Update 12
अंकल की तो जैसे लॉटरी लग गई. मम्मी साड़ी में डांस करते हुए एकदम आइंटम डांसर लग रही थी। अंकल डांस करते हैं मम्मी की पतली कमर को छू रहे थे और नंगी पीठ पर हाथ घुमा रहे थे। मुझे गुस्सा भी आ रहा था।
मैं एक चीज नोटिस किया अंकल की पैंट में तंबू बन गया था। जो अंकल मम्मी के गांड में दबा दे रहे थे . मम्मी को अच्छा नहीं लग रहा था वह अंकल से दूर रहने कि कोशिश कर रही थी मगर अंकल बार बार उसे अपनी ओर खींच लिया कर रहे थे।
एक बार तो अंकल ने मम्मी को अपनी गोद में ही उठाया और डांस करने लगे। सभी ने दोनो के डांस पे तालिया बजायी। तभी अंकल और मम्मी काफी करीब हो गए थे।
ऐसी ही शादी का दिन आ गया। आज मम्मी ने एक घाघरा चोली पहनी थी। लाल चोली पूरी बैकलेस और घाघरा नाभि के 4 इंच आला। पतली कमर क्या लग रही थी मम्मी की। और हाई हील्स में उनकी गांड और बाहर आ रही थी। अब पंडित जी सब विधि कर रहे थे तब कन्यादान का समय आ गया।
पंडित जी ने लड़की के पापा और लड़की की मम्मी को बुलाया। लेकिन गौतम अंकल की पत्नी की मौत हो चुकी है। पंडित जी ने कहा कन्यादान के लिए गौतम जी की पत्नी का होना बहुत ज़रूरी है।
अब सब इस समस्या से रास्ता निकलने के लिए सोचने लगे। तो गौतम अंकल की एक बुआ बोली कि अगर गौतम की पत्नी की जगा कोई कन्यादान कर सकता है क्या। तो मौसी ने मम्मी का नाम सुझाया। मुझे मौसी पर गुस्सा आ रहा था बार बार मौसी मम्मी को कियू मुसीबत में डाल देती हैं।
लेकिन मम्मी ने मना कर दिया की वो पहले से ही शादीशुदा हैं और एक बच्चे की मां है। और वो कैसे किसी और की पत्नी की जगह ले सकती है । सभी लोग मान गए लेकिन मौसी ने जलते हुए आग में घी डालने का काम किया। मौसी बोली ये सिर्फ एक दिन तो बात है।
सभी की विनती करने पर मम्मी मान गई । पंडित जी ने एक दिन के लिए मम्मी और गौतम अंकल को पति पत्नी बना दिया और पूजा विधि में मम्मी अंकल की पत्नी बन कर साथ देने लगी। शादी होने के बाद मम्मी और अंकल पंडित जी से आशीर्वाद लेने गए। उन्हें आशीर्वाद दिया कि आपकी जोड़ी हमेशा सलामत रहे।
ये सुनते ही अंकल और मम्मी एक दूसरे की तरफ देखने लगे। मम्मी सब से आशीर्वाद लेने गयी। एक दादी ने मम्मी को दुल्हन समझ के पूछ लिया कि बेटी अब अगले साल हमें एक मुन्ना भी दे देना गोदी में। सभी लोग हंसने लगे और मम्मी शरम से पानी पानी हो गई।
विधि के अनुसार आज मम्मी और अंकल की भी शादी हुई थी कुछ आंटी और दादी बोली आज इनकी शादी हुई है तो उनकी सुहागरात होनी जरूरी है । जब यह सब में सुना तो मुझे मौसी पर बहुत गुस्सा आ रहा था और मम्मी मेरी ओर देख रही थीं में उसे गुस्सा भरी नजर से देख रहा था मम्मी मजबूर थी और वह किया कर सकती थीं। अब मेरे औरतों पर से भरोसा उठ गया था मेरा विश्वास टूटने वाला था कि मेरी मम्मी कभी किसी गैर मर्द से चुदाई नही करवा सकती हैं ।
मम्मी कुछ कहती हैं , इसे पहले सब आंटी लोगों ने मम्मी और अंकल को एक कमरे में बंद कर दिया और बाहर से दरवाज़ा बंद कर लिया। और बोले कि अब दरवाजा कल सुबह में ही खुलेगा। कुछ लोग अपने अपने घर चले गऐ और कुछ दादी यह रूकी गई । मौसी मेरे पास आकर बोली तुम्हारी मम्मी को कुछ और पुजा विधि करना है उसे रात भर यहां रुकना पड़ेगा तुम मेरे साथ होटल के कमरे में चलो मैं मौसी से कहा कि आप जो मैं थोड़ी देर में आता हूं । मैंने ध्यान से देखा तो उसे रूम के बगल में एक स्टोर रूम मुझे नजर आया । मैंने सभी से चुपके-चुपाते उस स्टोर रूम में जाकर घुस गया उसे स्टोर रूम से उस रूम की एक खिड़की जुटी हुई थी तो मैंने उसे खिड़की के पास जाकर देखा तो उस में एक छेद था जिसे मैं आराम से अंदर की सारी चीज देख और सुन सकता था ।
अंकल मम्मी की तरफ ध्यान से देख रहे थे और उनसे कहा, आज मैं तुम्हारी पति हूं और आज हमने सुहागरात मनाने का पूरा हक है। लेकिन मम्मी उसे मना कर रही थी वह बार-बार मम्मी को अपनी ओर खींच रहा था मम्मी उसका विरोध कर रही थी अंकल ने धीरे से मम्मी को किस किया और उनकी
चोली के पीछे की डोर खिंच के उसे अलग कर दिया। उसने अपनी चोली के अंदर में कुछ नहीं पहना था इसकी वजह से उसकी स्तन आजाद हो चुके थे वह अपने हाथों की हथेलियां से अपने दोनों स्तन को छुपाने की कोशिश कर रही थी
अंकल ने कहा वह इतने बड़े स्तन आज तक कभी किसी औरत के नहीं देखे थे और उसकी पत्नी की भी इतनी बड़ी नहीं थे। बड़े स्तन को देखकर पागल कुत्ते की तरह उसे नोचना और चूसना चालू कर दिया थोड़ी देर बाद उनका घाघरा ऊपर उठाया और जोर से उनकी गांड पर चाटा मारने लगे।
मम्मी दर्द से आह….उहह….उई माँ…..जैसी आवाज निकलने लगी. अंकल ने बिना देरी किये अपना 8 इंच का लंड बाहर निकाला इतना बड़ा देख के मम्मी की तो वैसे ही हालत खराब हो गई थी । जैसे ही अंकल ने अपना मोटा लंड अंदर घुसाया मम्मी की चीख निकल पड़ी। बहार खड़ी सब आंटी और दादी
लोग हसने लगी और उनको विश्वास हो गया कि सही में सुहागरात के मजे लिया जा रहे हैं।l
पूरे आधे घंटे चोदने के बाद अंकल का निकलने वाला था और उन्हें एक जोर का झटका लगता हुआ सारा माल एकदम अंदर छोड़ दिया। मम्मी बोलीं अरे तुमने क्या किया अगर मैं प्रेग्नेंट हो गई तो । अंकल बोले कि उसके लिए ही तो अंदर छोड़ा दिया । तूझे तो अपने बच्चे की माँ बनाकर ही छोड़ूगा। तभी मम्मी ने उसे एक थप्पड़ जड़ दिया । और बोली " माधरचोद में पहले से ही एक बच्चे की मां हु । रात भर ऐसे ही जी भर के मेरी सेक्सी मम्मी की बदन को नोच खाने के बाद अंकल और मम्मी सुबह 3 बजे सो गए। मैं भी स्टोर रूम से बाहर निकला बड़ी सावधानी से कहीं कोई मुझे देख ना ले देखा तो सभी गहरी नींद में सो रहे थे फिर में होटल के रूम में चला गया फिर जाकर वहां सो गया मैं सुबह 9:00 बजे मेरी नींद टूटी । जब मौसी ने कहा में शादी वाले घर जा रही हु तुझे चलना है किया
सुबह 9 बजे एक आंटी ने दरवाजा खोला तो मम्मी और अंकल कमरे में एकदम नंगी ही सो रही थी। ये देख के सब आंटी लोग हंसने लगी और मम्मी को आवाज लगाई। फ्रेश होने के बाद मम्मी एक लाल साड़ी पहन कर बाहर आई।
एक आंटी बोली देखो तो पुनम को नई दुल्हन के जैसा चेहरा चमक रहा है इसका। एक आंटी बोली हमारे भैया ने तुम्हें खुश तो किया ना । दूसरी आंटी बोलीं अरे रात को सुना नहीं तुमने कितने चिल्लाने की आवाज आ रही थी कमरे से। माजा तो पूरा लिया होगा इन्होंने। मम्मी के बैकलेस ब्लाउज़ से अंकल के नाखुन के निशान दिख रहे थे। वो देख के एक आंटी बोली ये निशान तो बता रहे हैं कि तुम कम से कम 4-5 बार चुदी होगी गौतम जी से।
ये सब सुनते सुनते मम्मी के गाल शर्म से लाल हो चुके थे। जब भी वे साडी पहनती थी ना वे डीपनेक ब्लाउज के साथ जो कोई भी उन को देखता दीवाना हो जाए करता इतनी सेक्सी लगती थी। शादी में आये सब लोग दुल्हन को कम मम्मी को ज्यादा घूर रहे थे। कुछ जवान लड़के तो जान बुझ कर भाभी भाभी कह कर तंग कर रहे थे।
शादी ख़त्म होने के बाद हम सब मौसी के घर वापस आ गये
मैंने मम्मी से दूरी बना लिया हूं जिसकी वजह से मैं उनके साथ अब टाइम भी स्पेंड नहीं करता नहीं उनसे ज्यादा बात करता हूं मैं अपने कमरे में समय बिताने की कोशिश करता हूं यह तो दोस्तों के बीच अपना टाइम स्पेंड करता हूं मेरी दूरी बनाने की वजह से मम्मी के जीवन में बहुत ही बड़ा असर पड़ा है वह मेरे करीब आना चाहती है मगर मैं उसे दूरी बनाए रखता हूं ।
उसे घटना को घटे 3 महीना पूरा हो चुके थे आखिर एक बेटा अपनी मां से कितनी दिन दूरी बनाकर रख सकता है एक न एक दिन उन्हें एक होना ही पड़ता है 3 महीना का समय बहुत ज्यादा होता है लोग यहां 24 घंटा दूर नहीं रह पाते हैं एक बेटा या एक मां ही जानती हैं
एक सवेरे मुझे कॉलेज किसी काम से जाना था मैं जल्दी से तैयार हो कर खाने की टेबल पर बैठा था पिताजी को भी ऑफिस जाना था वह भी खाने की टेबल पर बैठे हुए थे कुछ देर बाद मम्मी खाना लेकर आई। मैंने कहा मम्मी आज आप आम दिनों से ज्यादा खूबसूरत दिख रही हो ।
आज मैं मम्मी से 3 महीने बाद बात की ( आप जानते हो कि अगर कोई इंसान आपको पसंद करता है अगर आप उस इंसान से बात करना छोड़ देता है और वह इंसान आप से बात करने केलिए मौका ढूंढता हो फिर आप कुछ महीने बाद बात करता है तो उसके चेहरे पर जो खुशी नजर आती है वैसे ही मुझे अपनी मम्मी के चेहरे पर खुशी नजर आ रही थी ) कुल मिनट के लिए उसकी आंखें मेरे ऊपर टिकी रही । मेंने उनकी आंखों में आंसू देख सकता था ।
तभी पापा ने कहा कि अगर मां बेटे का प्यार खत्म हो गया हो तो मुझे खाना मिल सकता है मुझे ऑफिस के लिए लेट हो रही है फिर मां ने मुझे और पापा जी को खाना दिया मम्मी किचन चली गई। पापा जी खाना खाकर ऑफिस चलेगा मम्मी किचन में कुछ काम कर रही थी । मैं झूठे बर्तन उठाकर किचन में रखने के लिए गया तभी मैंने देखा मम्मी की आंख में आंसू भरा था
मम्मी ने कहा मुझे लगा कि मैं अपने राजकुमार बेटे को खो दिया । अगले 3 महीने से मैं तेरी आवाज सुनने के लिए तड़प रही थी मैंने मां को गले से लगा लिया और मैंने उसे सॉरी कहा उन्होंने मुझे कसकर जकड़ लिया। मैंने उनसे कहा किसी और कि दगाबाज की सज़ा आपको क्यों मिलनीं चाहिए सज़ा उसे मिलेगी जिसने दगाबाज की है।
थोड़ी देर के बाद मम्मी मुझसे अलग हुई और उन्होंने मेरे दोनों गाल पर किस किया और मेरे होठों को अपने होंठों में दबाकर किसिंग किया 10 मिनट तक करती रही । मेरे मोबाइल पर रिंग बजी और मुझे उसे अलग होने का मौका मिल गया मैंने मम्मी से कहा कि मैं कॉलेज जा रहा हूं
शाम को जब मैं कॉलेज से वापस घर आया तो मैं मम्मी के लिए एक गिफ्ट
लेकर आया जब मैं घर पहुंचा तो मम्मी अपने कमरे में थी मैंने ने मम्मी से कहा तुम अपनी आंखें बंद करो मम्मी ने पूछा क्या है तो मैंने कहा मैं तुम्हारे लिए कुछ लेकर आया हूं अपनी आंखें बंद करो थोड़ी देर बाद खोलना थोड़ी देर बाद उन्होंने अपनी आंखें खोली तो उसके सामने एक लाल गुलाब का फूल था मम्मी यह देखकर बहुत खुश हुई और उन्होंने कहा मेरे राजकुमार बेटे ने जो गिफ्ट दिया है वह मैं संमाल के रखूंगी .
थोड़ी देर बाद पापा भी ऑफिस से घर पहुंचे पापा ने यह सूचना दी कि हमें दो-तीन दिन बाद अपने गांव ( अनुज के दादा के घर ) जाना है क्योंकि मेरे छोटे भाई ( अनुज के चाचा ) की बेटी की शादी है । और उन्होंने यह भी कहा पूनम तुम अपनी बहन ( अनुज की मौसी ) को भी बुला लेना हम सभी साथ शादी समारोह में शामिल होने जाएंगे । अगले दिन बाद हम सभी लोग गांव चल दिए ।
अगले दिन मेरी छोटी चचेरी बहन की हल्दी की रस्म थी। उसने पीले रंग का कुर्ता और सफ़ेद पलाज़ो पहना हुआ था। वह इस पोशाक में बहुत खूबसूरत लग रही थी और जब हमारी नज़रें मिलीं तो मैंने उसे आँख मारी। उसने मुझे शरारती मुस्कान दी।
उस समारोह में मुझे पूजा नज़र आई । उसने मुझे कुछ सामान उठाने में मदद करने के बहाने स्टोर रूम में बुलाया। जैसे ही में कमरे में दाखिल हुआ , उसने मुझे बंद कर दिया और उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया! उसने मुझसे कहा वह मेरे साथ सेक्स करना चाहती है मुझे धक्का दिया मैं उससे कहा ऐसा करने का यह सही समय नहीं है क्योंकि हमारे रिश्तेदार आस-पास थे। लेकिन वह मेरी बात सुनने के मूड में नहीं थी ।
उसने मुझे घुमाया, पीछे से गले लगाया, उसने मेरे हाथ कस कर पकड़े और मेरी गर्दन चूमने लगी । चूंकि वह बहुत दिनों से सेक्स के लिए भूखी थी, इसलिए कुछ ही देर में वह पिघल गई और उसने अपनी पकड़ ढीली कर दी। और मैं जोश में आ गया ।
फिर मैंने उसके दोनों मुलायम स्तन दबाने शुरू कर दिए और उसके कुर्ते के ऊपर से उसके स्तनों से खेलने लगा। मैं उसका कुर्ता नहीं उतारना चाहता था क्योंकि अगर कोई अचानक आ गया तो हम मुसीबत में पड़ सकते थे।
तो, बिना समय बरबाद किए, मैंने उसका कुर्ता कमर तक उठा दिया। मेरी चचेरी बड़ी बहन ने मैचिंग पीले रंग की पैडेड ब्रा और सफ़ेद पैंटी पहनी हुई थी। उसने अपना पलाज़ो और पैंटी नीचे खींची और धीमी आवाज़ में चिल्लाई --
पूजा : जल्दी ख़तम कर पागल, कोई आ जाएगा।
मैं उसकी बात सुनने के मूड में नहीं था और उसके सेक्सी बाल खींचे, उसके दाहिने गाल को चूमा और उसके कान में फुसफुसाया -
मैं: क्या जल्दी है? चोदने दो मुझे (कोई जल्दी नहीं है। मुझे तुम्हें चोदने दो)।
और कुछ ही देर में, मैंने उसके कंधों को नीचे धकेला और उसे डॉगी पोज़िशन में झुका दिया और अपने लंड पर थोड़ा थूक लगाया। मैंने कुछ सेकंड के लिए अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा और एक धक्के के साथ, मैंने अपना 6 इंच का लंड बड़ी बहन के अंदर डाल दिया। वह जोर से कराह उठी।
मैंने उसकी कमर पकड़ी और उसे बहुत तेज़ी से चोदना शुरू कर दिया। बाहर गाने बज रहे थे, इसलिए बाहर से कोई कुछ नहीं सुन सकता था। मैं बड़ी बहन की गांड पर थप्पड़ मार रहा था और उसे ज़ोर से चोद रहा था। हमने कुछ मिनट तक डॉगी पोज़िशन में चुदाई की और फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसे पलट दिया। उसने मुझसे पूछा कि क्या मेरा काम हो गया है, जिस पर मैंने जवाब दिया, " नहीं " और उसे दीवार पर धकेल दिया।
फिर मैंने उसे पलाज़ो से एक पैर हटाने को कहा, जिसकी उसने बात मान ली। मैंने उसका एक पैर उठाया, थोड़ा सा मोड़ा और अपना लंड फिर से उसकी चूत में डाल दिया। मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया और उसकी चूत में ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा।
अचानक, किसी ने हमारे दरवाजे पर जोर से दस्तक दी! हम दोनों इस बात से बहुत डरे हुए थे कि वहां कौन है और आगे क्या होगा। वैसे भी, वह व्यक्ति हम पर शक करेगा इसलिए मैंने अपना लंड वापस उसके अंदर डाला और बड़ी बहन को तेजी से चोदा और उसके अंदर आ गया। फिर उसने वहां मौजूद कपड़े से अपनी चूत साफ की और हम दोनों ने कपड़े पहने।
उस व्यक्ति ने फिर से दरवाजा पीटा और इस बार वह चिल्लाया, "अंदर कौन है?"
यह हमारी मौसी थीं। हमने किसी तरह दरवाज़ा खोला और वह चिल्लाईं।
मौसी : कब से दरवाजा बजा रही हूँ। और तुम दोनो क्या लेने आये हो यहाँ? सब प्रोग्राम वहीं चल रहे हैं। (मुझे दरवाज़ा खटखटाते हुए काफी समय हो गया है। और तुम लोग यहाँ क्या कर रहे हो, जब सब कुछ शुरू हो गया है?)
मेरी माँ की बहन अंदर आई और उसे बदबू आने लगी और वह चौंककर हम दोनों की तरफ देखने लगी। बिना कोई और सवाल किए हम वहाँ से चले गए। मेरी मौसी पूरे समारोह के दौरान बीच-बीच में मेरी तरफ़ देख रही थीं और मुझे ऐसा दिखावा करना पड़ा जैसे सब कुछ सामान्य हो।
उस रात के अगला दिन भर के सारे काम हो चुके थे, मेरी मौसी ने मुझे अपने कमरे में बुलाया। मैं बहुत डरा हुआ था क्योंकि वह पिता जी को इस घटना के बारे में बता सकती थी। फिर मैं उसके कमरे में गया। उसने मुझे दरवाज़ा बंद करने को कहा और मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया। मैं उसके पास गया और उसने वहीं मेरे गाल पर थप्पड़ मारा। मैं उसकी हरकत से हैरान रह गया क्योंकि यह पहली बार था जब उसने मुझे थप्पड़ मारा था।
फिर उसने मुझसे कहा: हैरान मत हो, मैंने तुम्हारा वीर्य स्टोर रूम में फर्श पर गिरा हुआ देखा है।
मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं थे। फिर मैंने उससे बहुत विनती की और विनती की कि वह इस बारे में किसी को न बताए। वह जोर से चिल्लाई और बोली --
मौसी: वो तो तुम्हारी बड़ी बहन है! तुमने क्या किया? (उनका चेहरा उदास हो गया।)
मैं उसके पास गया और उससे माफ़ी मांगी और कहा, "मैं पागल हो गया था, और मैं ऐसा दोबारा नहीं करूंगा।"
उसने मुझे सांत्वना दी.
मौसी : तुम छोटे हो, मैं समझती हूँ। लेकिन यह ठीक नहीं है। तुम बड़ी चचेरी बहन के साथ ऐसा नहीं कर सकते।
अंततः मुझे सच बताना पड़ा।
मैं : माफ़ करना मौसी, लेकिन बड़ी बहन बता रही थी कि जीजू उसका ख्याल नहीं रख रहे हैं और उसे अंदर की सेक्स लाइफ प्यासी थी तो अनजाने में मुझे ये करना पड़ा।
मौसी: यह सुनकर बहुत दुख हुआ। लेकिन उसकी देखभाल करना तुम्हारे जीजू की जिम्मेदारी है, तुम्हारी नहीं। तब तक तुम्हारी बहन को अपनी इच्छाओं पर काबू रखना चाहिए। मैं भी इतने सालों से खुद पर काबू रखती आई हूँ।
मैं: मौसी, तुम बहुत बहादुर और साहसी महिला हो। मुझे तुम पर बहुत गर्व है
उसका चेहरा गर्व से चमक उठा और मैंने उसे प्यार से गले लगा लिया। उसने कुछ नहीं कहा और न ही उसने मेरे गले लगने का जवाब दिया। मैं मन ही मन जानता था कि वह बहुत दिनों से अकेली थी और धीरे-धीरे उसने भी मुझे गले लगा लिया। हम कम से कम दस मिनट तक गले लगे हुए खड़े रहे।
मौसी: ठीक है अब जाकर सो जाओ। कल हमें बहुत काम करने हैं। तुम्हारे सभी चचेरे भाई-बहन सो गए हैं। जाओ और सो जाओ।
आमतौर पर, मेरी मौसी को बेडरूम में अकेली सोती हैं
मैं: नहीं मौसी, मैं तुम्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहता। चलो बातें करते रहें ।
वह मान गई और मुझे बिस्तर पर बैठने के लिए कहा। फिर उसने दरवाज़ा खोला और यह देखने के लिए बाहर चली गई कि क्या सब कुछ सामान्य है। वह कुछ मिनट बाद वापस आई और दरवाज़ा बंद कर दिया। वह अभी भी अपनी पीली साड़ी में थी। फिर उसने बिस्तर की लाइट को छोड़कर सभी लाइटें बंद कर दीं और मेरे बगल में बैठ गई।
मौसी : तो, तुम्हारी ज़िंदगी कैसी चल रही है?
मैं: सब कुछ ठीक चल रहा है, मौसी।
मौसी : मुझे नहीं पता था कि मेरा लड़का अब बड़ा हो गया है, है ना?
मैं: आप रोज़ क्या करती हैं, मौसी? आप अपना दिन कैसे मैनेज करती हैं?
वह शांत रही और मैं समझ गया। फिर मैंने अपना हाथ उसके कंधे पर रखा तो वह मेरी तरफ झुक गई और अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया और तब तक सब कुछ सामान्य था।
मैं: मौसी, उदास मत हो। मैं तुम्हारा दर्द समझता हूँ। बहुत समय हो गया है, मैं तुमसे नहीं मिला हूँ। अब से, जब भी तुम्हें अकेलापन महसूस हो, तो बेझिझक मुझे फ़ोन कर लेना।
वह सहज महसूस कर रही थी और मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। हम दोनों बिस्तर पर लेट गए।
मौसी: वैसे तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?
मैं: मौसी, नहीं । लेकिन जब सही इंसान के लिए सही चीज़ बनाने की बात आती है, तो आदमी उस इंसान को औरत के रूप में देखता है, फिर चाहे वो उसकी बहन हो या उसकी मौसी।
उसने मुझे शरारती मुस्कान दी और अपनी पीठ मेरी तरफ घुमा ली। यह मेरे लिए ग्रीन सिग्नल था। मैं उसकी तरफ बढ़ा और उसे पीछे से गले लगा लिया।
मौसी : बहुत ठंड है, है न? तुम्हारा हाथ मुझे गर्मी दे रहा है। चलो हम कंबल ओढ़ लेते हैं।
मैंने उसकी बात मान ली। धीरे-धीरे मैंने अपने हाथ उसकी कमर से लेकर नाभि तक ले गए। उसकी स्थिति की बात करें तो वह न तो बहुत मोटी है और न ही बहुत पतली। बिल्कुल सेक्सी पेट और बड़े स्तनों वाली भारतीय आंटी की तरह।
वह सहज महसूस करने लगी और अपने कूल्हों को पीछे की ओर ले गई। मेरा लंड पहले से ही मेरी पैंट में फड़क रहा था। धीरे-धीरे, मैंने अपने हाथों को उसके स्तनों की ओर बढ़ाया। उसकी आंखों बंद थी वह एक भी शब्द नहीं बोल रही थी। एक-एक करके, मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोले । वह अभी भी अपनी आंखें बंद कर लेटी हुई थी।
फिर मैं आगे बढ़ा और उसके कंधे और गर्दन पर चूमा। उसने अपनी आंखें खोली उसने कहा तुम नहीं सुधुरोगे मैंने उसे घुमाया और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। मैं उसके बड़े स्तन देख सकता था जो उसकी लाल रंग की ब्रा से बाहर निकलने को बेताब थे। फिर मैंने मौसी से पूछा-
मैं: मौसी, क्या आप चाहती हैं कि मैं आपको अधिक सहज महसूस कराऊं?
जिस पर उसने उत्तर दिया: हम्म.
मैंने अपना हाथ उसकी पीठ पर घुमाया और उसकी ब्रा के हुक हटा दिए और वे वहाँ थे। गहरे निप्पल वाले दो बड़े खरबूजे जोर से चूसे जाने के लिए तैयार थे। कुछ ही देर में, मैंने उसका ब्लाउज और ब्रा उतार दी। फिर मैंने उसे सीधा लिटाया और उसके माथे, गालों और फिर होंठों को चूमना शुरू कर दिया। हमने करीब 15 मिनट तक एक-दूसरे की जीभ और चुंबन को बंद रखा और मेरी मौसी ने मुझे कसकर गले लगाया और कहा --
मौसी : अनुज , मैं इसके लिए कब से तरस रही हूँ। मेरा नारीत्व ले लो। मुझे अपना बना लो।
मैं बहुत उत्साहित था और मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और उसकी साड़ी और पेटीकोट भी उतार दिया। उसने पैंटी नहीं पहनी थी और उसकी चूत पर बहुत बाल थे। शायद उसकी चुदाई नहीं हुई थी इसलिए उसने अपनी चूत का ख्याल नहीं रखा।
धीरे-धीरे, मैंने अपनी मौसी के स्तन को चूसना शुरू किया और दूसरे स्तन को दबाया। वह जोर से कराहने लगी और मुझे लगा कि वह मुझे वहीं चाहती है। मैं नीचे गया और उसके पेट को चाटा। मैं नीचे गया और उसने अपने पैर बंद कर लिए क्योंकि वह शर्म महसूस कर रही थी।
फिर मैंने उसके हाथ पकड़े और उसके पैरों को अलग किया और वहाँ मैं मंद बिस्तर लैंप में उसका छेद देख सकता था। मैं उस चूत को चूसना और चाटना चाहता था, लेकिन यह बालों से भरी थी। इसलिए मैंने उसकी चूत के होंठों को अलग किया और उसके छेद को चखा। यह नमकीन था। मैं इतना उत्तेजित था कि मैंने अपनी जीभ उसके छेद में डाल दी। वह बहुत उत्तेजित महसूस कर रही थी।
फिर उसने मेरे सिर पर हाथ रखकर और भीख माँगी। मैंने अपनी माँ की बहन को जीभ से चोदा। कुछ मिनट बाद वह मेरे चेहरे पर ही झड़ गई।
मौसी- अनुज , मैं तुमसे प्यार करती हूँ बेटा। तुमने आज मुझे स्वर्ग दिखा दिया।
यह कहते हुए, वह मेरे पास आई, नीचे गई और मेरा लंड चूसने लगी। वह चूसने में माहिर लग रही थी। सुबह सेक्स करने के बाद से मुझे जल्दी वीर्यपात का मन नहीं कर रहा था।
कुछ मिनटों के बाद, मैं अपनी माँ की सेक्सी बहन को चोदने के लिए तैयार था। तभी उसने मुझे अपने पर्स से एक कंडोम पैकेट दिया और कहा पहनने मैंने वह कंडोम पहन लिया। फिर मैंने उसे मिशनरी पोजीशन में लिटाया और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा। वह मुझसे विनती कर रही थी कि मैं अपना लंड उसके अंदर डाल दूँ। मैंने धीरे से अपना लंड उसकी बुर में डाला। ऐसा लगा जैसे मैं किसी कुंवारी बुर में लंड डाल रहा हूँ।
उसे कुछ दर्द हो रहा था। कुछ और झटके के साथ, मेरा पूरा लंड उसके अंदर था। चूंकि वह अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, इसलिए वह मेरे लंड का आनंद लेने लगी। मेरा पूरा लंड उसकी गीली चूत की गर्मी महसूस कर रहा था।
हमने 20 मिनट तक चुदाई की और वह पहले ही अपना दूसरा संभोग सुख प्राप्त कर चुकी थी और पहले से ही थक चुकी थी। मेरा अभी भी काम पूरा नहीं हुआ था और उसने मुझे रुकने के लिए कहा। मैं रुकने के मूड में नहीं था।
फिर मैंने उसे डॉगी पोज़िशन में घुमाया और अपना औज़ार उसकी बुर में डाल दिया। वह आधी नींद में थी। कुछ और झटके के साथ, वह फिर से मज़ा लेने लगी।
सुबह के 3 बज चुके थे और लोग शादी की तैयारियों के लिए जाग सकते थे। इसलिए मैंने उसे फिर से लिटाया और उसे ज़ोर से चोदा और में भी झड़ गया। हम दोनों थक गए थे और सो गए।
जब मैं सुबह जाग तो देखा मौसी बेड पर नहीं थी वह बाथरूम गई थी थोड़ी देर बाद वह बाथरुम से बाहर आई तो मैं मौसी से पूछा यह संजय कौन है । तो वह मुझे अपने चौड़े आंखों से देख रही थी उसने मुझसे झूठ कहा कि वह किसी संजय को नहीं जानती है तब मैंने उनसे कहा कि मम्मी बोल रही थी कि आप किसी संजय नाम आदमी से रोज चुदाई करवाती हो तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई वह मेरे पास दौड़ के भागती हुई आई और मेरे सामने गीडगाने लगी कि यह बात वह किसी को ना बताया नहीं तो उसकी बदनामी हो जाएगी फिर मैं अपनी मौसी से कहा कि अगर वह मेरी बड़ी बहन की चुदाई वाली बात किसी से बताएगी तो मैं भी यह बात सभी को बता दूंगा और वह जब तक इस शादी समारोह में शामिल रहेगी तब तक मैं उसकी चुदाई करूंगा तो उसने मुझसे वादा किया कि मैं यह बात किसी से नहीं बताऊंगी नहीं तुम्हारी मम्मी से नहीं तुम्हारे पिताजी से वादा किया और कहा ठीक है तुम्हारी जब मर्जी करें चुदाई कर सकते हो फिर मैं बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर के बाहर आ गया और शादी के समारोह में शामिल हो गया । पुरी शादी समारोहों के दौरान बार-बार उसकी नजर मेरे उपर रहती थी । इस दौरान मैंने उसकी काफी बार चुदाई की मैं खुद भी नहीं बता सकता।
अगले सुबह जब मेरी नींद खुली तो 7 बजे थे । मैं उठकर बाथरूम मैं जाकर फ्रेश होकर अशोक के लिए लंच बनायी क्योंकि उन्होंने 10 बजे ऑफिस के लिए निकला था । फिर मैं किचन में काम कर रही थी थोड़ी देर में मेरे मोबाइल पर रिंग बजा। वह चंद्रिका ( मेरी छोटी बहन ) का फोन था बात करते समय मेरी नजर घड़ी पर पड़ी 8 बजे चुके थे । अनुज 9 बजे तक कॉलेज निकल जाता था पर आज उसे कमलेश ( मजदूर ) जो स्टेशन के पास चौल में रहता है उसे लाने जाना था ( दिवाली की घर में साफ-सफाई करवानी थी )। इसीलिए आज वो कॉलेज नहीं गया था।
मैं अनुज के कमरे में गयी और दरवाज़ा खटखटाया. अनुज सो रहा था तो उसने दरवाज़ा खोलने में जरा देर कर दी। अनुज के दरवाज़ा खोलते ही मैं कमरे के अंदर आई, तब तक अनुज वापिस बिस्तर पर लेट गया. वो केवल अंडरवियर में ही था। मैं भी बेड पर उसके पास जाकर लेट गई और उसके माथे पर किस करते हुए कहा- गुड मॉर्निंग… उठ गया मेरा राजा बेटा।
अनुज ने भी मुस्कुराते ( उसकी मुस्कराहट किसी भी औरत को दिवाना बना दोगी ) हुए मुझे गुड मोर्निंग कहा और मेरे होंठों को चूमने लगा।
अनुज ने अपने एक हाथ से मेरा हाथ पकड़कर अपनी चड्डी के ऊपर से ही अपने लंड पर रख दिया। मेरे हाथ रखते ही अनुज के लंड ने फैलना शुरू कर दिया और देखते ही देखते पूरा खड़ा हो गया और उसका ऊपरी भाग बॉक्सर से बाहर निकल आया।
अनुज अभी भी मुझे चूम रहा था और मैं अपनी आँखें बंद किये इन सबका मजा ले रही थी। तभी अनुज ने मेरे गाउन के ऊपर के बटन को खोल दिया. मैं गाउन के अंदर ब्रा नहीं पहनती इसलिए मेरे कसे हुए मम्में बाहर निकल आए और अनुज ने उन्हें दबोचना शुरू कर दिया।
तभी मैं होश में आई और अनुज से कहा- बेटा उठो और जल्दी से फ्रेश हो जाओ, नहा लो … हम उसे बाद में ही करेंगे।
अनुज ने कहा- अभी क्या प्रॉब्लम है मम्मी?
मैंने अनुज से कहा- ध्यान रहे। अभी तेरी पिता जी घर पर ही है वो .
और पिता जी अभी तक ओफिस नहीं गये है।
अनुज ने मेरे मम्मों पर एक चुम्बन किया और उठकर बाथरूम की तरफ जाने लगा और मुझसे बोला- चलिए ना मम्मी … साथ नहाएंगे।
मैंने कहा- अभी नहीं अनुज… मुझे अभी काफी काम खत्म करने हैं
मेरे समझाने पर अनुज नहाने चला गया। मैंने भी खुद को ठीक किया और अनुज के रूम की सफाई करने के बाद घर के और कामों में लग गयी।
कुछ देर बाद अनुज ने मुझे आवाज़ दी। मैंने कमरे में जाकर देखी तो वह बिल्कुल नंगा खड़ा हुआ था। मैंने अनुज से पूछा- क्या हुआ? माँ के साथ मजे करने के चक्कर में बड़ी जल्दी नहा लिया।
मैं एक चीज नोटिस किया अंकल की पैंट में तंबू बन गया था। जो अंकल मम्मी के गांड में दबा दे रहे थे . मम्मी को अच्छा नहीं लग रहा था वह अंकल से दूर रहने कि कोशिश कर रही थी मगर अंकल बार बार उसे अपनी ओर खींच लिया कर रहे थे।
एक बार तो अंकल ने मम्मी को अपनी गोद में ही उठाया और डांस करने लगे। सभी ने दोनो के डांस पे तालिया बजायी। तभी अंकल और मम्मी काफी करीब हो गए थे।
ऐसी ही शादी का दिन आ गया। आज मम्मी ने एक घाघरा चोली पहनी थी। लाल चोली पूरी बैकलेस और घाघरा नाभि के 4 इंच आला। पतली कमर क्या लग रही थी मम्मी की। और हाई हील्स में उनकी गांड और बाहर आ रही थी। अब पंडित जी सब विधि कर रहे थे तब कन्यादान का समय आ गया।
पंडित जी ने लड़की के पापा और लड़की की मम्मी को बुलाया। लेकिन गौतम अंकल की पत्नी की मौत हो चुकी है। पंडित जी ने कहा कन्यादान के लिए गौतम जी की पत्नी का होना बहुत ज़रूरी है।
अब सब इस समस्या से रास्ता निकलने के लिए सोचने लगे। तो गौतम अंकल की एक बुआ बोली कि अगर गौतम की पत्नी की जगा कोई कन्यादान कर सकता है क्या। तो मौसी ने मम्मी का नाम सुझाया। मुझे मौसी पर गुस्सा आ रहा था बार बार मौसी मम्मी को कियू मुसीबत में डाल देती हैं।
लेकिन मम्मी ने मना कर दिया की वो पहले से ही शादीशुदा हैं और एक बच्चे की मां है। और वो कैसे किसी और की पत्नी की जगह ले सकती है । सभी लोग मान गए लेकिन मौसी ने जलते हुए आग में घी डालने का काम किया। मौसी बोली ये सिर्फ एक दिन तो बात है।
सभी की विनती करने पर मम्मी मान गई । पंडित जी ने एक दिन के लिए मम्मी और गौतम अंकल को पति पत्नी बना दिया और पूजा विधि में मम्मी अंकल की पत्नी बन कर साथ देने लगी। शादी होने के बाद मम्मी और अंकल पंडित जी से आशीर्वाद लेने गए। उन्हें आशीर्वाद दिया कि आपकी जोड़ी हमेशा सलामत रहे।
ये सुनते ही अंकल और मम्मी एक दूसरे की तरफ देखने लगे। मम्मी सब से आशीर्वाद लेने गयी। एक दादी ने मम्मी को दुल्हन समझ के पूछ लिया कि बेटी अब अगले साल हमें एक मुन्ना भी दे देना गोदी में। सभी लोग हंसने लगे और मम्मी शरम से पानी पानी हो गई।
विधि के अनुसार आज मम्मी और अंकल की भी शादी हुई थी कुछ आंटी और दादी बोली आज इनकी शादी हुई है तो उनकी सुहागरात होनी जरूरी है । जब यह सब में सुना तो मुझे मौसी पर बहुत गुस्सा आ रहा था और मम्मी मेरी ओर देख रही थीं में उसे गुस्सा भरी नजर से देख रहा था मम्मी मजबूर थी और वह किया कर सकती थीं। अब मेरे औरतों पर से भरोसा उठ गया था मेरा विश्वास टूटने वाला था कि मेरी मम्मी कभी किसी गैर मर्द से चुदाई नही करवा सकती हैं ।
मम्मी कुछ कहती हैं , इसे पहले सब आंटी लोगों ने मम्मी और अंकल को एक कमरे में बंद कर दिया और बाहर से दरवाज़ा बंद कर लिया। और बोले कि अब दरवाजा कल सुबह में ही खुलेगा। कुछ लोग अपने अपने घर चले गऐ और कुछ दादी यह रूकी गई । मौसी मेरे पास आकर बोली तुम्हारी मम्मी को कुछ और पुजा विधि करना है उसे रात भर यहां रुकना पड़ेगा तुम मेरे साथ होटल के कमरे में चलो मैं मौसी से कहा कि आप जो मैं थोड़ी देर में आता हूं । मैंने ध्यान से देखा तो उसे रूम के बगल में एक स्टोर रूम मुझे नजर आया । मैंने सभी से चुपके-चुपाते उस स्टोर रूम में जाकर घुस गया उसे स्टोर रूम से उस रूम की एक खिड़की जुटी हुई थी तो मैंने उसे खिड़की के पास जाकर देखा तो उस में एक छेद था जिसे मैं आराम से अंदर की सारी चीज देख और सुन सकता था ।
अंकल मम्मी की तरफ ध्यान से देख रहे थे और उनसे कहा, आज मैं तुम्हारी पति हूं और आज हमने सुहागरात मनाने का पूरा हक है। लेकिन मम्मी उसे मना कर रही थी वह बार-बार मम्मी को अपनी ओर खींच रहा था मम्मी उसका विरोध कर रही थी अंकल ने धीरे से मम्मी को किस किया और उनकी
चोली के पीछे की डोर खिंच के उसे अलग कर दिया। उसने अपनी चोली के अंदर में कुछ नहीं पहना था इसकी वजह से उसकी स्तन आजाद हो चुके थे वह अपने हाथों की हथेलियां से अपने दोनों स्तन को छुपाने की कोशिश कर रही थी
अंकल ने कहा वह इतने बड़े स्तन आज तक कभी किसी औरत के नहीं देखे थे और उसकी पत्नी की भी इतनी बड़ी नहीं थे। बड़े स्तन को देखकर पागल कुत्ते की तरह उसे नोचना और चूसना चालू कर दिया थोड़ी देर बाद उनका घाघरा ऊपर उठाया और जोर से उनकी गांड पर चाटा मारने लगे।
मम्मी दर्द से आह….उहह….उई माँ…..जैसी आवाज निकलने लगी. अंकल ने बिना देरी किये अपना 8 इंच का लंड बाहर निकाला इतना बड़ा देख के मम्मी की तो वैसे ही हालत खराब हो गई थी । जैसे ही अंकल ने अपना मोटा लंड अंदर घुसाया मम्मी की चीख निकल पड़ी। बहार खड़ी सब आंटी और दादी
लोग हसने लगी और उनको विश्वास हो गया कि सही में सुहागरात के मजे लिया जा रहे हैं।l
पूरे आधे घंटे चोदने के बाद अंकल का निकलने वाला था और उन्हें एक जोर का झटका लगता हुआ सारा माल एकदम अंदर छोड़ दिया। मम्मी बोलीं अरे तुमने क्या किया अगर मैं प्रेग्नेंट हो गई तो । अंकल बोले कि उसके लिए ही तो अंदर छोड़ा दिया । तूझे तो अपने बच्चे की माँ बनाकर ही छोड़ूगा। तभी मम्मी ने उसे एक थप्पड़ जड़ दिया । और बोली " माधरचोद में पहले से ही एक बच्चे की मां हु । रात भर ऐसे ही जी भर के मेरी सेक्सी मम्मी की बदन को नोच खाने के बाद अंकल और मम्मी सुबह 3 बजे सो गए। मैं भी स्टोर रूम से बाहर निकला बड़ी सावधानी से कहीं कोई मुझे देख ना ले देखा तो सभी गहरी नींद में सो रहे थे फिर में होटल के रूम में चला गया फिर जाकर वहां सो गया मैं सुबह 9:00 बजे मेरी नींद टूटी । जब मौसी ने कहा में शादी वाले घर जा रही हु तुझे चलना है किया
सुबह 9 बजे एक आंटी ने दरवाजा खोला तो मम्मी और अंकल कमरे में एकदम नंगी ही सो रही थी। ये देख के सब आंटी लोग हंसने लगी और मम्मी को आवाज लगाई। फ्रेश होने के बाद मम्मी एक लाल साड़ी पहन कर बाहर आई।
एक आंटी बोली देखो तो पुनम को नई दुल्हन के जैसा चेहरा चमक रहा है इसका। एक आंटी बोली हमारे भैया ने तुम्हें खुश तो किया ना । दूसरी आंटी बोलीं अरे रात को सुना नहीं तुमने कितने चिल्लाने की आवाज आ रही थी कमरे से। माजा तो पूरा लिया होगा इन्होंने। मम्मी के बैकलेस ब्लाउज़ से अंकल के नाखुन के निशान दिख रहे थे। वो देख के एक आंटी बोली ये निशान तो बता रहे हैं कि तुम कम से कम 4-5 बार चुदी होगी गौतम जी से।
ये सब सुनते सुनते मम्मी के गाल शर्म से लाल हो चुके थे। जब भी वे साडी पहनती थी ना वे डीपनेक ब्लाउज के साथ जो कोई भी उन को देखता दीवाना हो जाए करता इतनी सेक्सी लगती थी। शादी में आये सब लोग दुल्हन को कम मम्मी को ज्यादा घूर रहे थे। कुछ जवान लड़के तो जान बुझ कर भाभी भाभी कह कर तंग कर रहे थे।
शादी ख़त्म होने के बाद हम सब मौसी के घर वापस आ गये
मैंने मम्मी से दूरी बना लिया हूं जिसकी वजह से मैं उनके साथ अब टाइम भी स्पेंड नहीं करता नहीं उनसे ज्यादा बात करता हूं मैं अपने कमरे में समय बिताने की कोशिश करता हूं यह तो दोस्तों के बीच अपना टाइम स्पेंड करता हूं मेरी दूरी बनाने की वजह से मम्मी के जीवन में बहुत ही बड़ा असर पड़ा है वह मेरे करीब आना चाहती है मगर मैं उसे दूरी बनाए रखता हूं ।
उसे घटना को घटे 3 महीना पूरा हो चुके थे आखिर एक बेटा अपनी मां से कितनी दिन दूरी बनाकर रख सकता है एक न एक दिन उन्हें एक होना ही पड़ता है 3 महीना का समय बहुत ज्यादा होता है लोग यहां 24 घंटा दूर नहीं रह पाते हैं एक बेटा या एक मां ही जानती हैं
एक सवेरे मुझे कॉलेज किसी काम से जाना था मैं जल्दी से तैयार हो कर खाने की टेबल पर बैठा था पिताजी को भी ऑफिस जाना था वह भी खाने की टेबल पर बैठे हुए थे कुछ देर बाद मम्मी खाना लेकर आई। मैंने कहा मम्मी आज आप आम दिनों से ज्यादा खूबसूरत दिख रही हो ।
आज मैं मम्मी से 3 महीने बाद बात की ( आप जानते हो कि अगर कोई इंसान आपको पसंद करता है अगर आप उस इंसान से बात करना छोड़ देता है और वह इंसान आप से बात करने केलिए मौका ढूंढता हो फिर आप कुछ महीने बाद बात करता है तो उसके चेहरे पर जो खुशी नजर आती है वैसे ही मुझे अपनी मम्मी के चेहरे पर खुशी नजर आ रही थी ) कुल मिनट के लिए उसकी आंखें मेरे ऊपर टिकी रही । मेंने उनकी आंखों में आंसू देख सकता था ।
तभी पापा ने कहा कि अगर मां बेटे का प्यार खत्म हो गया हो तो मुझे खाना मिल सकता है मुझे ऑफिस के लिए लेट हो रही है फिर मां ने मुझे और पापा जी को खाना दिया मम्मी किचन चली गई। पापा जी खाना खाकर ऑफिस चलेगा मम्मी किचन में कुछ काम कर रही थी । मैं झूठे बर्तन उठाकर किचन में रखने के लिए गया तभी मैंने देखा मम्मी की आंख में आंसू भरा था
मम्मी ने कहा मुझे लगा कि मैं अपने राजकुमार बेटे को खो दिया । अगले 3 महीने से मैं तेरी आवाज सुनने के लिए तड़प रही थी मैंने मां को गले से लगा लिया और मैंने उसे सॉरी कहा उन्होंने मुझे कसकर जकड़ लिया। मैंने उनसे कहा किसी और कि दगाबाज की सज़ा आपको क्यों मिलनीं चाहिए सज़ा उसे मिलेगी जिसने दगाबाज की है।
थोड़ी देर के बाद मम्मी मुझसे अलग हुई और उन्होंने मेरे दोनों गाल पर किस किया और मेरे होठों को अपने होंठों में दबाकर किसिंग किया 10 मिनट तक करती रही । मेरे मोबाइल पर रिंग बजी और मुझे उसे अलग होने का मौका मिल गया मैंने मम्मी से कहा कि मैं कॉलेज जा रहा हूं
शाम को जब मैं कॉलेज से वापस घर आया तो मैं मम्मी के लिए एक गिफ्ट
लेकर आया जब मैं घर पहुंचा तो मम्मी अपने कमरे में थी मैंने ने मम्मी से कहा तुम अपनी आंखें बंद करो मम्मी ने पूछा क्या है तो मैंने कहा मैं तुम्हारे लिए कुछ लेकर आया हूं अपनी आंखें बंद करो थोड़ी देर बाद खोलना थोड़ी देर बाद उन्होंने अपनी आंखें खोली तो उसके सामने एक लाल गुलाब का फूल था मम्मी यह देखकर बहुत खुश हुई और उन्होंने कहा मेरे राजकुमार बेटे ने जो गिफ्ट दिया है वह मैं संमाल के रखूंगी .
थोड़ी देर बाद पापा भी ऑफिस से घर पहुंचे पापा ने यह सूचना दी कि हमें दो-तीन दिन बाद अपने गांव ( अनुज के दादा के घर ) जाना है क्योंकि मेरे छोटे भाई ( अनुज के चाचा ) की बेटी की शादी है । और उन्होंने यह भी कहा पूनम तुम अपनी बहन ( अनुज की मौसी ) को भी बुला लेना हम सभी साथ शादी समारोह में शामिल होने जाएंगे । अगले दिन बाद हम सभी लोग गांव चल दिए ।
अगले दिन मेरी छोटी चचेरी बहन की हल्दी की रस्म थी। उसने पीले रंग का कुर्ता और सफ़ेद पलाज़ो पहना हुआ था। वह इस पोशाक में बहुत खूबसूरत लग रही थी और जब हमारी नज़रें मिलीं तो मैंने उसे आँख मारी। उसने मुझे शरारती मुस्कान दी।
उस समारोह में मुझे पूजा नज़र आई । उसने मुझे कुछ सामान उठाने में मदद करने के बहाने स्टोर रूम में बुलाया। जैसे ही में कमरे में दाखिल हुआ , उसने मुझे बंद कर दिया और उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया! उसने मुझसे कहा वह मेरे साथ सेक्स करना चाहती है मुझे धक्का दिया मैं उससे कहा ऐसा करने का यह सही समय नहीं है क्योंकि हमारे रिश्तेदार आस-पास थे। लेकिन वह मेरी बात सुनने के मूड में नहीं थी ।
उसने मुझे घुमाया, पीछे से गले लगाया, उसने मेरे हाथ कस कर पकड़े और मेरी गर्दन चूमने लगी । चूंकि वह बहुत दिनों से सेक्स के लिए भूखी थी, इसलिए कुछ ही देर में वह पिघल गई और उसने अपनी पकड़ ढीली कर दी। और मैं जोश में आ गया ।
फिर मैंने उसके दोनों मुलायम स्तन दबाने शुरू कर दिए और उसके कुर्ते के ऊपर से उसके स्तनों से खेलने लगा। मैं उसका कुर्ता नहीं उतारना चाहता था क्योंकि अगर कोई अचानक आ गया तो हम मुसीबत में पड़ सकते थे।
तो, बिना समय बरबाद किए, मैंने उसका कुर्ता कमर तक उठा दिया। मेरी चचेरी बड़ी बहन ने मैचिंग पीले रंग की पैडेड ब्रा और सफ़ेद पैंटी पहनी हुई थी। उसने अपना पलाज़ो और पैंटी नीचे खींची और धीमी आवाज़ में चिल्लाई --
पूजा : जल्दी ख़तम कर पागल, कोई आ जाएगा।
मैं उसकी बात सुनने के मूड में नहीं था और उसके सेक्सी बाल खींचे, उसके दाहिने गाल को चूमा और उसके कान में फुसफुसाया -
मैं: क्या जल्दी है? चोदने दो मुझे (कोई जल्दी नहीं है। मुझे तुम्हें चोदने दो)।
और कुछ ही देर में, मैंने उसके कंधों को नीचे धकेला और उसे डॉगी पोज़िशन में झुका दिया और अपने लंड पर थोड़ा थूक लगाया। मैंने कुछ सेकंड के लिए अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा और एक धक्के के साथ, मैंने अपना 6 इंच का लंड बड़ी बहन के अंदर डाल दिया। वह जोर से कराह उठी।
मैंने उसकी कमर पकड़ी और उसे बहुत तेज़ी से चोदना शुरू कर दिया। बाहर गाने बज रहे थे, इसलिए बाहर से कोई कुछ नहीं सुन सकता था। मैं बड़ी बहन की गांड पर थप्पड़ मार रहा था और उसे ज़ोर से चोद रहा था। हमने कुछ मिनट तक डॉगी पोज़िशन में चुदाई की और फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसे पलट दिया। उसने मुझसे पूछा कि क्या मेरा काम हो गया है, जिस पर मैंने जवाब दिया, " नहीं " और उसे दीवार पर धकेल दिया।
फिर मैंने उसे पलाज़ो से एक पैर हटाने को कहा, जिसकी उसने बात मान ली। मैंने उसका एक पैर उठाया, थोड़ा सा मोड़ा और अपना लंड फिर से उसकी चूत में डाल दिया। मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया और उसकी चूत में ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा।
अचानक, किसी ने हमारे दरवाजे पर जोर से दस्तक दी! हम दोनों इस बात से बहुत डरे हुए थे कि वहां कौन है और आगे क्या होगा। वैसे भी, वह व्यक्ति हम पर शक करेगा इसलिए मैंने अपना लंड वापस उसके अंदर डाला और बड़ी बहन को तेजी से चोदा और उसके अंदर आ गया। फिर उसने वहां मौजूद कपड़े से अपनी चूत साफ की और हम दोनों ने कपड़े पहने।
उस व्यक्ति ने फिर से दरवाजा पीटा और इस बार वह चिल्लाया, "अंदर कौन है?"
यह हमारी मौसी थीं। हमने किसी तरह दरवाज़ा खोला और वह चिल्लाईं।
मौसी : कब से दरवाजा बजा रही हूँ। और तुम दोनो क्या लेने आये हो यहाँ? सब प्रोग्राम वहीं चल रहे हैं। (मुझे दरवाज़ा खटखटाते हुए काफी समय हो गया है। और तुम लोग यहाँ क्या कर रहे हो, जब सब कुछ शुरू हो गया है?)
मेरी माँ की बहन अंदर आई और उसे बदबू आने लगी और वह चौंककर हम दोनों की तरफ देखने लगी। बिना कोई और सवाल किए हम वहाँ से चले गए। मेरी मौसी पूरे समारोह के दौरान बीच-बीच में मेरी तरफ़ देख रही थीं और मुझे ऐसा दिखावा करना पड़ा जैसे सब कुछ सामान्य हो।
उस रात के अगला दिन भर के सारे काम हो चुके थे, मेरी मौसी ने मुझे अपने कमरे में बुलाया। मैं बहुत डरा हुआ था क्योंकि वह पिता जी को इस घटना के बारे में बता सकती थी। फिर मैं उसके कमरे में गया। उसने मुझे दरवाज़ा बंद करने को कहा और मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया। मैं उसके पास गया और उसने वहीं मेरे गाल पर थप्पड़ मारा। मैं उसकी हरकत से हैरान रह गया क्योंकि यह पहली बार था जब उसने मुझे थप्पड़ मारा था।
फिर उसने मुझसे कहा: हैरान मत हो, मैंने तुम्हारा वीर्य स्टोर रूम में फर्श पर गिरा हुआ देखा है।
मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं थे। फिर मैंने उससे बहुत विनती की और विनती की कि वह इस बारे में किसी को न बताए। वह जोर से चिल्लाई और बोली --
मौसी: वो तो तुम्हारी बड़ी बहन है! तुमने क्या किया? (उनका चेहरा उदास हो गया।)
मैं उसके पास गया और उससे माफ़ी मांगी और कहा, "मैं पागल हो गया था, और मैं ऐसा दोबारा नहीं करूंगा।"
उसने मुझे सांत्वना दी.
मौसी : तुम छोटे हो, मैं समझती हूँ। लेकिन यह ठीक नहीं है। तुम बड़ी चचेरी बहन के साथ ऐसा नहीं कर सकते।
अंततः मुझे सच बताना पड़ा।
मैं : माफ़ करना मौसी, लेकिन बड़ी बहन बता रही थी कि जीजू उसका ख्याल नहीं रख रहे हैं और उसे अंदर की सेक्स लाइफ प्यासी थी तो अनजाने में मुझे ये करना पड़ा।
मौसी: यह सुनकर बहुत दुख हुआ। लेकिन उसकी देखभाल करना तुम्हारे जीजू की जिम्मेदारी है, तुम्हारी नहीं। तब तक तुम्हारी बहन को अपनी इच्छाओं पर काबू रखना चाहिए। मैं भी इतने सालों से खुद पर काबू रखती आई हूँ।
मैं: मौसी, तुम बहुत बहादुर और साहसी महिला हो। मुझे तुम पर बहुत गर्व है
उसका चेहरा गर्व से चमक उठा और मैंने उसे प्यार से गले लगा लिया। उसने कुछ नहीं कहा और न ही उसने मेरे गले लगने का जवाब दिया। मैं मन ही मन जानता था कि वह बहुत दिनों से अकेली थी और धीरे-धीरे उसने भी मुझे गले लगा लिया। हम कम से कम दस मिनट तक गले लगे हुए खड़े रहे।
मौसी: ठीक है अब जाकर सो जाओ। कल हमें बहुत काम करने हैं। तुम्हारे सभी चचेरे भाई-बहन सो गए हैं। जाओ और सो जाओ।
आमतौर पर, मेरी मौसी को बेडरूम में अकेली सोती हैं
मैं: नहीं मौसी, मैं तुम्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहता। चलो बातें करते रहें ।
वह मान गई और मुझे बिस्तर पर बैठने के लिए कहा। फिर उसने दरवाज़ा खोला और यह देखने के लिए बाहर चली गई कि क्या सब कुछ सामान्य है। वह कुछ मिनट बाद वापस आई और दरवाज़ा बंद कर दिया। वह अभी भी अपनी पीली साड़ी में थी। फिर उसने बिस्तर की लाइट को छोड़कर सभी लाइटें बंद कर दीं और मेरे बगल में बैठ गई।
मौसी : तो, तुम्हारी ज़िंदगी कैसी चल रही है?
मैं: सब कुछ ठीक चल रहा है, मौसी।
मौसी : मुझे नहीं पता था कि मेरा लड़का अब बड़ा हो गया है, है ना?
मैं: आप रोज़ क्या करती हैं, मौसी? आप अपना दिन कैसे मैनेज करती हैं?
वह शांत रही और मैं समझ गया। फिर मैंने अपना हाथ उसके कंधे पर रखा तो वह मेरी तरफ झुक गई और अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया और तब तक सब कुछ सामान्य था।
मैं: मौसी, उदास मत हो। मैं तुम्हारा दर्द समझता हूँ। बहुत समय हो गया है, मैं तुमसे नहीं मिला हूँ। अब से, जब भी तुम्हें अकेलापन महसूस हो, तो बेझिझक मुझे फ़ोन कर लेना।
वह सहज महसूस कर रही थी और मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। हम दोनों बिस्तर पर लेट गए।
मौसी: वैसे तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?
मैं: मौसी, नहीं । लेकिन जब सही इंसान के लिए सही चीज़ बनाने की बात आती है, तो आदमी उस इंसान को औरत के रूप में देखता है, फिर चाहे वो उसकी बहन हो या उसकी मौसी।
उसने मुझे शरारती मुस्कान दी और अपनी पीठ मेरी तरफ घुमा ली। यह मेरे लिए ग्रीन सिग्नल था। मैं उसकी तरफ बढ़ा और उसे पीछे से गले लगा लिया।
मौसी : बहुत ठंड है, है न? तुम्हारा हाथ मुझे गर्मी दे रहा है। चलो हम कंबल ओढ़ लेते हैं।
मैंने उसकी बात मान ली। धीरे-धीरे मैंने अपने हाथ उसकी कमर से लेकर नाभि तक ले गए। उसकी स्थिति की बात करें तो वह न तो बहुत मोटी है और न ही बहुत पतली। बिल्कुल सेक्सी पेट और बड़े स्तनों वाली भारतीय आंटी की तरह।
वह सहज महसूस करने लगी और अपने कूल्हों को पीछे की ओर ले गई। मेरा लंड पहले से ही मेरी पैंट में फड़क रहा था। धीरे-धीरे, मैंने अपने हाथों को उसके स्तनों की ओर बढ़ाया। उसकी आंखों बंद थी वह एक भी शब्द नहीं बोल रही थी। एक-एक करके, मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोले । वह अभी भी अपनी आंखें बंद कर लेटी हुई थी।
फिर मैं आगे बढ़ा और उसके कंधे और गर्दन पर चूमा। उसने अपनी आंखें खोली उसने कहा तुम नहीं सुधुरोगे मैंने उसे घुमाया और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। मैं उसके बड़े स्तन देख सकता था जो उसकी लाल रंग की ब्रा से बाहर निकलने को बेताब थे। फिर मैंने मौसी से पूछा-
मैं: मौसी, क्या आप चाहती हैं कि मैं आपको अधिक सहज महसूस कराऊं?
जिस पर उसने उत्तर दिया: हम्म.
मैंने अपना हाथ उसकी पीठ पर घुमाया और उसकी ब्रा के हुक हटा दिए और वे वहाँ थे। गहरे निप्पल वाले दो बड़े खरबूजे जोर से चूसे जाने के लिए तैयार थे। कुछ ही देर में, मैंने उसका ब्लाउज और ब्रा उतार दी। फिर मैंने उसे सीधा लिटाया और उसके माथे, गालों और फिर होंठों को चूमना शुरू कर दिया। हमने करीब 15 मिनट तक एक-दूसरे की जीभ और चुंबन को बंद रखा और मेरी मौसी ने मुझे कसकर गले लगाया और कहा --
मौसी : अनुज , मैं इसके लिए कब से तरस रही हूँ। मेरा नारीत्व ले लो। मुझे अपना बना लो।
मैं बहुत उत्साहित था और मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और उसकी साड़ी और पेटीकोट भी उतार दिया। उसने पैंटी नहीं पहनी थी और उसकी चूत पर बहुत बाल थे। शायद उसकी चुदाई नहीं हुई थी इसलिए उसने अपनी चूत का ख्याल नहीं रखा।
धीरे-धीरे, मैंने अपनी मौसी के स्तन को चूसना शुरू किया और दूसरे स्तन को दबाया। वह जोर से कराहने लगी और मुझे लगा कि वह मुझे वहीं चाहती है। मैं नीचे गया और उसके पेट को चाटा। मैं नीचे गया और उसने अपने पैर बंद कर लिए क्योंकि वह शर्म महसूस कर रही थी।
फिर मैंने उसके हाथ पकड़े और उसके पैरों को अलग किया और वहाँ मैं मंद बिस्तर लैंप में उसका छेद देख सकता था। मैं उस चूत को चूसना और चाटना चाहता था, लेकिन यह बालों से भरी थी। इसलिए मैंने उसकी चूत के होंठों को अलग किया और उसके छेद को चखा। यह नमकीन था। मैं इतना उत्तेजित था कि मैंने अपनी जीभ उसके छेद में डाल दी। वह बहुत उत्तेजित महसूस कर रही थी।
फिर उसने मेरे सिर पर हाथ रखकर और भीख माँगी। मैंने अपनी माँ की बहन को जीभ से चोदा। कुछ मिनट बाद वह मेरे चेहरे पर ही झड़ गई।
मौसी- अनुज , मैं तुमसे प्यार करती हूँ बेटा। तुमने आज मुझे स्वर्ग दिखा दिया।
यह कहते हुए, वह मेरे पास आई, नीचे गई और मेरा लंड चूसने लगी। वह चूसने में माहिर लग रही थी। सुबह सेक्स करने के बाद से मुझे जल्दी वीर्यपात का मन नहीं कर रहा था।
कुछ मिनटों के बाद, मैं अपनी माँ की सेक्सी बहन को चोदने के लिए तैयार था। तभी उसने मुझे अपने पर्स से एक कंडोम पैकेट दिया और कहा पहनने मैंने वह कंडोम पहन लिया। फिर मैंने उसे मिशनरी पोजीशन में लिटाया और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा। वह मुझसे विनती कर रही थी कि मैं अपना लंड उसके अंदर डाल दूँ। मैंने धीरे से अपना लंड उसकी बुर में डाला। ऐसा लगा जैसे मैं किसी कुंवारी बुर में लंड डाल रहा हूँ।
उसे कुछ दर्द हो रहा था। कुछ और झटके के साथ, मेरा पूरा लंड उसके अंदर था। चूंकि वह अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, इसलिए वह मेरे लंड का आनंद लेने लगी। मेरा पूरा लंड उसकी गीली चूत की गर्मी महसूस कर रहा था।
हमने 20 मिनट तक चुदाई की और वह पहले ही अपना दूसरा संभोग सुख प्राप्त कर चुकी थी और पहले से ही थक चुकी थी। मेरा अभी भी काम पूरा नहीं हुआ था और उसने मुझे रुकने के लिए कहा। मैं रुकने के मूड में नहीं था।
फिर मैंने उसे डॉगी पोज़िशन में घुमाया और अपना औज़ार उसकी बुर में डाल दिया। वह आधी नींद में थी। कुछ और झटके के साथ, वह फिर से मज़ा लेने लगी।
सुबह के 3 बज चुके थे और लोग शादी की तैयारियों के लिए जाग सकते थे। इसलिए मैंने उसे फिर से लिटाया और उसे ज़ोर से चोदा और में भी झड़ गया। हम दोनों थक गए थे और सो गए।
जब मैं सुबह जाग तो देखा मौसी बेड पर नहीं थी वह बाथरूम गई थी थोड़ी देर बाद वह बाथरुम से बाहर आई तो मैं मौसी से पूछा यह संजय कौन है । तो वह मुझे अपने चौड़े आंखों से देख रही थी उसने मुझसे झूठ कहा कि वह किसी संजय को नहीं जानती है तब मैंने उनसे कहा कि मम्मी बोल रही थी कि आप किसी संजय नाम आदमी से रोज चुदाई करवाती हो तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई वह मेरे पास दौड़ के भागती हुई आई और मेरे सामने गीडगाने लगी कि यह बात वह किसी को ना बताया नहीं तो उसकी बदनामी हो जाएगी फिर मैं अपनी मौसी से कहा कि अगर वह मेरी बड़ी बहन की चुदाई वाली बात किसी से बताएगी तो मैं भी यह बात सभी को बता दूंगा और वह जब तक इस शादी समारोह में शामिल रहेगी तब तक मैं उसकी चुदाई करूंगा तो उसने मुझसे वादा किया कि मैं यह बात किसी से नहीं बताऊंगी नहीं तुम्हारी मम्मी से नहीं तुम्हारे पिताजी से वादा किया और कहा ठीक है तुम्हारी जब मर्जी करें चुदाई कर सकते हो फिर मैं बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर के बाहर आ गया और शादी के समारोह में शामिल हो गया । पुरी शादी समारोहों के दौरान बार-बार उसकी नजर मेरे उपर रहती थी । इस दौरान मैंने उसकी काफी बार चुदाई की मैं खुद भी नहीं बता सकता।
अगले सुबह जब मेरी नींद खुली तो 7 बजे थे । मैं उठकर बाथरूम मैं जाकर फ्रेश होकर अशोक के लिए लंच बनायी क्योंकि उन्होंने 10 बजे ऑफिस के लिए निकला था । फिर मैं किचन में काम कर रही थी थोड़ी देर में मेरे मोबाइल पर रिंग बजा। वह चंद्रिका ( मेरी छोटी बहन ) का फोन था बात करते समय मेरी नजर घड़ी पर पड़ी 8 बजे चुके थे । अनुज 9 बजे तक कॉलेज निकल जाता था पर आज उसे कमलेश ( मजदूर ) जो स्टेशन के पास चौल में रहता है उसे लाने जाना था ( दिवाली की घर में साफ-सफाई करवानी थी )। इसीलिए आज वो कॉलेज नहीं गया था।
मैं अनुज के कमरे में गयी और दरवाज़ा खटखटाया. अनुज सो रहा था तो उसने दरवाज़ा खोलने में जरा देर कर दी। अनुज के दरवाज़ा खोलते ही मैं कमरे के अंदर आई, तब तक अनुज वापिस बिस्तर पर लेट गया. वो केवल अंडरवियर में ही था। मैं भी बेड पर उसके पास जाकर लेट गई और उसके माथे पर किस करते हुए कहा- गुड मॉर्निंग… उठ गया मेरा राजा बेटा।
अनुज ने भी मुस्कुराते ( उसकी मुस्कराहट किसी भी औरत को दिवाना बना दोगी ) हुए मुझे गुड मोर्निंग कहा और मेरे होंठों को चूमने लगा।
अनुज ने अपने एक हाथ से मेरा हाथ पकड़कर अपनी चड्डी के ऊपर से ही अपने लंड पर रख दिया। मेरे हाथ रखते ही अनुज के लंड ने फैलना शुरू कर दिया और देखते ही देखते पूरा खड़ा हो गया और उसका ऊपरी भाग बॉक्सर से बाहर निकल आया।
अनुज अभी भी मुझे चूम रहा था और मैं अपनी आँखें बंद किये इन सबका मजा ले रही थी। तभी अनुज ने मेरे गाउन के ऊपर के बटन को खोल दिया. मैं गाउन के अंदर ब्रा नहीं पहनती इसलिए मेरे कसे हुए मम्में बाहर निकल आए और अनुज ने उन्हें दबोचना शुरू कर दिया।
तभी मैं होश में आई और अनुज से कहा- बेटा उठो और जल्दी से फ्रेश हो जाओ, नहा लो … हम उसे बाद में ही करेंगे।
अनुज ने कहा- अभी क्या प्रॉब्लम है मम्मी?
मैंने अनुज से कहा- ध्यान रहे। अभी तेरी पिता जी घर पर ही है वो .
और पिता जी अभी तक ओफिस नहीं गये है।
अनुज ने मेरे मम्मों पर एक चुम्बन किया और उठकर बाथरूम की तरफ जाने लगा और मुझसे बोला- चलिए ना मम्मी … साथ नहाएंगे।
मैंने कहा- अभी नहीं अनुज… मुझे अभी काफी काम खत्म करने हैं
मेरे समझाने पर अनुज नहाने चला गया। मैंने भी खुद को ठीक किया और अनुज के रूम की सफाई करने के बाद घर के और कामों में लग गयी।
कुछ देर बाद अनुज ने मुझे आवाज़ दी। मैंने कमरे में जाकर देखी तो वह बिल्कुल नंगा खड़ा हुआ था। मैंने अनुज से पूछा- क्या हुआ? माँ के साथ मजे करने के चक्कर में बड़ी जल्दी नहा लिया।