Update 04
इतने में मनीष को उसके किसी दोस्त का फोन आ गया और ओ अपने कमरे में चला गया। बाहर हाल में मैं मंजू और शिल्पी बैठे थे। मैं उनदोनो के बीच में जा के बैठ गया। फिर बाया हाथ शिल्पी के कंधे पर और दाया हाथ मंजू के कंधे पर रखा और दोनों को अपनी ओर खींचते हुए बोला कि तैयार हो जाओ डिनर के लिए अच्छे से। फिर मैंने बारी बारी से दोनों की ओर आँख मारी जिससे ओ समझ गई कि मैंने उन्हें सेक्सी कपड़े पहनने को कहाँ है।
फिर ओ दोनों उठी और अपने अपने कमरे में चली गई तैयार होने के लिए। मैं भी छत पर आ कर जीन्स टीशर्ट डाला और फिर नीचे आ गया। अभी ओ तीनो तैयार हो रहें थे तो मैंने टीवी स्टार्ट किया। कुछ मिनटों बाद मनीष भी हाल में आ गया। मैंने मनीष को अपने पास बुलाया और फिर कुछ सामान्य बाते की। फिर मैंने उसे बातों के दौरान कुछ रूपए दिए और कहाँ कि कभी कोई जरूरत हो तो बेहिचक बोलना और चुपचाप पढ़ाई पर ध्यान दे।
अब हम दोनों टीवी देख रहें थे तभी शिल्पी तैयार हो के बाहर आयी। शिल्पी ने वन पीस पहना हुआ था जो उसके लुक को क़ातिल बना रहा था। वन पीस काफी छोटा था और ओ किसी तरह उसकी पैंटी छुपा पा रहा था। ध्यान से ना देखो तो ऐसा लगे मानो ड्रेस के नीचे पैंटी पहना ही नहीं हो। शिल्पी मेरे पास आयी और इशारे से पूछी कैसी लग रही हूँ और मैंने कहाँ मस्त। फिर मैंने उसके ड्रेस के ऊपर से ही कस के उसके बूब्स दबा दिए जिससे उसकी आह निकल गई।
अब बारी थी मंजू के बाहर आने की। कहते है इंतजार का फल मीठा होता है लेकिन यहां तो इंतज़ार का फल जबरदस्त सेक्सी था। मंजू को देखते ही मेरी आँखे खुली की खुली रह गई। मंजू ने ट्रांसपेरेंट साड़ी पहनी थी जिसमे ब्लाउज स्लीवलेस और बैकलेस था। पूरी पीठ पर ब्लाउज की एक पतली सी डोर थी उसके सिवाय कुछ नहीं यानी पूरी पीठ नंगी थी। ब्लाउज आगे से भी थोड़ा ज्यादा ही टाइट था जिससे बूब्स का आखिरी कोना नजर आ रहा था। ऐसे ब्लाउज में ब्रा नहीं पहना जाता और मंजू ने भी ब्रा नहीं पहना था। आगे से उसके क्लीवेज क्या आधा बूब्स दिख रहा था जो कि बमुश्किल साड़ी के पल्लू से ओ ढक रही थी और उन सब के ऊपर हाई हील्स जो उसके लुक को इरोटिक बना रहें थे। उसे देखकर मन तो यह कर रहा था कि इसे यही नंगा कर चोद दूँ। लेकिन मैंने अपनी भावना पर किसी तरह नियंत्रण रखा और मंजू को चुपके से फ्लाइंग किस दी ताकि शिल्पी और मनीष ना देखे।
फिर मैंने कहाँ कि चलो सब लोग आ गए तो अब निकला जाए और मैंने गाडी निकाल ली। गाड़ी मैं ड्राइव कर रहा था और मेरे साथ वाली सीट पर मंजू बैठी जबकि पीछे वाली सीट पर शिल्पी और मनीष।
लगभग 10 मिनट कि ड्राइव के बाद हमलोग एक 5 स्टार होटल में पहुँच गए।
अब अगले अपडेट में पढ़िए कि होटल में क्या क्या होता है।
तो हम सभी लोग होटल के गेट पर पहुंच गए। ये मेरठ का काफी बड़ा और आलीशान होटल था। गेट पर मैंने गाड़ी रोकी और सिक्योरिटी को गाड़ी पार्क करने का इशारा किया।
सिक्योरिटी वाले बन्दे ने मुझसे चाभी ले ली और फिर मैंने बाहर निकलने के लिए कार का गेट खोला। कार की ड्राइविंग सीट से मैं बाहर आया, फिर बगल वाली सीट से मंजू और पीछे से शिल्पी और मनीष बाहर निकले। मंजू और शिल्पी के कहर ढाते बदन को देखकर सिक्योरिटी वाला बंदा उसमे खो गया और यह देख कर मंद मंद मुस्कुरा रहा था। फिर कुछ सेकंण्ड्स बाद मैंने उससे एक्सक्यूज़ ममी तो बोला तो मानो उससे होश आया कि ओ क्या कर रहा था। तुरंत उसने मुझे सॉरी सिर बोला और तेजी से पार्क करने के लिए आगे बढ़ा।
मनीष और शिल्पी आगे आगे चल रहें थे और मेरे हाथ में हाथ डाल कर मंजू मेरे साथ उन दोनों के पीछे। आगे चल रही शिल्पी कि वन पीस इतनी छोटी थी कि चलने के दौरान कई बार उसकी जाँघे भी दिख रही थी। रिसेप्शन तक पहुंचने तक हर कोई शिल्पी और मंजू को घूर ही रहा था। रिसेप्शन पर शिल्पी ने बुकिंग आईडी दी और फिर उनका एक स्टॉफ हमें वी आई पी सेक्शन में ले गया और फिर उसने कहाँ - सर यह रही आपकी टेबिल। ये हमारा वी आई पी सेक्शन है जहाँ प्राइवेसी का पूरा ध्यान है। मैंने उसे थैंक्स कहाँ, फिर ओ मेनू कार्ड रख कर चला गया।
मैं और मंजू टेबल के एक साइड बैठ गए और दूसरे साइड शिल्पी और मनीष। मैंने मीनू कार्ड को शिल्पी और मंजू को दिया और आर्डर करने को कहाँ। वेटर को हम लोगों ने आर्डर दिया। फिर हम लोग आपस में हंसी मजाक करने लगे। इसी दौरान मैंने अपना एक पैर शिल्पी की ओर बढ़ा दिया। शिल्पी ने काफी छोटा वन पीस पहना हुआ था जो कि बैठने कि वजह से और ऊपर की ओर खींच गया था। मैंने पैर से शिल्पी के दोनों टांगो के बीच को टच किया। शिल्पी को अचानक से झटका लगा मानो क्या हुआ हो। उसने तेजी से नीचे की ओर देखा और फिर मेरी ओर देख के मुस्कुराई।
अब मैं अपने पैर के अंगूठे से शिल्पी की चुत को रगड़ रहा था या कहाँ जाए तो मेरा अंगूठा पैंटी के ऊपर से ही उसके चुत में घुसने की कोशिश कर रहा था। मेरे द्वारा इस तरह रगड़ने से शिल्पी भी गर्म हो रही थी और उसके चेहरे पर मादकता नजर आ रही थी। इधर मंजू मेरे बाए हाथ को अपने दाये हाथ से पकड़ कर ऊँगली फेर रही थी ताकि शिल्पी या मनीष देख ना ले।
मनीष अपने मोबाइल में लगा था तभी वेटर आर्डर सर्व करने के लिए आ गया। वेटर ने मेरे पैरो को शिल्पी की चुत से खेलते हुए देख लिया और ओ शिल्पी की ओर मुस्कुरा कर पूछा आपलोग यहां एन्जॉय कर रहें हो ना। शिल्पी चौंक गई और घबराहट में कुछ बोल नहीं पाई। मैंने देखा वेटर शिल्पी की ओर लगातार हवस भरी नज़रों से देख रहा है तो सोचा चलो इससे भी थोड़ा मजे लेते है। मैंने शिल्पी को टेबल पर रखा चम्मच नीचे गिराने को कहाँ। शिल्पी समझ गई और बड़े ही कामुक तरीके से उसने चम्मच को पकड़ने के बाद उसको जमीन पर गिरा दिया और वेटर से बोली - ओह्ह सॉरी, भैया जरा उठा दोगे क्या?
वेटर - यस मैम और वेटर झुक कर चम्मच उठाने लगा। चम्मच उठाने के बजाय ओ शिल्पी की टांगो के बीच उसकी पैंटी को देखने की कोशिश कर रहा था।
शिल्पी - भैया मिला क्या?
वेटर - जी मैम कहता हूँ चम्मच को उठाया और बमुश्किल कुछ सेकेंड ही ओ पैंटी का दीदार कर पाया होगा। उसके चेहरे पर इस मौके पर चूक जाने की निराशा स्पष्ट दिख रही थी।
अब ओ आर्डर सर्व कर चला गया लेकिन फिर ओ हमें देखने ले लिए पानी सर्व करने के बहाने पहुँच गया। इस बार मैंने अपने पैरो से शिल्पी की पैंटी थोड़ी नीचे कर दी और अपने अंगूठे को उसकी चुत के द्वार तक ले गया। वहाँ जाकर मैंने अंगूठे को चुत के अंदर घुसा दिया जिससे शिल्पी को मीठे मीठे दर्द का अहसास हुआ और वो हल्की हल्की आह भरने लगी। वेटर ये सब टेबल के पास खड़े होकर देख रहा था जिसकी गवाही उसके पैंट में बना हुआ टेंट भी दे रहा था।
इधर शिल्पी गर्म हो रही थी और इधर मंजू मेरे बाहों में हाथ फेर कर मेरा ध्यान अपनी ओर खींच रही थी। मंजू को बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उसके साथ बैठकर मैं उसकी बेटी के साथ क्या कर रहा हूँ। एक तरफ मैं अंगूठे को शिल्पी की चुत के अंदर बाहर काफी तेजी से कर रहा था दूसरी ओर मैंने अचानक मंजू को अपनी ओर खींचा और उसके दाएं गाल को किस कर दिया।
अचानक से मंजू भी चौंक पड़ी और शिल्पी, मनीष एवं वेटर मेरी ओर देखने लगे।
मंजू के गाल पर मैंने जोरदार किस तो कर दिया लेकिन अचानक से सब कुछ मानो थम गया हो। वेटर, मनीष और शिल्पी तीनो मुझे आश्चर्य भरी नज़रों से देख रहें थे। मनीष मेरी ओर अजीब से देखा और फिर नज़रे नीचे कर ली तो मैंने सोचा इससे अलग से घर पर निपटूंगा। शिल्पी मेरा माल ये सोच रही थी मंजू के साथ क्या चक्कर है और कहीं मैं उसको धोखा तो नहीं दे रहा हूँ और ओ मादरचोद वेटर यह सोच रहा होगा कि मेरा चक्कर किसके साथ है।
ऐसे ही शान्ति रही तभी शिल्पी अचानक से अपने सीट से उठी और वाशरूम की ओर बढ़ी। उसके उठते ही मैंने मंजू का हाथ अपने हाथ से दबाया और वही बैठे रहने को कहाँ और मैं शिल्पी के पीछे पीछे वाशरूम में गया। शिल्पी गुस्से में मेरी ओर देख रही थी तो मैंने पकड़कर उसके होंठो तो अपने होंठो से लगाने की कोशिश की तो उसने खुद को अलग कर पीछे कर लिया।
मैं - क्या हुआ डार्लिंग
शिल्पी - अभी मम्मी को किस क्यों किया?
मैं - अरे यार इसपे इतना गुस्सा क्यों?
शिल्पी - गुस्सा क्यों नहीं, बोलों जवाब दो
मैं - यार तेरे चुत में अंगूठा अंदर बाहर करते हुए किस हो गया। ध्यान ही नहीं रहा की ओ तू सामने है और बाजू में तेरी मां है। और कुछ भी पूछना है पूछ
शिल्पी - पक्का ना
मैं - ठीक है फिर मत मान
शिल्पी - फिर ठीक है
चल अब तूने मुझ पर शक किया तुझे सजा मिलेगी।
शिल्पी ने ना में सिर हिलाया तो मैंने उसके स्तनों को दबा दिया और बोला कि सजा तो मिलेगी और उसकी सजा है तो अभी से घर तक बिना पैंटी के जाएगी।
शिल्पी इतनी छोटी तो ड्रेस है, अब इसमें पैंटी ना पहनू तो सब कुछ दिखेगा।
मैं - ठीक है, सब कुछ दिखेगा ही तो पूरी ड्रेस ही उतार के चल अभी से घर तक।
शिल्पी ना नुकुर कि तो मैंने बोला कि इसके बाद सजा और बढ़ेगी और मैं वाशरूम से बाहर निकलने लगा तो शिल्पी ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी पैंटी नीचे उतारने लगी।
मैं चुपचाप खड़ा देखता रहा और फिर जब पैंटी उसने निकाल लिया तो उसे हैंकी जैसे फोल्ड कर मैंने जेब में रख लिया। फिर मैंने उसको कहाँ कि अब तुम सीट पर जाओ मैं आता हूँ।
अब शिल्पी वाशरूम से सीट की ओर धीरे धीरे चलते हुए जा रही थी और मैं पीछे से उसको देख रहा था। उसकी ड्रेस काफी छोटी होने की वजह से उसकी चूतड का एक बड़ा हिस्सा अब दिख रहा था। जब ओ सीट पर आ गई तो पीछे पीछे मैं भी आ गया। अब सीट पर आने के बाद मैंने, शिल्पी और मंजू ने माहौल नार्मल किया और फिर हमलोग डिनर कर घर की ओर निकले। ऐसा लग रहा था मानो अजीब से शान्ति हो गई हो और आगे क्या होने वाला है?
हमलोग वापिस कार से निकले लेकिन मनीष का मुँह बना हुआ था। मैं, मंजू और शिल्पी आपस में सामान्य बातें कर रहें थे लेकिन मनीष ज्यादा बोल नहीं रहा था। मैंने मनीष को कुछ नहीं कहाँ।
10 मिनट में ही हम लोग घर वापिस पहुँच गए। सबलोग नीचे हाल में आए और मनीष सबसे पहले अपने कमरे में सोने चला गया। अब हम तीनो थे हाल में।
शिल्पी - बहुत थक गई, मैं सोने जा रही हूँ
मैं - अच्छा, ऐसा क्या कर लिया
मंजू - हाँ पूरा दिन घर में बैठे रहें और अभी बाहर से सिर्फ खा कर आ गए
मैं - वही तो
शिल्पी - अच्छा, मुझे नींद आ रही है, सोने जाऊ ये ठीक है
मंजू - हाँ चली जा
मैं - नहीं, अभी नहीं और अपने आगे उसका पैर कर दिया
इसके बाद मैंने शिल्पी को इशारा किया तो शिल्पी ने चुपचाप मेरे जूते खोले। फिर मैंने कहा, अब जा तू सोने और मैं भी चलू अब सोने।
शिल्पी अपने कमरे की ओर आगे बढ़ी और मैं सीढ़ी की ओर छत पर जाने के लिए। लगभग 10 सेकंण्ड्स हुए होंगे, शिल्पी अपने कमरे में अंदर गई और मेरा सीढ़ी से छत पर जाने का नाटक वही रुक गया। मंजू हाल में बैठे बैठे सब देख रही थी।
फिर मैं नीचे उतरा और सीधा मंजू के कमरे में चला गया।
मंजू के कमरे में जा के मैं बेड पर लेट गया। 5-10 मिनट्स के बाद मंजू भी गेट को लॉक कर कमरे में आ गई।
मंजू अपने सेक्सी ट्रांसपेरेंट साड़ी और स्लीवलेस बैकलेस ब्लाउज में थी। आज मंजू के कमरे में, उसके बेडरूम में ही मुझे उसके साथ सुहागरात मनाना है।
मंजू ने कमरे में घुसते ही कमरे को अंदर से लॉक किया और मेरे बगल में आकर लेट गई। उसने अपने सर को मेरे कंधे पर रखा और पूछा कि शिल्पी और मनीष को कुछ शक तो नहीं हुआ। मैं मंजू की ओर मुड़ा और उसकी पीठ पर हाथ रखते हुए हसते हुए कहा पता लग भी गया तो क्या हुआ?
मंजू थोड़ी डर गई थी और बोली नहीं ऐसा नहीं होना चाहिए।
मैं - कुछ नहीं होगा। मैं शिल्पी और मनीष से बात कर लूंगा।
ऐसा बोला कर मैंने मंजू के माथे पर किस किया। मंजू की आँखे बंद हो गई और उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और "आई लव यूँ " बोला। मैं भी उसको कस के पकडे रहा और मन ही मन सोच रहा था कि साला मैं दोनों मां बेटी (मंजू और शिल्पी ) को एक साथ चोदना चाहता हूँ और ये है कि इतना डर रही है।
मेरे दिमाग में अब मनीष को और शिल्पी को कैसे मैनेज करना है ये चल रहा था। मंजू भी थोड़ी मन में डरी हुई थी इसलिए मैंने उसे खुद से पकडे रखा। फिर मैंने उससे कहा कि तुम टेंशन ना लो और खुद से अलग किया।
ओ मेरे तरफ उम्मीदभरी नज़रों से देख रही थी और मैं उसको लगातार यह समझाने की कोशिश कर रहा था कि कुछ नहीं होगा। एक औरत के मन में सबसे बड़ा डर यही होता है कि कोई बात उसके पति या बच्चों को ना पता चले और मैं यह बात बखूबी समझ रहा था। फिर भी मैं उसे समझाया और बोला कि चलो जाओ पानी ले के आओ। मंजू समझी लेकिन अभी भी थोड़ी उदासी थी उसके चेहरे पर जिसको मैं देख पा रहा था। मंजू जब तक पानी लायी मैंने हाल में जाकर फ्रिज से कोल्ड्रिंक्स और छत से वाइन की एक छोटी बोतल ले आया।
मंजू जब पानी लेकर अंदर घुसी तो ये सब देखकर पूछी कि क्या है ये सब।
मैं - जो है सामने है देख लो।
मंजू - तुम भी पीओगे क्या?
मैं - हम पीयेंगे आज
मंजू - नहीं, मुझे नहीं पीना
मैं - एक बार टॉई करो, फिर अच्छा ना लगे तो मत पीना।
फिर मैंने एक छोटा पैक मंजू के लिए बनाया और खुद के लिए लार्ज और दोनों ने चियर्स किया।
मंजू ने थोड़ी जबरदस्ती से अपना छोटा पैक खत्म किया। मैंने भी अपने दो पैक तब तक खत्म कर लिए। हमने थोड़ी देर ऐसे ही इधर उधर की बातें की ताकि मंजू नार्मल हो जाए।
थोड़ी देर में कमरे का माहौल नार्मल हो गया। अब मैंने मंजू को खड़ा किया और उसके पीछे आ गया। मंजू ने बैकलेस ब्लाउज पहना हुआ था जो सिर्फ एक डोरी की नोक पर टीका था।
मैंने मंजू को दीवाल के सहारे टिकाया और उसकी पीठ के ऊपरी हिस्से या यूँ कहे सर का पिछला हिस्सा जहाँ जहाँ खत्म होता है वहाँ किस किया। फिर मैंने उसके बालो को अपनी मुट्ठी में समेटते हुए उसका सर आगे की ओर झुकाया और उसके गर्दन को जीभ से चाटने लगा। मगर्दन पर लगातार चूमने से मंजू की सिसकारिया निकल रही थी। पूरे पीठ को मैं लगातार चूमता रहा और मंजू लगातार सिसकारिया लेती रही। फिर उसकी पूरी पीठ चूमने के क्रम में उसके ब्लाउज का डोर आया जिसे मैंने खोल दिया और मंजू की पूरी पीठ नंगी हो गई।
ब्लाउज कुछ इस तरह का था-
इस पतली डोर के खुलते ही मंजू के स्तन को ब्लाउज का सिर्फ ऊपरी हिस्सा ढक रहा था। इस तरह मैंने उसे कमर तक चूमा। मंजू का पिछला हिस्सा जो कि कमर से ऊपर पूरा नंगा था उसे मैंने जमकर रगड़ा। फिर मैंने मंजू को अपनी ओर मोड़ा और उसकी साड़ी के पल्लू को नीचे की ओर गिराया। क्लीवेज दिखाता ब्लाउज जिसकी डोर पहले ही पीछे से हट चुकी थी ओ बस मानो किसी तरह मंजू के बूब्स को ढँक पा रहा था। ओ ढक क्या रहा था, ब्लाउज होने के बाबजूद आधा बूब्स दिख ही रहा था जो उसको और सेक्सी बना रहा था और मेरा लंड पूरा तन के खड़ा था। मेरे लंड के अकड़पन को मंजू का शरीर भी महसूस कर पा रहा था।
अब मैंने फिर मंजू के सिर को बालो से पकड़ कर पीछे की ओर धकेला और उसके चेहरे के नीचे से गालों को चूमना स्टार्ट किया। मेरी जीभ लगातार मंजू के अंगों को चूम रही थी या यूँ कहे उसकी उत्तेजना को बढ़ा रही थी। आज मैं मंजू के साथ बिल्कुल निफिक्र होकर खेलना चाह रहा था। जीभ से गर्दन चूमते चूमते मैंने अचानक उसको उठाया और बेड पर रखा।
बेड पर रखने से मंजू की साड़ी का पल्लू जो पहले ही नीचे गिरा था, उसकी साड़ी और पेटीकोट भी अस्त व्यस्त हो गई और दोनों घुटने तक ऊपर उठ गए। इधर उसका ब्लाउज किसी तरह उसके बूब्स से चिपका रहा। फिर मैं भी मंजू के शरीर के ऊपर चढ़ा और उसके छाती के पास जा के अपने जीभ से उसकी छाती को चाटने लगा। मंजू की उत्तेजना लगातार बढ़ती जा रही थी। उसके बूब्स पर ब्लाउज मानो इस वक्त एक रुमाल जैसा था जो बस यह साबित कर रहा था की बूब्स अभी छुपे हुए है और इस हालत में बूब्स और भी मादक लग रहें थे। फिर मैंने अपने जीभ को बूब्स वाले हिस्से को छोड़ कर पेट पर ले आया और उसके पेट को चाटना जारी रखा। साथ ही मैंने अपना एक हाथ ब्लाउज के नीचे डाला और उसके बाए बूब्स को अपने हाथों में पकड़ने की कोशिश की। उसके फुल साइज बूब्स जिनका साइज 36 होगा तो पकड़कर मैं मसलने लगा। बूब्स को मसलने से मंजू की आह आह की चीख निकल रही थी।
मैंने उसके दोनों बूब्स को जमकर मसला जिससे ओ पूरी तरह मदहोश थी और उसके मन में अभी किसी तरह का भय दूर दूर तक नहीं था। इसी दौरान मैंने उसके ब्लाउज को भी फेक दिया और अब मंजू कमर के ऊपर पूरी तरह नंगी थी।
अब मैं मंजू के शरीर से उतर कर बेड पर लेट गया और मंजू को अपनी ओर खींचा। अब मंजू मेरे ऊपर थी और एक समझदार पार्टनर की तरह ओ जानती थी कि उसे अब क्या करना है।
मंजू ने मेरे चेहरे को चूमना स्टार्ट किया। फिर ओ कमर के पास अपनी उंगलियां ले गई और बड़े ही सेक्सी अंदाज़ में ऊँगली फेरते हुए टीशर्ट को ऊपर किया और निकाला। फिर ओ मेरे बनियान को निचले हिस्से से ऊपर की ओर ले जाने लगी और साथ में मेरे पूरे पेट को ओ अपने जीभ से चाटने लगी। जीभ से चाटते चाटते ओ बनियान को गर्दन तक ले गई और फिर उसे भी निकाल फेका। अब हम दोनों कमर के ऊपर नंगे हो चुके थे और दोनों एक दूसरे के शरीर को आपस में रगड़ रहें थे।
कमर से ऊपर हम दोनों एक दूसरे के शरीर को रगड़ रहें थे। दोनों को कोई जल्दी नहीं थी, सच पूछो तो इत्मीनान से चुदाई के खेल का आनंद कई गुणा बढ़ जाता हैं।
मंजू के अंदर की उत्तेजना लगातार बढ़ रही थी। इसी बीच मंजू मेरे शरीर के ऊपर से उठी और मेरे जीन्स की बटन और चेन को खोलकर अपना मुँह रगड़ने लगी। मेरे अंडरवियर के ऊपर मंजू अपना मुँह फेर रही थी फिर उसने मेरे जीन्स को नीचे किया। फिर उसने मेरे अंडरवियर को नीचे किया और अब मैं पूरा नंगा था। मंजू फिर अपनी दो उंगलियों को मेरे लंड पर फेरने लगी। इससे मेरा लंड और तन गया।
आज मैंने सोच रखा था कि मंजू को जितना हो सके तड़पाना है मेरे लंड के लिए। मंजू मेरे लंड को सहलाने के बाद उसको अपने हाथों में लिया और अपने होंठो से मेरे लंड को दबा लिया। उसने मेरे लंड के आधे हिस्से को मुँह में भर लिया और उसे अंदर बाहर करना शुरु कर दिया। मेरा लंड भी अपनी उत्तेजना की तीव्रता पर था और मुझे लग रहा था कि मैं उसके मुँह में ही वीर्य छोड़ दूँगा जो मैं इस वक्त नहीं चाह रहा था। शायद मंजू भी बेचैन ज्यादा हो रही थी थोड़ी देर लंड को अंदर बाहर करने के बाद उसने लंड को बाहर निकाल दिया और किसी तरह मैंने खुद को और अपने लंड को संभाला।
मंजू की बेचैनी माहौल को और कामुक बना रही थी। मंजू कमर के ऊपर नंगी थी लेकिन अभी भी कमर से उसके साड़ी बँधी थी। अब मैंने मंजू को फिर बिस्तर पर पलटा और उसके नाभि के पास किस करने लगा। नाभि और उसके नीचे चाटने से मंजू कामुकता की सीमा को पार कर रही थी। फिर मैंने अपने होंठो से उसकी साड़ी जो कमर पर बँधी थी, उसको खींचा। जितनी मंजू बेचैन थी उतनी साड़ी भी बेचैन थी खुद को मंजू से अलग होने को। मैंने हल्के से खींचा और मंजू की साड़ी ने उसका साथ छोड़ दिया। अब मंजू अपने बड़े बड़े बूब्स को दिखा रही थी लेकिन कमर पर पेटीकोट बंधी थी।
मैंने उसकी पेटीकोट की डोरी को भी खोल दिया और उसकी पीठ के नीचे अपना हाथ रखा। इससे मैंने आसानी से पेटीकोट को नीचे खींचा। मंजू अब बस अपनी पतली सी पैंटी में थी। ओ पैंटी किसी तरह उसकी चुत को ढक पा रही थी। पैंटी का पिछला हिस्सा डोरी जैसा था जो उसकी गांड की दरारों में धसा जा रहा था।
मैंने अब मंजू को अपने गोद में उठा लिया और कमरे का दरवाजा खोला। मंजू जो अपने चुत में मेरा लंड लेने को बेताब थी ओ दरवाजा खुलते ही चौंक गई।
मंजू मेरी तरफ चकित हो कर देख रही थी और मैं मन ही मन मुस्कुरा रहा था। मंजू को गोद में उठाएं मैं छत की ओर बढ़ा।
रात्रि के लगभग 1 बज रहें होंगे, चारों तरफ अंधेरा था। छत पर मैं मंजू को लेकर पहुँचा। छत पर स्ट्रीट लाइट्स से हल्की हल्की रोशनी आ रही थी।
छत पर एक कुर्सी लगी थी जिसपर मैं बैठा और मंजू को नीचे जमीन पर रखा। मंजू अपने दोनों हाथ मेरे घुटने पर रख कर बैठ गई। मैंने अपने लंड से मंजू के गालों को सहलाया। ऐसा करते वक्त मेरे पैर से मंजू की पैंटी छू गई और मुझे गीलेपन का एहसास हुआ, मतलब मंजू अपना पानी छोर चुकी थी।
मंजू अब बस एक पतली सी पैंटी में थी जो कि पहले से ही काफी छोटा था और गिला होने की वजह से और सिकुड़ सा गया था। मैंने मंजू को खड़ा किया और पीछे की ओर मोड़ा। मंजू की चूतड़े मेरे चेहरे के सामने थे। मैंने उसकी गांड में समाए पैंटी की डोरी को खींच कर छोड़ा। इससे मंजू की आह निकल गई। फिर मैंने पैंटी को नीचे सरका दिया। अब मंजू और मैं पूरी तरह छत पर नंगे थे। मैंने देखा मंजू अपने एक हाथ से अपने बूब्स को छुपाने की कोशिश कर रही थी। मैंने मंजू को हाथ बूब्स से हटाने को कहा, मंजू हिचक रही थी। मैंने उसको गुस्से भरी नजर से देखा तो हल्की सहमते हुए उसने अपने हाथ बूब्स से हटा लिए।
छत पर ओ शर्मा रही थी या डर रही थी तो मैंने उसे कम करने के लिए छत का एक राउंड मारने को कहा। मंजू ने धीमे कदमो के साथ छत का एक चक्कर लगाया और आकर मेरे गले से लग गई। उसके मेरे गले से लगने पर मेरे दोनों हाथो में उसके दोनों जांघ आ गए जिसे मैंने कस कर मसल दिया। इससे मंजू की आह निकल गई।
मंजू की चुत की गर्मी उससे बर्दाश्त नहीं हो पा रही थी।
मंजू - प्लीज नीचे चलो ना
मैं - क्यों, यहाँ क्या दिक्कत है
मंजू - मुझे यहाँ शर्म आ रही है
मैं - ठीक है फिर चल नीचे सड़क पर चलते है
मंजू - पागल हो क्या
मैं - हाँ मैं पागल हूँ और तुझे वही करना होगा जो मैं कहूंगा
मंजू कुछ नहीं बोली
मैंने मंजू के चेहरे को अपने तीन उंगलियों से पकड़ कर अपनी ओर खींचा और बोला - बोल तुझे कोई दिक्कत है क्या?
मंजू सकपका गई। और हल्के से हाँ में सिर हिलाया।
मैं - अब मैं तुम लोगों को जैसे रखूंगा वैसे ही रहना होगा।
मंजू कुछ बोल नहीं पायी।
मैं- जवाब नहीं मिला
मंजू - जी आपकी हर बात माननी है
मैं मन ही मन खुश हुआ और ये जान रहा था कि आगे मुझे क्या करना है।
अब मैंने मंजू को फिर गोद में उठाया और उसको लेकर नीचे बेडरूम में आ गया। बेडरूम में मंजू को बेड पर पलटा और उसके ऊपर 69 की पोजीशन में आकर उसके बूब्स को जोर जोर से मसलने लगा। मंजू की सिसकारिया निकल रही थी। बूब्स को काफी देर मसलने के बाद मैं उसके निप्पल्स को चूसने लगा।
मंजू - राज, प्लीज अंदर डालो ना
मैं - कहा क्या अंदर डालू
मंजू - प्लीज अपना मेरे अंदर डालो
मैं - क्या बोली, समझ नहीं आ रहा खुल के बोलों
मंजू - अपना पेनिस मेरे अंदर डालो
मैं - अंग्रेज की औलाद, हिंदी में बोल
मंजू - प्लीज मुझे शर्म आ रही है
मैं - तो शर्म को बोल ना आए
मंजू ने अपनी आँखे बंद कर ली और फिर बोली की प्लीज अपना लंड डालो।
मैंने फिर ज्यादा जोर नहीं डाला क्योंकि सब कुछ धीरे धीरे करना था। मेरा लंड भी कब से बेचैन था उसके चुत के अंदर जाने को, मैंने भी बोला ठीक है।
मैं अपने लंड को उसकी चुत के पास रगड़ने लगा और फिर अपने लंड को उसके चुत के अंदर घुसा दिया। मंजू की चुत जो गीली हो रखी थी, उसकी वजह से लंड एक झटके में अंदर चला गया। फिर मैंने फुल स्पीड के साथ अपने लंड के धक्के उसकी चुत में मारे।
कुछ मिनटों में मेरे लंड ने उसकी चुत में माल छोड़ दिया। उसके बाद हम दोनों बेड पर ही पड़े रहें। कुछ देर बाद चुदाई का सेकेंड राउंड चला। इसमें लगभग सुबह के 3:30 बज गए तभी अचानक मंजू की नजर बेडरूम के दरवाजे पर पड़ी जो खुला ही था। मंजू फुर्ती के साथ उठी और गेट को बंद किया। फिर हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर सो गए।
सुबह के लगभग सात बजे होंगे, मेरे नींद हल्की सी मोबाइल के वाइब्रेट होने से खुली। मैंने देखा तो शिल्पी की कॉल है। मैं समझ गया कि ओ मैडम छत पर आयी होगी और मैं तो छत पर आज था ही नहीं।
मैं नींद में ही था तो जो उससे मेरी आवाज से पता लग जाता तो मैंने उसका कॉल काट दिया और sms किया कि मैं एक मीटिंग के लिए आया हूँ और थोड़ी देर में कॉल करूंगा।
शिल्पी नीचे आ गई और अपने रूटीन से तैयार हो कर कॉलेज ले लिए निकली। मनीष भी कॉलेज चला गया और मैंने ऑफिस में मेसेज कर के सिक लीव का बोल दिया।
इस तरह दस बजे मैं उठा तो देखा मंजू नहा के नाश्ता रेडी कर चुकी है। मुझे देखकर ओ मुस्कुराई। मैंने उसे अपने हाथों से इशारे करते हुए अपने पास बुलाया। मंजू मेरे पास आयी तो मैंने उससे हग किया और फिर किस किया।
मंजू - अब फ्रेश हो जाओ फिर ब्रेकफास्ट करते है
मैं - हाँ मैं फ्रेश हो कर दूध पीऊंगा
मंजू हस दी और मैं भी बाथरूम में चला गया। मैं फ्रेश हो कर शॉवर लिया और लगभग एक घंटे बाद मैं टॉवल लपेटे बाहर को आया।
बाहर मंजू ने डाइनिंग टेबल पर ब्रेकफास्ट अरेंज कर रखा था जिसे देखकर मजा आ गया।
मैंने मंजू को देखकर टॉवल को खुद से अलग कर टांग दिया। टॉवल वैसे भी हल्का गीला था। टॉवल हटाते ही मैं पूरा नंगा था। मुझे ऐसे देख मंजू हस पड़ी और बोली पहले ब्रेकफास्ट तो करो।
मैंने भी स्माइल से ही जवाब दिया और जाकर कुर्सी पर बैठ गया। मंजू मेरे एक जांघ पर कमर टीका कर बैठ गई और मुझे अपने हाथों से खिलाने लगी। मुझे खिलाने के बीच बीच में ओ खुद भी खाती रही और इस तरह हम दोनों ने ब्रेकफास्ट फिनिश किया।
फिर हम दोनों सोफे पर बैठ गए।
मैं - मंजू आज से तुम घर में ब्रा पैंटी नहीं पहनोगी
मंजू - बिना ब्रा के अजीब लगेगा और कोई आया तो
मैं - ऊपर टॉप या समीज या ब्लाउज तो होगा ही
मंजू - ठीक है।
और जब घर में सिर्फ हम दोनों होंगे, तुम्हे हर वक्त नंगा रहना होगा।
मंजू- सिर्फ मुझे क्यों, तुम क्यों नहीं
मैं - क्योंकि मैं हर वक्त नंगा रहने को तैयार हूँ।
मंजू - बेशर्म
फिर मैंने मंजू की सलवार समीज उतार दी। अब मंजू ब्रा और पैंटी में थी। आज उसने साधारण ब्रा पैंटी पहन रखे थे। मैंने उन्हें भी उतार दिया और अब ओ भी मेरे सात पूरी नंगी थी।
अब मैंने होम थिएटर स्टार्ट किया और जरा जरा टच मी गाना लगाया और उससे कहा कि डांस करें। मैं सोफे पर बैठा रहा और मंजू मेरे सामने जमीन पर बैठ कर बड़े ही सेक्सी अंदाज़ में डांस करने लगी। उसके हर मूव के साथ उसके बूब्स बड़े ही कातिलाना अंदाज में मूव करते जो काफी मजा दे रहा था।
डांस करते करते उसने मुझे भी उठा लिया और ओ कपल डांस करने लगी। कुछ देर ऐसे ही डांस मस्ती का दौर चला और फिर मैंने उसको वही घोड़ी बना दिया। घोड़ी बना के मैं उसके गांड की छेद के आस पास अपने लंड को रगड़ने लगा। मंजू की गांड काफी ज्यादा टाइट थी जिसकी वजह से मेरे लंड को भी काफी मुश्किल हो रही थी। खैर धीरे धीरे करते हुए मैंने अपना लंड उसकी गांड के छेद में घुसेड़ दिया। दर्द मुझे भी हुआ लेकिन मंजू की तो चीख निकल गई।
गांड में धक्के मारते मारते मेरे लंड ने फिर से वीर्य छोड़ दिया जिसे मैंने भी उसकी गांड में गिरा दिया। फिर थोड़ी देर मैंने उसकी चुत को भी रगड़ा और इस तरह 3 बज गए। शिल्पी कॉलेज से 3:30 तक और मनीष कॉलेज से 4 बजे तक आता था। मैं कल से नीचे ही था तो मेरे पास कोई कपड़ा ही नहीं था। मैं और मंजू नंगे ही ऊपर गए और मैं अपने लिए एक शॉर्ट्स और टीशर्ट ले आया। मैंने जल्दी जल्दी शॉर्ट्स और टीशर्ट पहन लिया और मंजू ने भी सलवार कमीज पहन ली। मन ही मन मैंने कहा जितना नाटक करना है कर ले एक दिन दोनों मां बेटी को साथ चोदुँगा लेकिन बड़ा सवाल यही था कैसे?
खैर हम दोनों कपड़े पहन लिए और मंजू ने एक गेट जो दुकान को घर से कनेक्ट करता था उसे खोल दिया।
इसके बाद मैं सोफे पर बैठकर टीवी देखने लगा और मंजू घर के कामों में लग गई। थोड़ी देर में शिल्पी घर आ गई। मुझे देखकर शिल्पी चौंक गई और मुस्कुराते हुए पूछा।
शिल्पी - आप यहाँ
मैं - हाँ, सुबह जल्दी गया था तो मीटिंग खत्म होते ही घर आ गया।
शिल्पी - ओह्ह ग्रेट, मुझे तो लगा सुबह से कहा गायब हो
मंजू किचन में थी। मैंने उसके कंधे पर चीकूटी काटी और कहा कि अभी दिखाता हूँ सबकुछ और अपना शॉर्ट्स हल्का नीचे कर दिया। मैंने नीचे अंडरवियर नहीं पहना था तो मेरा लंड उफनता हुआ बाहर आ गया। शिल्पी चौंक गई और भागते हुए अपने रूम में चली गई ।
फिर से मैं टीवी देखने लगा तभी मनीष भी कॉलेज से आ गया।
मैं - कैसे हो मनीष
मनीष - ठीक हूँ भैया
मैं मन ही मन, मादरचोद बाप और जीजा दोनों हूँ तेरा और तू भैया बोलता है।
मैं - और पढ़ाई कैसी चल रही है
मनीष - ठीक चल रही है।
इसके बाद मनीष भी अपने कमरे में चला गया। थोड़ी देर बाद शिल्पी और मनीष फ्रेश हो कर बाहर आए। शिल्पी ने एक बहुत ही छोटी शॉर्ट्स और टॉप पहना हुआ था।
मंजू ने उन दोनों को खाना खिलाया। उसके बाद शिल्पी सोफे पर मेरे बाजू में आकर बैठ गई। सामने मनीष और बेड पर मंजू बैठी थी। सब लोगों का ध्यान टीवी पर था और मैं शिल्पी की शॉर्ट्स के पास उसकी नंगी जांघो को सहलाने लगा।
इस तरह सहलाना शिल्पी को भी अच्छा लग रहा था, तभी मनीष मंजू से बोल पड़ा।
मनीष - मम्मी, जिम के लिए मान जाओ ना
मंजू - फालतू के पैसे बर्बाद नहीं करने मुझे
मनीष - फालतू नहीं ज़रूरत है ये
मैं - कितनी फी है
मनीष - 1500
जिम वाले को मैं जानता था, मैंने उसको कॉल कर 1000 के लिए बोला और साथ में ये भी कह दिया कि मैं पैसे दे दूँगा।
मनीष खुश हो गया और मुझे थैंक यूँ बोला।
मैंने बोला हाँ ठीक है, अब जिम में पूरा टाइम देना है ( मन ही मन - साले बाहर रहेगा तब ना तेरी मां या बहन को चोदुँगा )
इधर मैंने मंजू से कहा कि थोड़ी देर वो भी जिम में जा के देख ले और फिर डिनर के लिए कुछ अच्छा प्लान करो।
फिर ओ दोनों उठी और अपने अपने कमरे में चली गई तैयार होने के लिए। मैं भी छत पर आ कर जीन्स टीशर्ट डाला और फिर नीचे आ गया। अभी ओ तीनो तैयार हो रहें थे तो मैंने टीवी स्टार्ट किया। कुछ मिनटों बाद मनीष भी हाल में आ गया। मैंने मनीष को अपने पास बुलाया और फिर कुछ सामान्य बाते की। फिर मैंने उसे बातों के दौरान कुछ रूपए दिए और कहाँ कि कभी कोई जरूरत हो तो बेहिचक बोलना और चुपचाप पढ़ाई पर ध्यान दे।
अब हम दोनों टीवी देख रहें थे तभी शिल्पी तैयार हो के बाहर आयी। शिल्पी ने वन पीस पहना हुआ था जो उसके लुक को क़ातिल बना रहा था। वन पीस काफी छोटा था और ओ किसी तरह उसकी पैंटी छुपा पा रहा था। ध्यान से ना देखो तो ऐसा लगे मानो ड्रेस के नीचे पैंटी पहना ही नहीं हो। शिल्पी मेरे पास आयी और इशारे से पूछी कैसी लग रही हूँ और मैंने कहाँ मस्त। फिर मैंने उसके ड्रेस के ऊपर से ही कस के उसके बूब्स दबा दिए जिससे उसकी आह निकल गई।
अब बारी थी मंजू के बाहर आने की। कहते है इंतजार का फल मीठा होता है लेकिन यहां तो इंतज़ार का फल जबरदस्त सेक्सी था। मंजू को देखते ही मेरी आँखे खुली की खुली रह गई। मंजू ने ट्रांसपेरेंट साड़ी पहनी थी जिसमे ब्लाउज स्लीवलेस और बैकलेस था। पूरी पीठ पर ब्लाउज की एक पतली सी डोर थी उसके सिवाय कुछ नहीं यानी पूरी पीठ नंगी थी। ब्लाउज आगे से भी थोड़ा ज्यादा ही टाइट था जिससे बूब्स का आखिरी कोना नजर आ रहा था। ऐसे ब्लाउज में ब्रा नहीं पहना जाता और मंजू ने भी ब्रा नहीं पहना था। आगे से उसके क्लीवेज क्या आधा बूब्स दिख रहा था जो कि बमुश्किल साड़ी के पल्लू से ओ ढक रही थी और उन सब के ऊपर हाई हील्स जो उसके लुक को इरोटिक बना रहें थे। उसे देखकर मन तो यह कर रहा था कि इसे यही नंगा कर चोद दूँ। लेकिन मैंने अपनी भावना पर किसी तरह नियंत्रण रखा और मंजू को चुपके से फ्लाइंग किस दी ताकि शिल्पी और मनीष ना देखे।
फिर मैंने कहाँ कि चलो सब लोग आ गए तो अब निकला जाए और मैंने गाडी निकाल ली। गाड़ी मैं ड्राइव कर रहा था और मेरे साथ वाली सीट पर मंजू बैठी जबकि पीछे वाली सीट पर शिल्पी और मनीष।
लगभग 10 मिनट कि ड्राइव के बाद हमलोग एक 5 स्टार होटल में पहुँच गए।
अब अगले अपडेट में पढ़िए कि होटल में क्या क्या होता है।
तो हम सभी लोग होटल के गेट पर पहुंच गए। ये मेरठ का काफी बड़ा और आलीशान होटल था। गेट पर मैंने गाड़ी रोकी और सिक्योरिटी को गाड़ी पार्क करने का इशारा किया।
सिक्योरिटी वाले बन्दे ने मुझसे चाभी ले ली और फिर मैंने बाहर निकलने के लिए कार का गेट खोला। कार की ड्राइविंग सीट से मैं बाहर आया, फिर बगल वाली सीट से मंजू और पीछे से शिल्पी और मनीष बाहर निकले। मंजू और शिल्पी के कहर ढाते बदन को देखकर सिक्योरिटी वाला बंदा उसमे खो गया और यह देख कर मंद मंद मुस्कुरा रहा था। फिर कुछ सेकंण्ड्स बाद मैंने उससे एक्सक्यूज़ ममी तो बोला तो मानो उससे होश आया कि ओ क्या कर रहा था। तुरंत उसने मुझे सॉरी सिर बोला और तेजी से पार्क करने के लिए आगे बढ़ा।
मनीष और शिल्पी आगे आगे चल रहें थे और मेरे हाथ में हाथ डाल कर मंजू मेरे साथ उन दोनों के पीछे। आगे चल रही शिल्पी कि वन पीस इतनी छोटी थी कि चलने के दौरान कई बार उसकी जाँघे भी दिख रही थी। रिसेप्शन तक पहुंचने तक हर कोई शिल्पी और मंजू को घूर ही रहा था। रिसेप्शन पर शिल्पी ने बुकिंग आईडी दी और फिर उनका एक स्टॉफ हमें वी आई पी सेक्शन में ले गया और फिर उसने कहाँ - सर यह रही आपकी टेबिल। ये हमारा वी आई पी सेक्शन है जहाँ प्राइवेसी का पूरा ध्यान है। मैंने उसे थैंक्स कहाँ, फिर ओ मेनू कार्ड रख कर चला गया।
मैं और मंजू टेबल के एक साइड बैठ गए और दूसरे साइड शिल्पी और मनीष। मैंने मीनू कार्ड को शिल्पी और मंजू को दिया और आर्डर करने को कहाँ। वेटर को हम लोगों ने आर्डर दिया। फिर हम लोग आपस में हंसी मजाक करने लगे। इसी दौरान मैंने अपना एक पैर शिल्पी की ओर बढ़ा दिया। शिल्पी ने काफी छोटा वन पीस पहना हुआ था जो कि बैठने कि वजह से और ऊपर की ओर खींच गया था। मैंने पैर से शिल्पी के दोनों टांगो के बीच को टच किया। शिल्पी को अचानक से झटका लगा मानो क्या हुआ हो। उसने तेजी से नीचे की ओर देखा और फिर मेरी ओर देख के मुस्कुराई।
अब मैं अपने पैर के अंगूठे से शिल्पी की चुत को रगड़ रहा था या कहाँ जाए तो मेरा अंगूठा पैंटी के ऊपर से ही उसके चुत में घुसने की कोशिश कर रहा था। मेरे द्वारा इस तरह रगड़ने से शिल्पी भी गर्म हो रही थी और उसके चेहरे पर मादकता नजर आ रही थी। इधर मंजू मेरे बाए हाथ को अपने दाये हाथ से पकड़ कर ऊँगली फेर रही थी ताकि शिल्पी या मनीष देख ना ले।
मनीष अपने मोबाइल में लगा था तभी वेटर आर्डर सर्व करने के लिए आ गया। वेटर ने मेरे पैरो को शिल्पी की चुत से खेलते हुए देख लिया और ओ शिल्पी की ओर मुस्कुरा कर पूछा आपलोग यहां एन्जॉय कर रहें हो ना। शिल्पी चौंक गई और घबराहट में कुछ बोल नहीं पाई। मैंने देखा वेटर शिल्पी की ओर लगातार हवस भरी नज़रों से देख रहा है तो सोचा चलो इससे भी थोड़ा मजे लेते है। मैंने शिल्पी को टेबल पर रखा चम्मच नीचे गिराने को कहाँ। शिल्पी समझ गई और बड़े ही कामुक तरीके से उसने चम्मच को पकड़ने के बाद उसको जमीन पर गिरा दिया और वेटर से बोली - ओह्ह सॉरी, भैया जरा उठा दोगे क्या?
वेटर - यस मैम और वेटर झुक कर चम्मच उठाने लगा। चम्मच उठाने के बजाय ओ शिल्पी की टांगो के बीच उसकी पैंटी को देखने की कोशिश कर रहा था।
शिल्पी - भैया मिला क्या?
वेटर - जी मैम कहता हूँ चम्मच को उठाया और बमुश्किल कुछ सेकेंड ही ओ पैंटी का दीदार कर पाया होगा। उसके चेहरे पर इस मौके पर चूक जाने की निराशा स्पष्ट दिख रही थी।
अब ओ आर्डर सर्व कर चला गया लेकिन फिर ओ हमें देखने ले लिए पानी सर्व करने के बहाने पहुँच गया। इस बार मैंने अपने पैरो से शिल्पी की पैंटी थोड़ी नीचे कर दी और अपने अंगूठे को उसकी चुत के द्वार तक ले गया। वहाँ जाकर मैंने अंगूठे को चुत के अंदर घुसा दिया जिससे शिल्पी को मीठे मीठे दर्द का अहसास हुआ और वो हल्की हल्की आह भरने लगी। वेटर ये सब टेबल के पास खड़े होकर देख रहा था जिसकी गवाही उसके पैंट में बना हुआ टेंट भी दे रहा था।
इधर शिल्पी गर्म हो रही थी और इधर मंजू मेरे बाहों में हाथ फेर कर मेरा ध्यान अपनी ओर खींच रही थी। मंजू को बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उसके साथ बैठकर मैं उसकी बेटी के साथ क्या कर रहा हूँ। एक तरफ मैं अंगूठे को शिल्पी की चुत के अंदर बाहर काफी तेजी से कर रहा था दूसरी ओर मैंने अचानक मंजू को अपनी ओर खींचा और उसके दाएं गाल को किस कर दिया।
अचानक से मंजू भी चौंक पड़ी और शिल्पी, मनीष एवं वेटर मेरी ओर देखने लगे।
मंजू के गाल पर मैंने जोरदार किस तो कर दिया लेकिन अचानक से सब कुछ मानो थम गया हो। वेटर, मनीष और शिल्पी तीनो मुझे आश्चर्य भरी नज़रों से देख रहें थे। मनीष मेरी ओर अजीब से देखा और फिर नज़रे नीचे कर ली तो मैंने सोचा इससे अलग से घर पर निपटूंगा। शिल्पी मेरा माल ये सोच रही थी मंजू के साथ क्या चक्कर है और कहीं मैं उसको धोखा तो नहीं दे रहा हूँ और ओ मादरचोद वेटर यह सोच रहा होगा कि मेरा चक्कर किसके साथ है।
ऐसे ही शान्ति रही तभी शिल्पी अचानक से अपने सीट से उठी और वाशरूम की ओर बढ़ी। उसके उठते ही मैंने मंजू का हाथ अपने हाथ से दबाया और वही बैठे रहने को कहाँ और मैं शिल्पी के पीछे पीछे वाशरूम में गया। शिल्पी गुस्से में मेरी ओर देख रही थी तो मैंने पकड़कर उसके होंठो तो अपने होंठो से लगाने की कोशिश की तो उसने खुद को अलग कर पीछे कर लिया।
मैं - क्या हुआ डार्लिंग
शिल्पी - अभी मम्मी को किस क्यों किया?
मैं - अरे यार इसपे इतना गुस्सा क्यों?
शिल्पी - गुस्सा क्यों नहीं, बोलों जवाब दो
मैं - यार तेरे चुत में अंगूठा अंदर बाहर करते हुए किस हो गया। ध्यान ही नहीं रहा की ओ तू सामने है और बाजू में तेरी मां है। और कुछ भी पूछना है पूछ
शिल्पी - पक्का ना
मैं - ठीक है फिर मत मान
शिल्पी - फिर ठीक है
चल अब तूने मुझ पर शक किया तुझे सजा मिलेगी।
शिल्पी ने ना में सिर हिलाया तो मैंने उसके स्तनों को दबा दिया और बोला कि सजा तो मिलेगी और उसकी सजा है तो अभी से घर तक बिना पैंटी के जाएगी।
शिल्पी इतनी छोटी तो ड्रेस है, अब इसमें पैंटी ना पहनू तो सब कुछ दिखेगा।
मैं - ठीक है, सब कुछ दिखेगा ही तो पूरी ड्रेस ही उतार के चल अभी से घर तक।
शिल्पी ना नुकुर कि तो मैंने बोला कि इसके बाद सजा और बढ़ेगी और मैं वाशरूम से बाहर निकलने लगा तो शिल्पी ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी पैंटी नीचे उतारने लगी।
मैं चुपचाप खड़ा देखता रहा और फिर जब पैंटी उसने निकाल लिया तो उसे हैंकी जैसे फोल्ड कर मैंने जेब में रख लिया। फिर मैंने उसको कहाँ कि अब तुम सीट पर जाओ मैं आता हूँ।
अब शिल्पी वाशरूम से सीट की ओर धीरे धीरे चलते हुए जा रही थी और मैं पीछे से उसको देख रहा था। उसकी ड्रेस काफी छोटी होने की वजह से उसकी चूतड का एक बड़ा हिस्सा अब दिख रहा था। जब ओ सीट पर आ गई तो पीछे पीछे मैं भी आ गया। अब सीट पर आने के बाद मैंने, शिल्पी और मंजू ने माहौल नार्मल किया और फिर हमलोग डिनर कर घर की ओर निकले। ऐसा लग रहा था मानो अजीब से शान्ति हो गई हो और आगे क्या होने वाला है?
हमलोग वापिस कार से निकले लेकिन मनीष का मुँह बना हुआ था। मैं, मंजू और शिल्पी आपस में सामान्य बातें कर रहें थे लेकिन मनीष ज्यादा बोल नहीं रहा था। मैंने मनीष को कुछ नहीं कहाँ।
10 मिनट में ही हम लोग घर वापिस पहुँच गए। सबलोग नीचे हाल में आए और मनीष सबसे पहले अपने कमरे में सोने चला गया। अब हम तीनो थे हाल में।
शिल्पी - बहुत थक गई, मैं सोने जा रही हूँ
मैं - अच्छा, ऐसा क्या कर लिया
मंजू - हाँ पूरा दिन घर में बैठे रहें और अभी बाहर से सिर्फ खा कर आ गए
मैं - वही तो
शिल्पी - अच्छा, मुझे नींद आ रही है, सोने जाऊ ये ठीक है
मंजू - हाँ चली जा
मैं - नहीं, अभी नहीं और अपने आगे उसका पैर कर दिया
इसके बाद मैंने शिल्पी को इशारा किया तो शिल्पी ने चुपचाप मेरे जूते खोले। फिर मैंने कहा, अब जा तू सोने और मैं भी चलू अब सोने।
शिल्पी अपने कमरे की ओर आगे बढ़ी और मैं सीढ़ी की ओर छत पर जाने के लिए। लगभग 10 सेकंण्ड्स हुए होंगे, शिल्पी अपने कमरे में अंदर गई और मेरा सीढ़ी से छत पर जाने का नाटक वही रुक गया। मंजू हाल में बैठे बैठे सब देख रही थी।
फिर मैं नीचे उतरा और सीधा मंजू के कमरे में चला गया।
मंजू के कमरे में जा के मैं बेड पर लेट गया। 5-10 मिनट्स के बाद मंजू भी गेट को लॉक कर कमरे में आ गई।
मंजू अपने सेक्सी ट्रांसपेरेंट साड़ी और स्लीवलेस बैकलेस ब्लाउज में थी। आज मंजू के कमरे में, उसके बेडरूम में ही मुझे उसके साथ सुहागरात मनाना है।
मंजू ने कमरे में घुसते ही कमरे को अंदर से लॉक किया और मेरे बगल में आकर लेट गई। उसने अपने सर को मेरे कंधे पर रखा और पूछा कि शिल्पी और मनीष को कुछ शक तो नहीं हुआ। मैं मंजू की ओर मुड़ा और उसकी पीठ पर हाथ रखते हुए हसते हुए कहा पता लग भी गया तो क्या हुआ?
मंजू थोड़ी डर गई थी और बोली नहीं ऐसा नहीं होना चाहिए।
मैं - कुछ नहीं होगा। मैं शिल्पी और मनीष से बात कर लूंगा।
ऐसा बोला कर मैंने मंजू के माथे पर किस किया। मंजू की आँखे बंद हो गई और उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और "आई लव यूँ " बोला। मैं भी उसको कस के पकडे रहा और मन ही मन सोच रहा था कि साला मैं दोनों मां बेटी (मंजू और शिल्पी ) को एक साथ चोदना चाहता हूँ और ये है कि इतना डर रही है।
मेरे दिमाग में अब मनीष को और शिल्पी को कैसे मैनेज करना है ये चल रहा था। मंजू भी थोड़ी मन में डरी हुई थी इसलिए मैंने उसे खुद से पकडे रखा। फिर मैंने उससे कहा कि तुम टेंशन ना लो और खुद से अलग किया।
ओ मेरे तरफ उम्मीदभरी नज़रों से देख रही थी और मैं उसको लगातार यह समझाने की कोशिश कर रहा था कि कुछ नहीं होगा। एक औरत के मन में सबसे बड़ा डर यही होता है कि कोई बात उसके पति या बच्चों को ना पता चले और मैं यह बात बखूबी समझ रहा था। फिर भी मैं उसे समझाया और बोला कि चलो जाओ पानी ले के आओ। मंजू समझी लेकिन अभी भी थोड़ी उदासी थी उसके चेहरे पर जिसको मैं देख पा रहा था। मंजू जब तक पानी लायी मैंने हाल में जाकर फ्रिज से कोल्ड्रिंक्स और छत से वाइन की एक छोटी बोतल ले आया।
मंजू जब पानी लेकर अंदर घुसी तो ये सब देखकर पूछी कि क्या है ये सब।
मैं - जो है सामने है देख लो।
मंजू - तुम भी पीओगे क्या?
मैं - हम पीयेंगे आज
मंजू - नहीं, मुझे नहीं पीना
मैं - एक बार टॉई करो, फिर अच्छा ना लगे तो मत पीना।
फिर मैंने एक छोटा पैक मंजू के लिए बनाया और खुद के लिए लार्ज और दोनों ने चियर्स किया।
मंजू ने थोड़ी जबरदस्ती से अपना छोटा पैक खत्म किया। मैंने भी अपने दो पैक तब तक खत्म कर लिए। हमने थोड़ी देर ऐसे ही इधर उधर की बातें की ताकि मंजू नार्मल हो जाए।
थोड़ी देर में कमरे का माहौल नार्मल हो गया। अब मैंने मंजू को खड़ा किया और उसके पीछे आ गया। मंजू ने बैकलेस ब्लाउज पहना हुआ था जो सिर्फ एक डोरी की नोक पर टीका था।
मैंने मंजू को दीवाल के सहारे टिकाया और उसकी पीठ के ऊपरी हिस्से या यूँ कहे सर का पिछला हिस्सा जहाँ जहाँ खत्म होता है वहाँ किस किया। फिर मैंने उसके बालो को अपनी मुट्ठी में समेटते हुए उसका सर आगे की ओर झुकाया और उसके गर्दन को जीभ से चाटने लगा। मगर्दन पर लगातार चूमने से मंजू की सिसकारिया निकल रही थी। पूरे पीठ को मैं लगातार चूमता रहा और मंजू लगातार सिसकारिया लेती रही। फिर उसकी पूरी पीठ चूमने के क्रम में उसके ब्लाउज का डोर आया जिसे मैंने खोल दिया और मंजू की पूरी पीठ नंगी हो गई।
ब्लाउज कुछ इस तरह का था-
इस पतली डोर के खुलते ही मंजू के स्तन को ब्लाउज का सिर्फ ऊपरी हिस्सा ढक रहा था। इस तरह मैंने उसे कमर तक चूमा। मंजू का पिछला हिस्सा जो कि कमर से ऊपर पूरा नंगा था उसे मैंने जमकर रगड़ा। फिर मैंने मंजू को अपनी ओर मोड़ा और उसकी साड़ी के पल्लू को नीचे की ओर गिराया। क्लीवेज दिखाता ब्लाउज जिसकी डोर पहले ही पीछे से हट चुकी थी ओ बस मानो किसी तरह मंजू के बूब्स को ढँक पा रहा था। ओ ढक क्या रहा था, ब्लाउज होने के बाबजूद आधा बूब्स दिख ही रहा था जो उसको और सेक्सी बना रहा था और मेरा लंड पूरा तन के खड़ा था। मेरे लंड के अकड़पन को मंजू का शरीर भी महसूस कर पा रहा था।
अब मैंने फिर मंजू के सिर को बालो से पकड़ कर पीछे की ओर धकेला और उसके चेहरे के नीचे से गालों को चूमना स्टार्ट किया। मेरी जीभ लगातार मंजू के अंगों को चूम रही थी या यूँ कहे उसकी उत्तेजना को बढ़ा रही थी। आज मैं मंजू के साथ बिल्कुल निफिक्र होकर खेलना चाह रहा था। जीभ से गर्दन चूमते चूमते मैंने अचानक उसको उठाया और बेड पर रखा।
बेड पर रखने से मंजू की साड़ी का पल्लू जो पहले ही नीचे गिरा था, उसकी साड़ी और पेटीकोट भी अस्त व्यस्त हो गई और दोनों घुटने तक ऊपर उठ गए। इधर उसका ब्लाउज किसी तरह उसके बूब्स से चिपका रहा। फिर मैं भी मंजू के शरीर के ऊपर चढ़ा और उसके छाती के पास जा के अपने जीभ से उसकी छाती को चाटने लगा। मंजू की उत्तेजना लगातार बढ़ती जा रही थी। उसके बूब्स पर ब्लाउज मानो इस वक्त एक रुमाल जैसा था जो बस यह साबित कर रहा था की बूब्स अभी छुपे हुए है और इस हालत में बूब्स और भी मादक लग रहें थे। फिर मैंने अपने जीभ को बूब्स वाले हिस्से को छोड़ कर पेट पर ले आया और उसके पेट को चाटना जारी रखा। साथ ही मैंने अपना एक हाथ ब्लाउज के नीचे डाला और उसके बाए बूब्स को अपने हाथों में पकड़ने की कोशिश की। उसके फुल साइज बूब्स जिनका साइज 36 होगा तो पकड़कर मैं मसलने लगा। बूब्स को मसलने से मंजू की आह आह की चीख निकल रही थी।
मैंने उसके दोनों बूब्स को जमकर मसला जिससे ओ पूरी तरह मदहोश थी और उसके मन में अभी किसी तरह का भय दूर दूर तक नहीं था। इसी दौरान मैंने उसके ब्लाउज को भी फेक दिया और अब मंजू कमर के ऊपर पूरी तरह नंगी थी।
अब मैं मंजू के शरीर से उतर कर बेड पर लेट गया और मंजू को अपनी ओर खींचा। अब मंजू मेरे ऊपर थी और एक समझदार पार्टनर की तरह ओ जानती थी कि उसे अब क्या करना है।
मंजू ने मेरे चेहरे को चूमना स्टार्ट किया। फिर ओ कमर के पास अपनी उंगलियां ले गई और बड़े ही सेक्सी अंदाज़ में ऊँगली फेरते हुए टीशर्ट को ऊपर किया और निकाला। फिर ओ मेरे बनियान को निचले हिस्से से ऊपर की ओर ले जाने लगी और साथ में मेरे पूरे पेट को ओ अपने जीभ से चाटने लगी। जीभ से चाटते चाटते ओ बनियान को गर्दन तक ले गई और फिर उसे भी निकाल फेका। अब हम दोनों कमर के ऊपर नंगे हो चुके थे और दोनों एक दूसरे के शरीर को आपस में रगड़ रहें थे।
कमर से ऊपर हम दोनों एक दूसरे के शरीर को रगड़ रहें थे। दोनों को कोई जल्दी नहीं थी, सच पूछो तो इत्मीनान से चुदाई के खेल का आनंद कई गुणा बढ़ जाता हैं।
मंजू के अंदर की उत्तेजना लगातार बढ़ रही थी। इसी बीच मंजू मेरे शरीर के ऊपर से उठी और मेरे जीन्स की बटन और चेन को खोलकर अपना मुँह रगड़ने लगी। मेरे अंडरवियर के ऊपर मंजू अपना मुँह फेर रही थी फिर उसने मेरे जीन्स को नीचे किया। फिर उसने मेरे अंडरवियर को नीचे किया और अब मैं पूरा नंगा था। मंजू फिर अपनी दो उंगलियों को मेरे लंड पर फेरने लगी। इससे मेरा लंड और तन गया।
आज मैंने सोच रखा था कि मंजू को जितना हो सके तड़पाना है मेरे लंड के लिए। मंजू मेरे लंड को सहलाने के बाद उसको अपने हाथों में लिया और अपने होंठो से मेरे लंड को दबा लिया। उसने मेरे लंड के आधे हिस्से को मुँह में भर लिया और उसे अंदर बाहर करना शुरु कर दिया। मेरा लंड भी अपनी उत्तेजना की तीव्रता पर था और मुझे लग रहा था कि मैं उसके मुँह में ही वीर्य छोड़ दूँगा जो मैं इस वक्त नहीं चाह रहा था। शायद मंजू भी बेचैन ज्यादा हो रही थी थोड़ी देर लंड को अंदर बाहर करने के बाद उसने लंड को बाहर निकाल दिया और किसी तरह मैंने खुद को और अपने लंड को संभाला।
मंजू की बेचैनी माहौल को और कामुक बना रही थी। मंजू कमर के ऊपर नंगी थी लेकिन अभी भी कमर से उसके साड़ी बँधी थी। अब मैंने मंजू को फिर बिस्तर पर पलटा और उसके नाभि के पास किस करने लगा। नाभि और उसके नीचे चाटने से मंजू कामुकता की सीमा को पार कर रही थी। फिर मैंने अपने होंठो से उसकी साड़ी जो कमर पर बँधी थी, उसको खींचा। जितनी मंजू बेचैन थी उतनी साड़ी भी बेचैन थी खुद को मंजू से अलग होने को। मैंने हल्के से खींचा और मंजू की साड़ी ने उसका साथ छोड़ दिया। अब मंजू अपने बड़े बड़े बूब्स को दिखा रही थी लेकिन कमर पर पेटीकोट बंधी थी।
मैंने उसकी पेटीकोट की डोरी को भी खोल दिया और उसकी पीठ के नीचे अपना हाथ रखा। इससे मैंने आसानी से पेटीकोट को नीचे खींचा। मंजू अब बस अपनी पतली सी पैंटी में थी। ओ पैंटी किसी तरह उसकी चुत को ढक पा रही थी। पैंटी का पिछला हिस्सा डोरी जैसा था जो उसकी गांड की दरारों में धसा जा रहा था।
मैंने अब मंजू को अपने गोद में उठा लिया और कमरे का दरवाजा खोला। मंजू जो अपने चुत में मेरा लंड लेने को बेताब थी ओ दरवाजा खुलते ही चौंक गई।
मंजू मेरी तरफ चकित हो कर देख रही थी और मैं मन ही मन मुस्कुरा रहा था। मंजू को गोद में उठाएं मैं छत की ओर बढ़ा।
रात्रि के लगभग 1 बज रहें होंगे, चारों तरफ अंधेरा था। छत पर मैं मंजू को लेकर पहुँचा। छत पर स्ट्रीट लाइट्स से हल्की हल्की रोशनी आ रही थी।
छत पर एक कुर्सी लगी थी जिसपर मैं बैठा और मंजू को नीचे जमीन पर रखा। मंजू अपने दोनों हाथ मेरे घुटने पर रख कर बैठ गई। मैंने अपने लंड से मंजू के गालों को सहलाया। ऐसा करते वक्त मेरे पैर से मंजू की पैंटी छू गई और मुझे गीलेपन का एहसास हुआ, मतलब मंजू अपना पानी छोर चुकी थी।
मंजू अब बस एक पतली सी पैंटी में थी जो कि पहले से ही काफी छोटा था और गिला होने की वजह से और सिकुड़ सा गया था। मैंने मंजू को खड़ा किया और पीछे की ओर मोड़ा। मंजू की चूतड़े मेरे चेहरे के सामने थे। मैंने उसकी गांड में समाए पैंटी की डोरी को खींच कर छोड़ा। इससे मंजू की आह निकल गई। फिर मैंने पैंटी को नीचे सरका दिया। अब मंजू और मैं पूरी तरह छत पर नंगे थे। मैंने देखा मंजू अपने एक हाथ से अपने बूब्स को छुपाने की कोशिश कर रही थी। मैंने मंजू को हाथ बूब्स से हटाने को कहा, मंजू हिचक रही थी। मैंने उसको गुस्से भरी नजर से देखा तो हल्की सहमते हुए उसने अपने हाथ बूब्स से हटा लिए।
छत पर ओ शर्मा रही थी या डर रही थी तो मैंने उसे कम करने के लिए छत का एक राउंड मारने को कहा। मंजू ने धीमे कदमो के साथ छत का एक चक्कर लगाया और आकर मेरे गले से लग गई। उसके मेरे गले से लगने पर मेरे दोनों हाथो में उसके दोनों जांघ आ गए जिसे मैंने कस कर मसल दिया। इससे मंजू की आह निकल गई।
मंजू की चुत की गर्मी उससे बर्दाश्त नहीं हो पा रही थी।
मंजू - प्लीज नीचे चलो ना
मैं - क्यों, यहाँ क्या दिक्कत है
मंजू - मुझे यहाँ शर्म आ रही है
मैं - ठीक है फिर चल नीचे सड़क पर चलते है
मंजू - पागल हो क्या
मैं - हाँ मैं पागल हूँ और तुझे वही करना होगा जो मैं कहूंगा
मंजू कुछ नहीं बोली
मैंने मंजू के चेहरे को अपने तीन उंगलियों से पकड़ कर अपनी ओर खींचा और बोला - बोल तुझे कोई दिक्कत है क्या?
मंजू सकपका गई। और हल्के से हाँ में सिर हिलाया।
मैं - अब मैं तुम लोगों को जैसे रखूंगा वैसे ही रहना होगा।
मंजू कुछ बोल नहीं पायी।
मैं- जवाब नहीं मिला
मंजू - जी आपकी हर बात माननी है
मैं मन ही मन खुश हुआ और ये जान रहा था कि आगे मुझे क्या करना है।
अब मैंने मंजू को फिर गोद में उठाया और उसको लेकर नीचे बेडरूम में आ गया। बेडरूम में मंजू को बेड पर पलटा और उसके ऊपर 69 की पोजीशन में आकर उसके बूब्स को जोर जोर से मसलने लगा। मंजू की सिसकारिया निकल रही थी। बूब्स को काफी देर मसलने के बाद मैं उसके निप्पल्स को चूसने लगा।
मंजू - राज, प्लीज अंदर डालो ना
मैं - कहा क्या अंदर डालू
मंजू - प्लीज अपना मेरे अंदर डालो
मैं - क्या बोली, समझ नहीं आ रहा खुल के बोलों
मंजू - अपना पेनिस मेरे अंदर डालो
मैं - अंग्रेज की औलाद, हिंदी में बोल
मंजू - प्लीज मुझे शर्म आ रही है
मैं - तो शर्म को बोल ना आए
मंजू ने अपनी आँखे बंद कर ली और फिर बोली की प्लीज अपना लंड डालो।
मैंने फिर ज्यादा जोर नहीं डाला क्योंकि सब कुछ धीरे धीरे करना था। मेरा लंड भी कब से बेचैन था उसके चुत के अंदर जाने को, मैंने भी बोला ठीक है।
मैं अपने लंड को उसकी चुत के पास रगड़ने लगा और फिर अपने लंड को उसके चुत के अंदर घुसा दिया। मंजू की चुत जो गीली हो रखी थी, उसकी वजह से लंड एक झटके में अंदर चला गया। फिर मैंने फुल स्पीड के साथ अपने लंड के धक्के उसकी चुत में मारे।
कुछ मिनटों में मेरे लंड ने उसकी चुत में माल छोड़ दिया। उसके बाद हम दोनों बेड पर ही पड़े रहें। कुछ देर बाद चुदाई का सेकेंड राउंड चला। इसमें लगभग सुबह के 3:30 बज गए तभी अचानक मंजू की नजर बेडरूम के दरवाजे पर पड़ी जो खुला ही था। मंजू फुर्ती के साथ उठी और गेट को बंद किया। फिर हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर सो गए।
सुबह के लगभग सात बजे होंगे, मेरे नींद हल्की सी मोबाइल के वाइब्रेट होने से खुली। मैंने देखा तो शिल्पी की कॉल है। मैं समझ गया कि ओ मैडम छत पर आयी होगी और मैं तो छत पर आज था ही नहीं।
मैं नींद में ही था तो जो उससे मेरी आवाज से पता लग जाता तो मैंने उसका कॉल काट दिया और sms किया कि मैं एक मीटिंग के लिए आया हूँ और थोड़ी देर में कॉल करूंगा।
शिल्पी नीचे आ गई और अपने रूटीन से तैयार हो कर कॉलेज ले लिए निकली। मनीष भी कॉलेज चला गया और मैंने ऑफिस में मेसेज कर के सिक लीव का बोल दिया।
इस तरह दस बजे मैं उठा तो देखा मंजू नहा के नाश्ता रेडी कर चुकी है। मुझे देखकर ओ मुस्कुराई। मैंने उसे अपने हाथों से इशारे करते हुए अपने पास बुलाया। मंजू मेरे पास आयी तो मैंने उससे हग किया और फिर किस किया।
मंजू - अब फ्रेश हो जाओ फिर ब्रेकफास्ट करते है
मैं - हाँ मैं फ्रेश हो कर दूध पीऊंगा
मंजू हस दी और मैं भी बाथरूम में चला गया। मैं फ्रेश हो कर शॉवर लिया और लगभग एक घंटे बाद मैं टॉवल लपेटे बाहर को आया।
बाहर मंजू ने डाइनिंग टेबल पर ब्रेकफास्ट अरेंज कर रखा था जिसे देखकर मजा आ गया।
मैंने मंजू को देखकर टॉवल को खुद से अलग कर टांग दिया। टॉवल वैसे भी हल्का गीला था। टॉवल हटाते ही मैं पूरा नंगा था। मुझे ऐसे देख मंजू हस पड़ी और बोली पहले ब्रेकफास्ट तो करो।
मैंने भी स्माइल से ही जवाब दिया और जाकर कुर्सी पर बैठ गया। मंजू मेरे एक जांघ पर कमर टीका कर बैठ गई और मुझे अपने हाथों से खिलाने लगी। मुझे खिलाने के बीच बीच में ओ खुद भी खाती रही और इस तरह हम दोनों ने ब्रेकफास्ट फिनिश किया।
फिर हम दोनों सोफे पर बैठ गए।
मैं - मंजू आज से तुम घर में ब्रा पैंटी नहीं पहनोगी
मंजू - बिना ब्रा के अजीब लगेगा और कोई आया तो
मैं - ऊपर टॉप या समीज या ब्लाउज तो होगा ही
मंजू - ठीक है।
और जब घर में सिर्फ हम दोनों होंगे, तुम्हे हर वक्त नंगा रहना होगा।
मंजू- सिर्फ मुझे क्यों, तुम क्यों नहीं
मैं - क्योंकि मैं हर वक्त नंगा रहने को तैयार हूँ।
मंजू - बेशर्म
फिर मैंने मंजू की सलवार समीज उतार दी। अब मंजू ब्रा और पैंटी में थी। आज उसने साधारण ब्रा पैंटी पहन रखे थे। मैंने उन्हें भी उतार दिया और अब ओ भी मेरे सात पूरी नंगी थी।
अब मैंने होम थिएटर स्टार्ट किया और जरा जरा टच मी गाना लगाया और उससे कहा कि डांस करें। मैं सोफे पर बैठा रहा और मंजू मेरे सामने जमीन पर बैठ कर बड़े ही सेक्सी अंदाज़ में डांस करने लगी। उसके हर मूव के साथ उसके बूब्स बड़े ही कातिलाना अंदाज में मूव करते जो काफी मजा दे रहा था।
डांस करते करते उसने मुझे भी उठा लिया और ओ कपल डांस करने लगी। कुछ देर ऐसे ही डांस मस्ती का दौर चला और फिर मैंने उसको वही घोड़ी बना दिया। घोड़ी बना के मैं उसके गांड की छेद के आस पास अपने लंड को रगड़ने लगा। मंजू की गांड काफी ज्यादा टाइट थी जिसकी वजह से मेरे लंड को भी काफी मुश्किल हो रही थी। खैर धीरे धीरे करते हुए मैंने अपना लंड उसकी गांड के छेद में घुसेड़ दिया। दर्द मुझे भी हुआ लेकिन मंजू की तो चीख निकल गई।
गांड में धक्के मारते मारते मेरे लंड ने फिर से वीर्य छोड़ दिया जिसे मैंने भी उसकी गांड में गिरा दिया। फिर थोड़ी देर मैंने उसकी चुत को भी रगड़ा और इस तरह 3 बज गए। शिल्पी कॉलेज से 3:30 तक और मनीष कॉलेज से 4 बजे तक आता था। मैं कल से नीचे ही था तो मेरे पास कोई कपड़ा ही नहीं था। मैं और मंजू नंगे ही ऊपर गए और मैं अपने लिए एक शॉर्ट्स और टीशर्ट ले आया। मैंने जल्दी जल्दी शॉर्ट्स और टीशर्ट पहन लिया और मंजू ने भी सलवार कमीज पहन ली। मन ही मन मैंने कहा जितना नाटक करना है कर ले एक दिन दोनों मां बेटी को साथ चोदुँगा लेकिन बड़ा सवाल यही था कैसे?
खैर हम दोनों कपड़े पहन लिए और मंजू ने एक गेट जो दुकान को घर से कनेक्ट करता था उसे खोल दिया।
इसके बाद मैं सोफे पर बैठकर टीवी देखने लगा और मंजू घर के कामों में लग गई। थोड़ी देर में शिल्पी घर आ गई। मुझे देखकर शिल्पी चौंक गई और मुस्कुराते हुए पूछा।
शिल्पी - आप यहाँ
मैं - हाँ, सुबह जल्दी गया था तो मीटिंग खत्म होते ही घर आ गया।
शिल्पी - ओह्ह ग्रेट, मुझे तो लगा सुबह से कहा गायब हो
मंजू किचन में थी। मैंने उसके कंधे पर चीकूटी काटी और कहा कि अभी दिखाता हूँ सबकुछ और अपना शॉर्ट्स हल्का नीचे कर दिया। मैंने नीचे अंडरवियर नहीं पहना था तो मेरा लंड उफनता हुआ बाहर आ गया। शिल्पी चौंक गई और भागते हुए अपने रूम में चली गई ।
फिर से मैं टीवी देखने लगा तभी मनीष भी कॉलेज से आ गया।
मैं - कैसे हो मनीष
मनीष - ठीक हूँ भैया
मैं मन ही मन, मादरचोद बाप और जीजा दोनों हूँ तेरा और तू भैया बोलता है।
मैं - और पढ़ाई कैसी चल रही है
मनीष - ठीक चल रही है।
इसके बाद मनीष भी अपने कमरे में चला गया। थोड़ी देर बाद शिल्पी और मनीष फ्रेश हो कर बाहर आए। शिल्पी ने एक बहुत ही छोटी शॉर्ट्स और टॉप पहना हुआ था।
मंजू ने उन दोनों को खाना खिलाया। उसके बाद शिल्पी सोफे पर मेरे बाजू में आकर बैठ गई। सामने मनीष और बेड पर मंजू बैठी थी। सब लोगों का ध्यान टीवी पर था और मैं शिल्पी की शॉर्ट्स के पास उसकी नंगी जांघो को सहलाने लगा।
इस तरह सहलाना शिल्पी को भी अच्छा लग रहा था, तभी मनीष मंजू से बोल पड़ा।
मनीष - मम्मी, जिम के लिए मान जाओ ना
मंजू - फालतू के पैसे बर्बाद नहीं करने मुझे
मनीष - फालतू नहीं ज़रूरत है ये
मैं - कितनी फी है
मनीष - 1500
जिम वाले को मैं जानता था, मैंने उसको कॉल कर 1000 के लिए बोला और साथ में ये भी कह दिया कि मैं पैसे दे दूँगा।
मनीष खुश हो गया और मुझे थैंक यूँ बोला।
मैंने बोला हाँ ठीक है, अब जिम में पूरा टाइम देना है ( मन ही मन - साले बाहर रहेगा तब ना तेरी मां या बहन को चोदुँगा )
इधर मैंने मंजू से कहा कि थोड़ी देर वो भी जिम में जा के देख ले और फिर डिनर के लिए कुछ अच्छा प्लान करो।