Update 09
CHAPTER- 2
एक युवा के अपने पड़ोसियों और अन्य महिलाओ के साथ कारनामे
मानवी- मेरी पड़ोसन
PART 1
सुबह- सुबह
एक युवा के अपने पड़ोसियों और अन्य महिलाओ के साथ कारनामे
मानवी- मेरी पड़ोसन
PART 1
सुबह- सुबह
शुरुआत में हर दिन सुबह सुबह मानवी डुप्लीकेट चाबी से मेरे फ्लैट को खोलती और मुझे बिस्तर पर एक कप हॉट मॉर्निंग चाय सर्व करती और मुझे अपनी मीठी और मधुर आवाज में गुड मॉर्निंग करके जगा देती ।
जब तक आशा मेरे साथ रही थी वो रोज सुबह डुप्लीकेट चाबी से मेरे फ्लैट को खोलती और बिस्तर पर मुझे चूमती और मुझे अपनी मीठी और मधुर आवाज में गुड मॉर्निंग करके जगा देती । मैं साधारणतया रात को लुंगी पहन कर ही सोता हूँ और कभी भी अंडरवियर पहन कर नहीं सोता .. आशा के चूमने से मेरा लंड जाग जाता था और फिर चाय से भी पहले मैं आशा के साथ लगभग रोज चुदाई का एक राउंड लगा लेता था . और उसके जाने के बाद भी वो रोज सुबह सुबह मेरे ख्वाबो में आती थी और मैं उसकी भरपूर चुदाई करता था.
एक दो दिन बाद मैंने मानवी भाभी को सुझाव दिया, " मानवी भाभी, मैं देख रहा हूं, आप दिन-ब-दिन वजन बढ़ा रही हैं, और मैं आप जैसी इतनी खूबसूरत महिला को मोटी महिला में तब्दील होते नहीं देखना चाहता । तो कल से, हम दोनों पार्क में एक साथ सुबह और शाम की सैर करेंगे ।
मानवी ने सहमति जताई और प्रसन्न हुई कि काका को उनके स्वास्थ्य और सौंदर्य की कितनी चिंता है।
रूपाली फिल्म के शौकीन थी , लेकिन सूरत में उनके पति के छोटे छोटे प्रवासो के दौरान उनके पति शायद ही किसी फिल्म थिएटर में उसके साथ गए होंगे ।मुझे जल्द ही इस बात की जानकारी हो गई। इसलिए हर वीकेंड में मैं रूपाली को शनिवार या रविवार को मूवी थिएटर में ले जाता और रूपाली की पसंद के अनुसार फिल्म देखते। रूपाली का चुनाव गुजराती या भोजपुरी फिल्मों और हिंदी फिल्मों से लेकर हॉलीवुड फिल्मों तक अलग-अलग था। बेशक, पूरा खर्च मैं ही वहन करता था ।
एक सुबह रूटीन से मानवी ने चाय के प्याले के साथ मेरे बेडरूम में प्रवेश किया। मैं अपनी पीठ के बल चित्त सो रहा था। सुबह के समय में, उस समय मेरे सपने में आशा मेरे साथ थी और मैं उसे घोड़ी बना कर चोद रहा था और नींद में मेरा लंड पूरी हद तक कठोर और खड़ा हुआ था जैसे की मैंने पहले भी लिखा है मैं अंडरवियर पहन कर नहीं सोता और मैंने हमेशा की तरह सिर्फ लुंगी (भारत में कमर के चारों ओर पहना जाने वाला पारंपरिक परिधान) पहना हुआ था और लंड अपने विशाल आकार के कारण लुंगी में से पूरा बाहर आ गया था । मानवी ने अपने जीवन में कभी 8 इंच का इतना बड़ा लंड नहीं देखा था । वह इस नजारे से पूरी तरह मंत्रमुग्ध हो गई थी । वह बहुत हैरान थी और सोचा कि उसके पति का मरियल सा लंड तो मेरे इस विशालकाय लंड के आधे आकार का ही होगा ।
इन दिनों , दो कारणों से मानवी और उसके पति के बीच सेक्स लगभग बंद ही था । ( जो की मानवी ने ही मुझे बाद में बताया था। ) सबसे पहले, उसके पति छह महीने में एक बार ही यात्रा कर सूरत आते थे , और वह सेक्स के लिए कोई पहल नहीं करेंते थे सम्भवता उम्र और थकान, सेक्स में अरुचि इसका कारण थे । दूसरा, भीड़भाड़ वाले फ्लैट में बेटे और बेटी के बढ़ने के साथ ही फ्री तरीके से सेक्स संभव नहीं था । इन कारणों से निश्चित तौर पर मानवी सेक्स की भूखी महिला थी ।
अचानक मेरे बड़े खड़े हुए लंड को देखकर मानवी को अपनी चूत के अंदर एक सनसनी सी महसूस हुई। उसने लंबे समय तक मेरा विशाल लंड की मन्त्रमुुग्ध हो कर देखा, लेकिन उसे जल्द ही होश आ गयाऔर उसने खुद को नियंत्रित किया, ।
उसने चाय का कप बिस्तर के पास रखा, और धीरे से पुकारा, "काका, उठो, सुबह हो गई है।"
उसके बाद वो तुरंत वहां से चली गई। मैं जाग गया और उन घटनाओं से अनभिज्ञ था जो मेरे कमरे में कुछ समय पहले हुई थीं। उस दिन मानवी इतनी गर्म कामुक हो गयी थी कि दोपहर के समय, जब कोई भी घर पर नहीं होता था, उसने रसोई से एक लम्बा बेंगन उठा कर उसे अपनी चूत के अंदर डाल लिया । उसने बैगन की कल्पना मेरे लंड के रूप में की और 10 मिनट तक हस्तमैथुन करती रही जब तक वो झड़ नहीं गयी ।
कहानी जारी रहेगी