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अम्मी खामोश हो गई या इसे मुझे अपना ग्रीन सिग्नल मिला, अब मैं अपनी अम्मी की गांड अच्छी से मसल रहा था । मैं उनकी गांड को देख नहीं पा रहा था पर उनकी नरम गांड को महसूस जरूर कर रहा था।
अब मैं उन्हें पीठ के बल लेटने कहा। अम्मी चुप चाप पीठ के बल लेट गयी। अब मैं उनकी जाँघों को मसल रहा था। अम्मी की आँखे बंद थी, चेहरे पर अलग किसम की ख़ुशी दिख रही थी। मैं जान बुझ के अम्मी की मखमली चूत को बार बार छू रहा था, अम्मी हल्की सी सिसकारी ली मेरे छूने से।
इससे मेरी हिम्मत बढ़ गई, अब मैं सीधे उनकी चूत को सहलाने लगा, उनकी चूत के होंठों को अपनी उंगलियों से अलग कर रहा था।
मुझे पता है कि अम्मी सेक्स के लिए बेताब है, लेकिन हमारे रिश्ते का लिहाज कर रही है। अम्मी चुप चाप लेती रही, वो या तो नींद में होने का नाटक कर रही थी या फिर ऐसा दिखावा कर रही थी कि जैसे कुछ भी असामान्य न हो रहा हो. इस से मेरा भी होंसला बढ़ गया और मैं अम्मी की चूत को जोर से मसलने लगा। अम्मी भी चुप चाप मजा लेती लेती रही।
मैंने अम्मी को फिर से उल्टा हो जाने को कहा और अम्मी तुरंत पेट के बल लेट गयी. अब फिर से उनकी गांड मेरे सामने थी.
अम्मी इस उलटे पोज़ में मालिश करवाने में ज्यादा खुश थी क्योंकि इस तरह से उनको अपना मुँह नीचे कर सकने की सुविधा थी और उन्हें मेरी तरफ देखने में शर्म आती थी.
मैंने थोड़ा आगे बढ़ने का सोच और बोला।
मैं : अम्मी इस तरह से मुझे मालिश करने में ऐसी दिक्कत हो रही है और इस पे मसाज करना थोड़ा मुश्किल हैं। (मैंने गांड शब्द का इस्तेमाल नहीं किया), क्या मैं साया ढीला कर दूं?
अम्मी: हम्म. ( बेचारी ऐसा तो कह नहीं सकती थी कि बीटा अहमद जल्दी से मेरा साया खोल दो तो बस हम्म कहा )
मैं साया का नाडा खोल दिया, अब उनका साया ढीला हो चुका था। मैं अपना हाथ ऊपर से घुसा के उनके गोरे गांड पे हाथ फेरने लगा इसे उनका साया नीचे हो गया या उनकी गोरी गांड मुझे दिखने लगी।
अम्मी भी मजा ले रही थी, उन्हें पता नहीं चला कब मैं उनका साया उनकी गांड के नीचे ला रखा। मुझे अम्मी की चूत भी दिखने लगी, ना गोरा ना काला, उसपे बहुत झांटे थी ।
मुझे पता था अम्मी आज ज्यादा कुछ नहीं बोलेगी, अब मैं उन्हें बहुत गरम कर चुका हूं। मैंने अपना हाथ बढ़ा के उनकी चूत पर रखा या धीरे-धीरे सहलाने लगा।
अम्मी: तू मेरी बात कभी मानता क्यों नहीं? (हल्की आवाज में)
मैं : मैं हमेशा मानता हूं. अब क्या किया मैंने?
अम्मी: (सिसकारी लेती हुई) कल कुछ बोली थी तुझे.
मैं : (नाटक करने लगा) मैं भूल गया, फिर से बोलो।
अम्मी: (मैं उनकी चूत सहला रहा था ) आआह बेटा। कुछ नहीं.
मैं अंदर हसने लगा, जैसे मैंने सब कुछ हासिल कर ली हो। अब मेरी अम्मी की गांड या चूत की खातिर अच्छे से की, वो धीरे धीरे सिसकियाँ लेती रहती थी। मैं अनके चूत को ज्यादा नहीं छू रहा था, क्योंकि अगर वो उठ के चली गई तो फिर प्लान फ्लॉप हो जाएगा।
मैं : अम्मी रोज़ तुम्हारा ब्लाउज ख़राब हो जाता है, प्रॉब्लम नहीं होती क्या उसे धोने में?
अम्मी: तो अब क्या ब्लाउज़ भी निकालोगे?
मैं : अच्छा होंगा अगर आप अपने ब्लाउज भी निकाल दो. इस तरह मालिश आराम से होगा और धोने का भी टेंशन नहीं, ब्लाउज निकाल दो
(मासूम बनते हुए)
अम्मी : तू फालतू बातें बंद करके अपना हाथ चला, तू मुझे ऐसे नहीं देख सकता।
मैं : बचपन में कई बार तो देखा मैंने, अभी भी तो बेटा ही हुआ तुम्हारा।
अम्मी: लेकिन बेटा तू बड़ा हो गया है।
मैं : लेकिन अम्मी के नज़रो में तो बेटा हमेशा छोटा ही होता है ना?
अम्मी: बेटे लगता है की तुझे बातों में कोई हरा नहीं सकता. रुक... वो जैसी ही रुक बोली मैं ख़ुशी से जैसे आसमान पे चला गया, मुझे पता था अब मैं जन्नत जाने वाला हूं। वो अपने ब्लाउज का हुक निकल रही थी, मुझे पता था की वो ब्रा नहीं पहनी है। वो ब्लाउज खोलकर साइड में रख दी, उनके गोल मटोल दूध देखके मेरा लंड फट जा रहा था, मेरी अम्मी मेरे हालात को देख ली और सिर्फ एक स्माइल दी। वो भी अपने मम्मे दिखने से शर्मा रही थी पर उन्होंने भी अपने मम्मे छुपाने की कोई कोशिश नहीं की.
अम्मी: अब तू बड़ा हो गया है, मेरी बाते सुननी चाहिए तुझे (ये बोलके वो लेट गई)
मैं : अम्मी मैं छोटा हूँ अभी भी।
अम्मी का साया अभी भी ढीला था, ब्लाउज़ खोलते समय उन्हें साया सही कर लिया था (शयद अभी भी उन्हें शर्म आ रही थी) लेकिन नाडा खुला ही था। मैं अम्मी के दूध देखते हुए उनके हाथ, कंधे, पेट पर अच्छे से मालिश किया।
मैं : अम्मी यहां मालिश कर दू (दूध को दिखाते हुए)
अम्मी : यहां की मालिश कोई जरूरी नहीं है. क्योंकि यहां पर कोई दर्द नहीं है.
मैं उनकी ना को हा मानते हुए अपना हाथ चुप चाप उनके दूध पर रख दिए, वो थोड़ी देर मेरे आंखों में देखने लगी, फिर अपनी आंखें बंद कर दी। मुझे अब हरा सिग्नल मिल चुका था, मैं उनके चूचियों को हल्का दबा के मालिश कर रहा था, करीब एक मिनट बाद अम्मी के निपल्स खड़े हो गए।
अब मैं उनके निपल्स दबाने लगा, अम्मी अपने होठों को काट रही थी या सिस्कारिया ले रही थी। ऐसे करीब 20 मिनट करने के बाद अब मैंने उनके जांघों को मालिश करने लगा, अब मैंने भी कंट्रोल खो दिया था।
मैंने अम्मी के साया को उनकी चूत के नीचे खिसका दिया, अब उनका चूत साफ नज़र आ रहा था, मैं उनके चूत के ऊपर से मालिश कर रहा था।
फिर मैंने धीरे से उनकी चूत पर उंगली फेरा या धीरे-धीरे उनकी चूत सहलाने लगा, उनकी आंखें बंद थीं। मैं उनकी चूत के गुलाबी पंखों को अलग किया, ओह क्या नजारा था। उनको काफी देर हल्का सा मसलने के बाद अम्मी की चूत गिली हो चुकी थी।
अब मुझे एक आइडिया सूझा (मैं अम्मी को या बेबस करना चाहता था, उनके अंदर या कामवासना लाना चाहता था ताकि अम्मी मेरा लंड लेने को तड़प उठे। अभी अगर वो झड़ जाती तो शायद फिर कल से ये सब ना होता) मैं अब सोच लिया उस रात को भी अम्मी की चूत नहीं चाटूँगा,
जब अम्मी ने देखा कि मैं उनकी चूत को चाट नहीं रहा तो वो थोड़ा सा हैरान हो रही थी. वो भी चाहती थी कि मैं आगे बढूं पर मैं अपनी अम्मी को तड़पा रहा था ताकि उनकी कामवासना और तेज हो जाये और मुझे उनको चोदने का मौका मिल सके.
जब अम्मी ने देखा कि मैं उनकी चूत को सिर्फ देख रहा हूँ और ऊँगली वगैरा नहीं डाल रहा तो वो बोली
"क्या देख रहे हो बेटा मालिश करो ना" अम्मी ने मुझे अपने जिस्म की तरफ घूरता हुआ देखकर कहा । मैं अपनी मम्मी की बात सुनकर जल्दी से बोतल में से तेल निकालकर अपनी अम्मी की नंगी जांघों पर लगाकर मालिश करने लगा।
"आह्ह्ह्ह बेटा ओह तुम्हारे हाथों से तो 'बहुत बुहत मजा आ रहा है अपने हाथों से ऊपर तक मालिश करो" अम्मी ने अपने बेटे के हाथों को अपनी जांघों पर महसूस करके मज़े के मारे ज़ोर से सिसकते हुए कहा। असल में वो चाहती थी कि मैं उनकी चूत की मालिश जोर जोर से करूँ.
अपनी अम्मी की जांघों की मालिश करते हुए मेरा लंड अंडरवियर में पूरी तरह तनकर झटके मारना शुरू कर दिया था । मैंने अपने हाथ को अपनी अम्मी की जाँघ के ऊपर तक रगडते हुए उसकी मालिश करने लगा, अपनी अम्मी के जांघों की मालिश करते हुए मेरा हाथ बार बार अपनी अम्मी की चूत को छु रहा था अम्मी की हालत भी खराब होने लगी। अपने बेटे के हाथ को अपनी चूत पर महसूस करके उसकी चूत पानी टपकाने लगी । मेरा लंड अंडरवियर में आन्दोलन मचाने लगा था।
"ओहहहहह बेटा यह तुम्हारा अंडरवियर इतना फूला हुआ क्यों है" अम्मी ने अपनी जांघों को मज़े से अपने बेटे से मालिश कराते हुए कहा। शायद उन्होंने सोच लिया था की उनको भी कुछ करना पड़ेगा ताकि बात कुछ आगे तो बढे।
"वो अम्मी पता नहीं क्यों मेरा यह आपके जिस्म को छूते ही उठकर खडा हो गया है" मैंने बड़ी बेशरमी से अपनी अम्मी को जवाब देते हुए कहा।
"आआह्ह्ह्ह हाँ बेटे तुम्हारा क़सूर नहीं है तुम अब जवान हो चुके हो। अपनी अम्मी की नंगी जाँघ की मालिश करते हुए तो तुम्हारा यह तो उठेगा ही" अम्मी ने अपने बेटे की बात सुनने के बाद सिसकते हुए कहा ।
"अम्मी प्लीज एक बार मेरे शरीर की भी मालिश कर दो जैसे मैं आपके जिस्म की कर रहा हूँ" अहमद ने अपनी अम्मी की बात सुनने के बाद कहा।
"क्या कहा बेटे अपनी अम्मी से अपने शरीर ड की मालिश कराना चाहते हो" अम्मी ने हैंरान होते हुए कहा।
"हा अम्मी मैं आपके नरम हाथों से अपने शरीर की मालिश कराना चाह्ता हू" मैंने इस बार अपनी अम्मी की नंगी चूत के ऊपर अपने हाथ को रखते हुए कहा।
"आआह्ह्ह्हह हहहहह बेटे पहले तुम अपनी जादुई हाथों से हमारे पूरे शरीर का दर्द तो मिटाओ" अम्मी ने अपने बेटे का हाथ अपनी चूत पर पड़ते ही सिसकते हुए कहा।
"हा अम्मी मैं आपके सारे जिस्म की मालिश करता हूँ फिर आप मेरे जिस्म की मालिश करना" मैंने अपनी अम्मी की बात सुनकर खुश होते हुए कहा ।
"बेटे मै उलटी होकर लेट जाती हूँ। तुम मेरी पीठ की मालिश करो" अम्मी ने अपने बेटे की तरफ देखते हुए कहा और खुद उल्टा होकर लेट गई।
अब मेरे सामने अम्मी की पीठ अब बिलकुल नंगी थी । मैंने बोतल में से तेल निकालकर अपनी अम्मी के चिकने पीठ की मालिश करनी शुरू कर दिया।
ओहहह बेटा हाँ ऐसे ही ज़ोर लगा कर मालिश करो। बहुत मजा आ रहा है" अम्मी अपनी पीठ पर अपने बेटे का मर्दाना हाथ लगते ही ज़ोर से चिल्लाते हुए बोली। मैंने अपनी अम्मी की बात सुनकर उसकी पीठ की मालिश बुहत ज़ोर लगा कर करने लगा, मेरा हाथ अपनी अम्मी की पीठ की मालिश करते हुए बुहत गरम हो चुका था।
मेरा लंड भी पूरी तरह अकड कर झटके मार रहा था।
"बेटे अब थोडा नीचे भी मालिश करो" अम्मी कुछ देर तक अपने बेटे के हाथों से अपनी पीठ की मालिश कराने के बाद बोली, वो अपनी गांड या चूतड़ पर अपने बेटे का हाथ महसूस करना चाहती थी.
मैंनेअपना हाथ नीचे करते हुए अपनी अम्मी की चूतड़ों के थोडा ऊपर मालिश करने लगा । मेरा हाथ बार बार वहां पर मालिश करते हुए अम्मी की चूत से टकरा रहा था।
"आआह्ह्ह्ह बेटे थोडा और नीचे करो ना" अम्मी अपने बेटे के हाथ को अपने चूतडों के इतना क़रीब महसूस करके ज़ोर से सिसकते हुए बोली।
मैं गौर से अपनी अम्मी की तरफ देखने लगा । मेरी साँसें अपनी अम्मी को घूरते हुए बुहत ज़ोर से चल रही थी, मुझे अपनी अम्मी के चूतड़ के बीच गांड का भूरा छेद बुहत अच्छा लग रहा था और मुझे अपनी अम्मी की चूत की झांटें भी पीछे से नज़र आ रही थी।
"बेटे मालिश करो न क्या देख रहे हो" अम्मी ने कुछ देर तक चुप होकर बैठने के बाद कहा । मैंने अपनी अम्मी की बात सुनते ही अपने हाथ में तेल को लगाकर अपनी अम्मी के मोटे मोटे चूतडों की मालिश करने लगा, अपनी अम्मी के चूतडों की मालिश करते हुए जानबूझकर उसकी गांड के छेद को अपनी उँगलियों से टटोल रहा था ।
"ओहहहहह बेटे बुहत मजा आ रहा है ऐसे ही करते रहो" अम्मी अपने बेटे की उँगलियों को अपनी गांड के छेद पर लगते ही गरम होकर ज़ोर से सिसककर बोली। मैं कुछ देर तक यों ही अपनी अम्मी के चूतडों की मालिश करते हुए अब अपने हाथ को पीछे से उसकी चूत तक मालिश करने लगा।
"ओहहहह इसशहहह बेटा बुहत अच्छे से कर रहे हो ऐसे ही हा" अम्मी अपने बेटे के हाथ को अपनी चूत पर महसूस करके ज़ोर से सिसकते हुए बोली।
मैं अब अपना हाथ पूरी तरह अपनी अम्मी की चूत और उसकी गांड पर फिराने लगा । मेरे ऐसा करने से अम्मी ज़ोर से सिसक रही थी और उसकी चूत से उत्तेजना के मारे बुहत ज्यादा पानी निकल रहा था। मुझे अपने हाथ पर अपनी अम्मी का रस भी लगता हुआ महसूस हो रहा था।
"बेटे बस अब ज़रा मेरे पेट की मालिश करो" अम्मी को अचानक क्या सूझा जो उसने अपने बेटे को रोकते हुए कहा ।
मैंने अपनी अम्मी की बात सुनकर अपने हाथ को अपनी अम्मी के चूतडो से हटा लिया । अम्मी अपने बेटे के हाथों के रुकते ही फ़ौरन सीधा हो गयी, मेरा लंड अपनी अम्मी के सीधा होते ही उसकी गोरी नंगी चुचियों को देखकर उत्तेजना के मारे उसके अंडरवियर को फाडने लगा ।
"बेटे तुम तो मेरी चुचियों को ऐसे घूर रहे हो जैसे कभी किसी की चुचियां देखी ही न हो । तुमको 2 साल तक इनका दूध पिलाकर बड़ा किया है । अब देखना छोड़ो और मालिश करो" अम्मी ने अपने बेटे को अपनी चुचियों की तरफ घूरता हुआ देखकर कहा। (अब कामवासना के जोर से अम्मी भी खुल कर चूचीआं शब्द बोल रही थी. शायद उसने भी सोच लिया था की जब बात गांड और चूत को मसलने तक पहुँच ही चुकी है तो उसे भी तो आगे बढ़ना चाहिए ताकि दोनों माँ बेटे की मन की इच्छा पूरी हो सके ).
अम्मी आपकी चुचियों को देखकर तो लगता है इनमें अब भी बुहत सारा दूध है" मैंने अपनी अम्मी के गोरे चिकने पेट पर तेल की मालिश करते हुए कहा।
"बेटे इन में दूध तब होता है जब किसी औरत को ताज़ा बच्चा हुआ हो और मेरे तो सारे बच्चे बड़े है" अम्मी ने अपने बेटे की बात का जवाब देते हुए कहा ।
"अम्मी मगर हम नहीं मानते हमें तो इनमें अब भी दूध भरा हुआ महसूस हो रहा है" इस बार अहमद ने जानबूझकर अपने हाथों से अपनी अम्मी की दोनों चुचियों की भी मालिश करते हुए कहा।
"ओहहहह बदमाश तुम ऐसे नहीं मानोगे। अगर तुम्हें इतबार नहीं आता तो तुम इन्हें दबा कर देखो दूध होगा तो निकल आयेगा" अम्मी ने अपने बेटे का हाथ अपनी चुचियों पर पडते ही सिसकते हुए कहा।
मैंने अपनी अम्मी की बात सुनकर जल्दी से अपनी दोनों हाथों से अपनी अम्मी की चुचियों को पकड़ लिया और बुहत ज़ोर से उन्हें दबाने लगा।
"ओहहहहह नहीं है दूध हमें तकलीफ हो रही है" अम्मी ने अपने बेटे के हाथों से अपनी दोनों चुचियों पर दबाब पडते ही ज़ोर से चिल्लाते हुए बोली ।
"अम्मी नहीं हम पहले इन्हें चूसकर देखेंगे अगर फिर भी दूध नहीं निकला तो फिर हम हार मान जाएंगे" अहमद ने अपनी अम्मी की दोनों चुचियों को छोड़ते हुए कहा।
"बेते तुम तो बुहत ज़िद्दी हो आ जाओ मेरी चुचियों को चूसकर तसल्ली करके देखो" अम्मी ने अपने बेटे के सामने हार मानते हुए कहा।
मैंने अपनी अम्मी की बात सुनकर जल्दी से नीचे झुककर अपनी अम्मी की एक चूचि को अपने मूह में ले लिया और उसे बुहत ज़ोर से चूसने लगा।
"आजहहह बेटे आराम से दर्द हो रहा है" अम्मी अपने बेटे के मुँह में अपनी चूचि के जाते ही ज़ोर से चिल्लाते हुए बोली, मैंने अपनी अम्मी की बात की तरफ कोई धयान दिए बगैर उसकी दोनों चुचियों को बारी बारी पूरा अपने मुँह में भरकर चूसने लगा ।
"ओहहहह आआह्ह्ह बेटे नहीं है दूध क्यों जिद कर रहे हो" अम्मी ने फिर से ज़ोर से सिसकते हुए कहा।
"हाँ अम्मी आप सच कह रही थी इन में दूध नहीं है। मगर अम्मी आपकी चुचियों का स्वाद तो दूध से ज्यादा मीठा है" अहमद ने अपनी अम्मी की चुचियों को छोडकर उसकी तारीफ करते हुए कहा।
"बेटे अब मेरी तारीफ छोड़ो और खुद सीधे होकर लेट जाओ. तुम्हारा यह अंडरवियर तो आगे से फूलता ही जा रहा है। तुम भी क्या याद करोगे। अभी मैं तुम्हारे इस फूलने को भी ठीक कर देती हूँ और तुम्हारी मालिश कर देती हू" अम्मी ने बेड से उठते हुए कहा।
अहमद अपनी अम्मी की बात सुनकर सीधा लेट गया।
"ओहहह बेटे तुम्हारा लंड भी बुहत सूंदर और तगडा है" अम्मी ने अपने बेटे के लेटते ही उसके अंडरवियर को अपने हाथों से उसके जिस्म से अलग कर दिया ।
(अब अम्मी तो इतनी कामुक हो चुकी थी की उनके मुँह से लण्ड शब्द निकल गया. पर उन्होंने ऐसा शो नहीं किया कि उनसे कुछ गलत बोलै गया हो। मैंने भी सोचा की अम्मी तो बहुत ही कामुक हो चुकी है. लगता है आज काम बन ही जायेगा. इसलिए मैं भी चुप रहा और अम्मी ने मेरे अंडरवियर तो उतार कर मुझे नंगा कर दिया और मेरा टाइट और सख्त लण्ड आसमान की तरफ सर उठाये खड़ा था. )
अम्मी ने अपने हाथ में तेल लगाते हुए अपने बेटे के लंड को पकड लिया और उसे अपने नरम नरम हाथों से तेल की मालिश करने लगी।
"आजहहह अम्मी बुहत मज़ा आ रहा है। आपके हाथ बुहत नरम है" अहमद ने अपनी अम्मी के हाथों को अपने लंड पर जाते ही ज़ोर से सिसकते हुए कहा।
अम्मी अपने हाथों से वैसे ही कुछ देर तक अपने बेटे के लंड की मालिश करने के बाद अपना हाथ वहाँ से हटा ली।
"वाह बेटे अब तो तुम्हारा लंड बिलकुल तनकर चमक रहा है" अम्मी ने अपने बेटे के लंड की तरफ देखते हुए कहा।
अब तो मैंने सोचा की अब तो हद ही हो गयी है। अब इस से आगे और अम्मी मेरे को क्या इशारा कर सकती है. मैं एक मर्द हूँ तो मेरे को ही शुरुआत करनी चाहिए। मैंने अल्लाह को याद करके आखिरी चोट कर ही दी. मैंने अम्मी की चूत पर अपना हाथ रख कर अपनी एक ऊँगली उनकी चूत के अंदर खिसका दी और उसे धीरे धीरे अंदर बाहर करते हुए प्यार से बोला )
"अम्मी मुझसे बर्दाशत नहीं होता क्या मैं इसे आपकी चूत में डाल सकता हूँ" मैंने अपनी अम्मी की आँखों में देखते हुए कहा ।
अम्मी तो न जाने कब से मुझसे इन शब्दों के इन्तजार मैं बैठी थी. वो मेरे इतना बोलते ही खुश हो गयी और मेरे तने हुए लण्ड को प्यार से सहलाते हुए बोली।
"बेटे मैं भी कब से जल रही हूँ । तुम वैसे ही लेटे रहो । मैं खुद तुम्हारे लंड को अपनी चूत में डालती हूँ, पर पहले मुझे अपने प्यारे बेटे के प्यारे लण्ड को थोड़ा प्यार तो कर लेने दो. "
अम्मी ने अपने बेटे की बात सुनने के बाद उससे कहा और अपने होंठ नीचे झुकाते हुए अपने बेटे के लंड को चूम लिया।
"आजहहह अम्मी ऐसा मत करो। मैं ऐसे ही झरना नहीं चाहता" अपनी अम्मी के नरम होंठ अपने लंड पर पड़ते ही मैंने ज़ोर से सिसकते हुए कहा । अम्मी ने अपने बेटे की बात को सुनते ही अपने होंठो को उसके होंठो पर रख दिया और अपने बेटे के साथ कुछ देर तक फ्रेंच किस में खो गयी। अम्मी ने वैसे ही अपने बेटे को चूमते हुए अपनी टांगों को फ़ैलाकर अपने बेटे के पेट पर बैठ गयी ।
अहमद का लंड अपनी अम्मी की गांड को टक्कर मार रहा था, अम्मी ने कुछ देर तक अपने बेटे के साथ चूमा चाटी करने के बाद उसके होंठो से अपने होंठो को अलग करते हुए नीचे होकर अपने बेटे का लंड पकड लिया और अपने चूतडो को ऊपर उठाकर अपने बेटे के लंड को अपनी चूत पर रगडने लगी।
"आह्ह्ह्ह अम्मी डाल दो ना स्स्स्सह्ह्ह्ह" मैं अपने लंड को अपनी अम्मी की गीली चूत पर रगडते हुआ देखकर ज़ोर से सिसकता हुआ बोला । अम्मी ने अपने बेटे की हालत देखकर अपने बेटे के लंड को सीधा अपनी चूत के छेद पर टीका दिया और अपने बेटे के आँखों में देखने लगी ।
अम्मी अपने बेटे की बात सुनकर उसके लंड पर अपना वजन रखते हुए बैठने लगी, अम्मी के वजन के साथ नीचे ज़ोर लगाने से उसके बेटे का लंड सरकता हुआ उसकी चूत में घूसने लगा । अम्मी जैसे जैसे नीचे वजन डालकर बैठ रही थी वैसे वैसे उसके बेटे का लंड उसकी चूत में घुस रहा था, अम्मी को अपने बेटे का लंड अपनी गीली चूत में घुसते हुए बुहत मज़ा दे रहा था।
"आह्ह्ह्ह अम्मी तुम्हारी चूत तो बुहत गरम और टाइट है ओह्ह्ह्ह बुहत मज़ा आ रहा है" मैं भी अपने लंड को अपनी अम्मी की चूत में घुसते हुए देखकर सिसककर बोला।
"आआह्ह्ह्हह बेटे तुम्हारा लंड भी कुछ कम नहीं मेरी चूत से तीन बच्चे निकल चुके हैं फिर भी तुम्हारे लंड ने इसको बुरी तरह से फ़ैला रखा है" अम्मी ने भी उत्तेजना के मारे अपने बेटे से कहा और इस बार बुहत ज़ोर के साथ अपने बेटे के लंड पर बैठ गई।
"आह्ह्ह्ह बेटे तुम्हारा लंड तो बुहत लम्बा और मोटा है मुझे तुमहारा लंड तो मेरी चूत के आखरी हिस्से तक महसूस हो रहा है" अम्मी ने अपने बेटे का लंड अपनी चूत में पूरा घूसने के बाद सिसकते हुए कहा।
"आह्ह्ह्ह अम्मी मुझे भी तो अपना लंड किसी गरम भट्टी में घुसा हुआ महसूस हो रहा है" मैं ने अपनी अम्मी की चुचियों को पकडकर सहलाते हुए कहा ।
"हाँ बेटा शायद तुम सच कह रहे हो। मेंरी चूत कुछ दिनों से चुदाई न होने के सबब बुहत गरम रहने लगी है" अम्मी ने अब अपनी चूत को थोडा ऊपर करते हुए अपने बेटे के लंड पर उछलते हुए कहा । मैं ने भी उत्तेजना में अपनी अम्मी को नीचे से अपने लंड से धक्के देना शुरू कर दिये, अम्मी को अपने बेटे के लंड से चुदते हुए इतना मज़ा आ रहा था की वह अब बुहत ज़ोर से सिसकते हुए अपने चूतडों को पूरी तेज़ी के साथ ऊपर नीचे करते हुए अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में ले रही थी।
अम्मी की साँसें अपने बेटे के लंड पर कूदते हुए बुहत ज़ोर से चल रही थी उसकी चूत से उत्तेजना के मारे जाने कितना पानी निकल रहा था। जिस वजह से अब उसके बेटे का लंड उसकी चूत में बुहत आसानी और तेज़ी के साथ अंदर बाहर हो रहा था । अम्मी भी अपने बेटे के लंड को अपनी चूत से उसके टोपे तक निकालकर फिर धम के साथ नीचे बैठ रही थी। ऐसा करते हुए अम्मी का अंग अंग काँप रहा था और वह उत्तेजना के मारे बुहत ज़ोर की सिसकियाँ लेकर अपने बेटे के लंड पर ऊपर नीचे हो रही थी ।
"आह्ह्ह्ह बेटे मैं झरने वाली हूँ ओहहहह तुम्हारे लंड तो मेरी चूत को जवान बना चूका है" अम्मी यह कहते हुए अपने बेटे के लंड पर ज़ोर से ऊपर नीचे होने लगी, उसका पूरा जिस्म उत्तेजना के मारे कांप रहा था । अम्मी जैसे ही अपने बेटे के लंड से अपनी चूत को ऊपर करके फिर नीचे होने लगती। मैं भी अपने चूतडों को उठाकर उसकी चूत में ज़ोर से अपना लंड डाल देता। जिस वजह से अम्मी के मुँह से ज़ोर की सिसकी निकल जाती ।
आआह्ह्ह्ह बेटे में आई ओह्ह्ह्हह इसशहहह" अम्मी का जिस्म अचानक अकडने लगा और वह बुहत ज़ोर से अपने बेटे के लंड पर उछलते हुए झरने लगी । अम्मी ने झरते वक्त अपनी आँखें बंद कर ली और निढाल होकर अपने बेटे के ऊपर लेटकर झरने का मज़ा लेने लगी, मैं ने अपनी अम्मी की कमर में हाथ ड़ालते हुए नीचे से अपने चूतडों को उछालते हुए अपनी अम्मी की चूत में धक्के लगाने लगा ।
"हाहहह बेटे सच में तुम ने आज अपनी अम्मी को पूरी तरह से संतुष्ट कर दिया है, तुम्हारा लंड जिस औरत की चूत में घुसेगा वह तुम्हारी गुलाम बन जाएगी" अम्मी ने कुछ देर तक निढाल रहने के बाद अपने आँखें खोलकर अपने बेटे से कहा और अपने बेटे के होंठो पर अपने होंठ रखते हुए उसके होंठो को चूमने लगी ।
अम्मी ने अपने बेटे के होंठो को चूमते हुए अपनी जीभ को उसके मुँह में डाल दिया । मैं अपनी अम्मी की जीभ को अपने मुँह में महसूस करके उत्तेजना के मारे अपनी अम्मी की जीभ को अपने होंठ के बीच लेकर ज़ोर से चूसते हुए उसकी चूत में अपने लंड को बुहत ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा।
अम्मी की चूत एक बार झरने के बाद फिर से गरम होने लगी थी। अम्मी ने अपने बेटे के मुँह से अपनी जीभ को निकालकर अपनी चुचियों को अपने बेटे के मुँह के पास लहराने लगी । मैं ने अपनी अम्मी की गोरी गोरी चुचियों को अपने मूह के सामने देखकर उन्हें अपने हाथों से पकडते हुए एक एक करके अपने मुँह में भरकर चूसने लगा ।
"ओहहहह बेटे बुहत मज़ा आ रहा है। ऐसे ही अपनी अम्मी की चुचियों का रस पीकर अपने लंड को मेरी चूत में अंदर बाहर करो" अम्मी अपनी चुचियों के अपने बेटे के मुँह में चूसते हुआ महसूस करके ज़ोर से सिसकते हुए बोलने लगी।
मैं ने कुछ देर तक अपनी अम्मी की चुचियों को चूसने के बाद उसे अपने ऊपर से उठाते हुए उलटा लिटा दिया और अपनी अम्मी के पीछे आते हुए अपना लंड उसकी चूत में पीछे से पेल दिया।
"आहहह सशःह्ह्ह बेटे "अम्मी अपने बेटे का लंड पीछे से अपनी चूत में एक बार में ही पूरा अंदर घूसने से ज़ोर से चिल्लाते हुए बोली ।
अहमद अपनी अम्मी के दोनों चूतडों में हाथ डालकर अपनी अम्मी की चूत में अपना लंड बुहत ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा।
"आहहह बेटे हाँ ऐसे ही ओहहहह बुहत मज़ा आ रहा है" अम्मी भी अपने बेटे के लंड पर अपने चूतडों को पीछे धकेलते हुए उसका लंड अपनी चूत में लेते हुए सिसक कर कहने लगी।
मुझे अचानक अपनी अम्मी की गांड का भूरा छेद नज़र आ गया और मैंने अपनी अम्मी की चूत में अपना लंड अंदर बाहर करते हुए अपने हाथ को अपनी अम्मी की गांड पर रख दिया । मैंने अपनी अम्मी की गांड को अपने हाथ से मसलते हुए अपनी एक ऊँगली को उसकी गांड के छेद में रखकर टटोलने लगा।
"ओहहहह बेटे क्या कर रहे हो वहां" अम्मी अपने बेटे की ऊँगली को अपनी गांड के छेद पर महसूस करके चौकते हुए बोली । अम्मी का पूरा जिस्म अपने बेटे की ऊँगली को अपनी गांड के छेद पर महसूस करके सिहर उठा था ।
मैं अपनी अम्मी की बात पर कोई ध्यान दिए बगेर अपनी ऊँगली से अपनी अम्मी की गांड के छेद को कुरेदने लगा । अम्मी को अपने बेटे की ऊँगली अपनी गांड के छेद में कुरेदते हुए बुहत ज्यादा मज़ा दे रही थी। इसीलिए वह ज़ोर से सिसकते हुए अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में अंदर बाहर होता हुआ महसूस कर रही थी ।
मैं ने अचानक अपनी अम्मी की गांड के छेद को कुरेदते हुए अपनी ऊँगली को अपनी अम्मी की गांड में घुसा दिया,
"उईई बेटे यह क्या कर दिया तुमने" अपने बेटे की ऊँगली के अपनी गांड में जाते ही अम्मी ने ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा
मैं अपनी ऊँगली को यों ही अपनी अम्मी की गांड में घुसाये हुए अपने लंड को उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा।
"ओहहहहह आह्ह्ह्ह बेटे अब तो बुहत मज़ा आ रहा है" अम्मी अपने बेटे के लंड को अपनी चूत और उसकी ऊँगली अपनी गांड में डाले हुए मज़े के मारे सिसकते हुए बोली ।
मैं कुछ देर तक यों ही अपनी अम्मी की चूत को चोदने के बाद अब अपनी ऊँगली को अपनी अम्मी की गांड में हिलाते हुए अंदर बाहर करते हुए उसकी चूत को चोदने लगा । मेरा पूरा जिस्म ऐसा करते हुए बुहत ज़ोर से कांप रहा था।
"आजहहह बेटे मैं झरने वाली हूँ ओहहहह मुझे बुहत मज़ा आ रहा है। मेरे दोनों छेदों में हरकत होने से मुझे बुहत ज्यादा मज़ा आ रहा है" अम्मी ने अपने बेटे की ऊँगली को अपनी गांड और उसके लंड को अपनी चूत में अंदर बाहर होने से बुहत ज्यादा एक्साइटेडट होते हुए कहा ।
"अम्मी मैं भी आने वाला हूँ। ओहहहह अम्मी आपने आज मुझे जन्नत का मज़ा दिया है" मैं भी अपनी अम्मी की बात सुनकर बुहत ज़ोर से सिसकते हुए बोला । मैंअपनी अम्मी की चूत में बुहत तेज़ी के साथ अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था और साथ में अपनी ऊँगली को भी तेज़ी के साथ अपनी अम्मी की गांड में अंदर बाहर कर रहा था।
अम्मी अपने बेटे से चुदवाते हुए मज़े से हवा में उड़ रही थी, अम्मी को जो मज़ा अपना बेटा दे रहा था वह उसे आज तक किसी से नहीं मिला था । अम्मी का पूरा जिस्म उत्तेजना के मारे अकडने लगा था और वह मज़े के मारे अपने चूतडों को बुहत ज़ोर के साथ अपने बेटे के लंड पर पीछे धकेलने लगी ।
"ओहहहह अम्मी में आ रहा हूँ कहाँ झडुँ" मैं ने अचानक चिल्लाते हुए कहा।
"बेटा मेरी चूत में झरो अपनी अम्मी की प्यासी चूत को अपने वीर्य से भर दो" अम्मी ने अपने बेटे की बात सुनकर जल्दी से कहा । मैंअपनी अम्मी की बात सुनकर उसकी गांड से अपनी ऊँगली को निकालते हुए उसके चूतडों को पकडकर बुहत ज़ोर से उसकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर करते हुए हाँफते हुए झरने लगा।
"आह्ह्ह्ह बेटे तुम्हारा वीर्य बुहत गरम है ओहहहह। मैं भी आ रही हूँ इशहहहहह बेटे" अम्मी अपने बेटे का गरम वीर्य अपनी चूत में पड़ते ही उत्तेजना के मारे ज़ोर से हाँफते हुए वह भी झरने लगी । अम्मी ने झरते हुए अपनी आँखें बंद कर ली और अपने चूतडों को ज़ोर से पीछे धकलते हुए अपने बेटे का लंड अपनी चूत में लेने लगी।
मेरा लंड पूरी तरह झरने के बाद अपनी अम्मी की चूत से सिकुड़ कर निकल आया और वह निढाल होकर बेड पर लेट गया । अम्मी भी अपने बेटे का लंड अपनी चूत से निकलने के बाद निढाल होकर वही ढेर हो गयी ।
इस तरह मैंने अपनी अम्मी को अपनी हवस का शिकार बना ही लिया और मेरी अम्मी मेरी मेहबूबा बन कर अपने बेटे से चुद गयी.
हम दोनों माँ बीटा अपने पहले सेक्स से बहुत थक गए थे तो काफी देर तक हम मुर्दों की तरह पड़े रहे.
फिर काफी देर के बाद अम्मी ने अपनी आँखें खोली और मेरी तरफ प्यार से देखा. मैंने भी अपनी अम्मी को बाँहों में ले लिया और उन्हें प्यार से होंठों पर चूमने लगा.
अम्मी ने कहा. "बेटे बहुत टाइम हो गया है. तुम्हारी बहन भी आने वाली होगी. अब मुझे उठने दो ताकि मैं घर का काम और डिनर की तयारी कर सकूँ.
मैंने प्यार से उन्हें कहा "अम्मी मुझे आपकी चुदाई में बहुत मजा आया. प्लीज मुझे एक बार और चुदाई करने दो फिर आप घर का काम कर लेना. "
पर अम्मी ने मुझे मना कर दिया क्योंकि समय बहुत हो गया था और बहन के भी आने का समय हो चूका था।
तो मैंने अपने दिल पर पत्थर रख कर माँ को जाने दिया.
अम्मी मेरी हालत समझ सकती थी. वैसे तो उनका भी मन एक बार और चुदवाने का था पर वक्त की नजाकत समझ कर वो उठ कर चली गयी.
फिर बहन आ गयी और हमे मौका नहीं मिला की एक और राउंड चोद सकते। फिर इसी तरह रात में हम सो गए.
सुबह जब मैं उठा तो काफी दिन चढ़ आया था. अम्मी किचन में नाश्ता त्यार कर रही थी.. मैं चुपचाप किचन में गया और अम्मी को पीछे से जफ्फी डाल कर अपना लण्ड उनकी गांड में रगड़ता हुआ प्यार से बोला।
मैं : सुप्रभात अम्मी.
अम्मी: गुड मॉर्निंग बेटा, बहुत खुश लग रहा है। बात क्या है?
मैं : मैं हल्का महसूस कर रहा हूं बस, इसलिए (अम्मी समझ गई)।
अम्मी ने किचन का अपना काम ख़तम कर लिया था पर मैं अपना लण्ड उनकी गांड में रगड़ ही रहा था और उन्हें छोड़ नहीं रहा था. तो अम्मी मुझे प्यार से परे करती हुई बोली.
अम्मी: मुझे छोड़ो, नहाने जाना है मुझे।
मैं :" अम्मी एक राउंड चोदने दो न. मेरा लण्ड देखो कितने जोर से खड़ा है. बहुत दुःख रहा है."
अम्मी: "नहीं बेटा अभी समय नहीं है। तुम्हारी बहन जाग गयी तो वो किचन में आ सकती है. हम तुम्हारे अब्बा और बहन के जाने के बाद कर सकते हैं. "
मैं:" अम्मी में अभी आपको एक शरत पर जाने दूंगा. आप वायदा करो की आप मुझे अपनी गांड भी मारने डौगी. मुझे आपकी गांड बहुत प्यारी लगती है. मैं आपकी गांड मारना चाहता हूँ."
अम्मी: "ठीक है बेटा, तुम मेरी गांड मार लेना पर मेरी भी एक शरत है."
यह कह कर अम्मी मेरी आँखों में देखने लगी.
अम्मी: बेटा.
मैं : हा अम्मी.
अम्मी: ये मालिश वाली बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए।
मैं : मुझे पता है अम्मी.
अम्मी: तेरे अब्बा या बहन को भी नहीं.
मैं : मैं समझत हू अम्मी. ये हमारा सीक्रेट है, ठीक है.
(अम्मी मुस्कुरा दी)
उन्होंने मुझे प्यार से चूमा और नहाने के लिए बाथरूम की तरफ चल दी.
मैं प्यार से अपने तने हुए लण्ड को सहलाते हुए बोला, "कोई बात नहीं मेरे प्यारे लौड़े, आज तुझे अपनी माँ की गांड मारने का पूरा मौका मिलेगा."
तो इस तरह मेरा और मेरी अम्मी का प्यार का रिश्ता शुरू हुआ जो आज तक चल रहा है. हम माँ बेटा रोज चुदाई करते हैं. और कभी चूत और कभी गांड के मजे लेते है.,
अब मैं उन्हें पीठ के बल लेटने कहा। अम्मी चुप चाप पीठ के बल लेट गयी। अब मैं उनकी जाँघों को मसल रहा था। अम्मी की आँखे बंद थी, चेहरे पर अलग किसम की ख़ुशी दिख रही थी। मैं जान बुझ के अम्मी की मखमली चूत को बार बार छू रहा था, अम्मी हल्की सी सिसकारी ली मेरे छूने से।
इससे मेरी हिम्मत बढ़ गई, अब मैं सीधे उनकी चूत को सहलाने लगा, उनकी चूत के होंठों को अपनी उंगलियों से अलग कर रहा था।
मुझे पता है कि अम्मी सेक्स के लिए बेताब है, लेकिन हमारे रिश्ते का लिहाज कर रही है। अम्मी चुप चाप लेती रही, वो या तो नींद में होने का नाटक कर रही थी या फिर ऐसा दिखावा कर रही थी कि जैसे कुछ भी असामान्य न हो रहा हो. इस से मेरा भी होंसला बढ़ गया और मैं अम्मी की चूत को जोर से मसलने लगा। अम्मी भी चुप चाप मजा लेती लेती रही।
मैंने अम्मी को फिर से उल्टा हो जाने को कहा और अम्मी तुरंत पेट के बल लेट गयी. अब फिर से उनकी गांड मेरे सामने थी.
अम्मी इस उलटे पोज़ में मालिश करवाने में ज्यादा खुश थी क्योंकि इस तरह से उनको अपना मुँह नीचे कर सकने की सुविधा थी और उन्हें मेरी तरफ देखने में शर्म आती थी.
मैंने थोड़ा आगे बढ़ने का सोच और बोला।
मैं : अम्मी इस तरह से मुझे मालिश करने में ऐसी दिक्कत हो रही है और इस पे मसाज करना थोड़ा मुश्किल हैं। (मैंने गांड शब्द का इस्तेमाल नहीं किया), क्या मैं साया ढीला कर दूं?
अम्मी: हम्म. ( बेचारी ऐसा तो कह नहीं सकती थी कि बीटा अहमद जल्दी से मेरा साया खोल दो तो बस हम्म कहा )
मैं साया का नाडा खोल दिया, अब उनका साया ढीला हो चुका था। मैं अपना हाथ ऊपर से घुसा के उनके गोरे गांड पे हाथ फेरने लगा इसे उनका साया नीचे हो गया या उनकी गोरी गांड मुझे दिखने लगी।
अम्मी भी मजा ले रही थी, उन्हें पता नहीं चला कब मैं उनका साया उनकी गांड के नीचे ला रखा। मुझे अम्मी की चूत भी दिखने लगी, ना गोरा ना काला, उसपे बहुत झांटे थी ।
मुझे पता था अम्मी आज ज्यादा कुछ नहीं बोलेगी, अब मैं उन्हें बहुत गरम कर चुका हूं। मैंने अपना हाथ बढ़ा के उनकी चूत पर रखा या धीरे-धीरे सहलाने लगा।
अम्मी: तू मेरी बात कभी मानता क्यों नहीं? (हल्की आवाज में)
मैं : मैं हमेशा मानता हूं. अब क्या किया मैंने?
अम्मी: (सिसकारी लेती हुई) कल कुछ बोली थी तुझे.
मैं : (नाटक करने लगा) मैं भूल गया, फिर से बोलो।
अम्मी: (मैं उनकी चूत सहला रहा था ) आआह बेटा। कुछ नहीं.
मैं अंदर हसने लगा, जैसे मैंने सब कुछ हासिल कर ली हो। अब मेरी अम्मी की गांड या चूत की खातिर अच्छे से की, वो धीरे धीरे सिसकियाँ लेती रहती थी। मैं अनके चूत को ज्यादा नहीं छू रहा था, क्योंकि अगर वो उठ के चली गई तो फिर प्लान फ्लॉप हो जाएगा।
मैं : अम्मी रोज़ तुम्हारा ब्लाउज ख़राब हो जाता है, प्रॉब्लम नहीं होती क्या उसे धोने में?
अम्मी: तो अब क्या ब्लाउज़ भी निकालोगे?
मैं : अच्छा होंगा अगर आप अपने ब्लाउज भी निकाल दो. इस तरह मालिश आराम से होगा और धोने का भी टेंशन नहीं, ब्लाउज निकाल दो
(मासूम बनते हुए)
अम्मी : तू फालतू बातें बंद करके अपना हाथ चला, तू मुझे ऐसे नहीं देख सकता।
मैं : बचपन में कई बार तो देखा मैंने, अभी भी तो बेटा ही हुआ तुम्हारा।
अम्मी: लेकिन बेटा तू बड़ा हो गया है।
मैं : लेकिन अम्मी के नज़रो में तो बेटा हमेशा छोटा ही होता है ना?
अम्मी: बेटे लगता है की तुझे बातों में कोई हरा नहीं सकता. रुक... वो जैसी ही रुक बोली मैं ख़ुशी से जैसे आसमान पे चला गया, मुझे पता था अब मैं जन्नत जाने वाला हूं। वो अपने ब्लाउज का हुक निकल रही थी, मुझे पता था की वो ब्रा नहीं पहनी है। वो ब्लाउज खोलकर साइड में रख दी, उनके गोल मटोल दूध देखके मेरा लंड फट जा रहा था, मेरी अम्मी मेरे हालात को देख ली और सिर्फ एक स्माइल दी। वो भी अपने मम्मे दिखने से शर्मा रही थी पर उन्होंने भी अपने मम्मे छुपाने की कोई कोशिश नहीं की.
अम्मी: अब तू बड़ा हो गया है, मेरी बाते सुननी चाहिए तुझे (ये बोलके वो लेट गई)
मैं : अम्मी मैं छोटा हूँ अभी भी।
अम्मी का साया अभी भी ढीला था, ब्लाउज़ खोलते समय उन्हें साया सही कर लिया था (शयद अभी भी उन्हें शर्म आ रही थी) लेकिन नाडा खुला ही था। मैं अम्मी के दूध देखते हुए उनके हाथ, कंधे, पेट पर अच्छे से मालिश किया।
मैं : अम्मी यहां मालिश कर दू (दूध को दिखाते हुए)
अम्मी : यहां की मालिश कोई जरूरी नहीं है. क्योंकि यहां पर कोई दर्द नहीं है.
मैं उनकी ना को हा मानते हुए अपना हाथ चुप चाप उनके दूध पर रख दिए, वो थोड़ी देर मेरे आंखों में देखने लगी, फिर अपनी आंखें बंद कर दी। मुझे अब हरा सिग्नल मिल चुका था, मैं उनके चूचियों को हल्का दबा के मालिश कर रहा था, करीब एक मिनट बाद अम्मी के निपल्स खड़े हो गए।
अब मैं उनके निपल्स दबाने लगा, अम्मी अपने होठों को काट रही थी या सिस्कारिया ले रही थी। ऐसे करीब 20 मिनट करने के बाद अब मैंने उनके जांघों को मालिश करने लगा, अब मैंने भी कंट्रोल खो दिया था।
मैंने अम्मी के साया को उनकी चूत के नीचे खिसका दिया, अब उनका चूत साफ नज़र आ रहा था, मैं उनके चूत के ऊपर से मालिश कर रहा था।
फिर मैंने धीरे से उनकी चूत पर उंगली फेरा या धीरे-धीरे उनकी चूत सहलाने लगा, उनकी आंखें बंद थीं। मैं उनकी चूत के गुलाबी पंखों को अलग किया, ओह क्या नजारा था। उनको काफी देर हल्का सा मसलने के बाद अम्मी की चूत गिली हो चुकी थी।
अब मुझे एक आइडिया सूझा (मैं अम्मी को या बेबस करना चाहता था, उनके अंदर या कामवासना लाना चाहता था ताकि अम्मी मेरा लंड लेने को तड़प उठे। अभी अगर वो झड़ जाती तो शायद फिर कल से ये सब ना होता) मैं अब सोच लिया उस रात को भी अम्मी की चूत नहीं चाटूँगा,
जब अम्मी ने देखा कि मैं उनकी चूत को चाट नहीं रहा तो वो थोड़ा सा हैरान हो रही थी. वो भी चाहती थी कि मैं आगे बढूं पर मैं अपनी अम्मी को तड़पा रहा था ताकि उनकी कामवासना और तेज हो जाये और मुझे उनको चोदने का मौका मिल सके.
जब अम्मी ने देखा कि मैं उनकी चूत को सिर्फ देख रहा हूँ और ऊँगली वगैरा नहीं डाल रहा तो वो बोली
"क्या देख रहे हो बेटा मालिश करो ना" अम्मी ने मुझे अपने जिस्म की तरफ घूरता हुआ देखकर कहा । मैं अपनी मम्मी की बात सुनकर जल्दी से बोतल में से तेल निकालकर अपनी अम्मी की नंगी जांघों पर लगाकर मालिश करने लगा।
"आह्ह्ह्ह बेटा ओह तुम्हारे हाथों से तो 'बहुत बुहत मजा आ रहा है अपने हाथों से ऊपर तक मालिश करो" अम्मी ने अपने बेटे के हाथों को अपनी जांघों पर महसूस करके मज़े के मारे ज़ोर से सिसकते हुए कहा। असल में वो चाहती थी कि मैं उनकी चूत की मालिश जोर जोर से करूँ.
अपनी अम्मी की जांघों की मालिश करते हुए मेरा लंड अंडरवियर में पूरी तरह तनकर झटके मारना शुरू कर दिया था । मैंने अपने हाथ को अपनी अम्मी की जाँघ के ऊपर तक रगडते हुए उसकी मालिश करने लगा, अपनी अम्मी के जांघों की मालिश करते हुए मेरा हाथ बार बार अपनी अम्मी की चूत को छु रहा था अम्मी की हालत भी खराब होने लगी। अपने बेटे के हाथ को अपनी चूत पर महसूस करके उसकी चूत पानी टपकाने लगी । मेरा लंड अंडरवियर में आन्दोलन मचाने लगा था।
"ओहहहहह बेटा यह तुम्हारा अंडरवियर इतना फूला हुआ क्यों है" अम्मी ने अपनी जांघों को मज़े से अपने बेटे से मालिश कराते हुए कहा। शायद उन्होंने सोच लिया था की उनको भी कुछ करना पड़ेगा ताकि बात कुछ आगे तो बढे।
"वो अम्मी पता नहीं क्यों मेरा यह आपके जिस्म को छूते ही उठकर खडा हो गया है" मैंने बड़ी बेशरमी से अपनी अम्मी को जवाब देते हुए कहा।
"आआह्ह्ह्ह हाँ बेटे तुम्हारा क़सूर नहीं है तुम अब जवान हो चुके हो। अपनी अम्मी की नंगी जाँघ की मालिश करते हुए तो तुम्हारा यह तो उठेगा ही" अम्मी ने अपने बेटे की बात सुनने के बाद सिसकते हुए कहा ।
"अम्मी प्लीज एक बार मेरे शरीर की भी मालिश कर दो जैसे मैं आपके जिस्म की कर रहा हूँ" अहमद ने अपनी अम्मी की बात सुनने के बाद कहा।
"क्या कहा बेटे अपनी अम्मी से अपने शरीर ड की मालिश कराना चाहते हो" अम्मी ने हैंरान होते हुए कहा।
"हा अम्मी मैं आपके नरम हाथों से अपने शरीर की मालिश कराना चाह्ता हू" मैंने इस बार अपनी अम्मी की नंगी चूत के ऊपर अपने हाथ को रखते हुए कहा।
"आआह्ह्ह्हह हहहहह बेटे पहले तुम अपनी जादुई हाथों से हमारे पूरे शरीर का दर्द तो मिटाओ" अम्मी ने अपने बेटे का हाथ अपनी चूत पर पड़ते ही सिसकते हुए कहा।
"हा अम्मी मैं आपके सारे जिस्म की मालिश करता हूँ फिर आप मेरे जिस्म की मालिश करना" मैंने अपनी अम्मी की बात सुनकर खुश होते हुए कहा ।
"बेटे मै उलटी होकर लेट जाती हूँ। तुम मेरी पीठ की मालिश करो" अम्मी ने अपने बेटे की तरफ देखते हुए कहा और खुद उल्टा होकर लेट गई।
अब मेरे सामने अम्मी की पीठ अब बिलकुल नंगी थी । मैंने बोतल में से तेल निकालकर अपनी अम्मी के चिकने पीठ की मालिश करनी शुरू कर दिया।
ओहहह बेटा हाँ ऐसे ही ज़ोर लगा कर मालिश करो। बहुत मजा आ रहा है" अम्मी अपनी पीठ पर अपने बेटे का मर्दाना हाथ लगते ही ज़ोर से चिल्लाते हुए बोली। मैंने अपनी अम्मी की बात सुनकर उसकी पीठ की मालिश बुहत ज़ोर लगा कर करने लगा, मेरा हाथ अपनी अम्मी की पीठ की मालिश करते हुए बुहत गरम हो चुका था।
मेरा लंड भी पूरी तरह अकड कर झटके मार रहा था।
"बेटे अब थोडा नीचे भी मालिश करो" अम्मी कुछ देर तक अपने बेटे के हाथों से अपनी पीठ की मालिश कराने के बाद बोली, वो अपनी गांड या चूतड़ पर अपने बेटे का हाथ महसूस करना चाहती थी.
मैंनेअपना हाथ नीचे करते हुए अपनी अम्मी की चूतड़ों के थोडा ऊपर मालिश करने लगा । मेरा हाथ बार बार वहां पर मालिश करते हुए अम्मी की चूत से टकरा रहा था।
"आआह्ह्ह्ह बेटे थोडा और नीचे करो ना" अम्मी अपने बेटे के हाथ को अपने चूतडों के इतना क़रीब महसूस करके ज़ोर से सिसकते हुए बोली।
मैं गौर से अपनी अम्मी की तरफ देखने लगा । मेरी साँसें अपनी अम्मी को घूरते हुए बुहत ज़ोर से चल रही थी, मुझे अपनी अम्मी के चूतड़ के बीच गांड का भूरा छेद बुहत अच्छा लग रहा था और मुझे अपनी अम्मी की चूत की झांटें भी पीछे से नज़र आ रही थी।
"बेटे मालिश करो न क्या देख रहे हो" अम्मी ने कुछ देर तक चुप होकर बैठने के बाद कहा । मैंने अपनी अम्मी की बात सुनते ही अपने हाथ में तेल को लगाकर अपनी अम्मी के मोटे मोटे चूतडों की मालिश करने लगा, अपनी अम्मी के चूतडों की मालिश करते हुए जानबूझकर उसकी गांड के छेद को अपनी उँगलियों से टटोल रहा था ।
"ओहहहहह बेटे बुहत मजा आ रहा है ऐसे ही करते रहो" अम्मी अपने बेटे की उँगलियों को अपनी गांड के छेद पर लगते ही गरम होकर ज़ोर से सिसककर बोली। मैं कुछ देर तक यों ही अपनी अम्मी के चूतडों की मालिश करते हुए अब अपने हाथ को पीछे से उसकी चूत तक मालिश करने लगा।
"ओहहहह इसशहहह बेटा बुहत अच्छे से कर रहे हो ऐसे ही हा" अम्मी अपने बेटे के हाथ को अपनी चूत पर महसूस करके ज़ोर से सिसकते हुए बोली।
मैं अब अपना हाथ पूरी तरह अपनी अम्मी की चूत और उसकी गांड पर फिराने लगा । मेरे ऐसा करने से अम्मी ज़ोर से सिसक रही थी और उसकी चूत से उत्तेजना के मारे बुहत ज्यादा पानी निकल रहा था। मुझे अपने हाथ पर अपनी अम्मी का रस भी लगता हुआ महसूस हो रहा था।
"बेटे बस अब ज़रा मेरे पेट की मालिश करो" अम्मी को अचानक क्या सूझा जो उसने अपने बेटे को रोकते हुए कहा ।
मैंने अपनी अम्मी की बात सुनकर अपने हाथ को अपनी अम्मी के चूतडो से हटा लिया । अम्मी अपने बेटे के हाथों के रुकते ही फ़ौरन सीधा हो गयी, मेरा लंड अपनी अम्मी के सीधा होते ही उसकी गोरी नंगी चुचियों को देखकर उत्तेजना के मारे उसके अंडरवियर को फाडने लगा ।
"बेटे तुम तो मेरी चुचियों को ऐसे घूर रहे हो जैसे कभी किसी की चुचियां देखी ही न हो । तुमको 2 साल तक इनका दूध पिलाकर बड़ा किया है । अब देखना छोड़ो और मालिश करो" अम्मी ने अपने बेटे को अपनी चुचियों की तरफ घूरता हुआ देखकर कहा। (अब कामवासना के जोर से अम्मी भी खुल कर चूचीआं शब्द बोल रही थी. शायद उसने भी सोच लिया था की जब बात गांड और चूत को मसलने तक पहुँच ही चुकी है तो उसे भी तो आगे बढ़ना चाहिए ताकि दोनों माँ बेटे की मन की इच्छा पूरी हो सके ).
अम्मी आपकी चुचियों को देखकर तो लगता है इनमें अब भी बुहत सारा दूध है" मैंने अपनी अम्मी के गोरे चिकने पेट पर तेल की मालिश करते हुए कहा।
"बेटे इन में दूध तब होता है जब किसी औरत को ताज़ा बच्चा हुआ हो और मेरे तो सारे बच्चे बड़े है" अम्मी ने अपने बेटे की बात का जवाब देते हुए कहा ।
"अम्मी मगर हम नहीं मानते हमें तो इनमें अब भी दूध भरा हुआ महसूस हो रहा है" इस बार अहमद ने जानबूझकर अपने हाथों से अपनी अम्मी की दोनों चुचियों की भी मालिश करते हुए कहा।
"ओहहहह बदमाश तुम ऐसे नहीं मानोगे। अगर तुम्हें इतबार नहीं आता तो तुम इन्हें दबा कर देखो दूध होगा तो निकल आयेगा" अम्मी ने अपने बेटे का हाथ अपनी चुचियों पर पडते ही सिसकते हुए कहा।
मैंने अपनी अम्मी की बात सुनकर जल्दी से अपनी दोनों हाथों से अपनी अम्मी की चुचियों को पकड़ लिया और बुहत ज़ोर से उन्हें दबाने लगा।
"ओहहहहह नहीं है दूध हमें तकलीफ हो रही है" अम्मी ने अपने बेटे के हाथों से अपनी दोनों चुचियों पर दबाब पडते ही ज़ोर से चिल्लाते हुए बोली ।
"अम्मी नहीं हम पहले इन्हें चूसकर देखेंगे अगर फिर भी दूध नहीं निकला तो फिर हम हार मान जाएंगे" अहमद ने अपनी अम्मी की दोनों चुचियों को छोड़ते हुए कहा।
"बेते तुम तो बुहत ज़िद्दी हो आ जाओ मेरी चुचियों को चूसकर तसल्ली करके देखो" अम्मी ने अपने बेटे के सामने हार मानते हुए कहा।
मैंने अपनी अम्मी की बात सुनकर जल्दी से नीचे झुककर अपनी अम्मी की एक चूचि को अपने मूह में ले लिया और उसे बुहत ज़ोर से चूसने लगा।
"आजहहह बेटे आराम से दर्द हो रहा है" अम्मी अपने बेटे के मुँह में अपनी चूचि के जाते ही ज़ोर से चिल्लाते हुए बोली, मैंने अपनी अम्मी की बात की तरफ कोई धयान दिए बगैर उसकी दोनों चुचियों को बारी बारी पूरा अपने मुँह में भरकर चूसने लगा ।
"ओहहहह आआह्ह्ह बेटे नहीं है दूध क्यों जिद कर रहे हो" अम्मी ने फिर से ज़ोर से सिसकते हुए कहा।
"हाँ अम्मी आप सच कह रही थी इन में दूध नहीं है। मगर अम्मी आपकी चुचियों का स्वाद तो दूध से ज्यादा मीठा है" अहमद ने अपनी अम्मी की चुचियों को छोडकर उसकी तारीफ करते हुए कहा।
"बेटे अब मेरी तारीफ छोड़ो और खुद सीधे होकर लेट जाओ. तुम्हारा यह अंडरवियर तो आगे से फूलता ही जा रहा है। तुम भी क्या याद करोगे। अभी मैं तुम्हारे इस फूलने को भी ठीक कर देती हूँ और तुम्हारी मालिश कर देती हू" अम्मी ने बेड से उठते हुए कहा।
अहमद अपनी अम्मी की बात सुनकर सीधा लेट गया।
"ओहहह बेटे तुम्हारा लंड भी बुहत सूंदर और तगडा है" अम्मी ने अपने बेटे के लेटते ही उसके अंडरवियर को अपने हाथों से उसके जिस्म से अलग कर दिया ।
(अब अम्मी तो इतनी कामुक हो चुकी थी की उनके मुँह से लण्ड शब्द निकल गया. पर उन्होंने ऐसा शो नहीं किया कि उनसे कुछ गलत बोलै गया हो। मैंने भी सोचा की अम्मी तो बहुत ही कामुक हो चुकी है. लगता है आज काम बन ही जायेगा. इसलिए मैं भी चुप रहा और अम्मी ने मेरे अंडरवियर तो उतार कर मुझे नंगा कर दिया और मेरा टाइट और सख्त लण्ड आसमान की तरफ सर उठाये खड़ा था. )
अम्मी ने अपने हाथ में तेल लगाते हुए अपने बेटे के लंड को पकड लिया और उसे अपने नरम नरम हाथों से तेल की मालिश करने लगी।
"आजहहह अम्मी बुहत मज़ा आ रहा है। आपके हाथ बुहत नरम है" अहमद ने अपनी अम्मी के हाथों को अपने लंड पर जाते ही ज़ोर से सिसकते हुए कहा।
अम्मी अपने हाथों से वैसे ही कुछ देर तक अपने बेटे के लंड की मालिश करने के बाद अपना हाथ वहाँ से हटा ली।
"वाह बेटे अब तो तुम्हारा लंड बिलकुल तनकर चमक रहा है" अम्मी ने अपने बेटे के लंड की तरफ देखते हुए कहा।
अब तो मैंने सोचा की अब तो हद ही हो गयी है। अब इस से आगे और अम्मी मेरे को क्या इशारा कर सकती है. मैं एक मर्द हूँ तो मेरे को ही शुरुआत करनी चाहिए। मैंने अल्लाह को याद करके आखिरी चोट कर ही दी. मैंने अम्मी की चूत पर अपना हाथ रख कर अपनी एक ऊँगली उनकी चूत के अंदर खिसका दी और उसे धीरे धीरे अंदर बाहर करते हुए प्यार से बोला )
"अम्मी मुझसे बर्दाशत नहीं होता क्या मैं इसे आपकी चूत में डाल सकता हूँ" मैंने अपनी अम्मी की आँखों में देखते हुए कहा ।
अम्मी तो न जाने कब से मुझसे इन शब्दों के इन्तजार मैं बैठी थी. वो मेरे इतना बोलते ही खुश हो गयी और मेरे तने हुए लण्ड को प्यार से सहलाते हुए बोली।
"बेटे मैं भी कब से जल रही हूँ । तुम वैसे ही लेटे रहो । मैं खुद तुम्हारे लंड को अपनी चूत में डालती हूँ, पर पहले मुझे अपने प्यारे बेटे के प्यारे लण्ड को थोड़ा प्यार तो कर लेने दो. "
अम्मी ने अपने बेटे की बात सुनने के बाद उससे कहा और अपने होंठ नीचे झुकाते हुए अपने बेटे के लंड को चूम लिया।
"आजहहह अम्मी ऐसा मत करो। मैं ऐसे ही झरना नहीं चाहता" अपनी अम्मी के नरम होंठ अपने लंड पर पड़ते ही मैंने ज़ोर से सिसकते हुए कहा । अम्मी ने अपने बेटे की बात को सुनते ही अपने होंठो को उसके होंठो पर रख दिया और अपने बेटे के साथ कुछ देर तक फ्रेंच किस में खो गयी। अम्मी ने वैसे ही अपने बेटे को चूमते हुए अपनी टांगों को फ़ैलाकर अपने बेटे के पेट पर बैठ गयी ।
अहमद का लंड अपनी अम्मी की गांड को टक्कर मार रहा था, अम्मी ने कुछ देर तक अपने बेटे के साथ चूमा चाटी करने के बाद उसके होंठो से अपने होंठो को अलग करते हुए नीचे होकर अपने बेटे का लंड पकड लिया और अपने चूतडो को ऊपर उठाकर अपने बेटे के लंड को अपनी चूत पर रगडने लगी।
"आह्ह्ह्ह अम्मी डाल दो ना स्स्स्सह्ह्ह्ह" मैं अपने लंड को अपनी अम्मी की गीली चूत पर रगडते हुआ देखकर ज़ोर से सिसकता हुआ बोला । अम्मी ने अपने बेटे की हालत देखकर अपने बेटे के लंड को सीधा अपनी चूत के छेद पर टीका दिया और अपने बेटे के आँखों में देखने लगी ।
अम्मी अपने बेटे की बात सुनकर उसके लंड पर अपना वजन रखते हुए बैठने लगी, अम्मी के वजन के साथ नीचे ज़ोर लगाने से उसके बेटे का लंड सरकता हुआ उसकी चूत में घूसने लगा । अम्मी जैसे जैसे नीचे वजन डालकर बैठ रही थी वैसे वैसे उसके बेटे का लंड उसकी चूत में घुस रहा था, अम्मी को अपने बेटे का लंड अपनी गीली चूत में घुसते हुए बुहत मज़ा दे रहा था।
"आह्ह्ह्ह अम्मी तुम्हारी चूत तो बुहत गरम और टाइट है ओह्ह्ह्ह बुहत मज़ा आ रहा है" मैं भी अपने लंड को अपनी अम्मी की चूत में घुसते हुए देखकर सिसककर बोला।
"आआह्ह्ह्हह बेटे तुम्हारा लंड भी कुछ कम नहीं मेरी चूत से तीन बच्चे निकल चुके हैं फिर भी तुम्हारे लंड ने इसको बुरी तरह से फ़ैला रखा है" अम्मी ने भी उत्तेजना के मारे अपने बेटे से कहा और इस बार बुहत ज़ोर के साथ अपने बेटे के लंड पर बैठ गई।
"आह्ह्ह्ह बेटे तुम्हारा लंड तो बुहत लम्बा और मोटा है मुझे तुमहारा लंड तो मेरी चूत के आखरी हिस्से तक महसूस हो रहा है" अम्मी ने अपने बेटे का लंड अपनी चूत में पूरा घूसने के बाद सिसकते हुए कहा।
"आह्ह्ह्ह अम्मी मुझे भी तो अपना लंड किसी गरम भट्टी में घुसा हुआ महसूस हो रहा है" मैं ने अपनी अम्मी की चुचियों को पकडकर सहलाते हुए कहा ।
"हाँ बेटा शायद तुम सच कह रहे हो। मेंरी चूत कुछ दिनों से चुदाई न होने के सबब बुहत गरम रहने लगी है" अम्मी ने अब अपनी चूत को थोडा ऊपर करते हुए अपने बेटे के लंड पर उछलते हुए कहा । मैं ने भी उत्तेजना में अपनी अम्मी को नीचे से अपने लंड से धक्के देना शुरू कर दिये, अम्मी को अपने बेटे के लंड से चुदते हुए इतना मज़ा आ रहा था की वह अब बुहत ज़ोर से सिसकते हुए अपने चूतडों को पूरी तेज़ी के साथ ऊपर नीचे करते हुए अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में ले रही थी।
अम्मी की साँसें अपने बेटे के लंड पर कूदते हुए बुहत ज़ोर से चल रही थी उसकी चूत से उत्तेजना के मारे जाने कितना पानी निकल रहा था। जिस वजह से अब उसके बेटे का लंड उसकी चूत में बुहत आसानी और तेज़ी के साथ अंदर बाहर हो रहा था । अम्मी भी अपने बेटे के लंड को अपनी चूत से उसके टोपे तक निकालकर फिर धम के साथ नीचे बैठ रही थी। ऐसा करते हुए अम्मी का अंग अंग काँप रहा था और वह उत्तेजना के मारे बुहत ज़ोर की सिसकियाँ लेकर अपने बेटे के लंड पर ऊपर नीचे हो रही थी ।
"आह्ह्ह्ह बेटे मैं झरने वाली हूँ ओहहहह तुम्हारे लंड तो मेरी चूत को जवान बना चूका है" अम्मी यह कहते हुए अपने बेटे के लंड पर ज़ोर से ऊपर नीचे होने लगी, उसका पूरा जिस्म उत्तेजना के मारे कांप रहा था । अम्मी जैसे ही अपने बेटे के लंड से अपनी चूत को ऊपर करके फिर नीचे होने लगती। मैं भी अपने चूतडों को उठाकर उसकी चूत में ज़ोर से अपना लंड डाल देता। जिस वजह से अम्मी के मुँह से ज़ोर की सिसकी निकल जाती ।
आआह्ह्ह्ह बेटे में आई ओह्ह्ह्हह इसशहहह" अम्मी का जिस्म अचानक अकडने लगा और वह बुहत ज़ोर से अपने बेटे के लंड पर उछलते हुए झरने लगी । अम्मी ने झरते वक्त अपनी आँखें बंद कर ली और निढाल होकर अपने बेटे के ऊपर लेटकर झरने का मज़ा लेने लगी, मैं ने अपनी अम्मी की कमर में हाथ ड़ालते हुए नीचे से अपने चूतडों को उछालते हुए अपनी अम्मी की चूत में धक्के लगाने लगा ।
"हाहहह बेटे सच में तुम ने आज अपनी अम्मी को पूरी तरह से संतुष्ट कर दिया है, तुम्हारा लंड जिस औरत की चूत में घुसेगा वह तुम्हारी गुलाम बन जाएगी" अम्मी ने कुछ देर तक निढाल रहने के बाद अपने आँखें खोलकर अपने बेटे से कहा और अपने बेटे के होंठो पर अपने होंठ रखते हुए उसके होंठो को चूमने लगी ।
अम्मी ने अपने बेटे के होंठो को चूमते हुए अपनी जीभ को उसके मुँह में डाल दिया । मैं अपनी अम्मी की जीभ को अपने मुँह में महसूस करके उत्तेजना के मारे अपनी अम्मी की जीभ को अपने होंठ के बीच लेकर ज़ोर से चूसते हुए उसकी चूत में अपने लंड को बुहत ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा।
अम्मी की चूत एक बार झरने के बाद फिर से गरम होने लगी थी। अम्मी ने अपने बेटे के मुँह से अपनी जीभ को निकालकर अपनी चुचियों को अपने बेटे के मुँह के पास लहराने लगी । मैं ने अपनी अम्मी की गोरी गोरी चुचियों को अपने मूह के सामने देखकर उन्हें अपने हाथों से पकडते हुए एक एक करके अपने मुँह में भरकर चूसने लगा ।
"ओहहहह बेटे बुहत मज़ा आ रहा है। ऐसे ही अपनी अम्मी की चुचियों का रस पीकर अपने लंड को मेरी चूत में अंदर बाहर करो" अम्मी अपनी चुचियों के अपने बेटे के मुँह में चूसते हुआ महसूस करके ज़ोर से सिसकते हुए बोलने लगी।
मैं ने कुछ देर तक अपनी अम्मी की चुचियों को चूसने के बाद उसे अपने ऊपर से उठाते हुए उलटा लिटा दिया और अपनी अम्मी के पीछे आते हुए अपना लंड उसकी चूत में पीछे से पेल दिया।
"आहहह सशःह्ह्ह बेटे "अम्मी अपने बेटे का लंड पीछे से अपनी चूत में एक बार में ही पूरा अंदर घूसने से ज़ोर से चिल्लाते हुए बोली ।
अहमद अपनी अम्मी के दोनों चूतडों में हाथ डालकर अपनी अम्मी की चूत में अपना लंड बुहत ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा।
"आहहह बेटे हाँ ऐसे ही ओहहहह बुहत मज़ा आ रहा है" अम्मी भी अपने बेटे के लंड पर अपने चूतडों को पीछे धकेलते हुए उसका लंड अपनी चूत में लेते हुए सिसक कर कहने लगी।
मुझे अचानक अपनी अम्मी की गांड का भूरा छेद नज़र आ गया और मैंने अपनी अम्मी की चूत में अपना लंड अंदर बाहर करते हुए अपने हाथ को अपनी अम्मी की गांड पर रख दिया । मैंने अपनी अम्मी की गांड को अपने हाथ से मसलते हुए अपनी एक ऊँगली को उसकी गांड के छेद में रखकर टटोलने लगा।
"ओहहहह बेटे क्या कर रहे हो वहां" अम्मी अपने बेटे की ऊँगली को अपनी गांड के छेद पर महसूस करके चौकते हुए बोली । अम्मी का पूरा जिस्म अपने बेटे की ऊँगली को अपनी गांड के छेद पर महसूस करके सिहर उठा था ।
मैं अपनी अम्मी की बात पर कोई ध्यान दिए बगेर अपनी ऊँगली से अपनी अम्मी की गांड के छेद को कुरेदने लगा । अम्मी को अपने बेटे की ऊँगली अपनी गांड के छेद में कुरेदते हुए बुहत ज्यादा मज़ा दे रही थी। इसीलिए वह ज़ोर से सिसकते हुए अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में अंदर बाहर होता हुआ महसूस कर रही थी ।
मैं ने अचानक अपनी अम्मी की गांड के छेद को कुरेदते हुए अपनी ऊँगली को अपनी अम्मी की गांड में घुसा दिया,
"उईई बेटे यह क्या कर दिया तुमने" अपने बेटे की ऊँगली के अपनी गांड में जाते ही अम्मी ने ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा
मैं अपनी ऊँगली को यों ही अपनी अम्मी की गांड में घुसाये हुए अपने लंड को उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा।
"ओहहहहह आह्ह्ह्ह बेटे अब तो बुहत मज़ा आ रहा है" अम्मी अपने बेटे के लंड को अपनी चूत और उसकी ऊँगली अपनी गांड में डाले हुए मज़े के मारे सिसकते हुए बोली ।
मैं कुछ देर तक यों ही अपनी अम्मी की चूत को चोदने के बाद अब अपनी ऊँगली को अपनी अम्मी की गांड में हिलाते हुए अंदर बाहर करते हुए उसकी चूत को चोदने लगा । मेरा पूरा जिस्म ऐसा करते हुए बुहत ज़ोर से कांप रहा था।
"आजहहह बेटे मैं झरने वाली हूँ ओहहहह मुझे बुहत मज़ा आ रहा है। मेरे दोनों छेदों में हरकत होने से मुझे बुहत ज्यादा मज़ा आ रहा है" अम्मी ने अपने बेटे की ऊँगली को अपनी गांड और उसके लंड को अपनी चूत में अंदर बाहर होने से बुहत ज्यादा एक्साइटेडट होते हुए कहा ।
"अम्मी मैं भी आने वाला हूँ। ओहहहह अम्मी आपने आज मुझे जन्नत का मज़ा दिया है" मैं भी अपनी अम्मी की बात सुनकर बुहत ज़ोर से सिसकते हुए बोला । मैंअपनी अम्मी की चूत में बुहत तेज़ी के साथ अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था और साथ में अपनी ऊँगली को भी तेज़ी के साथ अपनी अम्मी की गांड में अंदर बाहर कर रहा था।
अम्मी अपने बेटे से चुदवाते हुए मज़े से हवा में उड़ रही थी, अम्मी को जो मज़ा अपना बेटा दे रहा था वह उसे आज तक किसी से नहीं मिला था । अम्मी का पूरा जिस्म उत्तेजना के मारे अकडने लगा था और वह मज़े के मारे अपने चूतडों को बुहत ज़ोर के साथ अपने बेटे के लंड पर पीछे धकेलने लगी ।
"ओहहहह अम्मी में आ रहा हूँ कहाँ झडुँ" मैं ने अचानक चिल्लाते हुए कहा।
"बेटा मेरी चूत में झरो अपनी अम्मी की प्यासी चूत को अपने वीर्य से भर दो" अम्मी ने अपने बेटे की बात सुनकर जल्दी से कहा । मैंअपनी अम्मी की बात सुनकर उसकी गांड से अपनी ऊँगली को निकालते हुए उसके चूतडों को पकडकर बुहत ज़ोर से उसकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर करते हुए हाँफते हुए झरने लगा।
"आह्ह्ह्ह बेटे तुम्हारा वीर्य बुहत गरम है ओहहहह। मैं भी आ रही हूँ इशहहहहह बेटे" अम्मी अपने बेटे का गरम वीर्य अपनी चूत में पड़ते ही उत्तेजना के मारे ज़ोर से हाँफते हुए वह भी झरने लगी । अम्मी ने झरते हुए अपनी आँखें बंद कर ली और अपने चूतडों को ज़ोर से पीछे धकलते हुए अपने बेटे का लंड अपनी चूत में लेने लगी।
मेरा लंड पूरी तरह झरने के बाद अपनी अम्मी की चूत से सिकुड़ कर निकल आया और वह निढाल होकर बेड पर लेट गया । अम्मी भी अपने बेटे का लंड अपनी चूत से निकलने के बाद निढाल होकर वही ढेर हो गयी ।
इस तरह मैंने अपनी अम्मी को अपनी हवस का शिकार बना ही लिया और मेरी अम्मी मेरी मेहबूबा बन कर अपने बेटे से चुद गयी.
हम दोनों माँ बीटा अपने पहले सेक्स से बहुत थक गए थे तो काफी देर तक हम मुर्दों की तरह पड़े रहे.
फिर काफी देर के बाद अम्मी ने अपनी आँखें खोली और मेरी तरफ प्यार से देखा. मैंने भी अपनी अम्मी को बाँहों में ले लिया और उन्हें प्यार से होंठों पर चूमने लगा.
अम्मी ने कहा. "बेटे बहुत टाइम हो गया है. तुम्हारी बहन भी आने वाली होगी. अब मुझे उठने दो ताकि मैं घर का काम और डिनर की तयारी कर सकूँ.
मैंने प्यार से उन्हें कहा "अम्मी मुझे आपकी चुदाई में बहुत मजा आया. प्लीज मुझे एक बार और चुदाई करने दो फिर आप घर का काम कर लेना. "
पर अम्मी ने मुझे मना कर दिया क्योंकि समय बहुत हो गया था और बहन के भी आने का समय हो चूका था।
तो मैंने अपने दिल पर पत्थर रख कर माँ को जाने दिया.
अम्मी मेरी हालत समझ सकती थी. वैसे तो उनका भी मन एक बार और चुदवाने का था पर वक्त की नजाकत समझ कर वो उठ कर चली गयी.
फिर बहन आ गयी और हमे मौका नहीं मिला की एक और राउंड चोद सकते। फिर इसी तरह रात में हम सो गए.
सुबह जब मैं उठा तो काफी दिन चढ़ आया था. अम्मी किचन में नाश्ता त्यार कर रही थी.. मैं चुपचाप किचन में गया और अम्मी को पीछे से जफ्फी डाल कर अपना लण्ड उनकी गांड में रगड़ता हुआ प्यार से बोला।
मैं : सुप्रभात अम्मी.
अम्मी: गुड मॉर्निंग बेटा, बहुत खुश लग रहा है। बात क्या है?
मैं : मैं हल्का महसूस कर रहा हूं बस, इसलिए (अम्मी समझ गई)।
अम्मी ने किचन का अपना काम ख़तम कर लिया था पर मैं अपना लण्ड उनकी गांड में रगड़ ही रहा था और उन्हें छोड़ नहीं रहा था. तो अम्मी मुझे प्यार से परे करती हुई बोली.
अम्मी: मुझे छोड़ो, नहाने जाना है मुझे।
मैं :" अम्मी एक राउंड चोदने दो न. मेरा लण्ड देखो कितने जोर से खड़ा है. बहुत दुःख रहा है."
अम्मी: "नहीं बेटा अभी समय नहीं है। तुम्हारी बहन जाग गयी तो वो किचन में आ सकती है. हम तुम्हारे अब्बा और बहन के जाने के बाद कर सकते हैं. "
मैं:" अम्मी में अभी आपको एक शरत पर जाने दूंगा. आप वायदा करो की आप मुझे अपनी गांड भी मारने डौगी. मुझे आपकी गांड बहुत प्यारी लगती है. मैं आपकी गांड मारना चाहता हूँ."
अम्मी: "ठीक है बेटा, तुम मेरी गांड मार लेना पर मेरी भी एक शरत है."
यह कह कर अम्मी मेरी आँखों में देखने लगी.
अम्मी: बेटा.
मैं : हा अम्मी.
अम्मी: ये मालिश वाली बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए।
मैं : मुझे पता है अम्मी.
अम्मी: तेरे अब्बा या बहन को भी नहीं.
मैं : मैं समझत हू अम्मी. ये हमारा सीक्रेट है, ठीक है.
(अम्मी मुस्कुरा दी)
उन्होंने मुझे प्यार से चूमा और नहाने के लिए बाथरूम की तरफ चल दी.
मैं प्यार से अपने तने हुए लण्ड को सहलाते हुए बोला, "कोई बात नहीं मेरे प्यारे लौड़े, आज तुझे अपनी माँ की गांड मारने का पूरा मौका मिलेगा."
तो इस तरह मेरा और मेरी अम्मी का प्यार का रिश्ता शुरू हुआ जो आज तक चल रहा है. हम माँ बेटा रोज चुदाई करते हैं. और कभी चूत और कभी गांड के मजे लेते है.,
समाप्त