Update 13

अनुज - ऐसी बात नहीं है मम्मी… मेरी दोनों अंडरवियर गीली पड़ी हुई हैं… अब क्या पहनूँ?

तभी मुझे याद आया कि मैं कल अनुज के कपड़े धोना भूल गयी थी। मैंने अनुज से कहा- अब तो कोई एक्स्ट्रा भी नहीं है तेरे लिए… तू एक काम कर तब तक पापा की अंडरवियर पहन ले।

मेरी इस बात पर हम दोनों हंसने लगे।

अनुज ने कहा- चलिए ठीक है आज यह भी ट्राई कर लेते हैं।

मैंने अनुज को अलमारी से लाल रंग की एक अंडरवियर लाकर दी, अनुज ने उसे पहन लिया। छोटा अंडरवियर पहनने के कारण अनुज का लंड फिर से खड़ा हो गया जो अंडरवियर के बाहर आ गया।

अनुज ने कहा- ' मम्मी ' पापा की अंडरवियर बहुत छोटी है पर मुझे थोड़ा अजीब लग रहा है इसमें!

मैंने कहा- कोई बात नहीं, आदत पड़ जाएगी!

और मैं अपने बेटे के लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही पकड़ कर सहलाने लगी।

अनुज ने भी समय ना गंवाते हुए मेरे गाउन को खोल कर नीचे फेंक दिया। मैं अब केवल काली पैंटी में अनुज के सामने थी।

फिर अनुज मुझे अपने साथ बेड पर ले गया। अनुज बेड पर खड़ा हो गया और उसने अंडरवियर के बीच से लंड को बाहर निकाला और मेरे मुंह की तरफ लाकर खड़ा हो गया मैं अनुज का यह इशारा समझ चुकी थी मैंने उसे कहा तुम बहुत शरारती हो गया है और घुटनों के बल बैठ कर उस के लंड को अपने मुंह में भर लिया।

मैं अनुज का लंड बड़े ही प्यार से चूस रही थी क्योंकि में मेरे राजकुमार बेटे को कोई तकलीफ़ नहीं दे सकती थी और अनुज भी आँखें बंद किये ‘आआआहहह… मम्मी… उफ्फ… खा लो मेरा… आआआह… मम्मी… तुम्हारा मुँह…’ कर रहा था।

थोड़ी देर की चूसाई के बाद मैंने अनुज का लंड मुँह से निकाल दिया और हाथों में लेकर सहलाने लगी। फिर मैंने भी उठकर अपनी पैंटी उतार दी और अपने नंगे जवान बेटे का हाथ पकड़ा और सीधे बिस्तर पर लेट गयी।

मैं बिस्तर पर जाकर पीठ के बल जा लेटी और अपनी टांगें चौड़ी कर बाहें फैलाकर बोली- आ जा मेरे लाडले! अनुज कुछ मिनट के लिए रूका मैंने उसे पूछी किया हुआ तो उसने कहा पिता जी ओफिस चले गये? मेंने हां मैं सर हिलाया।

अनुज भी इशारा पाकर मेरी चूत के पास अपना मुंह लेकर गया और अपनी खुरदुरी जीभ से उसे चाटने लगा।

अनुज की जीभ ने जब मेरी चूत की पंखुड़ियों को छुआ तो मेरी तो जान ही निकल गयी। मैंने अपना सिर उठाया जिससे

मैं अपनी चुसाई देख सकूँ। मैं कुलबुलाई- आआआहह… अनुज… अपनी जीभ मेरी चूत में जहाँ तक डाल सकते हो डाल दो… हाँ … तुम बहुत अच्छा कर रहे हो। मुझे काफी मजा आ रहा था जिसके कारण मेरी जांघों ने खुद-ब-खुद अनुज के सर को कस कर जकड़ लिया। मुझे अपनी चूत से हल्का सा बहाव महसूस हुआ पर कुछ ही क्षण में मैं एक ज्वालामुखी की तरह फ़ट पड़ी… ऐसा पानी छूटा कि बस… “अरे बेटा… मैं झड़ी… झड़ी रे माँआआआँ मेरी… चूस ले मुझे… पी जा मेरा पानी… मॉय डियर… मेरे बेटे…आआ… आआआहह… हहह… हाआआआ आआ…”

जब अनुज मेरा पानी पीकर उठा तो उसके मुंह का आसपास का हिस्सा मेरे पानी से बुरी तरह गीला था जिसे उसने वही पड़ी मेरी पैंटी से पौंछकर साफ कर लिया। मैं निढाल पड़ी हुई… तेज साँसों और बन्द आंखों के साथ अनुज के साथ आगे होने वाली क्रियाओं का इंतजार कर रही थी।

फिर अनुज मुझे उठाकर खुद नीचे पीठ के बल लेट गया और मैं उसके ऊपर आकर आ गई। मैंने अपनी दोनों टांगों को अनुज की कमर के बगल में डाल दिया और जिससे मेरी चूत अनुज के लंड के बिल्कुल ऊपर थी।

जैसा कि आप लोगो को पता ही है कि इस अवस्था में जाँघें बहुत दर्द करती हैं … इसलिए मैंने सपोर्ट के लिए अपने दोनों हाथों को अनुज के सीने के पास रख दिया। मेरे बूब्स को अपनी आँखों के पास झूलते देखकर अनुज ने उन्हें पकड़ा और मेरे निप्पल को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा।

अनुज ने साथ ही अपने लंड का सुपारा मेरी चूत पर सेट किया और अपने हाथ से पकड़कर उसे मेरी चूत के अंदर करने लगा। सुपारे के अंदर घुसते ही वो रूक गया… शायद आगे के लिये वो मेरी सहमति मांग रहा था।

मैंने अपने मम्मों को अनुज के सीने पर दबाते हुए अपना शरीर अनुज के शरीर पर रख दिया और अपने हाथों से उसके सर को सहलाते हुए कहा- अब रुको मत बेटा और एक ही बार में बाकी का लंड घुसेड़ दो अपनी मम्मी की चूत में …

और मैं उसके होंठों को चूमने लगी। कुछ मिनट बाद उसने मुझे रोका और कहा ' मम्मी बेड के कोने में एक छोटा पैकेट है वो निकाला तो। मेंने वह पैकेट निकाला वो कंडोम था मैंने उसे पूछी यह किस लिये ?

उसने कहा मम्मी आपकी सुरक्षा केलिए कहीं आप प्रेगनेंट ना हो जाओ।

यह सुनकर मेरी आंखों में आंसू आ गए और मैंने उसे ' लव यू अनुज ' ।

उसने एक जोरदार शॉट मारा और पूरा का पूरा मूसल लंड मेरी चूत में पेल दिया।

मैं चीखी- और अंदर …और वापस उसी पुरानी अवस्था में आ गयी।

फिर तो अनुज ने आव देखा न ताव और अपने लंड से मेरी चूत की जबरदस्त पिलाई शुरू कर दी। अनुज ने गहरे व लम्बे धक्कों की ऐसी झड़ी लगाई कि मेरे मुँह से चूँ तक न निकल पायी।

कुछ समय बाद जब मैं अपने चरम पर पहुँची तो अपनी सिसकारियों को न रोक सकी- आअहह… अनुज… बस ऐसे ही… चोद मुझे… और जोर से… और अंदर तक… हाँ बेटा… ऐसे ही… चोद… उफ्फ… ऊईई… माँ… मैं गयी… उफ्फ…

मैं जब झड़ी तो मुझे लगा कि शायद मैं मर चुकी हुँ… मेरा अपने शरीर पर कोई जोर नहीं था… मेरे शरीर में एकदम कांटे से चुभने लगे… मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी चूचियों में पिन घुसी हुई हों…और मैं अनुज के ऊपर गिर पड़ी।

अनुज के मोटे लंड की भीषण पिलाई ने मुझे अंदर तक चीर दिया था… इतनी बुरी तरह झड़ने के बाद मेरा दिमाग सुन्न हो गया था.

पर जैसे ही मैंने होश संभाला तो पाया कि अनुज का लंड अभी भी मेरी चूत की असीमित गहराई को चूमने के लिये लगा हुआ था।

अनुज भी अब ज्यादा देर तक ना ठहर सका और उसने भी मेरे अंदर झड़ना शुरू कर दिया। मैं और अनुज पसीने से बिल्कुल लथपथ चिपके पड़े हुए थे।

थोड़ी देर आराम के बाद मैं अनुज के ऊपर से उठी और अपनी पैंटी उठाकर अनुज के वीर्य से सने हुए लंड को साफ करने लगी. अनुज को साफ करने के बाद मैंने खुद को भी उसी पैंटी से साफ किया और अपने नंगे बदन के ऊपर अपना गाउन डाल लिया।

दोपहर के 11 बजने को थे… मैंने अनुज से कहा- बेटा तेरी मौसी जब भी फोन करती हैं तो तेरे बारे में पुछती है आखिर तू ने उसे ऊपर कौन सी जादू कर दिया है।

" वो आप मौसी से ही पुछे "

अब कपड़े पहन ले और फिर लंच करके कमलेश को लेने स्टेशन चले जाना।

अनुज ने उठकर वापस से लाल अंडरवियर पहन ली और उसके ऊपर से कपड़े भी पहन लिए। कुछ देर बाद अनुज स्टेशन चला गया और मैं भी सभी काम निपटा कर नहाने चली गयी।​
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