Update 35
CHAPTER- 3
रुसी युवती ऐना
PART-11
दादा गुरु महर्षि
रुसी युवती ऐना
PART-11
दादा गुरु महर्षि
दादा गुरु महर्षि अमर मुनि जी का सीलबंद पत्र मैंने खोला जिसपे हमारे परिवार का चिरपरिचित निशाँ की सील लगी हुईं थी और उंसमें मेरे लिए निम्न सन्देश था :-
प्रिय कुमार दीपक,
आयुष्मान भाव
अब तक तुम्हे मेरी शिष्या ऐना ने अपना तुम्हारे पास आने का प्रयोजन बता दिया होगा तुम्हे नियोग के बारे में बताने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि तुम पहले ही अपने वाहन चालक की पत्नी को गर्भ दान दे चुके हो अब तुम्हारे अपने परिवार को तुम्हारे वीर्य की जरूरत है और तुम्हे आगे पुत्र और संतान होती रहे इसके लिए कुछ कर्म तुम्हे निष्पादित करने होंगे अन्यथा इस परिवार और तुम्हारे परिवार की परम्परा के अनुसार अब तुम्हारे परिवार में अब और कोई पुत्र नहीं होगा.
मेरी शिष्या और कुमारी जूही तुम्हे मुझसे शीघ्र अतिशीघ्र मिलवाने की सभी व्यवस्था कर देगी ।
मेरा आशीर्वाद सदा तुम्हारे साथ रहेगा।"
महर्षि अमर मुनि.
उसमे हमारे परिवार का एक चिरपरिचित निशाँ जिसे मैं अपनी हर अंगूठी में बनवाता था वो लगा हुआ था और गुरुदेव के हस्ताक्षर थे.
मैंने कहा अब हम कब चल सकते हैं तो ऐना बोली हमने एक चार्टर्ड प्लेन बुक कर रखा है और गुरु जी इस समय हिमालय में हैं और हमे कल प्रातः 9 बजे उनके दर्शन करने की आज्ञा मिली हुई है l
इस समय लगभग १० बज रहे थे मैंने अपने ड्राइवर सोनू को फ़ोन कर बोला मैं किसी जरूरी काम से सूरत से बाहर जा रहा हूँ और परसो सुबह (सोमवार) को वापिस आ जाऊँगा और फिर हम तीनो त्यार हुए और उस स्पेशल चार्टर्ड फ्लाइट से हिमालय चले गये और एयरपोर्ट से उतरने के बाद हम लगभग दो घंटे कार में चले और फिर उसके बाद लगभग दो घंटे पैदल पहाड़ की चढ़ाई करने के बाद गुरूजी के आश्रम में सुबह ४ बजे पहुंचे तो वहां गुरु जी के शिष्यों ने हमे जड़ी बूटियों का एक गर्म पेय या काढ़ा दिया जिससे सारी थकान गायब हो गयी और फिर हमे कुछ देर आराम करने को कहा गया .. सुबह ७ बजे स्नान, पूजा और नाश्ता करने के बाद हम गुरूजी के दर्शनों के गए l
जब हम गुरु जी के पास पहुँच कर बाहर कमरे में उनके पास जाने का इंतजार कर रहे थे तो अंदर से मुझे चिर परिचित स्वर सुनाई दे रहे थे .. मैं हैरान हुआ .. यहाँ मेरा परिचित कौन हो सकता हैl
जब गुरूजी ने हमे अंदर बुलाया तो उनके चेहरे की आभा देख मेरी आँखे बंद हो गयी और मैं उनके चरणों में झुक गया तो मुझे मेरे पिताजी की आवाज सुनाई दी .. उठो बेटा दीपक और अपनी ताई और बड़े भाई राजा हरमोहिंदर जी के चरण स्पर्श करो l.
तभी गुरूजी की भी सार गर्भित वाणी सुनाई दी l
उठो चिरंजीव कुमार दीपक और आँखे खोलो l
मैंने आँखे खोली और गुरूजी के दर्शन किये और उन्हें एक बार फिर प्रणाम किया और फिर अपने पिताजी को प्रणाम किया फिर गुरु जी बोले कुमार ये हैं तुम्हारी बड़ी माँ ताई राजमाता राजेश्वरी देवी और बड़े भाई राजा हरमोहिंदर l
मैंने दोनों के चरण छु कर उन्हें प्रणाम किया तो सबने मुझे आयष्मान होने का आशीर्वाद दिया l
मेरे बाद ऐना आयी और गुरु जी को उसने प्रणाम किया फिर जूही आयी और उसने प्रणाम किया तो गुरु जी ने जूही को पुत्रवती होने का आशीर्वाद दियl l
फिर पिताजी बोले कुमार ये हमारे कुल गुरु हैं महर्षि अमर और इन्होने मुझे यहाँ बुलवा लिया है और सारी बात बता दी है l
तो महर्षि बोले बेटा तुह्मारे पुरखो से अनजाने में कुछ भूल हो गयी थी और एक पाप कर्म हो गया था जिसके कारण एक महात्मा ने तुम्हारे कुल को श्राप दिया था की अब से तुम्हारे कुल के पुरुष केवल एक ही पुत्र पैदा कर सकेंगे .. जिसके कारण तुम्हारे परिवार की वंश बेल में अब केवल तुम दो ही पुरुष हो l
तुम्हारे पुरखो को अपनी भूल और इस श्राप का पता चला तो उन्होंने महात्मा से इस पाप के लिए क्षमा मांगी और श्राप वापिस लेने को कहा l
तो महात्मा जी ने कहा था श्राप तो वापिस नहीं हो सकता लेकिन इसका सिमित कर सकते हैं तुम्हारे परिवार में सदा दो पुत्र तो रहेंगे l
जब भी इस परिवार का कोई बेटा संतान पैदा करने में अक्षम होगा तो दूसरा पुत्र अगर कुछ ख़ास विधि से वेद मंत्रो की सहायता से कुछ विशेष स्थानों पर जा कर पूजा करेगा ये श्राप ख़त्म हो जाएगा l
तो मैंने पुछा गुरुदेव मुझे क्या करना होगा l
तो गुरुदेव बोले अगर आप सभी सहमत हो तो मैं आपको इसका उपाय बताता हूँ l
सब बोले जी गुरूजी आप आज्ञा दे l
इसके लिए सबसे पहले राजा हरमोहिंदर को एक कुंवारी कन्या से विवाह करना होगा जिससे कुमार भी परिचित है और वो कन्या भी कुमार को पसंद करती है फिर उस कुंवारी कन्या के साथ कुमार को नियोग करना होगा l
सबसे पहले राजा को विवाह मेरे आश्रम में ही करना होगा और फिर पूजा पाठ के बाद कुमार नयी रानी के साथ गर्भदान करेगा l
फिर कुमार को राजा हरमोहिंदर की सभी रानियों के साथ गर्भदान करना होगा l
ये विवाह और गर्भदान अलग अलग स्थान पर किये जाएंगे l
कहानी जारी रहेगी