Update 107
VOLUME II
विवाह
CHAPTER-1
PART 31
असली मजे का थोड़ा सा स्वाद
विवाह
CHAPTER-1
PART 31
असली मजे का थोड़ा सा स्वाद
नीता ने रीता को रोका और बोली कहो अब कुछ अलग अनुभव करते हैं जो आप के साथ मेट्रो ट्रैन में उस बुड्ढे ने किया था वो मैं आपके साथ करुँगी और जो मेरे साथ हुआ है वो आप मेरे साथ करना . ताकि ये भी पता छाए के हमने एक दुसरे के अनुभव को कितने ध्यान से सुना है ।
नीता ने रीता को धक्का दिया और नीता रीता के बदन पर उसकी पीठ के साथ चिपक गयी। और कुछ देर बाद उसने रीता की की स्कर्ट नीचे खिसका दी और दोनों ऐसे हिलने लगी जैसे ट्रैन में यात्रा के दौरान खड़े हुए लोग हिलते हैं । फिर नीता ने अपने हाथ की माध्यमा और प्रथमा ऊँगलीया मिला कर उसके नितम्बो पर रगड़ी । वह 4-5. मिनट से ऐसा करती रही तो रीता थोड़ा हिल कर आगे हुए तो भी नीता नहीं रुकी फिर रीता थोड़ी और उससे दूर खिसकी तब भी वह रीता के साथ ही चिपकी रही और उसके नितम्बो पर ऊँगली फिराती रही और एक बार नीता ने रीता के नितम्बो पर हलकी सी चुटकी काटी। उफ्फ्फ ओह्ह्ह करके रीता हलकी से कराही और बोली मुझे बिलकुल ऐसा ही लगा था जब उसकी वो कठोर वस्तु फिर से मेरी पीठ और नितम्बो में बार बार चुभ रही थी । काश वो मर्द यहाँ सच में होते तो कितना मजा आता । फिर रीता ने नीता को से दूर करने के लिए अपनी कोहनी हलके से उसके पेट मारने का नाटक किया तो नीता ने भी रीता को जोर से धक्का मारने का नाटक किया। और उसे एक कोने में ले गयी ।
ठीक इस मौके पर मैंने चीजों को अपने नियंत्रण में लेने की सोची और सोचा अब इन दोनों को असली मजे का थोड़ा सा स्वाद चखाया जाये। मैंने उन दोनों के मष्तिष्क पर नियंत्रण करते हुए उन्हें आदेश दिया की वो दोनों अपनी आँखे बंद कर ले और तब तक ना खोले जब तक मैं उन्हें आँखे खोलने के लिए आदेश न दू औरये सोचे जो ट्रैन में उनके साथ हुआ था वो ही अब फिर उनके साथ हो रहा है ।
नीता ने चारो तरफ देखा वहां कोई नहीं था परन्तु मैं वही छुपा हुआ उनकी हरकते देख रहा था और उन दोनों ने फिर मेरे आदेश के अनुसार अपने आँखे बंद कर ली और मैंने अगला आदेश दिया की वो महसूस करें की वो पुरुष ही उनके साथ चिपका हुआ है और उसके बाद चुपके से मैं उस कमरे में दाखिल हुआ और एक हाथ से रीता की नाभि को छूने लगा और उस बीच नीता ने रीता की स्कर्ट की ज़िप को खोल और उसे रीता के नितंबों तक नीचे खींच लिया और रीता के नितम्बो पर हाथ फेर उन्हें थोड़ा सहलाया । मैंने नीता को मानसिक निर्देश दिया वो रीता से थोड़ा पीछे हट जाए और आँखे बंद रखते हुए अपनी चूचिया खुद दबाये और नीता एक तरफ हो अपनी चूचिया दबाने लगी ।
उस समय मैं साथ साथ रीता को निर्देश देता रहा को वो यही महसूस करे की वो इस समय ट्रैन में हैं और ये सब उसके साथ जो कुछ भी वो बूढ़ा कर रहा था वही सब अब नीता उसके साथ कर रही है ।
मैं रीता के करीब आ गया फिर रीता के नितम्बो पर हाथ फेरते हुए रीता की पेंटी भी नीचे सरका दी और अपनी उंगली सीधे रीता की चूत के अंदर डाल दी। एक बार फिर रीता जम गयी और विरोध करने में इस तरह से असमर्थ हो गयी। मैंने रीता के नितम्बो के गालों के बीच अपना लंड घुसा दीया , और अंदर की एक जोर से धक्का दिया पर उसकी चूत या गांड में नहीं घुसाया और उसकी चूत और गांड के छेद के बीच की जगह को लंड से सहलाने लगा । लंड रीता की चूत के होंठो तक पहुँच गया और उनको छेड़ने लगा ।
रीता ने आँखे बंद रखते हुए फटाफट मेरी ऊँगली और मेरे लंड को अपनी गांड और चूत की फांक से निकाल कर मेरी हरकत का विरोध करने का नाटक किया, और पीछे धक्का देने का भी नाटक किया और अपनी पैंटी ऊपर खींच ली। फिर पूरे साहस के साथ, चेतावनी देती हुई मेरे कान में फुसफुसायी कि अब इसके बाद आपने ऐसा किया तो मैं चिल्लाऊंगी । तो मैंने उसकी नग्न नितम्बो पर हाथ फेर उसे अहसास करवाया की उसकी स्कर्ट अभी भी आधी नीचे हैं और उस ट्रैन वाले दुष्ट कमीने अधेड़ की तरह रीता की गांड के अंदर अपनी अपने सख्त मांसल बेलनाकार लंड को रीता की पेंटी के कपड़े के ऊपर से थपथपाया और उसके नितम्ब के गालों को पेंटी के कपडे के ऊपर ही अंदर और बाहर ले गया और अपनी उंगलियों कभी रीता की गांड के छेद के पास और कभी उसकी चूत के प्रवेश द्वार के पास घुमाने लगा ।
फिर मैंने रीता की कमर को स्तनों के नीचे से कस कर पकड़ लिया और फिर हाथ को स्तनों पर लेजाकर उसके स्तनों को अपने दाहिने हाथ में दबाते हुए रीता की पैंटी के ऊपर अपने लंड को उस रीता के नितम्बो की दरार में अंदर और बाहर धकेलता रहा ।
कुछ देर बाद रीता ने पानी छोड़ दिया और मैंने रीता के स्तन से अपना हाथ हटा लिया और नीता की आदेश दिया की वो रीता की किश करे . नीता ने रीता को किस किया तो रेटर आने नीता को किश करते हुए थक यू नीता कहा और नीता के कहा अब आपकी बारी है रीता ।
रीता उत्तेजित होते हुए नीता को धक्का देकर पलट गयी और नीता को एक कोने में ले गयी ।
नीता ने अपना दाहिना हाथ ऊपर कर ऐसे रखा था मानो उसने अपना हाथ छत पर रख दिया हो । और उसके कुछ सेकंड के बाद रीता ने नीता के कूल्हे के दोनों तरफ़ अपने दोनों हाथ रख दिए जो नीता के कूल्हों के ऊपर और नीचे हो रहे थे और कूल्हों को पकड़ने का प्रयास कर रहे थे। मैंने रीता को मानसिक निर्देश दिया वो नीता के स्तनों को सहलाये और दोनों को सख्त मानसिक ताकीद दी की उन्हें आँखे नहीं खोलनी है और वही महसूस करना है जो उन्होंने ट्रैन में महसूस किया था और पीछे से मैं नीता के साथ चिपक गया ।
नीता को यक़ीन ही नहीं हुआ की कि जो उसके साथ उस भीड़ में ट्रैन केअंदर हुआ वही फिर हो रहा है. वो बेचैन हो उठी और रीता के हाथों को दूर करने की कोशिश की।और खुद को इस प्रकार छूने से बचाने की पूरी कोशिश की, उसके पीछे मैं जोर-जोर से सांस ले रहा था।
थोड़ी देर बाद मैंने नीता को घुमाया और उसके सामनेहो गया और अब रीता नीता के पीछे थी । और उसने बायीं ओर से आए एक हाथ से नीता के बाएँ स्तन को पकड़ लिया और उसे प्यार से सहलाने लगी ।
आसपास अंधेरा-सा हो गया था। नीता ने लो-नेक और छोटी टी-शर्ट पहनी हुई थी जिसमे से उसका पेट भी दिखाई दे रहा था? और इन उपयुक्त परिस्थितियों का लाभ उठाकर पीछे खड़ी रीता ने नीता के स्तनों के बीच की दरार पर हाथ रख दिया। उसका हाथ बड़ी आसानी से नीता की टी शर्ट के अंदर फिसल गया और उसके हाथ ने नीता की ब्रा के कप्स को सहलाया और बिना समय बर्बाद किए उसने ब्रा कप्स को ऊपर उठा दिया, परिणामस्वरूप नीता के दोनों स्तन ब्रा के प्यालों से मुक्त हो गए। वह मेरे अब तक अनछुए दोनों स्तनों को सहलाने लगी ।
यही अनुभब नीता को अप्रत्याशित रूप से सार्वजनिक तौर पर मेट्रो ट्रैन के उस भीड़ वाले डिब्बे में हुआ था । अजीब-सी सनसनी महसूस होने के कारण उसके निप्पल सख्त और खड़े हो गए थे। नीता रीता की इस हरकत से सम्मोहित हो गयी और निप्पलों की प्रतिक्रिया ने मुझे प्रोत्साहित किया की वो इसका आनंद ले रही है । मैंने रीता की मानसिक आदेश दिया की वो नीता को नीचे से ऊँगली करे और उसके नितम्बो को सहलाये । और फिर रीता वैसा ही करने लगी फिर मैंने उसकी टी-शर्ट को ऊपर सरकाया और दोनों स्तनों को नीचे की तरफ़ बाहर निकाला और उसके स्तनों के ऊपर झुक गया। उसे मेरी गर्म और गीली जीभ अपने एक निप्पल पर महसूस हुई। उसी समय रीता जो नीता के पीछे थी उसका एक हाथ नीता के नितम्ब सहलाने के बाद दबाने लगा और उसका दूसरा हाथ नीता के उस दुसरे स्तन को दबने लगा जिसे मैंने चूसने के बाद छोड़ा था और मैं अब दूसरा स्तन दबाने के बाद चूस रहा था ।
अब नीता को भी अहसास हो गया को वो अब दो के बीच फसी हुई थी दोनों मिल कर उसकी इस हालत का भरपूर फायदा उठा रहे थे। मेरा हाथ नीता के नंगे हो चुके पेट और कमर पर चलने लगा और फिर मेरा वो हाथ नाभि के नीचे रेंगता हुआ नीता की इलास्टिक दार पेण्ट और फिर पैंटी के लोचदार इलास्टिक के अंदर चला गया । जिस समय मैं उसकी पैंटी के अंदर हाथ घुसा रहा था ठीक उसी समय मैंने रीता को निर्देश दिया और उसने नीता की पैंट और पेंटी नीचे कर दी और मेरा हाथ नीता की पैंटी के अंदर रेंगता रहा । मेरी उँगलियों ने नीता की बड़ी बड़ी झांटो के बालों को अलग किया और लंड से बाहरी लेबिया को छूने लगा और अंत में, लंड उसकी योनि के पास चली गईं। मेरा लंड नीता की चूत के भीतरी होंठ के ऊपर भगशेफ को रगड़ने लगी।
मेरी जीभ लगातार मेरे दोनों निपल्स को वैकल्पिक रूप से बारी-बारी चूस रही थी और इससे नीता के शरीर में कामुकता जाग रही थी क्योंकि इसके साथ साथ मेरा लंड उसकी चूत को और उसकी भगशेफ को रगड़ रहा था और मेरा दूसरा हाथ उसकी कमर को पकडे हुआ था नीता के पीछे रीता नीता के नितम्बो को सहला और दबा रही थी । फिर मैं अपना दूसरा हाथ रीता के नंगे नितम्बो पर ले गया और रीता ने भी दो उंगलियों को मिला कर नीता के नितम्बो पर रगड़ा।
इस दो तरफा हमले से नीता की चूत के अंदर का बाँध फट गया और वो कांपने लगी, उसका बदन अकड़ा और-उसका तरल बाहर निकलने लगा । मैंने नीता के नितम्बो को सहला कर लंड को उसकी जांधो के ऊपर रगडा और इस बीच रीता ने नीता के रस को अपनी हथेली में जमा कर लिया और अपना हाथ निकाल लिया । जैसे ही उसने निकला मैंने नीता की स्तनों को छेड़ना शुरू कर दिया तो नीता ने उत्तेजना में भर कर अपने बाएँ हाथ से रीता का हाथ ज़ोर से पकड़ कर अंदर को दबा दिया ताकि रीता की उंगलियाँ उसकी चूत के अंदर और गहराई तक जा सकें और अपने दूसरे हाथ में उसने मेरे चेहरे को अपने निप्पल की ओर इतनी ज़ोर से दबाया कि मैं उसके निप्पल को कुतरने लगा ।
पीछे से रीता नीता की चूत में ऊगली करती रही और मैं स्तन चूस रहा था और एक हाथ से नीता के और दुसरे हाथ से रीता के नितम्ब मसलने लगा।
रीता ने अपने उंगलिया जो नीता के रस से भरी थी वो पहले खुद चाटी फिर थोड़ी सी मुझे चटाई और फिर बाकी नीता के मुँह से लगा दी जिसे वो पूरा चाट गयी नीता पलटी और रीता के साथ चिपक गयी और फिर रीता ने एक आगे धक्का दिया और मेरा लंड उसकी टांगो के बीच दरार में घुसा और उसकी योनि से टकराने लगा।
मैंने नीता की कमर को दाए हाथ में कस कर पकड़ लिया और उसके स्तनों को अपने बाए हाथ में दबाने लगा और साथ ही साथ मैं पैंटी के ऊपर से अंदर गुसा कर अपने लिंग को अंदर और बाहर धकेल रहा था। अब नीता ने इसे छुआ तो उसे पता चला यह एक सख्त और लंबी मांसल लंड बहुत गर्म और लोहे की रोड की तरह सख्त था । नीता ने लंड को हाथ ने इसे पकड़ लिया और अधिक तलाशने की कोशिश की और लिंग के नीचे दो लटकी हुई गेंदों को महसूस किया और उन्हें सहलाया और उसने मेरे लिंग पर अपना पूरा हाथ घुमाकर त्वचा को ऊपर और नीचे खींचना शुरू कर दिया।
आह की कराह के साथ मैंने तुरंत उसे अपने चेहरे के पास खींच लिया, तथा जल्दी-जल्दी नीता के पूरे चेहरे पर चुंबन करने के बाद, उसके नरम होंठो को चूमा और फिर मुंह के अंदर अपनी जीभ डाल नीता की जीभ की जांच की। तो नीता ने मेरी गेंदों को कस कर दबा दिया तो मैंने नीता के होंटो को अपने दांतो में दबा लिया ।
नीता, ने मेरी जीभ चूसना शुरू कर दिया क्योंकि उस समय उसकी पास उसकी जीभ चूसने के अलावा कोई विकल्प नहीं था क्योंकि उसके शरीर से एक और नई सनसनी उत्पन्न हो गयी थी। नीता ने अभी भी मेरे लिंग को पकड़ा हुआ था और अग्रभाग को ढकने वाली त्वचा को बाहर और नीचे की ओर खींचा रही थी। इसी बीच मैने रीता को भी मेरे अंडकोषों को सहलाने और मेरे लंड से खेलने का निर्देश दिया ।
रीता ने लिंग पर अपना पूरा हाथ घुमाकर त्वचा को ऊपर और नीचे खींचना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद, मेरा लिंग मेरी हथेली में धड़कने लगा और भारी मात्रा में गर्म तरल बाहर निकल गया और रीता और नीता दोनों की हथेली में भर गया मैंने दोनों को बारी बारी चूमा और वीर्य निकलने के बाद कुछ देर तो मैं नीता और रीता दोनों के साथ चिपका रहा और फिर थोड़ा पीछे हुआ और दरवाजे से बाहर जाकर झाड़ियों में छुप गया ।
तभी रीता और नीता ने मेरा वीर्य चाटा और पर हथेलिया चाट कर साफ़ कर ली और दोनों बोली यह थोड़ा अजीब है मगर इतना बुरा स्वाद भी नहीं था। "
अब मैंने उसने आँखे खोलने का निर्देश दिया तो दोनों बोली ये बड़ा अजीब था । मुझे लगा यहाँ कोई पुरुष था । रीता बोली तुम्हारे साथ बहुत मजा आया पर ये तो उससे बहुत अलग और बहुत ज्यादा मजेदार था । नीता बोली काश वो मर्द यहाँ सच में होते तो कितना मजा आता ।
जारी रहेगी