Update 04

ठाकुर साहब बेहद खुश दिख रहे थे.. मेरी रूपाली दीदी को पाने का उनको अपने बिस्तर की रानी बनाने का उनका सपना जो पूरा हो रहा था... इस दौरान मेरी रूपाली दीदी ने ठाकुर साहब की तरह ना तो एक बार भी देखा ना ही उनसे बातचीत करने की कोई भी कोशिश की.. कंचन ने लंच तैयार कर दिया था.. हम सब ने मिलकर दोपहर को लंच किया.. मेरे जीजा जी को एक टेंपरेरी बेड पर सुला दिया गया था.. पूरे घर में सोनिया के दौड़ने चीखने और चिल्लाने की आवाज सुनाई दे रही थी.. मेरी दीदी की छोटी बेटी नूपुर वह भी नए घर में आकर सुकून से अपनी मम्मी की गोद में सो रही थी.. ठाकुर साहब की निगाहें मेरी रूपाली दीदी के बदन पर ही चिपक गई थी.. कंचन ठाकुर साहब की रखैल थी.. इस बात का एहसास हम सबको हो चुका था.. कंचन मेरी बहन को देखकर कुछ ज्यादा खुश तो नहीं थी पर उसने अपनी नाखुशी जाहिर नहीं की..

रात में मेरी रूपाली दीदी और कंचन ने साथ मिलकर डिनर तैयार किया.. हम सब ने एक साथ डिनर किया.. अब सोने की बारी थी...

ठाकुर साहब के घर में दो बेडरूम थे. 1 बैडरूम छोटा था जिसमें 6 बाई 4 का एक दीवान रखा हुआ था... मेरे जीजाजी को उसी दीवान पर सुला दिया गया..

ठाकुर साहब: अनूप तुम यहां पर ठीक हो ना..

मेरे जीजू: हां ठाकुर साहब.. मैं ठीक हूं.. इतना तो कोई अपने सगे परिवार के लिए भी नहीं करता है जो आपने हमारे लिए किया है..

ठाकुर साहब: अरे ऐसी कोई बात नहीं है..

मेरी रूपाली दीदी: मैं यहीं पर नीचे सो जाती हूं सोनिया के साथ..

ठाकुर साहब: तो फिर नूपुर कहां पर सोएगी.. ऐसा करो तुम मेरे बेडरूम में सो जाओ.. अपने दोनों बच्चों के साथ.

मेरे जीजू: हां रूपाली तुम ठाकुर साहब के बेडरूम में सो जाओ..

मेरी रूपाली दीदी दोनों मर्दों की बातें सुनकर हैरान रह गई..

ठाकुर साहब: हां रूपाली तुम अपने बच्चों के साथ और अपने भाई के साथ मेरे बेडरूम में सो जाओ.. मैं रोहन के साथ हॉल में सोफे पर सो जाऊंगा.. कंचन किचन में सो जाएगी..

मेरे जीजू: नहीं-नहीं ठाकुर साहब.. आप कैसी बात कर रहे हो.. अपने ही घर में क्या आप अपने नौकर के साथ सोएंगे?... रूपाली का भाई रोहन के साथ हॉल में सो जाएगा..आप रूपाली के साथ अपने बेडरूम में सो जाइए... क्यों ठीक है ना रूपाली?

मेरी रूपाली दीदी हैरान परेशान थी मेरे जीजू की बात सुनकर.. मेरा जीजा मेरी बहन को एक गुंडे के साथ उसके बेडरूम में उसके बिस्तर पर सोने के लिए कह रहा था..

मेरी रूपाली दीदी: अनूप तुम क्या बोल रहे हो तुम को कुछ पता भी है क्या...

मेरे जीजू: क्या हुआ रूपाली?

ठाकुर साहब: अनूप ठीक कह रहा है रुपाली.. तुम मेरे बिस्तर पर आ जाओ.. सोनिया और नूपुर के साथ.. मेरा बेड तो बहुत बड़ा है..

मेरे जीजू: हां रूपाली.. ठाकुर साहब ठीक कह रहे हैं.. तुम सोनिया को बीच में सुला देना.. नूपुर तो पालने में सो जाएगी... वैसे भी ठाकुर साहब का बिस्तर बहुत बड़ा है..

मेरी रूपाली दीदी: अनूप तुम क्या बोल रहे हो तुम को कुछ पता नहीं है.

मेरे जीजू: तो क्या ठाकुर साहब अपने नौकर के साथ हॉल में सोएंगे सोफे पर?

ठाकुर साहब: अरे कोई बात नहीं मैं नीचे सो जाऊंगा..

मेरी रूपाली दीदी: ठीक है ठाकुर साहब... सोनिया बीच में सो जाएगी..

सब कुछ तय हो चुका था.. ठाकुर साहब बहुत खुश लग रहे थे.. मैं और रोहन बाहर हॉल में सोफे पर सो गए..

रोहन की बहन कंचन भी किचन में नीचे जमीन पर सो गई.. मेरे जीजू ने मेरी बहन को ठाकुर साहब के बेडरूम में अपने बच्चों के साथ भेज दिया था.. मेरी रूपाली दीदी बिस्तर के एक कोने में दीवार की तरफ लेटी हुई थी , बीच में सोनिया, और ठाकुर साहब बिस्तर के दूसरे कोने पर लेटे हुए थे.. उनकी आंखों में नींद नहीं थी.. रात के तकरीबन 2:00 बज चुके थे..

अचानक ठाकुर साहब के बेडरूम का दरवाजा खुला.. ठाकुर साहब अपने बेडरूम से बाहर आया और किचन में घुस गय.. कंचन वहीं पर नीचे जमीन पर लेटी हुई थी.. ठाकुर साहब ने व्हिस्की का 1 का एक बड़ा पेग बनाया और पी गए... एक के बाद एक करके उन्होंने तीन चार पैग पी लिय.. और फिर अपने बेडरूम में वापस लौट गए ..अंदर से दरवाजा बंद कर लिया उन्होंने..

ठाकुर साहब ने सोनिया को उठाकर अपनी जगह पर सुला दिया.. और खुद बीच में आ गए.. मेरी रूपाली दीदी के पास... उन्होंने अपना हाथ मेरी रुपाली दीदी के नंगे पेट पर रख दिया और सहलाने लगे... चांदनी रात में मेरी रुपाली दीदी बेहद खूबसूरत लग रही थी..

रुपाली दीदी गहरी नींद में थी... ठाकुर साहब मेरी बहन के पीठ को उनकी चोली के ऊपर से चूमने लगे पीछे से... उनका हाथ मेरी बहन के नंगे पेट और नाभि को मसल रहा था.. मेरी रूपाली दीदी नींद से जाग गई..

मेरे रूपाली दीदी: ठाकुर साहब... यह आप क्या कर रहे हैं.. प्लीज मुझे छोड़ दीजिए...

ठाकुर साहब: प्लीज रूपाली.. मैं तुमसे बेहद प्यार करने लगा हूं.. तुम तो अच्छी तरह जानती ही हो ना रूपाली...

मेरी रूपाली दीदी: ऐसा मत कीजिए ठाकुर साहब..

ठाकुर साहब: सोनिया जाग जाएगी ..धीरे बोलो रूपाली..

मेरी रूपाली दीदी: प्लीज ठाकुर साहब... यह गलत कर रहे हैं आप..

ठाकुर साहब: रूपाली.. मैंने तुम्हारे लिए इतना कुछ किया... क्या तुम मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकती हो..

मेरी रुपाली दीदी: ठाकुर साहब... आप जो चाहते हो मैं वह आपके लिए कर सकती हो... परंतु यह नहीं..

ठाकुर साहब: मुझे तो बस यही चाहिए रूपाली..

ठाकुर साहब मेरी बहन के पेट को अपने हाथ से मसलते रहे और उनकी गांड पर अपना लंड दबाते रहे...

मेरी रूपाली दीदी: ठाकुर साहब प्लीज मुझे छोड़ दीजिए... मैंने आपका क्या बिगाड़ा है.. जो आप मेरे साथ ऐसा कर रहे हैं.

नाराज होकर मेरी रुपाली दीदी उठ कर बैठ गई.. ठाकुर साहब ने मेरी बहन का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया..

ठाकुर साहब: प्लीज रुपाली मेरा साथ दे दो.. बस एक बार.. तुम्हें जब से देखा है मुझे नींद नहीं आती है..

मेरी रूपाली दीदी: मेरी बेटियां यहीं पर सो रही है.. मेरा पति दूसरे कमरे में सो रहा है... मेरा भाई आपके नौकर के साथ हॉल में सो रहा है..

ठाकुर साहब:

: मैंने दरवाजा अच्छी तरह लॉक कर दिया है... वैसे भी तुम्हारा पति उठने की हालत में नहीं है...

दोनों बहुत धीरे-धीरे बात कर रहे थे.. ठाकुर साहब ने कंबल खींच लिया मेरी रूपाली दीदी और अपने ऊपर... वह मेरी बहन की गर्दन को चूमने लगे और अपने एक हाथ से एक उंगली मेरी बहन की नाभि में अंदर बाहर करने लगे.. मेरी बहन तड़पने लगी...

मेरी रूपाली दीदी: प्लीज ठाकुर साहब... यह मत कीजिए मेरे साथ.. आप जो कुछ भी कहोगे करुंगी मैं आपके लिए.. पर यह नही.. मैं एक अच्छे घर से हूं... शादीशुदा हूं..

ठाकुर साहब: तभी तो तुमको अपने घर लाया हूं रूपाली...

मैं हमेशा तुम्हारा ख्याल रखूंगा.

मेरी रूपाली दीदी: यह पाप है ठाकुर साहब..

ठाकुर साहब: रूपाली... यह पाप नहीं है.. प्यार है..

ठाकुर साहब ने कंबल नीचे फेंक दिया... उन्होंने अपने एक हाथ से मेरी बहन की मुलायम चूची को पकड़ के जोर से दबा दिया... मेरी रूपाली दीदी की तो सिसकारी निकल गई..

ठाकुर साहब मेरी रुपाली दीदी के ऊपर सवार हो गय.. उन्होंने मेरी बहन की दोनों चूचियों को पकड़ कर अपने दोनों हाथों से जोर जोर से मसलना शुरू कर दिया और मेरी बहन की आंखों में देखने लगे..

ठाकुर साहब: तुम्हें क्या लगता है मैं तुमको अपने बिस्तर पर क्यों लाया.. रूपाली..

मेरी रूपाली दीदी: यह पाप मुझे मत करवाइए ठाकुर साहब...

ठाकुर साहब: पाप नहीं रानी.. यह तो प्यार है..

ठाकुर साहब मेरी रुपाली दीदी के गुलाबी रसीले होंठों को चूमने लगे बड़े प्यार से धीरे-धीरे हल्के हल्के.. मेरी बहन भी उनका साथ दे रही थी चुंबन.. थोड़ी देर में फ्रेंच किस में बदल गया था मेरी बहन और ठाकुर साहब का चुंबन.. दोनों के जीव आपस में टकराने लगी थी.. दोनों एक दूसरे को बुरी तरह चाटने लग रहे थे.. एक दूसरे के होंठों को.. एक दूसरे की जीभ को..

मेरी रूपाली दीदी की आंखें बंद थी.. चोली के ऊपर से ही ठाकुर साहब मेरी बहन की दोनों चुचियों को बुरी तरह मसल रहे थे. मेरी रूपाली दीदी की दोनों बेटियां अगल-बगल में सोई हुई थी.. दोनों प्रेमी युगल आपस में प्रेम कर रहे थे.. मेरी रूपाली दीदी जानती थी कि यह गलत हो रहा है.. कमरे का एसी ऑन था.. गहरा अंधेरा था.. मेरी रूपाली दीदी और ठाकुर साहब का चुंबन अब जंगली हो चुका था.. ठाकुर साहब तो पागल हो चुके थे मेरी बहन को ठोकने के लिए..

मेरी रूपाली दीदी अपने होशो हवास में थी.. वह जानती थी कि ठाकुर साहब का मोटा मुसल लंड उनके गुलाबी छेद का रास्ता ढूंढ रहा है.. दीदी किसी भी कीमत पर ठाकुर साहब को ऐसा करना नहीं देना चाह रही थी.. मेरी बहन उस गुंडे को अपने गुलाबी छेद का रास्ता नहीं दिखाना चाहती थी.. मेरी रूपाली दीदी परेशान थी.. ठाकुर साहब जबरदस्ती कर रहे थे..

ठाकुर साहब ने मन ही मन फैसला कर लिया था कि आज की रात वह मेरी रूपाली दीदी की चूत में गहराई तक पेल कर ही दम लेंगे..

ठाकुर साहब ने मेरी बहन की चोली के ऊपर से उनकी एक छाती पर अपना मुंह रख दिया और चूसने लगे मुंह में लेकर.. मेरी रूपाली दीदी के मुंह से कराह निकलने लगी.. एक औरत की सिसकारी जो अपने पति के साथ बिस्तर में निकालती है औरत.. मेरी रूपाली दीदी ठाकुर साहब को अपनी बाहों में जकड़ कर अपनी छाती अपनी चूची पिलाती हुई मदमस्त होने लगी थी...

मेरे रूपाली दीदी: आआह्हीईईईईईईईईईइह्ही.. ठाकुर साहब ...नहीं..

ठाकुर साहब अपना लौड़ा मेरी रूपाली दीदी के त्रिकोण पर टीका कर रगड़ने लगे थे.. मेरी बहन के गुलाबी छेद पर ठाकुर साहब का झंडा और डंडा खड़ा था.. सब कुछ कपड़े के ऊपर से हो रहा था..

मेरी रूपाली दीदी अपना संयम खोने लगी थी.. ठाकुर साहब ने मेरी बहन को अपने कब्जे में ले लिया था... दोनों हवस और वासना की प्यास में झुलस रहे थे.. ठाकुर साहब मेरी दीदी की चूची को दबाए ही जा रहे थे.. मेरी बहन एक काम पीड़ित औरत की तरह सिसकारियां ले रही थी धीरे-धीरे.. ठाकुर साहब पूरी तरह उत्तेजित हो चुके हैं..

ठाकुर साहब मेरी रुपाली दीदी की चोली खोलने लगे..

27 साल की दो बच्चों की मां मेरी रूपाली दीदी एक गुंडे के नीचे थी.. ठाकुर साहब का बदन और मेरी दीदी का बदन एक दूसरे से रगड़ खा रहा था.. दोनों एक दूसरे के अंदर समा जाना चाहते थे... किसी भी कीमत पर ठाकुर साहब आज मेरी रूपाली दीदी को पेल देना चाहते थे ..

ठाकुर साहब मेरी रूपाली दीदी की चोली के ऊपर के हिस्से को जंगली अंदाज में चूमने चाटने लगे थे.. मेरी दीदी का बदन उन्हें बेहद नरम गरम और मुलायम लग रहा था.. ठाकुर साहब ने आज तक बहुत सारी लड़कियों और औरतों के साथ संभोग किया था पर मेरी बहन का बदन उन्हें कुछ अलग नशा दे रहा था.. मेरी दीदी का बदन बेहद मांसल और नरम है इसलिए ठाकुर साहब को बड़ा मजा आ रहा था..

अब मेरी रूपाली दीदी जितना हो सकता था उतना प्रतिरोध करने लगी थी ठाकुर साहब का, पर आखिर क्या कर पाती, मेरी बहन ठहरी एक नाजुक मुलायम सी हाउसवाइफ और ठाकुर साहब तो एक खूंखार ताकतवर गुंडे थे.. मेरी रुपाली दीदी कुछ भी नहीं कर पा रही थी बस ठाकुर साहब से छोड़ देने का गुहार लगा रही थी.. पर ठाकुर साहब तो बिल्कुल भी मानने को तैयार नहीं थे...

दोनों मोटे कंबल के अंदर ढके हुए थे.. ठाकुर साहब ने मेरी बहन के त्रिकोण पर अपने मुसल का दबाव बढ़ा दिया था.. आज तो बस मेरी रूपाली दीदी को चोद देना चाहते थे ठाकुर साहब..

मेरी रूपाली दीदी: आअ ईईईईईई माआआ... ठाकुर साहब प्लीज छोड़ दीजिए मुझे..

ठाकुर साहब: नहीं रूपाली... आज तो किसी भी कीमत पर नहीं.. मुझे कर लेने दो ना..

ठाकुर साहब मेरी रुपाली दीदी की गर्दन को चाट रहे थे लगातार.. उन्होंने अपना हाथ नीचे ले जाकर मेरी बहन की साड़ी को खींच दि और उनकी कमर से खींचकर ढीला करने लगे... मेरी रूपाली दीदी लगातार ठाकुर साहब का विरोध कर रही थी.. उनको धक्का देकर हटाना चाहती थी.. मेरी बहन अपनी दोनों टांगों की जोर से उनको धकेलने की कोशिश कर रही थी .. मेरी बहन को एक अजीब तरह का एहसास हुआ था जब ठाकुर साहब ने उनको चुम्मा लिया था.. पर मेरी दीदी जानती थी कि यह ठीक नहीं हो रहा है.. वह बिल्कुल भी ठाकुर साहब के साथ ऐसा नहीं करना चाहती थी.. ठाकुर साहब के दोनों हाथ लगातार मेरी रुपाली दीदी की दोनों चुचियों के साथ खेल रहे थे.. वह तो मेरी बहन की चोली को ही फाड़ देना चाहते थे क्योंकि वह चोली खोलने में खुद को असहज महसूस कर रहे थे.

ठाकुर साहब की जोर-जबर्दस्ती के कारण मेरी बहन की चोली के ऊपर के दो बटन टूट गए थे.. वह ऊपर की ओर आकर एक बार फिर मेरी बहन के होठों को चूमने लगे.. ठाकुर साहब की वासना के जाल से बचने के लिए मेरी रूपाली दीदी अपने चेहरे को कभी दाएं तो कभी बाय घुमाने लगी.. ठाकुर साहब के हाथ जो भी लग रहा था वह तो वहीं पर चुम्मा दिए जा रहे थे.. मेरी दीदी के गाल को.. उनके कान को.. ठाकुर साहब जबरदस्ती कर रहे थे मेरी बहन के साथ...

इस जंगली प्यार की वजह से कंबल तो नीचे खिसक चुका था.. ठाकुर साहब अपने ऊपर के बदन को नंगा कर चुके थे, मेरी रूपाली दीदी के ऊपर चढ़े हुए थे.. मेरी बहन की साड़ी भी लगभग खुल चुकी थी.. एक हाथ से ठाकुर साहब मेरी रूपाली दीदी की चूची दबा रहे थे और दूसरे हाथ से उनकी साड़ी को घुटनों से ऊपर उठाने की कोशिश कर रहे थे.. उन्होंने मेरी दीदी की साड़ी को जांघों तक पहुंचा दिया था.. मेरी दीदी अपनी टांगों से उनको धक्का देने की कोशिश कर रही थी.. ठाकुर साहब अपने पजामे का नाड़ा ढीला करने लगे थे.. उन्होंने मेरी बहन के घुटने को हल्का सा मोड़ दिया था और उनकी टांगों के बीच में अपना जगह बनाने की कोशिश करने लगे थे... ठाकुर साहब मेरी बहन की दोनों टांगों को जितना हो सके उतना चौड़ा करने की कोशिश कर रहे थे.. पर जैसा ठाकुर साहब सोचते थे यह उतना आसान नहीं था.. मेरी रूपाली दीदी अपनी पूरी ताकत से उनका प्रतिरोध कर रही थी.. ठाकुर साहब अब मेरी बहन की चोली खोलने के लिए उत्सुक नहीं लग रहे थे.. अब तो वह बस एक बार मेरी रुपाली दीदी की गरम गुलाबी चूत में लंड घुसा लेना चाहते थे...

अचानक सोनिया जग गई और मम्मी.. मम्मी.. चिल्लाने लगी.. मेरी बहन ठाकुर साहब को धक्का देने लगी पर ठाकुर साहब 1 इंच टस से मस नहीं हो रहे थे.. बिस्तर पर होने वाली हलचल के कारण सोनिया की आंख खुलने लगी थी.. मेरी रूपाली दीदी किसी भी कीमत पर नहीं चाहती थी कि सोनिया उनको ठाकुर साहब को इस हालत में देखें..

मेरी रूपाली दीदी: मैं आपसे भीख मांगती हूं.. प्लीज अभी मुझे छोड़ दीजिए.. मेरी बेटी जगने वाली है..दया कीजिए ..

ठाकुर साहब: कोई बात नहीं.. देखने दो उसको..

ठाकुर साहब किसी भी कीमत पर मेरी बहन की लेना चाहते थे .. उन्होंने अपना खूंखार लंड बाहर निकाला और मेरी दीदी की छेद पर टिका दिया.. मेरी दीदी को एहसास हो गया था.. तकरीबन 9 इंच लंबा 3 इंच मोटा लौड़ा उनके त्रिकोण के ऊपर पैंटी के ऊपर से रगड़ खा रहा था... मेरी दीदी को उस चीज का एहसास हो चुका था कि यह कितना बड़ा मोटा और खूंखार है... ठाकुर साहब के मोटे काले रंग के लंड पर मोटी मोटी नस दिख रही थी.. ठाकुर साहब मेरी रूपाली दीदी की जांघों पर अपना मोटा मुसल रगड़ रहे थे.. मेरी बहन थरथर कांप रही थी.. मेरी रूपाली दीदी को गर्मी का एहसास होने लगा था.. वह लगभग रोने लगी थी यह सोच कर कि अगर यह हो गया तो फिर वह कहां जाएगी.. किसके सहारे रहेगी.. किसको अपना मुंह दिखाएगी.. मेरी रूपाली दीदी ने पूरी ताकत लगाकर ठाकुर साहब को धक्का दिया और उनको बेड के नीचे गिरा दिया.. मेरी रूपाली दीदी अपनी चोली को ठीक करने लगी.. बड़ी तेजी से.. फिर उन्होंने अपनी साड़ी से खुद को ढक लिया और कंबल भी अपने ऊपर खींच ली..

उसके बाद मेरी रूपाली दीदी ने सोनिया को अपनी बाहों में ले लिया और उसको थपकी देकर सुलाने लगी... ठाकुर साहब अपनी आंखों में हवस के अंगारे लिए हुए मेरी बहन को देख रहे थे और लोड़े को भी जो मुरझा गया था... उनको पहले बेहद गुस्सा तो आया पर वह फिर धीरे-धीरे शांत हो गए...

सोनिया फिर से नींद की आगोश में जा चुकी थी.. मेरी रूपाली दीदी और ठाकुर साहब एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे..

मेरी रुपाली दीदी: ठाकुर साहब.. कुछ तो सोचिए... यह क्या हैवानियत कर रहे थे आप मेरे साथ...

ठाकुर साहब ने मन ही मन सोचा.. सच में यह आज कुछ ज्यादा ही हो गया.. इस मासूम हसीना की लेने के लिए यह तरीका ठीक नहीं था... जोर जबरदस्ती के साथ चोद देना ठीक नहीं है.. ठाकुर साहब ने अपना सर झुका लिया..

ठाकुर साहब: मैं क्या करता... मुझसे रहा नहीं गया.. तुम इतनी खूबसूरत हो तुमको देखकर मैं पागल हो गया था... रूपाली...

मेरी रूपाली दीदी : प्लीज ठाकुर साहब... यह सब बंद कीजिए.. मैं आपसे उम्र में ... मैं तो आपकी बेटी जैसी हूं... आप तो मेरे पति को बेटा कह कर बुलाते हो...

मेरी रूपाली दीदी पूरी तरह से लड़खड़ा रही थी बोलते हुए.. उनकी सांसे तेज तेज चल रही थी..

ठाकुर साहब ने मेरी बहन को सांत्वना देने की कोशिश की.. उन्होंने पानी का ग्लास भी मेरी दीदी को दिया.. पानी का ग्लास लेते हुए मेरी रूपाली दीदी ने महसूस किया कि ठाकुर साहब अपने होशो हवास में आ चुके हैं.

मेरी रूपाली दीदी खुद को संयमित करने का प्रयास करने लगी थी..

ठाकुर साहब: रुपाली... जाओ तुम अपनी जगह पर सो जाओ नहीं तो सोनिया जाग जाएगी.

मेरी रूपाली दीदी: नहीं मुझे आपसे डर लग रहा है.. कहीं फिर आप मेरे साथ... नहीं मैं वहां नहीं सो रही..

ठाकुर साहब: ठीक है रुपाली.. तुम सोनिया को बीच में सुला दो.. मैं तुम्हारी जगह पर सो जाता हूं..

मेरी रूपाली दीदी ठाकुर साहब को आश्चर्य से देखने लगी..

ठाकुर साहब: मेरा विश्वास करो रूपाली.. मैं अब कुछ नहीं करूंगा तुम्हारे साथ...

मेरी रूपाली दीदी घबराते हुए ठाकुर साहब की जगह पर जाने लगी और लेट गई सोनिया बीच में थी और ठाकुर साहब दूसरी तरफ...

अगले 2 घंटे तक मेरे रुपाली दीदी और ठाकुर साहब दोनों में से किसी को भी नींद नहीं आई... मेरी रूपाली दीदी सोच रही थी और भगवान को धन्यवाद दे रही थी कि उन्होंने इतनी शक्ति दे कि उन्होंने इस हालत में भी ठाकुर साहब को मनमानी नहीं करने दी.... दूसरी तरफ ठाकुर साहब निराश होकर लेटे हुए थे...

ठाकुर साहब मेरी बहन के साथ एक प्यारा रोमांटिक चुदाई करने के मूड में थे.. और ठाकुर साहब सफल नहीं हो पाए थे.. पर ठाकुर साहब के अंदर की गर्मी शांत नहीं हुई थी.. वह मेरी बहन को हर कीमत पर चोदना चाहते थे.. शायद इसीलिए उनकी पत्नी उनको छोड़कर चली गई थी...

वैसे भी ठाकुर साहब को रंडियों के साथ मजा नहीं आता था.. वह एक घरेलू पतिव्रता नारी चाहते थे.. जो मेरी रुपाली दीदी के रूप में उनके हाथ आई थी... वह मेरी बहन को चाहते भी थे.. इसीलिए तो हमारे परिवार को अपने घर में लेकर आए थे.. सोचते हुए ठाकुर साहब को नींद आ गई.. सब कुछ नॉर्मल हो चुका था बिस्तर पर.. मेरी दीदी भी नींद की आगोश में जा चुकी थी..

मेरे जीजू: अरे रूपाली.. कल रात तुम्हारे बेडरूम का दरवाजा क्यों बंद था... मेरी दीदी घबरा गई पर खुद को संभाला..

मेरी रूपाली दीदी: वह कल रात हॉल से अजीब अजीब गाने की आवाज आ रही थी इसलिए.. सोनिया ठीक से सो नहीं पा रही थी..

मेरे जीजू: हां रूपाली.. कल रात को ही हॉल में गंदे गंदे भोजपुरी गाने बजा रहा था.. तुम्हारा भाई सेंडी तो नहीं था..

मेरी रूपाली दीदी: सैंडी नहीं रोहन होगा... सैंडी को तो पता भी नहीं होगा इन सब गानों के बारे में ...

जीजू: तुम ठीक कह रही हो.. रोहन अच्छा लड़का नहीं है..

मेरी रुपाली दीदी: खैर छोड़ो बच्चों को... आप तो ठीक हो ना.

मेरे जीजू: हां मेरी जान आई लव यू..

लव यू टू अनूप... मेरी दीदी बोली...

मेरी रूपाली दीदी: मैं नाश्ता बनाने जा रही हूं.. आप ठीक तो हो ना? कल रात को अच्छे से नींद तो आई आपको.. आज डॉक्टर साहब आने वाले हैं आपके चेकअप के लिए..

मेरे जीजा: हा रूपाली.. मैं बिल्कुल ठीक से सोया.. कल रात में ठाकुर साहब को कुछ तकलीफ तो नहीं हुई.

मेरी रूपाली दीदी मन ही मन सोच रही थी कि तकलीफ कैसे होगी.. ठाकुर साहब को... कल रात को तो वह आपकी पत्नी की इज्जत लूटने वाले थे.. आपको कुछ पता भी है..

मेरी रूपाली दीदी किचन में घुस गई और कंचन के साथ मिलकर सोनिया के लिए नाश्ता तैयार करने लगी.

कंचन: कल रात कैसी गुजरी दीदी..

मेरी बहन कंचन का सवाल सुन कर हैरान हो गई थी और उसकी तरफ देखने लगी थी.

मेरी रूपाली दीदी कंचन के सवाल का जवाब दे पाती इसके पहले ठाकुर साहब किचन के अंदर मौजूद थे.. उन्होंने कंचन को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया था और उसकी गर्दन को चूम रहे थे... मेरी रूपानी दीदी बगल में खड़ी होकर सब कुछ देख रही थी..

कंचन की गांड पर अपना दबाव बढ़ाते हुए ठाकुर साहब मेरी बहन को घूरे जा रहे थे..

ठाकुर साहब: आई लव यू रूपाली.. आई लव यू मेरी जान.

ठाकुर साहब कंचन को पीछे से दबोच कर उसको प्यार कर रहे थे.. उन्होंने अपना हाथ मेरी रूपाली दीदी की तरफ बढ़ाया.. मेरी रूपाली दीदी उनकी पहुंच से दूर होने लगी थी.. कंचन मुड़ गई और ठाकुर साहब से लिपट गई... कंचन और ठाकुर साहब के बीच का प्यार देखकर मेरी रुपाली दीदी की छाती ऊपर नीचे हो रही थी.. उनकी चूचियां टाइट होने लगी थी .. ठाकुर साहब की नजर मेरी रुपाली दीदी की उठती गिरती हुई चुचियों पर ही टिके हुई थी... और कंचन लिपटी हुई थी उनके चौड़े सीने से..

ठाकुर साहब: आई लव यू रूपाली... तुम भी कंचन की तरह मुझसे चिपक जाओ ना..

मेरी दीदी: नहीं... आप यहां से जाइए... मुझे मेरी बेटी के लिए नाश्ता तैयार करना है..

ठाकुर साहब: कल रात के लिए माफी चाहता हूं रूपाली.. कुछ ज्यादा ही हो गया तुम्हारे साथ.. लेकिन इसका मतलब यह मत समझ लेना कि मैं तुमको इतनी आसानी से जाने दूंगा.. तुम्हारी लेकर रहूंगा चाहे कुछ भी हो जाए... समझी मेरी जान... कंचन ने ठाकुर साहब का लौड़ा पकड़ लिया था... उनकी पैंट के ऊपर से...

मेरी रूपाली दीदी घबरा रही थी कि यह क्या हो रहा है ..उनकी आंखों के सामने ठाकुर साहब और कंचन एक दूसरे के अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे.. बुरी तरह चुम्मा चाटी करने लगे थे दोनों.. मेरी रूपाली दीदी काफी गंभीर हो चुकी थी..

ठाकुर साहब: तुम्हें नहीं पता तुम क्या चीज हो रूपाली.. मेरा यह सब कुछ तुम्हारे लिए ही है.. तुम जैसे चाहो मेरे साथ रह सकती हो.. कुछ भी खरीद सकती हो..

मेरी रूपाली दीदी: आपका दिमाग तो ठीक है ना ठाकुर साहब? मैं आपको बिल्कुल पसंद नहीं करती हूं.. प्यार करना तो दूर की बात है.. प्लीज आप लोग मेरे सामने यह मत कीजिए..

ठाकुर साहब ने कंचन को आजाद कर दिया.. वह मेरी रूपाली दीदी के बिल्कुल पास गय और अपने घुटनों के बल बैठ गय. उन्होंने मेरी बहन की साड़ी का आंचल उनके सीने से हटा दिया.. आप मेरी बहन का नंगा पेट ठाकुर साहब की आंखों के सामने था.. उन्होंने मेरी दीदी की गोल गहरी नाभि पर चुम्मा लिया उनकी कमर के इर्द-गिर्द अपना हाथ डालकर..

ठाकुर साहब: आज तो बस इसी छेद पर चुम्मा ले रहा हूं.. तुम्हारे हर छेद भी इसी तरह चुम्मा लूंगा रूपाली... समझ गई ना मेरी जान..

कंचन अपने सामने यह कामुक नजारा देख रही थी..

मेरी रुपाली दीदी : ठाकुर साहब... मुझे नहीं पता था कि आप इतने गिरे हुए इंसान हैं..

ठाकुर साहब: रूपाली अभी तो तुम्हें कुछ भी पता नहीं चला.. मैं बहुत गंदा आदमी हूं.. अभी तक तो मैं शराफत से काम ले रहा था.

मेरी रूपाली दीदी : यह कैसी शराफत है ठाकुर साहब.. आपकी शराफत तो कल रात ही मैंने देख ली थी..

ठाकुर साहब: जो भी है... अभी मुझे कुछ काम से बाहर जाना है.. मेरे लिए नाश्ता तैयार कर दो तुम ..

मेरी रूपाली दीदी: मैं आपकी बीवी नहीं हूं जो आप मुझे इस तरह से आर्डर दे रहे हैं..

ठाकुर साहब: बीवी बन जाओगी तो मेरा आर्डर ले लोगी?( ठाकुर साहब की आंखों में बस प्यास थी मेरी बहन के लिए)..

मेरी दीदी अजीब सा महसूस करने लगी थी उनकी बात सुनकर..

ठाकुर साहब: डरो मत रुपाली... मैं तुम्हारे साथ जबरदस्ती नहीं करूंगा.. तुमसे शादी करूंगा और फिर तुम को सुख दूंगा..

मेरी रुपाली दीदी: आपके बदतमीजी का जवाब नहीं ठाकुर साहब.. आप एक अकेली औरत को अपने घर में लाकर उसकी मजबूरी का फायदा उठाना चाहते हैं.. अगर मेरे पति अनूप ठीक होते तो आपकी हिम्मत भी नहीं होती..

ठाकुर साहब: तेरा पति? हा हा हा? अगर तुम्हारा पति ठीक भी होता तो मैं तो उसको एक हाथ से उठाकर पटक देता..

मेरी रूपाली दीदी मन ही मन जानते थे कि ठाकुर साहब बिल्कुल सच कह रहे हैं... ठाकुर साहब की मर्दानगी के आगे मेरा जीजा बिल्कुल चूहे की तरह था.. अगर ठाकुर साहब चाहे मेरे जीजाजी की हड्डी पसली एक कर सकते थे.. ठाकुर साहब के मुसल का एहसास मेरी बहन को चुका था.. कोई बराबरी नहीं थी ठाकुर साहब और मेरे जीजाजी में..

कल रात को मेरी रूपाली दीदी ने ठाकुर साहब के औजार की मोटाई और लंबाई का एहसास करके उनको पीछे धक्का दिया था.. दीदी को अच्छी तरह पता था कि ठाकुर साहब के पास क्या चीज है.. मेरी रूपाली दीदी अपने छोटे छेद के बारे में सोच रही थी.. ठाकुर साहब बाहर निकल गय..

कंचन: क्या दीदी... आपने तो ठाकुर साहब को नाराज कर दिया... मैं तो समझ रही थी कि ठाकुर साहब ने कल रात को आपका बाजा बजा दिया.. लेकिन वह तो आपसे प्यार करने लगे है..

मेरी रुपाली दीदी: चुप करो कुछ भी बोलती हो तुम...

कंचन: अच्छा दीदी मैं तो कुछ नहीं बोलती .. आज की रात ठाकुर साहब आपकी जरूर लेंगे...

मेरी दीदी : तुमको कैसे पता..

कंचन: मुझे सब पता है दीदी ठाकुर साहब के बारे में.. जब वह मुझे इस घर में पहली बार लेकर आए थे तभी मुझे समझ आ गया था..

मेरी रूपाली दीदी अच्छी तरह जानती थी कंचन क्या कह रही है.. दीदी किचन से निकलकर बाहर आ गई.. मैं और रोहन हॉल में बैठकर टीवी देख रहे थे.. ठाकुर साहब हॉल में खड़े मेरे रुपाली दीदी के सामने थे..

ठाकुर साहब: मैं नहाने जा रहा हूं रूपाली... मुझे बाहर जाना है बहुत सारा काम है.. मैं तुम्हारे पति की तरह निकम्मा नहीं हूं.. जब मैं नहा कर आऊंगा तो मेरा नाश्ता तैयार रखना..

मेरी रूपाली दीदी: मेरे पति की हालत पर कुछ तो तरस खाइए ठाकुर साहब..

ठाकुर साहब: उसका हाथ तो ठीक है.. आजकल इंटरनेट पर कितने सारे काम होते हैं.. कुछ भी कर सकता है.. पर करना ही नहीं चाहता अनूप..

मैं और रोहन चुपचाप मेरी दीदी और ठाकुर साहब के बीच होने वाली बातचीत को सुन रहे थे...

ठाकुर साहब: वह तो बस तुमसे काम करवाना चाहता है.. खुद्दार पति की पत्नी होने का सुख तुम्हें कभी नहीं मिलेगा अनूप से..

मेरी रूपाली दीदी और मैं भी अच्छी तरह जानता था कि ठाकुर साहब की बातों में कुछ तो सच्चाई है.. रोहन मुस्कुरा रहा था... कंचन भी किचन से बाहर आकर उन दोनों के बीच की बातचीत सुन रही थी.

ठाकुर साहब: देखो रूपाली मुझे बाहर जाना है किसी काम से.. आज डॉक्टर आने वाला है तुम्हारे पति का चेकअप करने के लिए.. मैंने पैसे रख दिय टेबल पर... डॉक्टर को दे देना जाने के समय... चेकअप के बाद... समझ गई ना..

मेरी रूपाली दीदी सर झुका के ठाकुर साहब के सामने खड़ी थी...

तुम दोनों बाहर जाओ.. ठाकुर साहब ने मुझे और रोहन को कहा.. हम दोनों बड़ी तेजी से बाहर निकल गए घर से..

ठाकुर साहब: देखो रूपाली.. मुझे माफ कर दो मैंने आज तुम्हारे साथ बहुत बदतमीजी के साथ बात की..

उन्होंने मेरी दीदी का चेहरा अपने हाथों में ले उनको चुम्मा लेने की कोशिश की.. दीदी दूर हो गई ठाकुर साहब से..

मेरी रूपाली दीदी: क्या आप मेरे पति के लिए एक व्हीलचेयर का इंतजाम कर सकते हैं?

ठाकुर साहब: व्हीलचेयर? वह किसलिए रूपाली? जब रात में मैं तुम्हारी लूंगा तो तुम्हारा पति व्हील चेयर पर आकर देखेगा सब कुछ.. इसलिए?

मेरी रूपाली दीदी शर्मिंदा होकर चुपचाप नीचे की तरफ देखने लगी थी..

ठाकुर साहब: ठीक है रुपाली.. व्हीलचेयर का इंतजाम हो जाएगा..

मैं कुछ और पैसे रख दूंगा.. व्हीलचेयर की खातिर कम से कम एक चुम्मा तो दे दो.. मेरी रानी..

रूपाली दीदी: बस कीजिए अपनी बकवास... कुछ भी बोलते हैं आप.. मैं नहीं करूंगी आपके साथ यह सब..

ठाकुर साहब: तुम नहीं सुधरने वाली... मैं नहाने जा रहा हूं मेरा नाश्ता तैयार रखना... बोलते हुए ठाकुर साहब वॉशरूम में घुस गय..

इसके बाद कुछ खास नहीं हुआ.. ठाकुर साहब नहाने के बाद नाश्ता किय और फिर चले गए घर से बाहर अपने काम के लिए..

मेरी रूपाली दीदी ने भी सोनिया को कॉलेज छोड़ दिया और वापस घर आकर अपनी छोटी बेटी नूपुर को अपना दूध पिला बिस्तर पर लेटी हुई सोच रही थी.... यह कंचन क्या चीज है... मुझे कंचन की तरह ठाकुर साहब के रंडी नहीं बनना है... मेरी दीदी ने जीजू को खाना खिलाया... फिर मुझे और रोहन को भी... कंचन की निगाहें मेरे रूपाली दीदी पर टिकी हुई थी.. मेरी दीदी अपने बेडरूम में गई यानी कि ठाकुर साहब के बेडरूम में उनके बिस्तर पर लेट कर अपने आने वाले भविष्य के बारे में सोचने लगी... मेरी दीदी को नींद आ गई..

ठाकुर साहब ने मेरी बहन के साथ जो कुछ भी किया था वह किसी भी तरह से ठीक नहीं था.. लेकिन साथ ही साथ वह हमारे घर की आर्थिक स्थिति को भी संभाल रहे थे... मेरी रुपाली दीदी ठाकुर साहब के ही ख्यालों में खोई हुई थी.. व्हीलचेयर..?

मेरी बहन का पति दूसरे कमरे में सो रहा था.. और मेरी रूपाली दीदी ठाकुर साहब के साथ उनके बिस्तर पर.. ठाकुर साहब की उम्र कुछ ज्यादा ही थी.. मेरी रुपाली दीदी की तुलना में.. ठाकुर साहब मेरी रुपाली दीदी के साथ कुछ मौज मस्ती करना चाहते थे.. इस बात में तो कोई शक नहीं..

मेरी रूपाली दीदी किसी भी कीमत पर नहीं चाहती थी.. उन्होंने मन ही मन फैसला किया कि वह ठाकुर साहब को बोलेगी कि कोई नौकरी दिला दें.. ताकि वह ठाकुर साहब का उधार चुका सकें... पर ठाकुर साहब ... उनका तो इरादा कुछ और ही था.. मेरी बहन की लेने का... बिना कंडोम के..

मेरी बहन को नींद आ गई.. शाम को डॉक्टर साहब आए.. उन्होंने मेरे जीजाजी का चेकअप किया.. डॉक्टर साहब ने सुझाव दिया कि मेरे जीजाजी को एक व्हीलचेयर की जरूरत है... मेरी दीदी उनकी बात सुनकर हैरान थी.. ठाकुर साहब ने भी तो यही कहा था..

ठाकुर साहब के पर्स में से पैसा निकाल कर मेरी रूपाली दीदी ने डॉक्टर को दिया और उनको जाने दिया... डॉक्टर साहब के जाने के बाद मेरी रूपाली दीदी और मेरे जीजा जी ने एक साथ लंच किया.. मेरी दीदी अच्छा महसूस कर रही थी.. सब कुछ अच्छा हो रहा था...

मैं और रोहन अब एक दूसरे के अच्छे दोस्त बन चुके थे..​
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