्यों ना आज सभी लोग बाहर ही चले डिनर पे। मनीष ने तुरंत उसके हाँ में हाँ मिलाया और मैंने भी अपनी हामी भर दी।​
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