Update 12

भीमा मेरी रुपाली दीदी को अपनी गोद में उठाकर अपनी खोली के अंदर ले तो जा रहा था मगर उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था की यह हुस्न की मल्लिका यह काम देवी उसके साथ उसकी गोद में बैठी हुई है, उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह सच है या सपना..

और उसे यकीन तब हुआ जब मेरी दीदी ने अपनी चूड़ियों से भरी हुई अपनी दोनों बाहों का हार उसके गले में डाल दिया...

अपने कमरे के अंदर पहुंचने के बाद भीमा ने मेरी बहन को उनके पैरों पर खड़ा कर दिया...

मेरी रूपाली दीदी अपनी चूचियां तान के एक मस्त अंगड़ाई तोड़ते हुए कमरे में चारों तरफ देखने लगी... सोनिया तो उस छोटे से कमरे के अंदर उस छोटे से बिस्तर पर सोई हुई थी.. बाकी का कमरा बहुत गंदा था और काफी सामान इधर-उधर बिखरा हुआ था... बस एक ही कुर्सी थी वहां पर बैठने के लिए...

मेरी रूपाली दीदी: ओफो.... भीमा भैया... इस कमरे में तो एक ही कुर्सी है अब हम दोनों इस एक कुर्सी पर ही बैठकर बातचीत कैसे करेंगे..

कुछ सोचने के बाद मेरी रूपाली दीदी भीमा के पास आई और बड़े प्यार से उसकी चौड़ी छाती पर मुक्के मारने लगी... फिर वह भीमा को धकेलते हुए उस कुर्सी के ऊपर बिठा दी.. भीमा को तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि मेरी रूपाली दीदी उसके साथ क्या कर रही है... लेकिन उसे बड़ा मजा आ रहा था...

मेरी बहन ने अपनी साड़ी अपने घुटनों तक उठा के अपने गुलाबी होठों को अपने दांतो से काटते हुए भीमा की आंखों में अपनी नशीली आंखों से देख रंडियों की तरह मुस्कुराने लगी थी... और फिर अपनी दोनों टांगे दाएं बाएं कर कर भीमा की गोद में बैठ गई मेरी बहन...

भीमा: आह्ह्हह्ह.... हमार बुरचोदी भौजी..आह्ह...

दरअसल मेरी बहन भीमा कि लूंगी के भीतर टेंट बनाकर खड़े उसके खूंखार मुसल पर बैठ गई थी... जिसके कारण उसके मुंह से कामुक सिसकारियां निकलने लगी थी..

मेरी रूपाली दीदी: क्या कहा आपने भैया जी..

भीमा ने मेरी बहन की आंखों में आंखें डाल कर कहा...

भीमा: मेरी बुरचोदी भौजी.....

भीमा की गंदी देहाती बातें सुनकर मेरी रूपाली दीदी के बदन में एक अजीब सा रोमांच उठ रहा था... आज पहली बार कोई मर्द मेरी बहन को गंदी गाली अपनी देहाती भाषा में दे रहा था... और उसे सुनकर मेरी दीदी नाराज होने के बजाय कामुक और उत्तेजित हो रही थी..

पिछले 1 महीने के अंदर ठाकुर साहब ने मेरी रुपाली दीदी को भरपूर चोदा था.... पर कभी भी उन्होंने मेरी बहन के बारे में गंदे लफ्ज़ों का इस्तेमाल नहीं किया था.. ना ही कभी काम क्रीड़ा के दौरान मेरी बहन को गालियां दी थी... मेरे जीजू तो वैसे भी बहुत ही शरीफ इंसान है.. वह तो कभी सोच भी नहीं सकते कि किसी औरत के साथ ऐसा किया जा सकता है... भीमा ने जो पान खिलाया था यह उसका नशा था या फिर कुछ और मगर मेरी दीदी भीमा की देहाती बातों और उसकी जबरदस्त मर्दानगी की दीवानी होती जा रही थी...

भीमा ने अपनी मजबूत बाहों का शिकंजा मेरी रूपाली दीदी की नंगी कमर और उनकी पीठ के आसपास मजबूत कर दी और मेरी बहन को अपने सीने से चिपका लिया था...

साड़ी के ऊपर ही सही मेरी रूपाली दीदी को अपनी चूत के नीचे टिका हुआ भीमा का खूंखार मुसल अपनी मौजूदगी का एहसास दिला रहा था...

मेरी रूपाली दीदी बस अपनी कामुकता में मुस्कुरा रही थी..

मेरी दीदी ने अपना निचला अंग उसकी कठोर अंग पर धीरे-धीरे रगड़ना शुरू कर दिया था...

और फिर भीमा की कामुक आंखों में देखते हुए बोलने लगी.

मेरी रूपाली दीदी: भैया जी.... आपसे बस एक बात पूछनी है अगर आप बुरा नहीं मानो तो पूछ सकती हूं क्या..

भीमाने और जबरदस्त तरीके से मेरी बहन को जकड़ लिया... मेरी रूपाली दीदी की चूचियां उसके चेहरे पर जाकर टकरा गई... और पहली बार उसने अपने काले मोटे होठों की मोहर मेरी बहन की एक चूचि पर लगा दी थी..

मेरी रूपाली दीदी: आह्ह… उफ्फ मम्मी.... मेरी बहन को अपने पूरे जिस्म में एक जबरदस्त कामुक कंपन का एहसास हुआ..

चोली के ऊपर से ही भीमा द्वारा मेरी रूपाली दीदी की दोनों चूचियां कस-कस के अब रगड़ी, मसली जा रही थीं..

भीमा: हां पूछो भौजी... का पूछना है आपको..

मेरी रूपाली दीदी भीमा के मुसल अंग के ऊपर अपना निचला अंग टिका कर बड़ी मासूमियत के साथ पूछने लगी.

मेरी रूपाली दीदी: भैया जी.. इस महंगाई के जमाने में भी आप इतने सारे बच्चे कैसे पाल सकते हो.... आप कुछ करते क्यों नहीं ताकि आगे से और बच्चे पैदा ना...

मेरी बहन की बातें सुनकर भीमा हंसने लगा था... मेरी दीदी की बात का जवाब देने के बजाय उसने अपने डब्बे से एक और पान निकाल कर मेरी बहन के मुंह में ठूंस दिया... मेरी रूपाली दीदी मस्त होकर चबाने लगी..

अभी तो पहले वाले पान के नशे में मेरी दीदी झूम रही थी... इस दूसरे पान ने तो कयामत ढा दी मेरी दीदी के अंदर.. ऊपर से मेरी रूपाली दीदी एक कठोर मर्द के कठोर अंग के ऊपर बैठी हुई थी जिसकी दस्तक उनके निचले छेद पर महसूस हो रही थी... मेरी बहन वासना की नदी में गोते खा रही थी बिना किसी रूकावट के..

मेरी दीदी ने झूमते हुए एक अंगड़ाई तोड़ी भीमा की गोद में बैठे हुए... उसके कठोर मुसल पर..

भीमा मेरी रुपाली दीदी की हालत देख कर मुस्कुराने लगा... उसे अच्छी तरह पता था कि उसने जो पान मेरी बहन को खिलाया है उसका नशा मेरी दीदी के सर पर चढ़कर बोल रहा है..

भीमा अपना डब्बा खोलकर एक पान निकालकर अपने मुंह में रखने ही वाला था कि मेरी दीदी ने उसका हाथ पकड़ लिया और वह पान उसके हाथ से लेकर अपने मुंह में ले लिया... लेकिन दीदी उस पान को चबा नहीं रही थी... मेरी रूपाली दीदी की इस हरकत पर भीमा हैरान होकर उनकी तरफ देख रहा था...

मेरी रूपाली दीदी फिर नीचे की तरफ झुक कर अपने गुलाबी होंठ भीमा के काली भद्दे होठों पर रख के चूमने लगी उसको... उसके होठों को बड़े प्यार से चूसने के बाद मेरी दीदी ने अपनी जुबान उसके मुंह के अंदर डाल दी और वह पान भी उसके मुंह में ठूंस दिया... अब दोनों मिलकर पान चबाने लगे थे... जबरदस्त चुंबन हो रहा था दोनों के बीच... उस पान को खाने की लड़ाई चल रही थी... मेरी बहन की तो सांसे फूलने लगी थी..

पवन के साथ साथ भीमा ने मेरी रूपाली दीदी के होठों पर लगे हुए लाल लिपस्टिक को भी पूरा चाट कर साफ़ कर दिया था..

उस चुंबन को तोड़कर भीमा ने मेरी बहन को खड़ा किया और खींचकर उनकी साड़ी को उनके बदन से अलग कर दिया और नीचे फेंक दिया.

उसके अंदर का जानवर जाग चुका था... वह हवस की आग में पागल हो चुका था...

छोटे कद की मेरी बहन भीमा के सामने खड़ी थी अपनी चोली और पेटीकोट में... भीमा उनके सामने खड़ा हुआ दानव लग रहा था.. उसने मेरी बहन की बालों का जूड़ा खोल दिया एक झटके में ही... मेरी रूपाली दीदी के लंबे लंबे काले काले बाल बिखर कर उनकी गांड तक पहुंच गए थे... दीदी की मांग में सिंदूर लगा हुआ था.. जिसे देखकर भीमा मुस्कुरा रहा था अजीब तरीके से...

भीमाने मेरी रुपाली दीदी के डिजाइनर फ्रंट ओपन चोली के सारे बटन एक-एक करके खोल दिए.. और मेरी बहन की चोली को निकाल कर वहीं जमीन पर फेंक दिया...

ब्रा में कैद मेरी बहन के दोनों कबूतर फड़फड़ा के आजाद होने की दुआएं मांगने लगे थे.. मेरी रूपाली दीदी की चूचियां गर्मी और वासना की आग में झुलसते हुए ऊपर नीचे हो रही थी भीमा की आंखों के सामने..

मेरी रूपाली दीदी की गदरआई हुई जवानी देख कर भीमा बेचैन हो रहा था... आज तक उसने सिर्फ गंदी मैगजीन में ही इतने बड़े-बड़े और ठोस चूचियां देखी थी... नीचे झुक कर उसने मेरी बहन की दोनों चूचियों को अपने मजबूत हाथों में पकड़ लिया और जोर जोर से मसलने लगा दबाने लगा ब्रा के ऊपर से... फिर उसने मेरी बहन की एक चूची को अपने मुंह में लिया और अपने दांत से काट लिया... मेरी दीदी सिसक सिसक के पागल होने लगी थी..

मेरी रूपाली दीदी: उह्ह… उह्ह… उह्ह्ह… मम्मी रे... दांत से मत करिए भैया जी.... दर्द होता है.. उह्ह्ह…

भीमा तो दीवाना हो गया था मेरी बहन की छाती देख कर... अपनी हथेली में लेकर वह अब बारी बारी से मसलता और चूस रहा था..

मेरी रूपाली दीदी: ओह्ह… आह्ह आह्ह… भैया जी.... प्यार से कीजिए ना.... मैं मर जाऊंगी....

हवस की आग में जलती हुई मेरी बहन अपने मुंह से कुछ भी बोल रही थी..

अचानक भीमा को धक्का देकर मेरी रूपाली दीदी उससे अलग हो गई... भीमा हैरान होकर मेरी बहन की तरफ देखने लगा... मेरी रूपाली दीदी भी उसकी तरफ देखकर रंडियों की तरह मुस्कुराने लगी.. फिर मेरी दीदी पीछे की तरफ घूम गई और अपने बाल अपनी पीठ से एक हाथ से हटाते हुए भीमा की और अपनी गर्दन घुमा कर बोली..

मेरी रूपाली दीदी: भैया जी.... हमारी ब्रैशियर खोलने में हमारी मदद कीजिए ना...

जिस कामुक अंदाज में मेरी दीदी ने धीमा को अपनी ब्रा खोलने के लिए आमंत्रित किया था... वह बस मंत्रमुग्ध होकर मेरी बहन की तरफ देख रहा था..

मेरी रूपाली दीदी: क्या सोच रहे हैं भैया जी.... हमारी ब्रा खोलना है कि नहीं... वरना हम चले जाएंगे... कह देते हैं आपको...

मेरी रूपाली दीदी की कामुक अदाएं देकर भीमा तो बिल्कुल पागल हो चुका था... वह दीवाना हो चुका था मेरी बहन का...

लेकिन मुसीबत की बात यह थी की भीमा नहीं जानता था कि इस डिजाइनर ब्रा का हुक कैसे खोलें.... इसीलिए वह नीचे की तरफ झुक गया और मेरी बहन की पीठ को अपनी जीभ से चाटने लगा...

मेरी रूपाली दीदी मन ही मन भीमा की परेशानी को समझ रही थी...

मेरी रूपाली दीदी( नखरे दिखाती हुई): ठीक है भैया जी... अगर आप नहीं चाहते हो तो मैं खुद ही अपनी ब्रा का हुक खोल देती हूं..

ऐसा बोलते हुए मेरी बहन अपना हाथ पीछे की तरफ ले गई ...अपनी ब्रा का हुक खोलकर दीदी ने अपनी ब्रा को नीचे गिरा दिया....

भीमा को अपने मन मांगी मुराद मिल गई थी..

भीमा ने मेरी दीदी को अपनी तरफ घुमाया... मेरी रूपाली दीदी की बड़ी-बड़ी चूचियां... गुलाबी निप्पल से बहता हुआ दूध देखकर भीमा को कुछ ज्यादा हैरानी नहीं हुई... उसे अच्छी तरह पता था कि मेरी बहन 3 महीने पहले ही मां बनी है... दूध की बूंदे मेरी बहन के निप्पल से टपक टपक कर उनकी नाभि की तरफ जा रही थी...

छोटे कद की मेरी बहन दोनों हाथों में अपनी चूचियां थाम के भीमा को आकर्षित करने का प्रयास कर रही थी... जिसकी कोई जरूरत नहीं थी.. भीमा तो पहले से ही मंत्रमुग्ध हो चुका था मेरी बहन के ऊपर..

उसने मेरी बहन का एक निप्पल अपने मुंह में ले लिया और मेरी बहन का दूध पीने लगा... दीदी उसका सर पकड़ के अपनी छाती से दबाने लगी..

मेरी रूपाली दीदी: उह्ह… उह्ह्ह... हमार दूध काहे पीते हैं आप.. हमारा दूध तो हमारी बेटी की खातिर है..

मेरी दीदी भी देहाती भाषा बोलने की कोशिश कर रही थी.. कामुक अंदाज में...

भीमा( मेरी बहन की चूची से मुंह हटा कर): बुरचोदी भौजी हमार... हमको पता था... तोहार चूची में दूध रहा.... छिनार रंडी बाड़ू तू... हमारा ठाकुर साहब तभी तो पी पी का इतना मोटा हो गया है.. बहुत मीठा दूध बा तोहार बुरचोदी.... आज तक तोहार दोनों चूची के पी पी के सुखा देहम..

और फिर बारी बारी से मेरी बहन की दोनों चुचियों से दूध पीने लगा... दांत काट कर वह मेरी बहन की दोनों छातियों पर मुहर भी लगा रहा था..

मेरी रूपाली दीदी ‘आहहह आहहहह.. सिईईईई.. आहहह..’

अ मम्मी हाय रे... करने लगी थी... साथ ही साथ वह बीमा का सर पकड़ के अपनी छाती में दबा रही थी.. भीमा तो पूरी तरह से मदहोश होकर मेरी बहन का दूध पी रहा था...

मेरी रूपाली दीदी की दोनों चूचियां फुल कर गुब्बारा बन गई थी... लाल-लाल निपल्स अकड़ कर अपनी औकात में आ गए थे.. पूरी तरह तन के मेरी बहन के निपल्स भीमा को चुनौती दे रहे थे... और उस चुनौती को स्वीकार करते हुए भीमा बड़ी बेरहमी से मेरी बहन की दोनों चुचियों के साथ खेल रहा था...

“ऊईई…ई…ई…ई…” कुछ दर्द और कुछ मजे से मेरी रूपाली दीदी कामुक सिसकियां ले रही थी.... उनकी 3 साल की बेटी बगल में ही बिस्तर पर सो रही थी शायद इसीलिए मेरी दीदी चिल्ला नहीं रही थी...

भीमा ने मेरी रूपाली दीदी की चुचियों को जोर जोर से पंप करना शुरू किया.... दीदी के निप्पलस से दूध की धार निकलने लगी... दीदी के दूध से भीमा का चेहरा गीला होने लगा....

कमसिन जवान मेरी बहन अब तो बहुत बुरी तरह से सीसकने लगी थी..

भीमा बारी-बारी से मेरी बहन की छातियों से दूध पीते हुए अपना चेहरा ऊपर की तरफ उठा कर मेरी दीदी की बड़ी-बड़ी काली कजरारी आंखों में झांक रहा था जहां पर उसे हवस के अलावा और कुछ नहीं दिखाई दे रहा था...

तकरीबन 10 मिनट तक वह मेरी बहन की दोनों चुचियों को अपनी मनमर्जी से प्यार करता रहा... चूसता रहा बीच बीच में काट भी रहा था अपने नुकीले दांत से... इसी दौरान उसने मेरी रूपाली दीदी की पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया... मेरी बहन को तो पता भी नहीं चला था कि उनका नाड़ा खुल चुका है... मेरी दीदी का पेटीकोट नीचे जमीन पर पड़ा हुआ धूल चाट रहा था..

भीमा के दांतो के प्रहार से मेरी रूपाली दीदी तड़पने लगी और जब उनसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो वह धक्का देकर भीमा से अलग हो गई...

मांग में सिंदूर, गले में मंगलसूत्र, हाथों में मेहंदी, कलाई में चूड़ियां और अपनी दोनों टांगों के बीच में एक लाल रंग की छोटी सी पेंटी पहन कर जो उनके ही काम रस से भीग चुकी थी, मेरी दीदी अपनी दोनों छतिया ऊपर नीचे करती हुई अपने होठों को अपने दांतो से काटती हुई भीमा की तरफ कामुक निगाहों से देख रही थी...

मेरी बहन के पांव थरथरा रहे थे जिसके साथ उनके पांव में पड़ी हुई पायल छन छन कर रही थी...

भीमा को तो ऐसे लग रहा था जैसे उसके सामने स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा लगभग नंगी होकर उसको आमंत्रित कर रही है...

मेरी रूपाली दीदी: क्या देख रहे हो भैया जी आप.... हमको शर्म आती है..

भीमा: हम तो अपन बुरचोदी भौजी को देख रहे हैं... क्या मस्त चूची बा तोहार..... कसम झंडे वाले बाबा की.... हम अपना जिंदगी में ऐसा चूची नहीं देखा...

इतना बड़ा बड़ा और दुधारू ... इतना ठोस फिर भी इतना मुलायम... कसम खाता हूं भौजी... हम तो वीडियो सीडी में भी नहीं देखा हूं ऐसा..

मेरी रूपाली दीदी अच्छी तरह समझ रही थी की भीमा उनकी तुलना अंग्रेजी ब्लू फिल्म की हीरोइनों से कर रहा है..

अब तो मेरी दीदी उसकी बात सुनकर खिलखिला कर हंसने लगी थी...

भीम अपने घुटनों के बल बैठा हुआ था... मेरी रूपाली दीदी उसके पास धीरे धीरे चलते हुए आई.. और फिर अपनी बाहों का हार उसके गले में डाल कर बड़े प्यार से बोली..

मेरी रूपाली दीदी: भैया जी.... लगता है आप अंग्रेजी वाला गंदा फिल्म बहुत देखते हो... फिर तो आप सब कुछ करना जानते होंगे... है ना भैया जी....

भीमा ने मेरी रुपाली दीदी की दोनों छातियों को एक बार फिर अपनी हथेली में पकड़ कर बुरी तरह से मसल डाला और बोला..

भीमा: सही पकड़े हो आप भौजी... हम तो बहुत अंग्रेजी फिल्म देखता हूं और खूब सारा पैंतरा भी सीखा हूं... मगर हमको कौन हो जोड़ीदार नहीं मिला था अब तक जिसका सामने सारा पैंतरा दिखाओ... लेकिन अब कौनो परेशानी नहीं होगी... तुम मिल गई हो.... रगड़ रगड़ के पेलूंगा तुमको बुरचोदी.... तेरी बुर फाड़ दूंगा...

ऐसा बोलते हुए उसने मेरी बहन की पैंटी को फाड़ डाला था... छोटे-छोटे काले बालों के बीच छुपे हुए मेरी बहन के गुलाबी अंग को देखकर भीमा पगला गया था.... मेरी रूपाली दीदी ने भी उसका बनियान निकाल कर उसके बदन से अलग कर दिया था... मेरी रूपाली दीदी की फटी हुई पेंटी निकाल कर भी माने नीचे जमीन पर गिरा दिया...

मेरी रूपाली दीदी अब नंगी हो चुकी थी उसकी खोली के अंदर... भीमा भी बस लूंगी पहना हुआ था नाम मात्र का...

एक झटके में मेरे रूपाली दीदी ने भीमा की लूंगी खोल दी... अब वह भी नंगा खड़ा होकर बेशर्मी से मेरी बहन को निहार रहा था और उसके नीचे का औजार भी... मेरी रूपाली दीदी हैरान थी उसके औजार को देखकर...

मेरी बहन को पहले से ही अंदाजा तो हो चुका था की भीमा की टांगों के बीच में एक बहुत बड़ा काला अजगर है... लेकिन जब मेरी रुपाली दीदी ने सचमुच में उस काले अजगर को अपनी आंखों से देखा तो हैरान रह गई..

तकरीबन 10 इंच लंबा..... और खूब मोटा तगड़ा..... ऊपर छत की तरफ अपना मुंह उठाकर देख रहा था भीमा का वह मुसल...

मेरी रूपाली दीदी को भीमा का मूसल देखकर ठाकुर साहब की याद आने लगी थी.... उनका 8 इंच का करारा मुसल भी मेरी दीदी को इस अजगर के आगे फीका लग रहा था.... लेकिन मेरी दीदी के मन में एक दूसरी मुसीबत...

मेरी रूपाली दीदी मन ही मन सोचने लगी थी: हाय हाय मै तो मर ही जाऊ .... मै तो बिस्तर से न उठ पाऊँगी ... इतना बड़ा लंड.... यह आदमी इंसान है कि घोड़ा.....

मेरी रूपाली दीदी यह सब सोच रही थी की भीमा ने मेरी बहन को अपनी गोद में उठा लिया और नीचे फर्श पर पटक दिया....

और मेरी बहन के होठों को बुरी तरह चूमने लगा.... मेरी रूपाली दीदी ने अपना हाथ नीचे ले जाकर भीमा के उस कड़क लंड को अपनी कलाई में पकड़ लिया और जोर जोर से हिलाने लगी.... उसके लंड का तापमान बढ़ा हुआ था... मेरी रूपाली दीदी को तो ऐसा लग रहा था जैसे उनका हाथ जल जाएगा.. उसकी मोटी मोटी नसे अपने हाथ की उंगलियों पर महसूस करके मेरी दीदी परेशान हैरान होने लगी थी.. फिर भी उसके लंड को हिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थी.... मेरी रूपाली दीदी ने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी..... मेरी बहन हैरान होने लगी थी क्योंकि मुसल और भी ज्यादा बड़ा होने लगा था....

भीमा: उह्ह… उह्ह… उह्ह्ह… हमार बुरचोदी ... रंडी साली.... बहुत मस्त माल हो तुम भौजी...… उह्ह्ह… बड़ा मजा आवत है भौजी... हिलावा ऐसे ही... और जोर जोर से हिला...

भीमा का अंदाज और उसकी बातें अब काफी उग्र हो गई थी... वह तो अपने देहाती भाषा में मेरी बहन को गालियां भी देने लगा था... जिसका बुरा मानने के बजाय मेरी दीदी इंजॉय कर रही थी..

मेरी रूपाली दीदी की हाथों की चूड़ियां टूटने लगी थी... उसका वह हिलाते हुए... मेरी बहन भी पूरी तरह से मूड में आ चुकी थी.. मेरी दीदी ने उसके कठोर अंग को अपनी हथेलियों की कैसे आजाद कर दिया... और भीमाने मेरी बहन को फर्श के ऊपर ही पूरा चित कर दिया..

पहले उसने मेरी रुपाली दीदी के होठों को चूसा.. फिर मेरी दीदी के गाल को, फिर गर्दन को... उसके बाद मेरी बहन की दोनों चूचियों को बड़े प्यार से चूमने के बाद वह नीचे की तरफ आने लगा था...

मेरी रुपाली दीदी की गहरी नाभि और पतली कमर पर भीमा ने अपने होठों से और अपनी जुबान से बहुत सारा प्यार दिया... मेरी दीदी उसके सर पर उसके बालों में अपने हाथ फिरा रही थी.... और अपना निचला होंठ अपने दांतो से काटकर कामुक सिसकारियां ले रही थी.. भीमा अब और नीचे की तरफ गया... मेरी बहन की दोनों टांगों के बीच... उसने मेरी दीदी की दोनों टांगों को फैला कर अलग अलग कर दिया और नीचे झुककर सामने का नजारा देखने लगा.... छोटे छोटे काले बालों के बीच में छुपी हुई मेरी रूपाली दीदी की कसी हुई मक्खन मुलायम गुलाबी गुलाबी चूत देख कर उसकी सांसे भारी होने लगी... उसकी गरम-गरम सांसो का एहसास अपनी गुलाबी चूत के ऊपर पाकर मेरी दीदी शर्माने भी लगी थी और काम उत्तेजित भी..

मेरी रूपाली दीदी( कामुक अदा से): क्या देख रहे हो भैया जी..

भीमा: हम तोहार बुर देख रहा हूं भौजी... बड़ा मस्त टाइट सामान बा तोहार.... हमार लुगाई का बड़ा बड़ा झांठ है... उसका तो बड़ा सा भोसड़ा बना हुआ है इस जगह पर..

मेरी रूपाली दीदी: भैया जी... आपका यह जो इतना बड़ा मुसल है ना.. किसी भी औरत के छेद में जाएगा तो वहां भोंसड़ा बन ही जाएगा..

ऐसा बोलकर मेरी बहन भीमा की तरफ देखकर रंडियों की तरह मुस्कुराने लगी थी...

अपने लंड की तारीफ मेरी बहन के मुंह से सुनकर भीमा का सीना गर्व से चौड़ा हो गया था...

भीमा: सच कहता हूं हमार बुरचोदी भौजी... तोहार जैसन बुर हम अपना जिंदगी में नहीं देखा हूं... बच्चा पैदा करने के बाद भी तोहार सामान तो एकदम सील पैक लगता है...

उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर मेरी रूपाली दीदी की दोनों बड़ी बड़ी गांड को दबोच लिया और कस के मसल भी दीया... मेरी रूपाली दीदी हाय हाय करते हुए अपनी गांड ऊंची कर दी....

मेरी रूपाली दीदी की नाजुक गुलाबी चूत के साथ उनकी गांड का भूरे रंग का छोटा सा छेद भी भीमा की आंखों के सामने आ गया था... और अब उसने देर करना ठीक नहीं समझा... उसने अपनी लंबी जुबान बाहर निकाली... और मेरी बहन की गांड के छेद से लेकर उनकी गुलाबी चूत तक अपनी जुबान लहराता हुआ ले गया... उसकी इस हरकत पर मेरी रूपाली दीदी का रोम रोम कांप उठा.... मेरी दीदी सीहरने लगी..

मेरी रूपाली दीदी: .ओह्ह… माँ ऽऽ, अह्ह… ओह्ह...ऊओह्ह… माँ … हाय मैं मर जाऊंगी... भैया जी कहां से सीखा आपने ऐसा करना...

भीमाने मेरी दीदी की बात का कोई जवाब नहीं दिया..

बल्कि उसने तो फिर से वही क्रिया दो तीन बार और दोहराई...

मेरी दीदी मस्ती से गिनगिनआने लगी थी... तड़पते हुए अपने चूतड़ों को फर्श पर रगड़ने लगी थी...

मेरी रूपाली दीदी - आआआआह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह ऊऊऊऊऊईईईईईईईईईई स्सस्सस्सस ईईईईईईईईई ..."म्‍म्म्मम, "ओह्ह्ह्ह ... आअहह!"ओह्ह्ह्ह.. मम्मी.. भैया जी.. नहीं..

भीम अपनी लंबी खुरदरी जुबान से मेरी रूपाली दीदी की फुलझड़ी को चाटने लगा था... अपने मासूम अंग पर उसकी गरम-गरम जुबान का एहसास पाकर मेरी बहन रंडियों की तरह व्यवहार करने लगी थी.. मेरी दीदी ने अपनी दोनों टांगे उठा कर भीमा के कंधे पर रख दी थी.. और भीमा का चेहरा मेरी बहन की गुलाबी फुलझड़ी के अंदर धंसा हुआ था..

भीमा मेरी बहन की चूत से धीरे-धीरे टपकता हुआ खट्टा नमकीन पानी चाट रहा था... उसे बड़ा मजा आ रहा था... मेरी दीदी तो सातवें आसमान में पहुंच चुकी थी.. मेरी रूपाली दीदी के पैरों में पड़ी हुई पायल से छन छन की आवाज निकलने लगी थी...

भीमा ने अपने एक हाथ की दो उंगलियों से मेरी बहन की गुलाबी फुलझड़ी की दोनों पत्तियों को अलग किया और अपनी जुबान को भीतर का रास्ता दिखा दिया... और फिर अपनी जुबान अंदर बाहर करते हुए अपनी जीभ से मेरी बहन की चुदाई करने लगा..

उसकी गीली जीभ का तीखा नम स्पर्श अपने गुलाबी जिस्म के सबसे सवेदनशील अंग पर पड़ते ही मेरी रूपाली दीदी के मुहँ से जैसे सिसकारियों की बौछार निकल पड़ी ..

मेरी रूपाली दीदी : आआआआह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् स्सस्सस्सस ईईईईईईईईई ऊऊऊऊऊईईईईईईईईईई आआआआह्ह्ह्ह म्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्ममा आआआआआआआआआआआअ.. प्लीज ..आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् नहीं...आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् मम्मी...

नहीं भैया जी प्लीज..

भीमा ने अपनी जुबान की करामात से आग लगा दी थी मेरी बहन की फुलझड़ी के अंदर...

आज तक किसी ने भी मेरी रूपाली दीदी के साथ इस तरह से प्यार नहीं किया था...

मेरी रूपाली दीदी जैसे अपने जिस्म में उठती वासना की तरंगो को अब संभाल नहीं पा रही थी - आआआआह्ह्ह्ह आआआआह्ह्ह्ह बस करो भैया जी मै मर जाउंगी ....

मेरी दीदी - आआआआह्ह्ह्हआआआ आह्ह्ह्हआआआआह्ह्ह्ह ओओओओओओओओओओओओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हाय मां..

मेरी रूपाली दीदी की गुलाबी फुलझड़ी झरना बनी हुई थी..

मेरी बहन फडफड़आती, तड़पती, मचलती, कराहती, सिसकती भीमा को यह क्रिया रोकने की गुहार लगाने लगी थी... क्योंकि मेरी बहन झड़ने वाली थी.. लेकिन भीमा नहीं रुका... उसका रुकने का कोई इरादा भी नहीं था... बल्कि उसे मनचाहा प्रसाद मिलने वाला था... वह भला क्यों रुक जाता...

और फिर मेरी दीदी झड़ गई... अपनी गुलाबी फुलझड़ी का नमकीन पानी भीमा की जीभ के ऊपर रखकर मेरी रूपाली दीदी थरथर आते हुए फर्श के ऊपर निढाल हो कर लेट गई.. और अपनी आंखें बंद करके गहरी गहरी सांसें लेने लगी... उनकी चुचियों के ऊपर पड़ा हुआ उनका मंगलसूत्र उनकी सांसों के साथ ऊपर नीचे हो रहा था...

भीमा मेरी रुपाली दीदी का पूरा पानी चाट गया था.... और मेरी बहन को ऐसे झड़ते हुए देख रहा था.. उसकी निगाहें मेरी रूपाली दीदी के मंगलसूत्र और मांग में पड़े हुए सिंदूर पर टिकी हुई थी...

वह अपनी किस्मत पर गुमान कर रहा था और अपनी मर्दानगी पर भी...

अब समय आ गया था आखरी खेल खेलने का... जो मेरी बहन के लिए इतना आसान नहीं होने वाला था... भीमा ने मन ही मन फैसला कर लिया था.. अगर अब नखरा करेगी साली तो जबरदस्ती पेलूंगा इस माल को.

बिना देर किए भीमा मेरी रूपाली दीदी के ऊपर सवार हो चुका था.... मेरी बहन की दोनों टांगों को चौड़ा करके अपने काले लंबे खूंखार मुसल को उसने मेरी बहन की गुलाबी चूत के ऊपर टिका दिया और झुक कर मेरी दीदी की आंखों में देखने लगा..

मेरी रूपाली दीदी- प्लीज ऐसा मत करो.. मम्मी हाय दैया...

भीमा ने मेरी बहन की आँखों में गहराई तक झाँका और उसके बाद में उसने धीरे से एक बार में हल्का सा झटका मारा उसका मोटा सुपाड़ा मेरी दीदी की कसी हुई गुलाबी चूत को चीरता हुआ अंदर फंस गया..

मेरी रूपाली दीदी के मुहँ से सिसकारी भरी कराह निकल गयी - आआआआआआआआह्हीईईईईईईईईईइ ऊऊऊऊओह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्ह.. भैया जी.. हाय दैया मर गई... प्लीज... धीरे धीरे करो ना.. मेरी जान लोगे क्या..

भीमा बड़ी कुटिलता के साथ मुस्कुराकर मेरी बहन की तरफ देख रहा था... वह मेरी दीदी के होठों को चूमने लगा..

फिर भीमा ने दो बार फिर से आगे पीछे कमर हिलाई.. मेरी बहन सिसक कर रह गई उन्होंने अपनी बाहों का कसाव भीमा की पीठ पर और बढ़ा दिया ..

मेरी रूपाली दीदी के मुंह से हल्की सी चीख निकल गई - आआआह्हीईइ माम्मामामामामाम्म आआआआआआअ ..ऊऊऊईईई माम्मामामामामाम्मरेरेरेरे मममररर गईईईईईईईई.. हाय रे दैया.. बड़े जालिम हो आप भैया जी...

भीमा तो अब मेरी बहन को बुरी तरह से पेलने के मूड में था...

भीमा ने मेरी रूपाली दीदी के अंदर झटके देने शुरू कर दिए थे.. उसका हर झटका मेरी दीदी के रोम-रोम में एक नया एहसास दे रहा था..

भले ही मेरी बहना की चूत भीमा के लंड के लिए अभी जगह न बना पाई हो लेकिन ये तीखा दर्द भरा अहसास भी कम जादुई नहीं था ... मेरी बहन की चूत के ओंठ अपने किनारों तक पूरी तरह फ़ैल गए थे ...भीमा के फौलादी लोड़े ने मेरी रूपाली दीदी की चिकनी चुनमुनिया को पूरा चौड़ा कर दिया था..

मेरी रूपाली दीदी की चूत घाटी की गुलाबी दरार में भीमा का लंड पूरी तरह धंस चूका था....अब तो बस आगे का सफ़र करने की देर थी ..मेरी दीदी के बदन की गरमी और वासना में उसका पूरा बदन नहाया हुआ था.

मेरी दीदी भी पूरी तरह से वासना की अग्नि में जलने लगी थी... जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी...

मेरी रूपाली दीदी के तने हुए सुडौल उरोज और कठोर निप्पल, और उनसे बहता हुआ दूध इस बात की निशानी थे कि मेरी बहन अब चुदने के लिए पूरी तरह से तैयार है .. मेरी बहन की उभरी कठोर छातियाँ, चिकनी कसी हुई गुलाबी चूत, भीमा के तो होश उड़े हुए थे.. भीमा ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि मेरी रुपाली दीदी जैसी अप्सरा उसके नीचे नंगी लेटी हुई कामुक सिसकियां ले रही होगी...

मेरी रूपाली दीदी कि चूत की गुलाबी गर्माहट के अहसास और उसके जवान मांसल बदन की कसावट देखकर भीमा से रहा न गया उसने एक जोरदार ठोकर मेरी बहना के छेद में मारी और मेरी बहना मुसल लंड की ठोकर से मिले दर्द से नहा गयी...

मम्मी रे...आआआईईईईई मामाआआ... मेरी दीदी चीख पड़ी..

इसके बाद भीमा ने अपने लंड को बाहर खींचा और फिर से मेरी रूपाली दीदी की चूत में पेल दिया था ..

ऊऊऊऊऊईईईईई ...माम्मईईईई.. मर गई रे... मेरी दीदी चीखने लगी..

भीमा ने फिर से पीछे लंड को खींचा और फिर से मेरी रूपाली दीदी की चूत में गहराई तक पेल दिया था...

इसके बाद मेरी दीदी के मुहँ से तेज कराह निकली - आआह्हीईईइ मामआअ ईईईईईईईईईईई मरररर रर रररर गाअयीईईई..

भीमा ने अपना लण्ड सुपाड़े तक बाहर निकालकर फिर धीमे-धीमे, रस लेते हुये, मेरी रूपाली दीदी की कसी बुर में कसकर रगड़ते हुए, अन्दर पेलना शुरू किया...मजे में मेरी दीदी की चूचियां पत्थर की तरह सख्त हो गई... निपल्स अकड़ के खड़े हो गए थे एक बार फिर से... और भीमा को दावत देने लगे थे...

भीमा अपने एक हाथ से मेरी रूपाली दीदी के दूध भरे दोनों जोबन को बारी-बारी से दबा रहा था और दूसरे हाथ से मेरी बहन की मस्त हो चुकी क्लिट को कसकर छेड़ना शुरू किया..

मेरी रूपाली दीदी: उह्ह… उह्ह… उह्ह्ह… रस में सिसक रही मेरी बहन..

अब मेरी रुपाली दीदी भी भीमा के उस खतरनाक मुसल को अपने चूत में कसकर सिकोड़ ले रही थी.. और भीमा के हर झटके का जवाब अपनी गांड उठा उठा कर दे रही थी.... मेरी दीदी उसके ताल से ताल मिलाने की कोशिश कर रही थी.... भीमा की रफ्तार बढ़ती जा रही थी...​
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