Update 09

मैं नहा के बाहर निकला और निकर एवं टीशर्ट पहना।

मैं नीचे गया तो देखा मंजू घर का सारा काम कर चुकी है और नीतू नहाने गई हैं। मंजू मुझे देखते ही खड़ी हो गई। मैं सोफे पर जाकर बैठा और उसको अपने पास बुलाया।

मंजु मेरे सामनेआयी तो मैंने उसे नीचे झुकने का इशारा किया।

जैसे ही मंजु नीचे झुकी, मैंने उसके गर्दन पर हाथ रखा और चेहरा अपनी ओर टेढ़ा करते हुए ग़ुस्से से पूछा।

मैं- यह क्या पहन रखा है तुमने?

मंजू ने सूट पहना हुआ था जबकि मैंने बोला हुआ था कि घर में सब कम से कम कपड़े पहनेंगे।

मंजू- प्लीज़ मुझे माफ कर दो, अगली बार ऐसा नहीं होगा।

मैं- अगली बार, आज ही ऐसा क्यों हुआ?

मंजू कुछ नहीं बोली तो मैंने उसे कस कर एक थप्पड़ मारा और बोला कि अगली बार ऐसा कुछ हुआ ना तो नंगा कर के सड़क पर घूमाऊँगा।

मंजू डर गई और वो जल्दी से सूट उतार दी और पूरी नंगी हो गई। फिर वो मेरे बगल में आ के बैठ गई और मुझे मनाने लगी। मंजु मेरे बाए बैठी थी और मेरे गाल को किस कर रही थी वहीं अपनी उँगुलियों को मेरे पीठ पर रगड़ रही थीं।

मंजू ऐसे मुझे मना ही रहीं थी नीतू नहा कर बाथरूम से निकली।नीतू को शायद अंदाजा नहीं था कि मैं नीचे आके बैठा हूँ। वो टॉवेल लपेटे कमरे में जा रही थी तभी मेरी नजर उस पर पड़ी।नीतू का गोरा गोरा बदन नहाने के बाद और भी चमक रहा था।

मैंने नीतू को आवाज दी।

नीतू चौंकी और वैसे ही मेरे सामने आकर खड़ी हो गई।

मैं नीतू से- अभी क्या पहनेगी।

नीतू कभी मेरी ओर देखती और कभी मंजू की ओर जो पूरी नंगी मेरे पास बैठी थी। फिर वो कुछ सेकंड्स के लिए चुप रही और उसके बाद बोली।

नीतू- जो आप कहे।

मैं- शाबाश, जाओ एक काम करो कोई मस्त सेक्सी साड़ी पहन लो। जितना सेक्सी पहन सकती हो उतना।

मंजू मेरी और हैरान भरी नजरों से देख रही थी और शायद मन हो मन सोच रही थी कि मुझे नंगा कर के छोड़ रखा है और उसको मस्त साड़ी पहनने को बोल रहा है।

मैं मन ही मन मुस्कुरा रहा था। फिर मैंने मंजु की ओर देखा और बोला जा मेन गेट खोल, अभी हम तीनों दिल्ली निकलेंगे।

मंजु पूरी नंगी थी और उसने किसी तरह हिम्मत जुटा कर मुझसे पूछा- मैं क्या पहन लूँ?

मैं- तुझे कुछ नहीं पहनना है। तू ऐसे ही नंगी जाएगी।

मंजु के होश उड़ गए।

मंजू को यह लगने लगा था कि मेरी बात ना मानने की सजा में मैं कही उसे नंगा घर से बाहर ना घुमा दूं। मंजू के मन के इस डर को मैं समझ चुका था।

वो लगातार मेरे गले से लिपट कर मुझे चूम रही थी और अपने हाथों से मेरे शॉर्ट्स के ऊपर से ही लंड को पकड़े हुए मसल रही थी, मानों किसी तरह वो अपनी बाट मुझसे मनवा ले।

मै अपना हाथ मंजु के चूतर के पास ली गया, उसकी बायीं जंघा पर जोर से चिकौटी काटा। फिर उसको सोफा से उठाया और सीधा सामने खड़ी होने को कहा। मंजु बिना कोई देरी किए चुपचाप मेरे सामने खड़ी हो गई। मैं सोफे पर बैठा था और वो सोफे के सामने खड़ी थी।

मेरे आखों के सामने उसका चिकना चूत था, मैंने चूत के पास अपनी दो उँगलियों को ले गया और वहाँ पर हाथे फेरने लगा। मंजु की सिसकी निकल रही थी। मैं कुछ और आगे की सोचता तब तक नीतू तैयार होकर कमरे से बाहर आ गई।

नीत्यु की मेरे कहे के अनुसार साड़ी पहना था जिसमें वो कातिल लग रही थी।

नीतू ने मैरून कलर की साड़ी पहनी थी और बैकलेस ब्लाउज था। उसके बड़े बड़े बूब्स ब्लाउज से बाहर निकलने को बेताब थे।

मैंने नीतू को पास बुलाया और मंजु के कान के पास थीड़े से बोला- बात मानेगी तो ऐसे घूमेगी नहीं तो नंगी घूमेगी

मंजु समझ चुकी थी कि अब सब लाज शर्म छोड़ के उसे रहना होगा वरना परिणाम कुछ भी हो सकता है। अब मैंने बग़ल में खड़ी नीतू को अपने पास खींचा।

नीतू की साड़ी नाभि से थोड़ी नीचे बांधी थी जबकि औरतों की साड़ी को और नीचे बांधा जा सकता है। मैंने नीतू की साड़ी नाभि से थोड़ी और नीचे की ओर खींच दी, मानो बस चूत के बस ऊपर और मैंने उसको वहाँ पे किस किया। बग़ल में खड़ी मंजु को अब इसे जलन हो रही थीं।

फिर मैंने नीतू को अपने गोद में बिठाया और उसके बूब्स मसलने लगा। ये क्या नीतू ने ब्रा पहना था।

मैं नीतू की ओर ग़ुस्से से देखा और बोला- ये क्या तुझे भी नंगी जाना है, क्या?

यह बोलने के साथ मैंने नीतू के ब्लाउज की डोरीं खींच दी। नीतू का ब्लाउज हवा में बस कंधे से लिपटा था सुर ब्रा सामने थी। मैंने उसे बोला चल ब्रा उतार।

फिर मैंने मंजु और नीतू दोनों को सामने खड़ा किया और बोला।

राज- मेरी बात ध्यान से सूनो, आज आखिरी बार बोल रहा हूँ। आज के बाद किसी ने यह गलती की तो उसे बहुत भयानक सजा मिलेगी।

घर में तुम दोनों कम से कम कपड़े में रहोगी। ऊपर कुछ भी पहन रखा हो तो ब्रा और पैंटी कोई नहीं पहनेगा।

तुमलोगों का कम कपड़ा पहनना अजीब ना लगे इसलिए प्रीति और शिल्पी को भी समझा कर कम कपड़े पहनाओ।

बाहर घूमने जाते वक़्त कोई ब्रापैंटी नहीं होनी चाहिए।

दोनों चुपचाप सुनते रहे। फिर मैंने पूछा कोई दिक्कत तुम दोनों को?

मंजु और नीतू ने स्वीकारते हुए सर हिलाया फिर बहुत ही धीमी आवाज़ में बोला, मनीष भी तो है घर में।

फिर मैंने बोला- ठीक है आज मनीष के सामने तुम नंगी होगी मंजु।

मंजू तुरंत मेरे पैर में गिर गई और बोलने लगी- प्लीज मेरे बेटे के सामने मुझे जलील नहीं कीजिए बाक़ी आप जो कहोगे मैं मानूँगी।

मैंने मंजु को उठाया और बोला- चलों दोनों जा के छत से मेरे कपड़े, जूते और गाड़ी की चाभी ले ले आ जाओं।

मंजु और नीतू दोनों छत पर गए और मेरे कपड़े और जूते ले आए।

इधर मैं सोच रहा था कि इनके साथ क्या किया जाए फिर मैंने नेट से एक टेलर का नंबर निकाला और उसको घर आने के लिए बोला।

मंजू और नीतू दोनों मेरे सामने बैठे थे और मंजू काफी टेंशन में थी तो मैंने सोचा चलों उसको रिलैक्स करता हूँ।

मैंने बोला हम आज कही नहीं जा रहे है, आज हम सभी घर में ही रहेंगे। ऐसा बोलते ही मंजू बहुत ही तेज़ी से मेरे होंठों को किस करने लगी और मुझे थैंक यू बोली।

मंजू और मैं एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे और बगल में नीतू चुपचाप खड़ी थी, मानों उसे समझ नहीं आ रहा हो, उसे क्या करना है।

जब एक औरत मर्द को खुश करना चाहती थी तो उसका व्यवहार ही कुछ अलग होता है और मंजु अभी मुझे किसी भी तरह खुश करना चाहती थी। मंजु के जबरदस्त किस से मेरा जोश फिर से जाग गया और मैंने मंजु को अपने गोद में बिठाया।

मैं सोफे पर बैठा था और मंजु के बूब्स मेरे सामने थे। इसी पोजीशन में मैंने मंजू के चुत में अपना लण्ड घुसा दिया और उसकी जम के पहले राउंड की चुदाई की। मंजु की आहें पूरे माहौल को मादक बना रही थी।

अभी मेरा और मंजु का कार्यक्रम चल ही रहा था कि दरवाजे की घंटी बजी।

मैंने नीतू को इशारा किया कि बाहर जा के देखे।

टेलर- मैडम किसी साहेब ने कॉल किया था और यहां आने को बोला था।

नीतू- अच्छा रुको, मैं पूछ कर बताती हूँ।

नीतू फिर अंदर आयी और मुझसे पूछी कि कोई टेलर आया है। आपने बुलाया है क्या?

मैं- हाँ, मैंने बुलाया है। उसको अंदर ले आओं।

तब तक मैंने अपने शॉर्ट्स को ऊपर किया और अभी जबरदस्त चुदाई के बाद मंजु उसी हालत में पूरी नंगी सोफे पर मेरे बग़ल में बैठी थी।

मंजू ने भी मन ही मन यह स्वीकार कर लिया था कि शायद उसे नंगी ही रहना होगा उस टेलर के सामने।

बाहर जाकर नीतू- हाँ भैया, चलिए अंदर। आपको साहब ने ही बुलाया है।​
Previous page: Update 08