Update 15

ग्राउंड का व्यू वाकई बहोत अच्छा था और मैं जाना भी चाहती थी पर वरुण के साथ होने की वजह से थोड़ी नर्वस हो रही थी । मुझे कोई जवाब देता ना देखकर वरुण ने एक बार फिर से मेरी ओर मुड़कर कहा - " क्या हुआ भाभी आइये ना ? "

मैं - नहीं वरुण तुम जाओ मुझे आज बोहोत काम है । आज तुम्हारे अशोक के दोस्त घर आने वाले है ।

वरुण - उनके आने मे तो अभी बोहोत टाइम है , आप आइये बाद मे हो जाएगा काम ।

ये कहते हुए वरुण ने अपना बैग वही गेट के पास खूंटी पर टाँग दिया और मेरा हाथ पकड़कर मुझे घर से बाहर ले आया । ये सब इतनी जल्दी मे हुआ कि मुझे कुछ बोलने का मौका ही नहीं मिला फिर नितिन मेरा हाथ छोड़कर झूमता हुआ आसमान की ओर देखकर बोला - " देखिए इतना अच्छा नज़ारा रोज - रोज थोड़े ही देखने को मिलता है आइये मेरे साथ । "

बाहर की ठंडी मोहक हवा ने मेरे मन मे भी बचपना जगा दिया और मैं भी वरुण के साथ उस मौसम का आनंद लेने लगी और सामने के ग्राउंड मे जाने लगी ,

वरुण मुझसे आगे भागता हुआ ग्राउंड मे पहुँच गया और मस्ती मे झूमने लगा । जब मैं ग्राउंड मे पहुँची तो वहाँ के मन-मोहक नज़ारे को देखकर बस देखती रह गई । ग्राउंड मे इक्का-दुक्का लोग थे जो मेरी ही तरह वहाँ के नज़ारे का मज़ा ले रहे थे । एक कोने मे कुछ सुंदर फूल खिले हुए थे मैं वहाँ उनके पास गई और एक फूल को तोड़कर अपने पास लाई ।

मैं वहाँ की मदहोश कर देने वाली हवा मे खोई हुई थी और मेरे पीछे वरुण अपना सारा काम छोड़कर मेरे जिस्म मे खोया हुआ था मुझे तो अपनी हालत का ध्यान ही नहीं था , कि पीछे से वरुण अपनी ज़हरीली नज़रों से ही मेरे कामुक बदन का रस पी रहा है ।

मुझे पता भी नहीं चला और वरुण धीरे-धीरे मेरे करीब आ गया । बादल अब और भी घने हो गए जिसकी वजह से अँधेरा छाने लगा और हवा भी तेज चलने लगी , बारिश होने के पूरे आसार लग रहे थे , जो लोग ग्राउंड मे थे वो भी अब धीरे-2 करके वहाँ से निकलने लगे थे, हवा के तेज होने से मेरी साड़ी का पल्लू भी हवा से उड़कर नीचे गिर गया और मैंने भी लापरवाही से उसपर कोई ध्यान नहीं दिया । मैंने सोचा अब मुझे घर चलना चाहिए कहीं बारिश ना हो जाए , पर मुझे क्या पता था कि वरुण बिल्कुल मेरे पीछे ही खड़ा है जैसे ही मैं पीछे हटने को हुई पीछे वरुण से जा टकराई, वरुण ने भी इस मौके का पूरा फायदा उठाया और अपने हाथ आगे बढ़ाकर मेरी पतली कमर के उस हिस्से को जहां कोई कपड़ा नहीं था पीछे से पकड़कर अपनी ओर खींचा ।

इससे मेरी पीठ वरुण के सीने से जा टकराई और मैं बिल्कुल उससे सट गई , मौसम ठंडा था पर वरुण के बदन से गरम लहरे निकल रही थी जो मुझे अपने बदन पर साफ महसूस हो रही थी , नीचे वरुण के लिंग का जो तनाव था वो भी मुझे मेरे नितम्बों पर चुभने लगा , आज पहली बार मैंने वरुण के लिंग को अपने जिस्म पर महसूस किया । मैं समझ गई कि ये सब आज की मेरी वरुण के साथ की गई हरकतों का परिणाम है । मैं जल्दी से वरुण से अलग हुई और उसकी ओर हैरानी के भाव से देखा ।

अपनी गलती के पकड़े जाने से वरुण एकदम से थोड़ा सा घबराया और कहने लगा - " वो सॉरी भाभी....... मैं आपको ये कहने आया था कि अब हमे चलना चाहिए मौसम खराब हो रहा है । " वरुण की बात सुनकर मैंने हामी मे सर हिलाया और उसे भी चलने को कहा । वरुण बात तो मुझसे कर रहा था पर उसकी नजर मेरे उभरे हुए बूब्स पर थी जैसे वो उन्हे सिर्फ ब्रा मे कल्पना कर रहा हो,

जब मुझे अपनी हालत का ध्यान आया तो मैंने अपनी साड़ी का आँचल ठीक किया , अब तक सब लोग ग्राउंड से निकल चुके थे सिर्फ हम दोनों ही वहाँ खड़े थे । मैंने उसे एक बार फिर से उसकी कल्पना से जगाया - " वरुण चलो भी । "

वरुण - हाँ ... हाँ ... भाभी ।

इतना कहकर हम दोनों चलने वाले ही थे के तभी बोहोत ज़ोरों की बिजली कड़की और एक तेज हवा का झोंका आया जिसकी वजह से एक बार फिर मेरा आँचल मेरी पकड़ से छूटकर हवा मे उड़ने लगा

, मैंने उसे पकड़ने की भी कोशिश की पर नाकामयाब रही । मैं अपने आँचल को संभालने मे लगी थी और वरुण पीछे से मेरी हालत के मजे ले रहा था , एक ही दिन मे दो बार वरुण के सामने इतनी बोल्ड हो जाने से मुझे अब थोड़ी शर्म भी आने लगी । मैंने जल्दी -2 अपने पल्लू को ठीक किया और चलने लगी । पर आज शायद होनी भी मुझे वरुण के करीब ही लाना थी मेरे एक कदम बढ़ाते ही ज़ोरों की बारिश शुरू हो गई । बारिश शुरू होते के साथ ही मैं घबरा गई और ग्राउंड से निकलने के लिए तेजी से भागने लगी । वरुण मेरे पीछे ही चल रहा था , मेरे पैरों मे सैंडल थी बारिश होने की वजह से ग्राउंड की मिट्टी गीली हो गई और भागते हुए मेरी सैंडल मिट्टी मे धंस गई जिससे मेरा पैर मुड़ गया मैं तो गिरने को ही हो गई थी पर तभी पीछे से वरुण ने मुझे थाम लिया और सहारा देकर खड़ा किया ।

वरुण(मुझे थामे हुए ) - भाभी आप ठीक तो है ?

मेरे पैर मे थोड़ा दर्द था मैंने वरुण से कहा - " हम्म मैं ठीक हूँ , शुक्रिया वरुण । " वरुण ने मुझे पूरा अपनी बाँहों मे समेटा हुआ था उसने ऐसे ही पकड़े-2 मेरी ओर देखा और अपनी आँखों से ही मेरा शुक्रिया स्वीकार किया । मैं वरुण से थोड़ा अलग होते हुए चलने की कोशिश करने लगी पर चलते ही फिर से मेरे पैर मे दर्द मचल गया जिसकी वजह से मैं फिर से वरुण से सट गई ।

वरुण इस बार मुझे पीछे से और भी मजबूती से पकड़ा और मेरी कमर मे अपना हाथ धीरे से फिराते हुए मेरी गर्दन पर धीरे से अपने होंठो से चुम्बन देने लगा ।

बारिश के होते हुए भी वरुण का जिस्म गरम था और उसकी गर्मी मेरे जिस्म तक पहुँच रही थी । मेरा पूरा बदन सिहर उठा और मैं वरुण की बाहों मे सिमट गई ।

वरुण ने एक नजर मेरी आँखों मे देखा और हमारी नजरें मिल गई ना वो कुछ बोल रहा था ना मैं । चलती तेज बारिश की वजह से हम दोनों पूरे भीग चुके थे

और एक दूसरे के इतने करीब होने से हमारी साँसों की गरमी एक दूसरे के बदन को रोमांचित करने लगी । वरुण ने एक टक मेरी ओर देखते हुए कहा - " पैर मे दर्द है क्या भाभी ? " मैं कुछ बोल तो नहीं पाई बस उसके इस सवाल पर धीरे से हाँ मे गर्दन हिला दी । इसके बाद वरुण ने कोई सवाल नहीं पुछा , और अपने एक हाथ से मेरी कमर को मजबूती से पकड़ा और दूसरे हाथ को मेरी पीठ , कमर और नितम्बों पर फिराते हुए नीचे ले गया और एक झटके के साथ मुझे अपनी बाँहों मे उठा लिया ।

उस दिन मुझे वरुण के शरीर की ताकत का सही अंदाजा हुआ , उसने मुझे किसी फूल की तरह अपने ताकतवर हाथों मे उठा लिया । वरुण के गोद मे उठाते ही मेरी चूचियाँ उसकी छाती पर दब गई जिससे मेरी हल्की सी आह .. निकल गई जिसे दबाने के लिए मैंने वरुण से कहा - " आह .... वरुण ये क्या ....... "

मैंने इतना ही कहा था कि वरुण ने बीच मे ही मेरी बात काटते हुए कहा - " घबराइए मत भाभी , मुझ पर भरोसा रखिए । " वरुण का इतना कहना मेरे होंठों को सि देने के लिए बोहोत था , मैं चुप हो गई और वरुण मुझे गोद मे लिए हुए ही मेरे घर की तरफ बढ़ने लगा । बारिश मे भीगे हुए हमारे बदन आपस मे रगड़ खा रहे थे , वरुण के साथ अपनी इस हालत को देखकर मेरी दिल की धड़कने तेज होने लगी । वरुण चलते हुए भी मुझे ही देख रहा था और मैं अपनी नजरे नीची किये हुए उसकी गोद मे सिमटी हुई थी , मुझे इस बात का भी डर लग रहा कहीं कोई मुझे इस हालत मे वरुण के साथ देख ना ले । मैंने अपने आस-पास देखा तो वहाँ दूर -2 तक कोई नहीं था सब अपने घरों मे जा चुके थे, जल्दी ही हम भी घर पहुँच गए बारिश के आने की वजह से बिजली भी चली गई थी और पूरे घर मे अँधेरा हो रखा था । वरुण मुझे अपनी गोद मे उठाए हुए सीधे मेरे बेडरूम मे ले गया और धीरे से मुझे मेरे बेड पर लिटाया

इस दौरान वरुण मेरे चेहरे के काफी करीब आ गया इतने कि मैं उसकी साँसों की गरमाई अपने चेहरे पर महसूस कर पा रही थी जो मुझे भी मेरे होंठ खोलने के लिए मजबूर कर रही थी । वरुण की छातियों से रगड़ खाकर मेरी चूचियाँ थोड़े तनाव मे आ गई थी , मुझे लिटाकर वरुण ने धीरे से एक तकिया मेरे सिरहाने लगाया ।

मेरी नजर उसके चेहरे पर जमी हुई थी, मैंने कभी वरुण को इतने करीब से नहीं देखा था पर आज देखकर उसे देखते रहने का ही मन कर रहा था । वरुण मेरे बिस्तर के पास से हटा और दूर जाके खड़ा हो गया बारिश मे भीगा हुआ वो 19 साल का लड़का मुझ 28 साल की औरत को लुभा रहा था अब तक मैंने या वरुण ने एक शब्द भी नहीं कहा था माहोल ही इतना गरम हो चुका था और चारों ओर अँधेरा भी तो था ।

फिर वरुण मेरे पैरों के पास बैठ गया और मेरे पैर पर अपना एक हाथ रखकर बोला - " क्या अभी भी दर्द है ? " मैं धीमी आवाज मे वरुण के सवाल का जवाब दिया - " थोड़ा सा ।" वरुण ने एक बार मेरी ओर देखा फिर कमरे मे चारों ओर देखता हुआ बोला यहाँ कोई बाम है क्या ?" मैंने उसके सवाल के जवाब मे मेज के ड्रावर की ओर इशारा करते हुए कहा - " उसमे है एक । " वरुण बिस्तर से उठा और मेज के पास जाके उसके ड्रावर से बाम की एक छोटी शीशी लेके वापस बिस्तर पर मेरे पैरों के पास आकर बैठ गया । मेरे पैरों मे अभी-भी सैंडल थी वरुण ने धीरे मेरे पैर को पकड़कर उसकी सैंडल को निकालने लगा । सैंडल उसने वही नीचे फर्श पर फेंक दी और अपने हाथ की दो उँगलियों पर बाम लेकर उसे मेरे पैर पर धीरे-2 लगाने लगा । वरुण के हाथों का स्पर्श जैसे -2 मेरे पैरों पर हो रहा था आनंद और सुकून मे मेरी आँखे बंद होने लगी ।

वरुण के हाथ मेरे पैरों की मसाज कर रहे थे पर उसकी नजरे मेरे बदन पर ऊपर से नीचे तक घूम रही थी ,बीच-2 मे वरुण मेरे पैर को थोड़ा सा दबा देता जिससे मेरे जिस्म मे एक हल्की दर्द की लहर मचल जाती और मैं आँखे बंद कीये हुए एक हल्की सी आह .. भर देती , मेरे बदन मे अंदर-ही-अंदर एक मस्ती की तरंग दौड़ने लगी ,

मेरा बदन पूरा भीगा हुआ था पर फिर भी मुझे ठंड नहीं लग रही थी इसकी वजह ये थी के वरुण के हाथ और वो कामोत्तेजक माहौल मेरे जिस्म मे भरपूर गर्मी पैदा कर रहे थे वरुण मेरी हालत को अच्छे से समझ रहा था और वो इसका भरपूर मज़ा भी उठा रहा था , मेरी साड़ी गीली होकर मेरे जिस्म से चिपकी हुई थी जिसकी वजह से मेरे बूब्स पूरे आकार मे वरुण की आँखों के सामने थे जिन्हे वो बड़ी ही बेशर्मी के साथ लगातार घूर रहा था । थोड़ी देर पैर की मालिश करने ने बाद वरुण ने कहा - " अब दर्द कुछ कम हुआ क्या भाभी ? " मैं तो लगभग नशे मे मदहोश ही थी और ऐसे ही आँखे बंद कीये हुए मैंने कहा - " हम्म । "

वरुण - तब तो अच्छा है अब और भी आराम मिलेगा ।

इतना कहकर वरुण पूरा मेरे बेड पर चढ़ गया अब तक वो नीचे पैर कीये हुए था । बेड पर बैठकर वरुण ने मेरे पैर को अपनी गोद मे रखा और बड़े ही प्यार से सहलाने लगा ,ना जाने क्यूँ मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे पैर पर कुछ चुभ रहा है वरुण के दोनों हाथ तो मेरे पैर पर थे फिर ये नीचे क्या है ? ये जानने के लिए मैंने जिज्ञासा-वश अपनी आँखे धीरे से खोली और फिर जो देखा उसे देखकर साँसो की रफ्तार ने तूल पकड़ ली

' वरुण ने मेरे पैर को अपने लिंग के ऊपर रखा हुआ था उसकी पेंट मे कैद उसका लिंग पूरे उफान पर लग रहा था , वरुण का लिंग इतना कठोर था कि पेंट के अंदर से भी वो मेरे कोमल पैरों पर चुभ रहा था , मेरे दिल की धड़कने तेज हो गई, घबराकर मैंने अपनी आँखे बंद कर ली और अपने होंठों को दाँतों मे दबा लिया

अब मेरी साँसों के साथ-2 मेरी तनाव मे आई हुई चूचियाँ भी मेरे निप्पलस को तना रही थी । अब धीरे -2 वरुण ने मेरी साड़ी को मेरी टाँग के ऊपर से हटाना शुरू किया और उसे मेरे घुटनों तक करके वहाँ भी सहलाने लगा , अब तो ये उसका क्रम बन गया वो अपने हाथों को मेरे पैरों की उंगलियों से लेकर मेरे घुटनों तक ले जाता और वहाँ पर सहलाता हुआ नीचे आता । इस समय मेरी हालत कुछ भी कहने की नहीं थी मैं बस बिस्तर पर बेसुध पड़ी रही और वरुण के गरम हाथों के स्पर्श का मज़ा उठाती रही और कही ना कही वरूण भी ये बात जान गया था कि मैं भी उसकी हरकतों का मज़ा उठा रही हूँ । अब इस खेल को चलते हुए काफी वक्त बीत गया था और मुझे अब इसे रोकना था इससे पहले कि मेरे अरमान मुझ पर पूरी तरह से हावी हो जाएं । वैसे भी अब मेरे पैर मे बिल्कुल दर्द नहीं था मैंने अपनी आँखे खोली जो सुर्ख लाल हो गई थी

और वरुण से कहा -

मैं - वरुण .. अब मेरा पैर बिल्कुल ठीक है ।

वरुण मेरी बात सुनकर थोड़ा सा सकपका गया , उससे उसका हवस भरा रोमांच जो छीनने जा रहा था । वरुण ने मेरी ओर देखा और मेरी बात को अनसुना सा करके कहा - " भाभी आपके पैर बोहोत नाजुक है , इनका ध्यान रखिए , 1 मिनट जरा देखूँ । "

इतना कहकर वरुण मेरे पैर के तलवे पर कुछ बोहोत ही गौर से देखने लगा ।

मैं - क्या हुआ वरुण ?

वरुण - आपके पैर के नीचे कुछ लगा है ।

ये बोलते हुए वरुण मेरे पैर के तलवे पर अपनी उंगलियों से कुछ ढूंढने लगा । वरुण की उंगलियों के अपने पैर के तलवे पर फिरने से मुझे एक मीठी से गुदगुदी होने लगी । वरुण ने मेरे पैर को अपने दोनों हाथों मे उठा लिया और अपने चेहरे बिल्कुल पास ले आया । वरुण की साँसों की गरमाई मेरे पैरों से होकर मेरे पूरे शरीर मे फैलने लगी और मेरी आँखों मे वासना की लकीरे उतर आई । मैंने वरुण से एक बार फिर पुछा- "क्या लगा है वरुण पैर मे ?" वरुण मेरे पैर अपने होंठों के एक दम करीब लाया और बोला - " कुछ चिकना सा है । " और इतना कहकर वरुण ने बिना मुझसे कुछ पूछे अपनी जीभ बाहर निकाली और मेरे पैर के तलवे उससे चाट लिया ।

मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी वरुण ऐसा कर देगा , मेरी एकदम से आह फूट पड़ी ।

मैं - आह .... वरुण .... ये ... क्या .... ....नहीं .... ?

पर वरुण ने उल्टा मेरे पैर को अपने हाथों मे मजबूती से पकड़ा और अपने होंठ मेरे पैरों से घुमाते हुए मेरी जांघों तक आया और वहाँ पर जम कर चूमा ।

"ओह .... वरुण .... छोड़ो ना ....... । "- कहते हुए मैं बिस्तर पर तड़पने लगी हवस का शैतान मुझे अपने काबू मे कीये जा रहा था, तभी लाइट आ गई और हर तरफ रोशनी हो गई , अचानक से रोशनी फैल जाने से वरुण की पकड़ मेरे पैर पर थोड़ी ढीली हो गई और मैंने तेजी के साथ अपना पैर वरुण के हाथों से खिंच लिया और बिस्तर पर उठकर बैठ गई । मैंने थोड़े गुस्से के भाव से वरुण की ओर देखा

वो मुझसे नजरे चुराता हुआ बेड से उतरा और बाम की शीशी रखने जाने लगा , मैं उसे कुछ बोलती इससे पहले ही ठीक उसी समय दरवाजे की बेल बजी । मैंने थोड़ा हड़बड़ाते हुए वरूण की ओर देखा वो पहले से ही मुझे देख रहा था । एक बार के लिए तो मुझे लगा कि अशोक ही आ गए है पर फिर घड़ी मे देखा तो अभी तो सिर्फ 6 ही बजे थे अशोक तो 7 बजे ऑफिस से आते है । मुझे थोड़ी राहत मिली के ये अशोक तो नहीं होंगे मैं जल्दी से बिस्तर से उतरकर दरवाजा खोलने के लिए गई , वरूण मेरे पीछे ही था । जैसे ही मैंने दरवाजा खोला

तो देखा सामने सीमा जी ( वरुण की माँ ) खड़ी थी ।

मुझे देखते ही वो तुरंत बोल पड़ी - " पदमा वो वरुण नहीं आया अब तक ? "

मेरे कुछ कहने से पहले ही पीछे से उन्होंने वरुण को देख लिया और देखते ही बोली - " अरे वरुण ! तुम अभी तक यहाँ क्या कर रहे हो ? " वरुण उनकी बात का कुछ जवाब देता इतने मे ही उन्होंने एक और सवाल दाग दिया ।

सीमा जी - और ये तुम दोनों के कपड़े कैसे भीग गए ?

मैंने सीमा जी को देखकर उन्हे आदर के साथ अंदर आने को कहा और वो अंदर आ भी गई ,पर मुझे समझ नहीं आ रहा था कि उनकी बात क्या जवाब दूँ , मुझसे तो कोई जवाब देते ना बना । मेरे मन मे चिंता की लकिरे खिंच आई पर तभी वरुण ने बात संभालते हुए कहा - " अरे मम्मी , वो मैं आ ही रहा था कि बीच मे ही बारिश शुरू हो गई और मुझे वापस यहीं रुकना पड़ गया पर मैं उस टाइम रास्ते मे था तो थोड़ा भीग गया । "

सीमा जी वरुण के इस जवाब से संतुष्ट हुई और मुझे भी राहत मिली 'आज तो वरुण ने बचा लिया , नहीं तो सीमा जी क्या सोचती के मैं उनके बेटे को टयूशन पढ़ाने के बजाय उसके साथ बारिश के मजे ले रही हूँ । '

सीमा जी - अच्छा ठीक है चल अब तू घर जाके कपड़े बदल ले, नहीं तो तुझे सर्दी हो जाएगी । बारिश अब रुक गई है , जल्दी जा ।

मैंने मन मे सोचा " बाहर की बारिश अब बंद हो गई वो तो शायद बस मुझे वरुण के करीब लाने के लिए आई थी ।"

वरुण ने अपनी मम्मी की बात सुनी और खूंटी से अपना बेग उतारकर जाने लगा ।

फिर सीमा जी ने मेरी ओर देखा और कहा - " पदमा तुम भी भीगी हुई लग रही हो ?"

मैं ( थोड़ी झिझक के साथ ) - हाँ सीमा जी वो ..... मैं छत पर कपड़े लेने गई थी और तभी बारिश के आने से मैं भीग गई ।

सीमा जी - तो तुम्हें तभी चेंज कर लेना चाहिए था ।

सीमा जी की इस बात मैं एक सवाल भी था कि मैंने अभी तक अपने भीगे हुए कपड़े बदले क्यों नहीं और मेरे पास इसका कोई उचित जवाब भी नहीं था , मैं सोच ही रही थी कि सीमा जी से क्या कहूँ के तभी दरवाजे पर खड़ा वरुण बोला - " वो बिजली चली गई थी ना मम्मी ,तो बोहोत अँधेरा था इसलिए ......... । "

वरुण इतना कहकर चुप हो गया सीमा जी ने इसपर हामी मे सर हिलाया और मुझे चेंज करने को बोलकर , वरुण के साथ चली गई ।

उनके जाने के बाद , मैंने चैन की साँस ली । अब मेरे शरीर को ठंड लगने लगी थी वरुण ने मेरे जिस्म मे जो गरमाई पैदा की थी वो भी अब खत्म हो चुकी थी ,मैं सीधे बेडरूम मे गई और वहाँ से दूसरे कपड़े लेकर बाथरूम मे गई और अपनी गीली साड़ी निकाल दी और दूसरी साफ साड़ी पहन ली,

चेंज करके मैं बाहर आई । बेडरूम मे वापस आकर मेरी नजर बेड-शीट पर गई जो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी , मैंने उस बेडशीट को बेड से हटा दिया और उसकी जगह एक दूसरी नई बेड-शीट बिछा दी , सोचा अशोक पूछेंगे तो कह दूँगी ' वो पुरानी वाली गंदी हो गई थी । ' बेड-शीट बिछा कर मैंने एक बार घड़ी मे देखा 6:30 बज रहे थे , इसका मतलब था की अशोक के आने मे बस आधा घंटा बचा था । मैं जल्दी-2 रात के खाने के इंतेज़ाम मे लग गई वैसे भी आज अशोक अकेले तो थे नहीं उनके साथ डॉक्टर रफीक भी तो आने वाले थे ।

7:15 पर घर की डॉर बेल बजी , मैं अपने काम मे व्यस्त थी । मैंने जाकर दरवाजा खोला तो सामने अशोक और रफीक दोनों खड़े थे,

रफीक के हाथ मे एक बेग था । मैंने मुस्कुराते हुए उनका स्वागत किया और उन दोनों को अंदर लेके आई । रफीक ने भी मुस्कुराते हुए मुझे ' हाई' बोला और अंदर आ गया । अंदर आकर हम सभी हॉल मे बैठ गए मैं सबके लिए चाय लेने कीचेन मे चली गई जब मैं चाय लेकर वापस आई तो रफीक और अशोक आपस मे कुछ बात कर रहे थे ।

मैंने उनके सामने चाय रखी और वही पास वाले सोफ़े पर अशोक के बगल मे बैठ कर चाय पीने लगी । मैं और अशोक एक सोफ़े पर थे और रफीक दूसरे सोफ़े पर । अशोक ने बात करते हुए रफीक से कहा -

" रफीक अब तुम ही मेरी बीवी जान का शक दूर करो । "

रफीक ने हँसते हुए थोड़ी हैरानी से मेरी ओर देखा और कहा - " शक ..... कैसा शक ? "

अशोक - अरे इसको लगता है कि मैं इसकी झूठी तारीफ करता हूँ , अब तुम ही इसे बताओ क्या ऐसा ही है ?

रफीक ( हँसते हुए ) - नहीं ... नहीं ... ऐसा नहीं है पदमा । तुम्हारी तारीफ सिर्फ अशोक ही नहीं हम सब दोस्त भी करते है ।

अशोक - देखा मैंने कहा था ना ।

मैं ( अपनी प्रशंसा से थोड़ी शरमाती हुई ) - अरे छोड़ो भी रफीक ... इनकी तो आदत है मुझे ऐसे ही सताने की ।

रफीक - नहीं पदमा .. अशोक बिल्कुल सही तुम्हारी तारीफ करता है अगर तुम्हारे जैसी पत्नी मुझे मिल जाए तो मेरे भी दिन सुधर जाए । ( इतना कहकर वो हँसने लगा और मैं भी अपनी मुस्कुराहट छिपा नहीं पाई )

मैं - मिल जाएगी एक दिन फिक्र मत करों ।

रफीक - नहीं कोई फिक्र नहीं है , बस तुम ही ढूंढ देना ।

मैं - हाँ बिल्कुल ।

अशोक - अरे भई ऐसी बीवी के लिए तो बड़े अच्छे कर्म करने पड़ते है तब जाके मिलती है ।

रफीक - बस भई फिर तो अपने को नहीं मिलने वाली क्योंकि अपने तो कर्म ही पूरे पापियों वाले है ।

( हम सब हँस पड़े )

मैं - और बताओ रफीक आज बड़े दिनों बाद आना हुआ , कुछ ज्यादा ही बीजी लगते तो अपने क्लिनिक मे ?

रफीक - अरे बस कुछ नहीं ऐसे ही टाइम ही नहीं लगा ।

मैं - अच्छा तुम लोग बैठो मैं खाना लगाती हूँ ।

मैं उठकर कीचेन मे जाने लगी तभी अशोक ने मुझे पीछे से रोक दिया ।

अशोक - अरे सुनो पदमा ।

मैं पीछे मुड़ी और पुछा - हाँ ।

अशोक - तुम खाना मत लगाओ अभी हम अभी आते है जरा छत से घूम कर ।

मैं समझ गई के ये लोग आज फिर से शराब पीने जाने वाले है , मैंने हैरानी से रफीक की ओर देखा

और उससे कहा - " रफीक तुम इन्हे रोकते क्यों नहीं ? ये कोई अच्छी बात थोड़े ही है , घर मे मेहमान आए और उसे लेकर शराब पीने चल दिए । "

पर रफीक के कुछ कहने से पहले ही अशोक बोल पड़े - " अरे मेरी डार्लिंग बीवी बस 10 मिनट मे नीचे आ जाएंगे । "

मैं जानती थी ये बस कहने को 10 मिनट है , असल मे तो 2 घंटे से पहले ये दोनों नीचे नहीं आने वाले । इतने मे ही रफीक ने अपने साथ लाया हुआ वो बेग उठाया और अशोक के साथ छत पर चला गया । यहाँ नीचे मैं अकेली रह गई और वहाँ उन दोनों की महफ़िल शुरू हो गई । मुझे अशोक पर काफी गुस्सा भी आया क्योंकि मुझे उससे नितिन के बारे मे कुछ बात भी करनी थी पर वो तो सीधा अपनी मस्ती मे मजे करने चले गए । मैं भी समय बिताने के लिए सोफ़े पर बैठकर टीवी देखने लगी , करीब आधा घंटा टीवी देखने के बाद मैं भी अपने बचे हुए काम को निपटाने मे लग गई चाय की ट्रे लेकर मे कीचेन मे गई और वहाँ के अपने काम खत्म कीये । मैं जानती थी की अब अशोक या रफीक दोनों मे से कोई खाना तो खाने वाला है नहीं इसलिए बचे हुए आटे को ऊपर छज्जे पर रखने लगी पर वो थोड़ी ऊँचाई पर था और वहाँ मेरा हाथ भी मुस्किल से पहुँच रहा था अचानक आटे को ऊपर रखने के चक्कर कैसे उसका डब्बे से कुछ आटा उड़कर मेरे ऊपर आ गिरा । मेरी साड़ी थोड़ी खराब सी गंदी हो गई और आटे के कुछ कण मेरे ब्लाउज पर भी गिर गए । मैं उन्हे साफ करने के लिए वहीं कीचेन मे खड़ी होकर अपनी साड़ी अपने ब्लाउज से हटाकर उसे साफ करने लगी ,

मैं अपने आप को साफ करने मे व्यस्त थी मुझे पता भी नहीं चला कब रफीक नीचे आ गये और वहीं कीचेन के पास गेट पर खड़े होकर मुझे चुपके से देखने लगे । साड़ी के सामने से हटने की वजह से रफीक के सामने मेरे ब्लाउज मे कसे हुए बूब्स और मेरा सपाट चिकना पेट साफ दिख रहा था और वो मजे से इस नज़ारे का लुत्फ उठा रहा था । मेरा ध्यान रफीक पर तब गया जब मैंने अपने को बिल्कुल साफ करके अपनी साड़ी ठीक की और सामने देखा , सामने रफीक को देखकर मैं एक दम से सकपका गई ये पहली बार था जब रफीक ने मुझे ऐसे देख लय था , वहीं खड़े-2 उसकी ओर देखकर बोली - रफीक .... तुम .. ? क्या कुछ चाहिए था ?

रफीक अभी भी मुझे ही देख रहा था और मेरे सवाल पूछने पर वो अपनी सोच से बाहर निकलता हुआ बोला - " हाँ ... वो मुझे थोड़ा पानी चाहिए था । "

इतना बोलकर रफीक कीचन के अंदर आ गया और पानी लेने के लिए सीधे फ्रिज की ओर बढ़ा फ्रिज मेरे पीछे था और वहाँ से पानी लेने के लिए रफीक को मुझे पार करना था । चाहता तो रफीक मुझे भी पानी लाने के लिए कह सकता था पर उसने ऐसा नहीं किया वो बिल्कुल मेरे करीब आया और अपने मर्दाना सीने को मेरी नाजुक चूचियों से रगड़ता हुआ आगे बढ़ गया 'आह........ ' मेरी आह मेरे होंठों तक आई पर मैंने उसे अपने गले मे ही दफ्न कर लिया । रफीक को अपने इतने पास से गुजरता महसूस करके मेरी धड़कने तेज हो गई । रफीक ने फ्रिज से पानी की बोतल निकाली और वापस जाने लगा पर इस बार मैं रास्ते से थोड़ा पीछे हट गई रफीक थोड़ा सा लड़खड़ाते हुए मेरी ओर आया मे एक तरफ खड़ी थी । मेरे करीब आते ही रफीक एक-दम से मुझ से टकरा गया पर इस बार ना सिर्फ मेरी चूचियाँ उसके सीने के नीचे दब गई बल्कि यूँ अचानक से गिरने की वजह से मेरे होंठ भी उसके होंठों से टकरा गए ।

" आह .... रफीक .... ओह ...... "- मैं संभलते हुए बोली ।

रफीक काफी नशे मे लग रहा था उसके मुहँ से शराब की बदबू आ रही थी । उसने मुझे अपनी बाहों के घेरे मे ले लिया और धीरे से अपने होंठ मेरे होंठों पर रगड़ दिए ।

वरुण की आज शाम की, की हुई हरकतों से मैं पहले ही उत्तेजित थी और अब रफीक के होंठ आग मे घी का काम कर रहे थे । मैंने संभलते हुए रफीक को खुद से अलग किया और उसकी ओर देखते हुए कहा -

मैं - ये सब क्या है रफीक ?

रफीक भी अब होश मे आया और अपनी गलती मानते हुए बोला - " ओह .. मुझे माफ करदों पदमा .. दरसल मैं नशे मे बहक गया था । "

फिर रफीक बोतल लेकर बिना कुछ बोले वहाँ से चला गया , उसके मुहँ से शराब की बदबू आ रही थी । रफीक का ये रूप मैंने पहली बार देखा था ऐसा पहले तो कभी नहीं हुआ था मैंने सोचा , शायद शराब के नशे मे रफीक से गलती हो गई खैर मैंने अपना ध्यान इन सब बातों से हटाया और अपने काम को खत्म करके वापस हॉल मे आकर बैठ गई । अशोक और रफीक को गए 1 घंटा हो गया मैंने सोचा अब बस बोहोत पीली इन दोनों ने अब इन्हे वापस नीचे आ जाना चाहिए । ये सोचकर मैं ऊपर की ओर छत पर जाने लगी , जैसे ही मैं छत पर गई मुझे छत वाले कमरे से अशोक की नशे मे धुत धीमी-2 कुछ आवाज़े सुनाई देने लगी , ना जाने मुझे क्या सूझी मैं धीरे-2 उनकी बातों को सुनने का प्रयास करने लगी

और वही छिपकर कमरे के पास खड़ी हो गई अशोक कह रहा था -

अशोक - यार .. रफीक मुझे तो लगता है उस नितिन के बच्चे को मुझ पर शक हो गया है ।

रफीक - तू उसकी चिंता मत कर बस एक बार वो फाइल और वो ड्राइव मिल जाए फिर देखते है साले को क्या कर पाता है हमारा ?

अशोक - फाइल तो मेरे पास है यार बस वो ड्राइव मिल जाए एक बार ।

रफीक - ड्राइव की बाद मे देख लेंगे तू ये बता क्या किसी और को भी तेरे काम पे शक है ?

अशोक - नहीं , और किसी को तो भनक भी नहीं कि कंपनी मे क्या हो है ।

रफीक - गुड़ । बस ये राज राज ही रहे जबतक काम पूरा ना हो जाए ।

अशोक - ऐसा ही होगा । चीयर्स ।

रफीक - चीयर्स । वैसे वो नितिन अभी कहाँ है ? शहर से बाहर ही क्या ?

अशोक - हाँ ,वही है ।

रफीक - बस ठीक है वो हमारे रास्ते मे नहीं आएगा ।

फिर वो दोनों शराब पीने मे मग्न हो गए और इधर उधर की बाते करने लगे । मैं थोड़ी देर उनकी बाते सुनती रही पर फिर मुझे कमरे मे कुछ हलचल महसूस हुई । कहीं ये दोनों बाहर तो नहीं आ रहे ये सोचकर मैं वहाँ से धीरे से पीछे हटी और नीचे आकर सोफ़े पर बैठ गई । मेरे दिमाग मे उन दोनों के कहे हुए शब्द बिजली की रफ्तार से घूमने लगे " आखिर ये सब हो क्या रहा है ? क्या चल रहा है यहाँ ? कहीं अशोक कुछ गलत तो नहीं कर रहे ? पर क्या है वो ? और क्या रफीक भी इसमे शामिल है ? कहीं जो कुछ नितिन कह रहा था वो सच तो नहीं ? " ये सब बातें मेरे दिमाग मे घूमने लगी ।​
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