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मैने बैग से उसकी रेड ब्रा निकाल के बहु की तरफ बढ़ाया.. सपना मेरे सामने ब्रा पहन रही थी. मैं सोचने लगा के बहु के सामने से बूब्स अभी कैसे दिख रहे होंगे.. मैं दिवार की तरफ पिलो लगा कर बैठा था, बहु को ऐसे अधनंगा देख मेरा लंड रगड़ने का मन करने लगा. मैं बेड पे रखी ब्लैंकेट को खींच उसके अंदर घुस गया और अपना लोवर नीचे कर लंड को मसलने लगा.. बहु ने बिना मेरी तरफ मुड़े अपनी पैंटी भी मांगी, मैंने एक हाथ से पैंटी उठा उसकी तरफ बढ़ायी। मेरा एक हाथ अभी भी लंड को मसल रहा था. बहु ने एक टॉवल लपेट अपनी ट्रैक पैंट उतार बेड पे फेंक दी और पैर उठा के पैंटी पहनने लगी. मैं तेजी से मास्टरबेट कर रहा था. बहु ने पैंटी और ब्रा पहनने के बाद टॉवल को नीचे गिरा दिया और मेरी तरफ मुड़ गई.. मेरी तो जैसे सांस ही अटक गई.. मेरी जवान बहु अपने भरे-भरे बदन को सिर्फ एक रेड कलर की ब्रा और पैंटी में ढके मेरे सामने खड़ी थी.. मैंने अपना हाथ स्लो कर दिया ताकि बहु को पता न चले कि मैं ब्लैंकेट के अंदर मास्टरबेट कर रहा हूँ..
सपना -- कैसी लग रही हूँ बाबूजी..
मैं -- (मेरी साँसे तेज़ थी..) बहुत अच्छी लग रही हो बहु.. लाल कलर की ब्रा पैंटी में बहुत गोरी लग रही हो, और तुम्हारी जांघें कितनी मोटी चिकनी और मांसल हैं बहु.. (ऐसा कहते हुवे मैंने आँख बंद कर अपने लंड का स्किन पूरा खोल 3-4 बार जोर से स्ट्रोक दिया.)।
सपना -- (हँसते हुवे.. -- सच्ची बाबूजी.. मुझे भी इसकी कलर बहुत पसंद है.. आपको ठण्ड लग रही है क्या? आपने ब्लैंकेट क्यों ले लिया?
मैं -- हाँ बहु थोड़ी ठण्ड लग रही थी.. (मैं बहु की सेक्सी स्ट्रक्चर देख तेज़ी से मास्टरबेट करने लगा..)।
सपना -- क्या हुवा बाबू जी? आपके हाथों को -- इतना क्यों शेक कर रहे हैं?
मैं -- कुछ नहीं बहु तुम्हारे कमरे में मच्छर ज्यादा है पैर पे कोई मच्छर ने काट लिया शायद.. (मैं खुजलाने के बहाने और तेज़ी से लंड हिलाने लगा और बस थोड़ी देर में ब्लैंकेट के अंदर मेरे लंड से गाढ़ा पानी निकल आया.. )।
सपना -- हाँ बाबूजी मच्छर तो ज्यादा है यहाँ.. मैं गुड नाईट लगा देती हूँ..
(बहु मेरे सामने ब्रा पैंटी में अपनी गांड मटकाते हुवे स्विच के तरफ गई और गुड नाईट लगाने लगी..)। मैंने मौका देख तुरंत अपना लंड अंडरवियर के अंदर वापस डाल लिया. सपना बेड के ऊपर आ गई और घुटने पे मेरे सामने बैठ अपनी ब्रा को छूते हुवे बोली..
सपना -- बाबूजी.. इस ब्रा की क्वालिटी कितनी अच्छी है ना?
मैं -- (मैं बहु के पास आया और अपने हाथ बहु के कंधे के पास ब्रा को छूते हुवे..बोला) हाँ बहु ये तो बहुत अच्छा है. मैं धीरे से अपना हाथ नीचे ले आया और साइड से बहु की ब्रा के अंदर हाथ डालते हुवे ब्रा के कपडे को छूने लगा... मेरी उंगलियां बहु के नंगे बूब्स को महसूस कर रही थी..
सपना -- बाबूजी ब्रा तो मुझे बहुत पसंद आयी है लेकिन पैंटी उतनी सॉफ्ट नहीं है और स्टिचिंग भी अच्छी नहीं है। देखिये ना साइड से धागे (थ्रेड) निकल रहे हैं. (बहु ने एक छोटी से थ्रेड पकड़ के कहा)।
मैं -- बहु इन सब थ्रेड को काट दो नहीं तो स्टिचिंग खुल जाएगी.. कुछ काटने के लिए है बहु?
सपना -- नहीं बाबू जी.. यहाँ तो कुछ नहीं है..
मैं -- बहु तुम थोड़ा पास आओ तो मैं अपने दांतो से काट देता हूँ।
सपना -- ठीक है बाबूजी.. (बहु थोड़ा ऊपर होते हुवे अपनी पैंटी मेरे चेहरे के पास लायी).
मैंने अपने हाथ बहु की ब्रा से निकालकर.. बहु की नंगी कमर और गांड पे रख दिया और झुक कर अपनी तरफ पुल किया. बहु अपना लेफ्ट हाथ बेड पे रख अपनी कमर को मेरे मुँह के पास ले आयी. मैं धीरे से अपने होठ बहु के इनर जांघें के पास ले गया और थ्रेड काटने की कोशिश करने लगा.
मैं -- बहु और पास आओ..(मैं अपना राइट हैंड बहु की गांड से हटा के बहु की पैंटी के साइड में ऊँगली डालते हुवे अपनी तरफ पुल किया.. मुझे बहु की चूत की साइड के हल्के हल्के बाल महसूस हुवे...)।
सपना अब अपनी चूत को मेरे नाक के पास ले आयी.. पैंटी की साइड से चूत नज़र आ रही थी। मैं अपने नाक को बहु की चूत के काफी करीब ले गया.. बहु की चूत की स्मेल मुझे पागल कर रही थी.. मैं बहु की पैंटी साइड से हटा कर थ्रेड काटने लगा, मेरी उंगलिया बहु की गरम चूत से रगड़ खा रही थी. एक-दो बार मैंने थ्रेड काटने के बहाने अपने होठ बहु की चूत पे रगड़ दिए.. धीरे-धीरे बहु बेड पे लेट गई और मैं उसकी जांघें के बीच में उसकी चूत की स्मेल का मज़ा ले रहा था.. बहु की आँखें बंद थी..
सपना -- (अपनी टाँगे फैला दी.. उसने मेरे बाल पकड़ते हुवे अपनी चूत के पास खींचा..और बोली) आह.. बाबूजी.. संभाल के सारे थ्रेड काट दीजिये बाबूजी..
बहु की आवाज़ में कुछ नशा सा था.. मैंने पैंटी को साइड से खींच के बहु की चूत को नंगा कर दिया.. अब तक बहु की चूत गीली हो गई थी.. मैंने अपनी एक ऊँगली को बहु की चूत के बीच रखा.. ये क्या बहु की चूत एकदम गरम और मक्खन की तरह मुलायम थी.. बहु के बुर(चूत) से पानी निकल रहा था.. जिससे मेरी ऊँगली गीली हो गई. उसकी चूत की महक ने मुझे पागल बना दिया और मैंने ऊँगली से चूत को खोला और अपनी जीभ से बहु के बुर(चूत) को 2-3 बार चाट लिया.
सपना -- (अपनी चूत को पीछे करते हुवे..) बाबूजी.... ये आप..क्या आआआआहहहहहहहह!! थ्रेड काट दी सारी?
मैं -- (अपना चेहरा ऊपर करते हुवे..) हाँ बहु.. वो नीचे थोड़ा गीला होने की वजह से थ्रेड चिपक गया था.. इसलिए मैंने जीभ से निकाल के काट दिया.
मेरे होठ और मुँह पे बहु की चूत का पानी लगा था.. मैं उसे पोंछते हुवे मुस्कुराते हुवे बोला.. तभी बेड के किनारे रखे बहु का मोबाइल बजा.. बहु ने हाथ बढ़ा के सेल फ़ोन उठाया.. और अपनी पैंटी ठीक कर बिस्तर पे बैठ गई.
सपना -- (सेल फ़ोन देखते हुवे..) बाबूजी राजेश का फ़ोन है..
अपने मन में मैं अपने बेटे को गाली दे रहा था.. कैसे गलत टाइम पे फ़ोन किया, मेरी बहु के पति ने.. शायद मै कुछ देर और बहु की बुर(चूत) चाट पाता... बहु राजेश से फ़ोन पे बात करते हुवे..
सपना -- हेलो राजेश कैसे हो आप?
सपना -- ठीक हूँ.. नहीं अभी शॉपिंग कर के आयी कुछ.. अपने कमरे में हूँ।
सपना -- बाबूजी ठीक हैं.. यहीं हैं. सपना -- कुछ नहीं.. यूँ ही। मैं और बाबूजी बातें कर रहे थे।
मै बहु के बेड पे बैठा बहु और राजेश की बातें सुन रहा था. बहु ने राजेश से बस ये बोला के मैं और बहु बातें कर रहे थे.. लेकिन सच्चाई तो कुछ और ही थी. बहु को झूठ बोलता देख मैंने राहत की सांस ली। इसका मतलब मेरे और बहु के बीच अभी जो भी हो रहा था राजेश को इस बात का कभी पता नहीं चलेगा.
सपना -- ओके.. राजेश मै शाम को कॉल करती हूँ अभी कुकिंग करनी है। बहु ने फ़ोन काट दिया और बेड पे रखे शॉर्ट और टीशर्ट पहनते हुवे मुझसे बोली..
सपना -- बाबूजी मैं कुछ डिनर बना देती हूँ.. आज रात आप अपने कमरे में सोयेंगे या मेरे कमरे में..? एक्चुअली रात को मैं राजेश से बात करुँगी..
मैं -- ठीक है बहु मैं अपने कमरे में सोऊंगा.. बहु कमरे से बाहर चली गई मैंने बेड पे गिरे अपने माल को बहु की साड़ी से पूछ दिया लेकिन निशान नहीं मिटा. मैं वैसे छोड़ के कमरे के बाहर आ गया. रात में डिनर के बाद मैं अपने कमरे में लेटा था, आज जो भी हुवा उसके लिए मैं अपने लक पे बहुत खुश था. आज मुझे अपनी ही जवान बहु की बुर(चूत) चाटने का मौका मिला था. मैं बहु के बारे में सोच, मास्टरबेट कर सो गया.
शाम को बहु रेड कलर की साड़ी पहने किचन में बर्तन धो रही थी. मैं किचन में उसके पीछे एक टीशर्ट और लोअर पहने चाय की प्याली लिए खड़ा बहु से बातें कर रहा था।
सपना -- कमरा थोड़ा साफ़ करना पड़ेगा.. चीज़ें बिखरी पड़ी हैं बहुत दिन से हम लोगों ने साफ़ नहीं किया. मैंने बर्तन धो लिए हैं आप अगर मेरी थोड़ी सी मदद कर दें तो मैं जल्दी से कमरा साफ़ कर दूँगी.
मैं -- (बहु की खुली चिकनी कमर को देखते हुवे..) हाँ बहु क्यों नहीं..
किचन से निकल कर मैं और बहु मेरे कमरे में जाते हैं और बिखरे पड़े सामान को ठीक करने लगते हैं..
सपना -- बाबूजी.. यहाँ रखे पुराने सामान को मैं ऊपर वुडेन कवर में रख देती हूँ बहुत सारा स्पेस हो जायेगा कमरे में।
मैं -- हाँ बहु रुको मैं कोई चेयर लगाता हूँ जिसपे तुम चढ़ के सामान रख सको.
सपना -- अच्छा बाबूजी..
मैं डाइनिंग हॉल से एक प्लास्टिक की चेयर लाया और कमरे में बेड के पास लगा दी.
मैं -- बहु तुम इस चेयर पे चढ़ जाओ और बॉक्स ऊपर रख दो.. और संभल के चढ़ना बेटी..
सपना -- जी बाबूजी..
बहु ने एक बार फिर अपनी साड़ी के पल्लू को अपनी कमर में बाँधा और अपनी पूरी तरह से खुली नाभि को बेशर्मी से दिखाती हुई चेयर पे चढ़ गई.
सपना -- बाबूजी.. मुझे होल्ड करिये मैं गिर जाउंगी, मैं कोशिश करती हूँ बॉक्स को ऊपर डालने का..
मैं बहु के बिलकुल सामने था उसकी नाभि मेरे फेस के पास थी. मैंने अपने दोनों हाथों से बहु की बड़ी सी गांड को घेर लिया और अपनी हथेली से बहु की नरम मुलायम गांड को साड़ी के ऊपर से दबा दिया.
बहु -- आह बाबूजी.. थोड़ा ऊपर को कीजिये मेरा हाथ लगभग पहुंच गया है.
मैंने बहु की बड़ी गांड को कस के दबाते हुवे ऊपर उठा दिया और अपना फेस बहु के डीप सॉफ्ट नाभि में चिपका लिया.. मेरे गाल और होठ बहु की नाभि से टच हो रहे थे.. मैंने बहाने से अपने होठ बहु की नाभि पे रगड़ दिए. अभी 2 मिनट ही हुवे थे कि तभी पावर कट हो गया.. शाम हो चुकी थे और इस वजह से कमरे में अँधेरा छा गया.
सपना -- हो गया बाबूजी अब मुझे धीरे से नीचे उतारिये प्लीज.. मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा..
मैं -- ठीक है बहु.. (कहते हुवे मैंने हाथ के घेरे को ढीला किया और बहु को नीचे आने दिया.. )।
अँधेरे में मैं अपने हाथ धीरे-धीरे बहु की गांड से होते हुवे.. उसकी नंगी कमर को महसूस कर पा रहा था. सामने के तरफ मेरा फेस उसकी नाभि से होता हुवा अब उसके बूब्स के काफी करीब आ चुका था. नीचे आते वक़्त बहु के घुटने से मेरा लोअर और अंडरवियर नीचे की तरफ खिंच गया और मेरा खड़ा लंड पूरी तरह से बाहर निकल आया. इससे पहले के मैं संभल पाता बहु चेयर से उतरते ही अपना बैलेंस खो बैठी और जमीन पे झुकते ही उसके नरम होठ मेरे लंड से कस के रगड़ खा गए. मैंने अँधेरे में उसके गीले होठ को साफ़ अपने लंड पे महसूस किया... मैंने बिना कोई मौका गवाए अँधेरे का फ़ायदा उठाते हुवे जानबूझ कर बैलेंस खोने का नाटक किया और एक हाथ से लंड का स्किन नीचे खोल बहु के मुँह में डाल दिया. बहु की गरम सांस और मुँह के अंदर के लार का स्पर्श पा कर मेरे लंड से थोड़ा सा पानी निकल आया...
सपना -- बाबुजीई.... (कहते हुवे अपने हाथ मेरी टांगो पे रख दिये और लंड को अपने मुँह में और अंदर जाने से रोक लिया)।
मैं -- ओह बहु...सॉरी (कहते हुवे अपने लंड को बहु के मुँह से निकाल लिया..)।
लेकिन इतना सब होने के बाद मेरे अंदर इतना कण्ट्रोल नहीं था के मैं रुक पता.. लंड बहु के मुँह से बाहर आते हे फच-फच की आवाज के साथ ढेर सारा पानी मेरे लंड से निकल गया. मेरे लंड का पानी बहु के चेहरे गर्दन और शायद बूब्स पे गिरा और बाकी फर्श पे.. बहु का चेहरा मेरे लंड के पानी से भीग गया था.. मैंने अपने लंड को अंदर अपने लोअर में छिपा लिया. थोड़ी देर के लिए कमरे में सन्नाटा था। हम दोनो में से किसी ने कुछ नहीं कहा. बहु ने अपने आँचल से अपना चेहरा साफ़ किया और उठ के खड़ी हो गई. मैं भी बहु से बिना नज़रें मिलाये बिस्तर की तरफ बढ़ गया. बहु ने अँधेरे में फर्श पे गिरे मेरे माल को देखने की कोशिश की और फिर बगल के कमरे से एक कपडा लाकर फर्श पोंछने लगी. मैं वहीँ खड़ा बहु को देखता रहा बहु ने चुप्पी तोड़ने के लिए मुझसे रिक्वेस्ट की..
सपना -- बाबूजी.. ये चेयर हॉल में रख दीजिये ना प्लीज.
मैं -- अच्छा बहु..
मैंने चेयर वापस हॉल में रख दी.. (मैंने थोड़ी राहत की सांस ली, जो कुछ भी हुवा उसके रिएक्शन से साफ़ नज़र आ रहा था कि बहु को कोई फर्क नहीं पड़ा और अब वो नार्मल हो चुकी थी.. रात को मैं और बहु डिनर करने के बाद बिस्तर पे बैठे बातें कर रहे थे...
" लगता है आज सारी रात पावर नहीं आएगी, कैंडल कि रौशनी में डिनर बनाने में काफी तकलीफ हुई होगी ना?"
सपना -- नहीं मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं हुई इस मोहल्ले में शाम को लाइट जाना तो आम बात है.
मैं -- हाँ हमारे घर का पावर बैकअप भी ख़राब पड़ा है कल मैं उसे बाजार में ठीक कराने कि कोशिश करता हूँ देखो अब तो सारे कैंडल भी खत्म हो जायेंगे. बहु और कैंडल हैं?
सपना -- नहीं बाबूजी.. और कैंडल नहीं हैं.
शायद बहु बहुत ज़्यादा कैंडल यूस करती है.. जानबूझ कर डबल मीनिंग में बातें की)।
सपना -- हाँ मैं तो बहुत सारे कैंडल यूस करती हूँ... कैंडल भी पतले हैं तो ज्यादा देर तक नहीं चलते.. मोटे होते तो अच्छा होता
मै -- बहु तुम्हे मोटा कैंडल चाहिए तो मैं ला दूंगा. मेरा कैंडल बहुत मोटा है बहु तुम्हे चाहिए तो मैं दे दूंगावैसे बहु तुम कैंडल के अलावा और क्या-क्या यूस करती हो?
सपना -- जी मैं.. ज्यादा तो कैंडल ही यूस करती हूँ कभी कभी किचन में अपना मोबाइल भी यूस कर लेती हूँ.. उसमे टोर्च है ना..
बहु... तुम बाबूजी का मोबाइल क्यों नहीं यूस करती..? वो बड़ा भी है और उसकी रौशनी भी ज्यादा है.
वैसे बहु तुम्हे मोबाइल से ज्यादा मज़ा आता है या कैंडल से?? मेरा मतलब आसान क्या है?
इस बार काफी खुल के डबल मीनिंग सवाल किया और मुझे लगा शायद बहु को भी समझ आने लगा के क्या ये डबल मीनिंग बातें हो रही हैं.. लेकिन फिर भी बहु शायद जानबूझ कर बोली..
सपना -- जी.. मुझे तो कैंडल यूस करने में ज्यादा मज़ा आता है..
बहु के मुँह से ऐसी बात सुन कर मेरा लंड खड़ा हो चुका था... मैंने भी अपनी तरफ से डबल मीनिंग जोड़ने की कोशिश की..
मैं -- बहु क्या तुम रात में भी कैंडल यूस करती हो...?
सपना -- हाँ बाबूजी मै रात में मोटा कैंडल यूस करती हूँ ताकि देर तक चले.. वरना मुझे अँधेरे में डर लगता है.
मैं -- कोई बात नहीं बहु आज तो मैं तुम्हारे साथ ही सोऊंगा तो आज तुम्हे किसी मोटे कैंडल की जरुरत नहीं पड़ेगी..
कुछ देर बात करने के बाद मैं और बहु बैडरूम में आ गए.. बैडरूम में आने के साथ ही बहु ने मेरी तरफ प्यासी नज़रों से देखते हुवे एक मादक अंगड़ाई ली. मैं अपनी नज़र बहु के चेहरे से हटा कर उसके बड़े बूब्स को देखने लगा। उसकी अंगड़ाई देख कर ऐसा लगता था मानो बहु की दोनों चूचियां ब्लाउज का बटन तोड़ के बाहर आ जाएँगी. बहु ने अपना पल्लू निचे गिरा दिया और बोली.
सपना -- बाबूजी आज कितनी गर्मी है कमरे में..
मैं बहु की नाभि देखने लगा, पल्लू उतरने से उसका पेट पूरा नंगा हो चुका था और उसका गोरा पेट और कमर अंधेरे में भी चमक रहे थे. मैंने भी अपनी टीशर्ट उतारते हुवे कहा...
मैं -- हाँ बहु बहुत गर्मी है.. बहु का नंगा पेट देखकर लोअर में मेरा लंड खड़ा था..)।
सपना -- पता नहीं कब लाइट आएगी.. (बहु ने अपने ब्लाउज के 3 बटन खोल दिए )।
मैं -- (मैं बहु की क्लीवेज को देखता रहा..उसकी चूचियां ब्रा के अंदर से बाहर निकल आयीं थी..) बहु.. तुम साड़ी में बहुत अच्छी लगती हो..
सपना -- सच बाबूजी.. क्या अच्छा लगता है?
मैं -- सबकुछ बहु.. तुम्हारी पसंद के कलर तुम्हारी साड़ी पहनने का स्टाइल.. तुम्हारी साड़ी में बॉडी सब कुछ अच्छा लगता है।
सपना -- साड़ी पहनने के स्टाइल? कौन सी स्टाइल?
मैं -- वही बहु जो तुम साड़ी को नाभि के नीचे बांधती हो और टाइट भी।
सपना -- हाँ बाबू जी मुझे साड़ी नाभि के नीचे पहनना अच्छा लगता है..
मैं -- बहु तुम्हारी नाभि बहुत ही अच्छी दिखती है.. ऐसी नाभि तो किसी एक्ट्रेस की भी नहीं है बहु।
सपना -- (अपनी साड़ी को नाभि के और नीचे करते हुवे.. -- बाबूजी.. ऐसा क्या है मेरी नाभि में ?
मैं -- (बहु के पास जा कर अपने दोनों हाथों से उसकी नंगी कमर को पकड़ते हुवे..) बहु तुम्हारी नाभि कितनी डीप और बड़ी है.. मुझे हमेशा से ऐसी नाभि पसंद थी.. बहु जब तुम कॉलेज में होगी तब तुम्हारी नाभि के तो बहुत सारे दीवाने होंगे ना?
सपना -- (हँसते हुवे.. -- होंगे बाबूजी मुझे नहीं मालूम.. अभी तो मुझे इतना पता है के मेरी नाभि को मेरे पति और ससुर दोनों बहुत पसंद करते हैं।
बहु अब अपनी साड़ी और ब्लाउज उतार चुकी थी। वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में खड़ी थे.
सपना -- बाबूजी मैं कपडे बदल लेती हूँ.. आप भी चेंज कर लीजिये।
बहु ने अपने पेटीकोट की डोर खींचते हुवे कहा..)।
सपना -- ओह बाबूजी.. ये पेटीकोट खुल नहीं रही.. ओह्हो..
मैं -- (बेड पे बैठे हुवे...) इधर आओ बहु मैं तुम्हारी पेटीकोट खोल देता हूँ।
सपना -- जी बाबूजी (बहू मेरे करीब आ जाती है)। मैंने कुछ देर कोशिश की..
मैं -- अरे बहु लगता है गोल गांठ पड़ गई है ये नहीं खुलेगा.. तुम ऐसे ही सो जाओ.. सुबह खोल दूंगा।
सपना -- नहीं बाबूजी मैं गर्मी से मर जाउंगी.. आप प्लीज खोल दीजिये ना।
मै -- ठीक है बहु.. मैं अपने दांतो से कोशिस करता हूँ।
फिर मै बहू को अपने और पास खींच कर, बहु के पेटीकोट को अपने होठ और दांत से खोलने लगा.. ऐसा करते वक़्त मैंने कई बार बहु की नाभि भी चाट ली.
मैं -- खुल गई बहु..
मैंने बहु के पेटीकोट को नीचे गिरा दिया। फिर मैं बहु की नंगी जांघों को छूने लगा..
मैं -- बहु तुम सच ही कहती थी तुम्हारी जांघो पे बिलकुल बाल नहीं हैं. (मैंने बहु की जांघों पे हाथ फिराते हुवे कहा)।
सपना -- हाँ बाबुजीई... (बहु की आवाज़ थोड़ी बदली सी थी.. जैसे उसे कुछ हो रहा हो)।
मैं बहु की इनर जांघों को सहलाते हुवे उसकी चूत के काफी करीब ऊँगली लगा दी.. मुझे वहां पे बहुत गीला सा लगा.. बहु शायद वेट थी।
मै -- अरे बहु तुम्हे तो पसीना आ रहा है..
सपना -- आआआहहह नहीं बाबूजी ये पसीना नहीं है..
मैं -- फिर क्या है बहु?
सपना -- बाबूजी वो बस ऐसे ही कुछ नहीं छोड़िये ना.. (बहु मेरा हाथ हटा कर बिस्तर पे एक पतली चादर के अंदर लेट गई)।
मुझे महसूस हुवा के शायद बहु वेट हो गई है और वो पसीना नहीं बहु की बुर का पानी था.. मैं बहु के बगल में उसी चादर में केवल लोअर पहने लेट गया.
मैं -- बहु क्या तुम ऐसे भीगी पैंटी पहन कर सोवगी? ऐसे तो तुम्हारे जांघों के बीच रेशेस आ जाएंगे।
सपना -- ओह... बाबूजी क्या भीगी पैंटी पहनने से रेशेस हो जाती है..?
मैं -- हाँ बहु.. और फिर स्किन डिजीज भी हो जाती हैं..
सपना -- क्या सच में बाबूजी.. एक बात कहूं पापा मुझे वहां 2 दिन से इचिंग हो रही है.. मुझे लगा के मैंने हेयर रिमूव किया इसलिए हो रही है.
मैं -- नहीं बहु रेशेस भी हो सकती है क्या तुम्हे 2 दिन से लगातार इचिंग हो रही है?
सपना -- हाँ बाबूजी।
मै -- बहु जब तुम्हे रेशेस हो तो रात को सोते वक़्त सब उतार दिया करो. लड़कियों का बदन बहुत नाज़ुक होता है इसलिए रेशेस होना बहुत कॉमन हो जाता है.
सपना -- मैं तो कपडे उतार के सोती हूँ.. देखिये अभी भी मैंने बस ब्रा और पैंटी ही पहनी है।
मैं -- बहु मैं इनको भी उतारने को कह रहा हूँ.. तुम्हे पूरी तरह से नंगी सोना चाहिए कुछ दिन. आज तो लाइट भी नहीं है गर्मी भी बहुत है और तुमने भीगी पैंटी पहनी है.. तुम इन्हे भी उतार दो बहु।
बहु ने मेरी बात सुन अपनी ब्रा उतार दी.. और अपनी पैंटी हाथ में लेकर मुझे दिखाते हुवे बोली..
सपना -- ये लीजिये बाबू जी मैंने अपनी पैंटी उतार दी..
बहु की पैंटी हाथ में देख मैं पूरी तरह से एकसाईटेड हो गया. मैंने अपनी लोअर और अंडरवियर खोल बिस्तर के नीचे गिरा दी और एक हाथ से लंड को पकड़ सहलाने लगा. मैंने बहु के हाथ से पैंटी ले ली और उसकी गीली पैंटी को सूंघने लगा।
सपना -- ये क्या कर रहे हैं बाबूजी?
मैं -- बहु तुम्हारी पैंटी से कुछ अजीब सी स्मेल आ रही है..
सपना -- ओह बाबूजी फेंकिए ना उसे... (बहु ने अपनी पैंटी मेरे हाथ से लेकर नीचे फेंक दी और शीट के अंदर अपना चेहरा ढक ली)।
सपना -- बाबू जी... ये शीट के अंदर कैसी स्मेल है? मुझे रेयलाइज हुवा के मैंने लंड सहलाते-सहलाते अपने लंड का स्किन नीचे खोल दिया था और मेरे लंड की स्मेल फ़ैल गई थी.
मैं -- बहु वो मुझे गर्मी लग रही थी तो मैंने अपनी लोअर और अंडरवियर उतार दी है..
सपना -- ओह्ह बाबूजी आपको भी ज्यादा गर्मी लग रही है? ठीक किया आपने न जाने कब तक लाइट आएगी.. लेकिन ये स्मेल क्यों है?
मैं -- वो बहु..... जैसे तुम्हारे पैंटी से स्मेल आ रही थी न. वैसे ही जब मैंने अपनी अंडरवियर उतार दी तो आ रही है.. ये देखो ठीक वैसी ही स्मेल मेरे हाथ से भी आ रही होगी, (मैंने अपना हाथ लंड से हटा कर बहु की तरफ बढ़ाया)।
सपना -- (बहु मेरे हाथ को स्मेल करते हुवे.. -- हाँ बाबूजी.. ये तो वैसे ही स्मेल है.. लेकिन ये आपके हाथ से क्यों? इसका मतलब आप अपने हाथ से क्या कर रहे थे..
मैं -- अरे बहु वो मैंने जब अंडरवियर उतारा तो साथ में वो...आआ... मेरा मतलब... वो.... स्किन खुल गया और फिर हाथ लगाने से स्मेल मेरे हाथ में भी आ गई.
सपना -- ओह बाबूजी.. आपको दर्द तो नहीं हुवा..??
मैं -- नहीं बहु..
मैं -- बहु एक बात पूछूं?
सपना -- हाँ बाबूजी पूछिये।
मै -- तुम्हारी पैंटी गीली क्यों थी.. -- और तुम्हारी पैंटी में स्मेल कैसी थी?
सपना -- (शर्माते हुवे..) ओह पापा.. वो ऐसा ही होता है.. वहां नीचे स्मेल तो होती है न जैसे आपकी है.. तो पैंटी में भी वही स्मेल थी..
मैं -- (बहु का जवाब सुनकर मैं तेज़ी से लंड हिलाने लगा और भारी सांस लेते हुवे फिर से पूछा..) क्या तुम नीचे अभी भी गीली हो..??
सपना -- (शर्माते हुवे -- जी बाबूजी.. मैं -- क्या तुम्हारे नीचे ज्यादा पानी आ रहा है या कम?
सपना -- जी बाबूजी ज्यादा आ रहा है..
मैं -- ओह्ह्ह बहु.. अपना एक हाथ नीचे ले जाओ और अंदर से पानी पोंछ लो।
सपना -- क्यों बाबूजी?
मैं -- बहुउउउउउउउउ जैसा मैं कह रहा हूँ करो..
सपना -- ठीक है बाबूजी.. (बहु अपना हाथ अपने बुर पे ले गई और 2 उँगलियों से पानी को साफ़ कर अपना हाथ बाहर ले आयी)
मैंने पहले बहु का हाथ पकड़ करीब से स्मेल किया और फिर उसकी बुर के पानी से चिपचिपी ऊँगली को मुँह में ले चाटने लगा..
सपना -- आआह बाबूजी ये क्या कर रहे हैं??
मैं -- बहु.. मैं सोच रहा था के जब इसकी स्मेल इतनी अच्छी है तो इसे चाटने में कितना मज़ा आएगा..
सपना -- बाबूजी.. ये आप क्या कह रहे हैं.. आपने मेरे... वहां के पानी को... ओहह!
मै -- हाँ बहु तुम्हारी बुर का पानी चाटने में बहुत मज़ा आ रहा है बहु..
(मैंने बेशर्मी से बहु के बुर की बात कह डाली... बहु मेरे मुँह से बुर वर्ड सुन कर शॉक हो गई.. और मेरा मुँह बंद करने के लिए उसने अपना हाथ मेरे मुँह पे रख दिया। लेकिन ये वही हाथ था जिससे बहु ने अपनी चूत में ऊँगली की थी. मैं पागलों की तरह बहु के हाथ चाटने लगा. बहु शर्मा गई..)
सपना -- बाबूजी.. हमे साथ नहीं सोना चाहिए.. ये आपको क्या हो रहा है.. प्लीज रुक जाइये.
मैं -- मैं रुक जाऊंगा बहु बस एक बार मुझे अपनी गरम बुर (चूत) छूने दो।
सपना -- नहीं बाबूजी..
मैं -- प्लीज बहु मैं जानता हूँ ये गलत है लेकिन मुझे बस एक बार अपनी गरम जवान बहु का बुर छूना है।
सपना -- नहीं बाबूजी.. मैं नहीं कर सकती अगर आपको मेरे बुर का पानी पीना है तो मैं अपनी ऊँगली डाल के आपके मुँह में देती हूँ बस. ये ठीक है?
बहु के मुँह से बुर वर्ड सुन मैं पागलों की तरह लंड हिलाने लगा.. और बोला.. मैं बहु को खुलता देख और गन्दी बातें करने लगा।
मै -- ठीक है बहु मैं नहीं छूऊँगा, लेकिन फिर तुम्हे मेरे लंड से पानी निकालना होगा..
सपना -- मैं कैसे कर सकती हूँ बाबूजी..?
मैं -- देखो बहु झूट मत बोलो मुझे पता है तुम्हे भी मेरे लंड का स्मेल पसंद है और शाम को तो रूम साफ़ करते वक़्त मेरे लंड का पानी तुम्हारे चेहरे पे गिर गया था.
सपना -- वो सब अचानक हुवा था बाबूजी.. प्लीज मैं आपका लंड नहीं छूवूँगी.. प्लीज आप मेरे ससुर हैं.
मैं -- ठीक है बहु फिर मैं तुम्हारे सामने मास्टरबेट करूँगा और शाम की तरह तुम्हारे चेहरे पे अपने लंड का पानी निकालूंगा. बोलो बहु..
सपना -- ठीक है बाबूजी.. लेकिन जल्दी कीजिये .
(मैं अपना लंड हाथ में लेकर बहु के पास बैठ गया बहु की चूचि से चादर हटा दिया और बहु की बड़ी बड़ी चूचि और निप्पल देख मुट्ठ मारने लगा. मेरा लंड बहु के होठ के काफी करीब था और बहु बेशर्मी से कभी मुझे तो कभी मेरे लंड को देख रही थी)। थोड़ी देर बाद मेरे लंड से गाढ़ा सफ़ेद पानी बहु के होठ पे गिरा और फिर उसके पूरे चेहरे पे.. आज मुझे अपनी ही बहु के मुँह पे मुठ मार कर बहुत सैटिस्फैक्शन मिला. बहु ने अपना मुँह पोंछा और बोली..
सपना -- बाबूजी.. आपने तो मेरा पूरा मुँह गन्दा कर दिया कितना सारा पानी निकला है आपका?
मैं -- हाँ बहु.. तुम्हारी जैसी बहु हो तो किस ससुर का नहीं निकलेगा.
सपना -- मुस्कुराते हुवे बोली.. आपको बहु पसंद है ना? लेकिन प्लीज वादा कीजिये आज के बाद आप ऐसा नहीं करेंगे.
मैं -- बहु को आँख मारते हुवे.. ठीक है बहु.. लेकिन अगर बहु का मन करे तो?
सपना -- (हँसते हुवे.. -- नहीं होगा बहु कंट्रोल कर लेगी।
बहु के मुँह पे अपना माल निकाल के मुझे काफी सैटिस्फैक्शन हुवा, मैं रिलैक्स होने के बाद वहीँ बहु के बगल में सो गया. बहु भी अपना मुँह पोंछ अपना पेटीकोट पहन मेरे बगल में लेट गई. सुबह जब मेरी नींद खुली तो बहु कमरे में नहीं थी शायद वो किच
मै -- चलो अब हम लोग मॉर्निंग वाक के लिए चलते हैं, मैं सपना को भी बुलाता हूँ.
मैं -- बहुउउउ.....सपना -- जी बाबूजी आयी..
सपना पहले से ही एक पिंक कलर का मिड ड्रेस पहनी हुई थी। उसकी गोरी और मोटी जांघें सुबह-सुबह हमे पागल बना रही थी..
सपना -- बाबूजी मैं तैयार हूँ चलिये!
सपना -- कैसी लग रही हूँ बाबूजी..
मैं -- (मेरी साँसे तेज़ थी..) बहुत अच्छी लग रही हो बहु.. लाल कलर की ब्रा पैंटी में बहुत गोरी लग रही हो, और तुम्हारी जांघें कितनी मोटी चिकनी और मांसल हैं बहु.. (ऐसा कहते हुवे मैंने आँख बंद कर अपने लंड का स्किन पूरा खोल 3-4 बार जोर से स्ट्रोक दिया.)।
सपना -- (हँसते हुवे.. -- सच्ची बाबूजी.. मुझे भी इसकी कलर बहुत पसंद है.. आपको ठण्ड लग रही है क्या? आपने ब्लैंकेट क्यों ले लिया?
मैं -- हाँ बहु थोड़ी ठण्ड लग रही थी.. (मैं बहु की सेक्सी स्ट्रक्चर देख तेज़ी से मास्टरबेट करने लगा..)।
सपना -- क्या हुवा बाबू जी? आपके हाथों को -- इतना क्यों शेक कर रहे हैं?
मैं -- कुछ नहीं बहु तुम्हारे कमरे में मच्छर ज्यादा है पैर पे कोई मच्छर ने काट लिया शायद.. (मैं खुजलाने के बहाने और तेज़ी से लंड हिलाने लगा और बस थोड़ी देर में ब्लैंकेट के अंदर मेरे लंड से गाढ़ा पानी निकल आया.. )।
सपना -- हाँ बाबूजी मच्छर तो ज्यादा है यहाँ.. मैं गुड नाईट लगा देती हूँ..
(बहु मेरे सामने ब्रा पैंटी में अपनी गांड मटकाते हुवे स्विच के तरफ गई और गुड नाईट लगाने लगी..)। मैंने मौका देख तुरंत अपना लंड अंडरवियर के अंदर वापस डाल लिया. सपना बेड के ऊपर आ गई और घुटने पे मेरे सामने बैठ अपनी ब्रा को छूते हुवे बोली..
सपना -- बाबूजी.. इस ब्रा की क्वालिटी कितनी अच्छी है ना?
मैं -- (मैं बहु के पास आया और अपने हाथ बहु के कंधे के पास ब्रा को छूते हुवे..बोला) हाँ बहु ये तो बहुत अच्छा है. मैं धीरे से अपना हाथ नीचे ले आया और साइड से बहु की ब्रा के अंदर हाथ डालते हुवे ब्रा के कपडे को छूने लगा... मेरी उंगलियां बहु के नंगे बूब्स को महसूस कर रही थी..
सपना -- बाबूजी ब्रा तो मुझे बहुत पसंद आयी है लेकिन पैंटी उतनी सॉफ्ट नहीं है और स्टिचिंग भी अच्छी नहीं है। देखिये ना साइड से धागे (थ्रेड) निकल रहे हैं. (बहु ने एक छोटी से थ्रेड पकड़ के कहा)।
मैं -- बहु इन सब थ्रेड को काट दो नहीं तो स्टिचिंग खुल जाएगी.. कुछ काटने के लिए है बहु?
सपना -- नहीं बाबू जी.. यहाँ तो कुछ नहीं है..
मैं -- बहु तुम थोड़ा पास आओ तो मैं अपने दांतो से काट देता हूँ।
सपना -- ठीक है बाबूजी.. (बहु थोड़ा ऊपर होते हुवे अपनी पैंटी मेरे चेहरे के पास लायी).
मैंने अपने हाथ बहु की ब्रा से निकालकर.. बहु की नंगी कमर और गांड पे रख दिया और झुक कर अपनी तरफ पुल किया. बहु अपना लेफ्ट हाथ बेड पे रख अपनी कमर को मेरे मुँह के पास ले आयी. मैं धीरे से अपने होठ बहु के इनर जांघें के पास ले गया और थ्रेड काटने की कोशिश करने लगा.
मैं -- बहु और पास आओ..(मैं अपना राइट हैंड बहु की गांड से हटा के बहु की पैंटी के साइड में ऊँगली डालते हुवे अपनी तरफ पुल किया.. मुझे बहु की चूत की साइड के हल्के हल्के बाल महसूस हुवे...)।
सपना अब अपनी चूत को मेरे नाक के पास ले आयी.. पैंटी की साइड से चूत नज़र आ रही थी। मैं अपने नाक को बहु की चूत के काफी करीब ले गया.. बहु की चूत की स्मेल मुझे पागल कर रही थी.. मैं बहु की पैंटी साइड से हटा कर थ्रेड काटने लगा, मेरी उंगलिया बहु की गरम चूत से रगड़ खा रही थी. एक-दो बार मैंने थ्रेड काटने के बहाने अपने होठ बहु की चूत पे रगड़ दिए.. धीरे-धीरे बहु बेड पे लेट गई और मैं उसकी जांघें के बीच में उसकी चूत की स्मेल का मज़ा ले रहा था.. बहु की आँखें बंद थी..
सपना -- (अपनी टाँगे फैला दी.. उसने मेरे बाल पकड़ते हुवे अपनी चूत के पास खींचा..और बोली) आह.. बाबूजी.. संभाल के सारे थ्रेड काट दीजिये बाबूजी..
बहु की आवाज़ में कुछ नशा सा था.. मैंने पैंटी को साइड से खींच के बहु की चूत को नंगा कर दिया.. अब तक बहु की चूत गीली हो गई थी.. मैंने अपनी एक ऊँगली को बहु की चूत के बीच रखा.. ये क्या बहु की चूत एकदम गरम और मक्खन की तरह मुलायम थी.. बहु के बुर(चूत) से पानी निकल रहा था.. जिससे मेरी ऊँगली गीली हो गई. उसकी चूत की महक ने मुझे पागल बना दिया और मैंने ऊँगली से चूत को खोला और अपनी जीभ से बहु के बुर(चूत) को 2-3 बार चाट लिया.
सपना -- (अपनी चूत को पीछे करते हुवे..) बाबूजी.... ये आप..क्या आआआआहहहहहहहह!! थ्रेड काट दी सारी?
मैं -- (अपना चेहरा ऊपर करते हुवे..) हाँ बहु.. वो नीचे थोड़ा गीला होने की वजह से थ्रेड चिपक गया था.. इसलिए मैंने जीभ से निकाल के काट दिया.
मेरे होठ और मुँह पे बहु की चूत का पानी लगा था.. मैं उसे पोंछते हुवे मुस्कुराते हुवे बोला.. तभी बेड के किनारे रखे बहु का मोबाइल बजा.. बहु ने हाथ बढ़ा के सेल फ़ोन उठाया.. और अपनी पैंटी ठीक कर बिस्तर पे बैठ गई.
सपना -- (सेल फ़ोन देखते हुवे..) बाबूजी राजेश का फ़ोन है..
अपने मन में मैं अपने बेटे को गाली दे रहा था.. कैसे गलत टाइम पे फ़ोन किया, मेरी बहु के पति ने.. शायद मै कुछ देर और बहु की बुर(चूत) चाट पाता... बहु राजेश से फ़ोन पे बात करते हुवे..
सपना -- हेलो राजेश कैसे हो आप?
सपना -- ठीक हूँ.. नहीं अभी शॉपिंग कर के आयी कुछ.. अपने कमरे में हूँ।
सपना -- बाबूजी ठीक हैं.. यहीं हैं. सपना -- कुछ नहीं.. यूँ ही। मैं और बाबूजी बातें कर रहे थे।
मै बहु के बेड पे बैठा बहु और राजेश की बातें सुन रहा था. बहु ने राजेश से बस ये बोला के मैं और बहु बातें कर रहे थे.. लेकिन सच्चाई तो कुछ और ही थी. बहु को झूठ बोलता देख मैंने राहत की सांस ली। इसका मतलब मेरे और बहु के बीच अभी जो भी हो रहा था राजेश को इस बात का कभी पता नहीं चलेगा.
सपना -- ओके.. राजेश मै शाम को कॉल करती हूँ अभी कुकिंग करनी है। बहु ने फ़ोन काट दिया और बेड पे रखे शॉर्ट और टीशर्ट पहनते हुवे मुझसे बोली..
सपना -- बाबूजी मैं कुछ डिनर बना देती हूँ.. आज रात आप अपने कमरे में सोयेंगे या मेरे कमरे में..? एक्चुअली रात को मैं राजेश से बात करुँगी..
मैं -- ठीक है बहु मैं अपने कमरे में सोऊंगा.. बहु कमरे से बाहर चली गई मैंने बेड पे गिरे अपने माल को बहु की साड़ी से पूछ दिया लेकिन निशान नहीं मिटा. मैं वैसे छोड़ के कमरे के बाहर आ गया. रात में डिनर के बाद मैं अपने कमरे में लेटा था, आज जो भी हुवा उसके लिए मैं अपने लक पे बहुत खुश था. आज मुझे अपनी ही जवान बहु की बुर(चूत) चाटने का मौका मिला था. मैं बहु के बारे में सोच, मास्टरबेट कर सो गया.
शाम को बहु रेड कलर की साड़ी पहने किचन में बर्तन धो रही थी. मैं किचन में उसके पीछे एक टीशर्ट और लोअर पहने चाय की प्याली लिए खड़ा बहु से बातें कर रहा था।
सपना -- कमरा थोड़ा साफ़ करना पड़ेगा.. चीज़ें बिखरी पड़ी हैं बहुत दिन से हम लोगों ने साफ़ नहीं किया. मैंने बर्तन धो लिए हैं आप अगर मेरी थोड़ी सी मदद कर दें तो मैं जल्दी से कमरा साफ़ कर दूँगी.
मैं -- (बहु की खुली चिकनी कमर को देखते हुवे..) हाँ बहु क्यों नहीं..
किचन से निकल कर मैं और बहु मेरे कमरे में जाते हैं और बिखरे पड़े सामान को ठीक करने लगते हैं..
सपना -- बाबूजी.. यहाँ रखे पुराने सामान को मैं ऊपर वुडेन कवर में रख देती हूँ बहुत सारा स्पेस हो जायेगा कमरे में।
मैं -- हाँ बहु रुको मैं कोई चेयर लगाता हूँ जिसपे तुम चढ़ के सामान रख सको.
सपना -- अच्छा बाबूजी..
मैं डाइनिंग हॉल से एक प्लास्टिक की चेयर लाया और कमरे में बेड के पास लगा दी.
मैं -- बहु तुम इस चेयर पे चढ़ जाओ और बॉक्स ऊपर रख दो.. और संभल के चढ़ना बेटी..
सपना -- जी बाबूजी..
बहु ने एक बार फिर अपनी साड़ी के पल्लू को अपनी कमर में बाँधा और अपनी पूरी तरह से खुली नाभि को बेशर्मी से दिखाती हुई चेयर पे चढ़ गई.
सपना -- बाबूजी.. मुझे होल्ड करिये मैं गिर जाउंगी, मैं कोशिश करती हूँ बॉक्स को ऊपर डालने का..
मैं बहु के बिलकुल सामने था उसकी नाभि मेरे फेस के पास थी. मैंने अपने दोनों हाथों से बहु की बड़ी सी गांड को घेर लिया और अपनी हथेली से बहु की नरम मुलायम गांड को साड़ी के ऊपर से दबा दिया.
बहु -- आह बाबूजी.. थोड़ा ऊपर को कीजिये मेरा हाथ लगभग पहुंच गया है.
मैंने बहु की बड़ी गांड को कस के दबाते हुवे ऊपर उठा दिया और अपना फेस बहु के डीप सॉफ्ट नाभि में चिपका लिया.. मेरे गाल और होठ बहु की नाभि से टच हो रहे थे.. मैंने बहाने से अपने होठ बहु की नाभि पे रगड़ दिए. अभी 2 मिनट ही हुवे थे कि तभी पावर कट हो गया.. शाम हो चुकी थे और इस वजह से कमरे में अँधेरा छा गया.
सपना -- हो गया बाबूजी अब मुझे धीरे से नीचे उतारिये प्लीज.. मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा..
मैं -- ठीक है बहु.. (कहते हुवे मैंने हाथ के घेरे को ढीला किया और बहु को नीचे आने दिया.. )।
अँधेरे में मैं अपने हाथ धीरे-धीरे बहु की गांड से होते हुवे.. उसकी नंगी कमर को महसूस कर पा रहा था. सामने के तरफ मेरा फेस उसकी नाभि से होता हुवा अब उसके बूब्स के काफी करीब आ चुका था. नीचे आते वक़्त बहु के घुटने से मेरा लोअर और अंडरवियर नीचे की तरफ खिंच गया और मेरा खड़ा लंड पूरी तरह से बाहर निकल आया. इससे पहले के मैं संभल पाता बहु चेयर से उतरते ही अपना बैलेंस खो बैठी और जमीन पे झुकते ही उसके नरम होठ मेरे लंड से कस के रगड़ खा गए. मैंने अँधेरे में उसके गीले होठ को साफ़ अपने लंड पे महसूस किया... मैंने बिना कोई मौका गवाए अँधेरे का फ़ायदा उठाते हुवे जानबूझ कर बैलेंस खोने का नाटक किया और एक हाथ से लंड का स्किन नीचे खोल बहु के मुँह में डाल दिया. बहु की गरम सांस और मुँह के अंदर के लार का स्पर्श पा कर मेरे लंड से थोड़ा सा पानी निकल आया...
सपना -- बाबुजीई.... (कहते हुवे अपने हाथ मेरी टांगो पे रख दिये और लंड को अपने मुँह में और अंदर जाने से रोक लिया)।
मैं -- ओह बहु...सॉरी (कहते हुवे अपने लंड को बहु के मुँह से निकाल लिया..)।
लेकिन इतना सब होने के बाद मेरे अंदर इतना कण्ट्रोल नहीं था के मैं रुक पता.. लंड बहु के मुँह से बाहर आते हे फच-फच की आवाज के साथ ढेर सारा पानी मेरे लंड से निकल गया. मेरे लंड का पानी बहु के चेहरे गर्दन और शायद बूब्स पे गिरा और बाकी फर्श पे.. बहु का चेहरा मेरे लंड के पानी से भीग गया था.. मैंने अपने लंड को अंदर अपने लोअर में छिपा लिया. थोड़ी देर के लिए कमरे में सन्नाटा था। हम दोनो में से किसी ने कुछ नहीं कहा. बहु ने अपने आँचल से अपना चेहरा साफ़ किया और उठ के खड़ी हो गई. मैं भी बहु से बिना नज़रें मिलाये बिस्तर की तरफ बढ़ गया. बहु ने अँधेरे में फर्श पे गिरे मेरे माल को देखने की कोशिश की और फिर बगल के कमरे से एक कपडा लाकर फर्श पोंछने लगी. मैं वहीँ खड़ा बहु को देखता रहा बहु ने चुप्पी तोड़ने के लिए मुझसे रिक्वेस्ट की..
सपना -- बाबूजी.. ये चेयर हॉल में रख दीजिये ना प्लीज.
मैं -- अच्छा बहु..
मैंने चेयर वापस हॉल में रख दी.. (मैंने थोड़ी राहत की सांस ली, जो कुछ भी हुवा उसके रिएक्शन से साफ़ नज़र आ रहा था कि बहु को कोई फर्क नहीं पड़ा और अब वो नार्मल हो चुकी थी.. रात को मैं और बहु डिनर करने के बाद बिस्तर पे बैठे बातें कर रहे थे...
" लगता है आज सारी रात पावर नहीं आएगी, कैंडल कि रौशनी में डिनर बनाने में काफी तकलीफ हुई होगी ना?"
सपना -- नहीं मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं हुई इस मोहल्ले में शाम को लाइट जाना तो आम बात है.
मैं -- हाँ हमारे घर का पावर बैकअप भी ख़राब पड़ा है कल मैं उसे बाजार में ठीक कराने कि कोशिश करता हूँ देखो अब तो सारे कैंडल भी खत्म हो जायेंगे. बहु और कैंडल हैं?
सपना -- नहीं बाबूजी.. और कैंडल नहीं हैं.
शायद बहु बहुत ज़्यादा कैंडल यूस करती है.. जानबूझ कर डबल मीनिंग में बातें की)।
सपना -- हाँ मैं तो बहुत सारे कैंडल यूस करती हूँ... कैंडल भी पतले हैं तो ज्यादा देर तक नहीं चलते.. मोटे होते तो अच्छा होता
मै -- बहु तुम्हे मोटा कैंडल चाहिए तो मैं ला दूंगा. मेरा कैंडल बहुत मोटा है बहु तुम्हे चाहिए तो मैं दे दूंगावैसे बहु तुम कैंडल के अलावा और क्या-क्या यूस करती हो?
सपना -- जी मैं.. ज्यादा तो कैंडल ही यूस करती हूँ कभी कभी किचन में अपना मोबाइल भी यूस कर लेती हूँ.. उसमे टोर्च है ना..
बहु... तुम बाबूजी का मोबाइल क्यों नहीं यूस करती..? वो बड़ा भी है और उसकी रौशनी भी ज्यादा है.
वैसे बहु तुम्हे मोबाइल से ज्यादा मज़ा आता है या कैंडल से?? मेरा मतलब आसान क्या है?
इस बार काफी खुल के डबल मीनिंग सवाल किया और मुझे लगा शायद बहु को भी समझ आने लगा के क्या ये डबल मीनिंग बातें हो रही हैं.. लेकिन फिर भी बहु शायद जानबूझ कर बोली..
सपना -- जी.. मुझे तो कैंडल यूस करने में ज्यादा मज़ा आता है..
बहु के मुँह से ऐसी बात सुन कर मेरा लंड खड़ा हो चुका था... मैंने भी अपनी तरफ से डबल मीनिंग जोड़ने की कोशिश की..
मैं -- बहु क्या तुम रात में भी कैंडल यूस करती हो...?
सपना -- हाँ बाबूजी मै रात में मोटा कैंडल यूस करती हूँ ताकि देर तक चले.. वरना मुझे अँधेरे में डर लगता है.
मैं -- कोई बात नहीं बहु आज तो मैं तुम्हारे साथ ही सोऊंगा तो आज तुम्हे किसी मोटे कैंडल की जरुरत नहीं पड़ेगी..
कुछ देर बात करने के बाद मैं और बहु बैडरूम में आ गए.. बैडरूम में आने के साथ ही बहु ने मेरी तरफ प्यासी नज़रों से देखते हुवे एक मादक अंगड़ाई ली. मैं अपनी नज़र बहु के चेहरे से हटा कर उसके बड़े बूब्स को देखने लगा। उसकी अंगड़ाई देख कर ऐसा लगता था मानो बहु की दोनों चूचियां ब्लाउज का बटन तोड़ के बाहर आ जाएँगी. बहु ने अपना पल्लू निचे गिरा दिया और बोली.
सपना -- बाबूजी आज कितनी गर्मी है कमरे में..
मैं बहु की नाभि देखने लगा, पल्लू उतरने से उसका पेट पूरा नंगा हो चुका था और उसका गोरा पेट और कमर अंधेरे में भी चमक रहे थे. मैंने भी अपनी टीशर्ट उतारते हुवे कहा...
मैं -- हाँ बहु बहुत गर्मी है.. बहु का नंगा पेट देखकर लोअर में मेरा लंड खड़ा था..)।
सपना -- पता नहीं कब लाइट आएगी.. (बहु ने अपने ब्लाउज के 3 बटन खोल दिए )।
मैं -- (मैं बहु की क्लीवेज को देखता रहा..उसकी चूचियां ब्रा के अंदर से बाहर निकल आयीं थी..) बहु.. तुम साड़ी में बहुत अच्छी लगती हो..
सपना -- सच बाबूजी.. क्या अच्छा लगता है?
मैं -- सबकुछ बहु.. तुम्हारी पसंद के कलर तुम्हारी साड़ी पहनने का स्टाइल.. तुम्हारी साड़ी में बॉडी सब कुछ अच्छा लगता है।
सपना -- साड़ी पहनने के स्टाइल? कौन सी स्टाइल?
मैं -- वही बहु जो तुम साड़ी को नाभि के नीचे बांधती हो और टाइट भी।
सपना -- हाँ बाबू जी मुझे साड़ी नाभि के नीचे पहनना अच्छा लगता है..
मैं -- बहु तुम्हारी नाभि बहुत ही अच्छी दिखती है.. ऐसी नाभि तो किसी एक्ट्रेस की भी नहीं है बहु।
सपना -- (अपनी साड़ी को नाभि के और नीचे करते हुवे.. -- बाबूजी.. ऐसा क्या है मेरी नाभि में ?
मैं -- (बहु के पास जा कर अपने दोनों हाथों से उसकी नंगी कमर को पकड़ते हुवे..) बहु तुम्हारी नाभि कितनी डीप और बड़ी है.. मुझे हमेशा से ऐसी नाभि पसंद थी.. बहु जब तुम कॉलेज में होगी तब तुम्हारी नाभि के तो बहुत सारे दीवाने होंगे ना?
सपना -- (हँसते हुवे.. -- होंगे बाबूजी मुझे नहीं मालूम.. अभी तो मुझे इतना पता है के मेरी नाभि को मेरे पति और ससुर दोनों बहुत पसंद करते हैं।
बहु अब अपनी साड़ी और ब्लाउज उतार चुकी थी। वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में खड़ी थे.
सपना -- बाबूजी मैं कपडे बदल लेती हूँ.. आप भी चेंज कर लीजिये।
बहु ने अपने पेटीकोट की डोर खींचते हुवे कहा..)।
सपना -- ओह बाबूजी.. ये पेटीकोट खुल नहीं रही.. ओह्हो..
मैं -- (बेड पे बैठे हुवे...) इधर आओ बहु मैं तुम्हारी पेटीकोट खोल देता हूँ।
सपना -- जी बाबूजी (बहू मेरे करीब आ जाती है)। मैंने कुछ देर कोशिश की..
मैं -- अरे बहु लगता है गोल गांठ पड़ गई है ये नहीं खुलेगा.. तुम ऐसे ही सो जाओ.. सुबह खोल दूंगा।
सपना -- नहीं बाबूजी मैं गर्मी से मर जाउंगी.. आप प्लीज खोल दीजिये ना।
मै -- ठीक है बहु.. मैं अपने दांतो से कोशिस करता हूँ।
फिर मै बहू को अपने और पास खींच कर, बहु के पेटीकोट को अपने होठ और दांत से खोलने लगा.. ऐसा करते वक़्त मैंने कई बार बहु की नाभि भी चाट ली.
मैं -- खुल गई बहु..
मैंने बहु के पेटीकोट को नीचे गिरा दिया। फिर मैं बहु की नंगी जांघों को छूने लगा..
मैं -- बहु तुम सच ही कहती थी तुम्हारी जांघो पे बिलकुल बाल नहीं हैं. (मैंने बहु की जांघों पे हाथ फिराते हुवे कहा)।
सपना -- हाँ बाबुजीई... (बहु की आवाज़ थोड़ी बदली सी थी.. जैसे उसे कुछ हो रहा हो)।
मैं बहु की इनर जांघों को सहलाते हुवे उसकी चूत के काफी करीब ऊँगली लगा दी.. मुझे वहां पे बहुत गीला सा लगा.. बहु शायद वेट थी।
मै -- अरे बहु तुम्हे तो पसीना आ रहा है..
सपना -- आआआहहह नहीं बाबूजी ये पसीना नहीं है..
मैं -- फिर क्या है बहु?
सपना -- बाबूजी वो बस ऐसे ही कुछ नहीं छोड़िये ना.. (बहु मेरा हाथ हटा कर बिस्तर पे एक पतली चादर के अंदर लेट गई)।
मुझे महसूस हुवा के शायद बहु वेट हो गई है और वो पसीना नहीं बहु की बुर का पानी था.. मैं बहु के बगल में उसी चादर में केवल लोअर पहने लेट गया.
मैं -- बहु क्या तुम ऐसे भीगी पैंटी पहन कर सोवगी? ऐसे तो तुम्हारे जांघों के बीच रेशेस आ जाएंगे।
सपना -- ओह... बाबूजी क्या भीगी पैंटी पहनने से रेशेस हो जाती है..?
मैं -- हाँ बहु.. और फिर स्किन डिजीज भी हो जाती हैं..
सपना -- क्या सच में बाबूजी.. एक बात कहूं पापा मुझे वहां 2 दिन से इचिंग हो रही है.. मुझे लगा के मैंने हेयर रिमूव किया इसलिए हो रही है.
मैं -- नहीं बहु रेशेस भी हो सकती है क्या तुम्हे 2 दिन से लगातार इचिंग हो रही है?
सपना -- हाँ बाबूजी।
मै -- बहु जब तुम्हे रेशेस हो तो रात को सोते वक़्त सब उतार दिया करो. लड़कियों का बदन बहुत नाज़ुक होता है इसलिए रेशेस होना बहुत कॉमन हो जाता है.
सपना -- मैं तो कपडे उतार के सोती हूँ.. देखिये अभी भी मैंने बस ब्रा और पैंटी ही पहनी है।
मैं -- बहु मैं इनको भी उतारने को कह रहा हूँ.. तुम्हे पूरी तरह से नंगी सोना चाहिए कुछ दिन. आज तो लाइट भी नहीं है गर्मी भी बहुत है और तुमने भीगी पैंटी पहनी है.. तुम इन्हे भी उतार दो बहु।
बहु ने मेरी बात सुन अपनी ब्रा उतार दी.. और अपनी पैंटी हाथ में लेकर मुझे दिखाते हुवे बोली..
सपना -- ये लीजिये बाबू जी मैंने अपनी पैंटी उतार दी..
बहु की पैंटी हाथ में देख मैं पूरी तरह से एकसाईटेड हो गया. मैंने अपनी लोअर और अंडरवियर खोल बिस्तर के नीचे गिरा दी और एक हाथ से लंड को पकड़ सहलाने लगा. मैंने बहु के हाथ से पैंटी ले ली और उसकी गीली पैंटी को सूंघने लगा।
सपना -- ये क्या कर रहे हैं बाबूजी?
मैं -- बहु तुम्हारी पैंटी से कुछ अजीब सी स्मेल आ रही है..
सपना -- ओह बाबूजी फेंकिए ना उसे... (बहु ने अपनी पैंटी मेरे हाथ से लेकर नीचे फेंक दी और शीट के अंदर अपना चेहरा ढक ली)।
सपना -- बाबू जी... ये शीट के अंदर कैसी स्मेल है? मुझे रेयलाइज हुवा के मैंने लंड सहलाते-सहलाते अपने लंड का स्किन नीचे खोल दिया था और मेरे लंड की स्मेल फ़ैल गई थी.
मैं -- बहु वो मुझे गर्मी लग रही थी तो मैंने अपनी लोअर और अंडरवियर उतार दी है..
सपना -- ओह्ह बाबूजी आपको भी ज्यादा गर्मी लग रही है? ठीक किया आपने न जाने कब तक लाइट आएगी.. लेकिन ये स्मेल क्यों है?
मैं -- वो बहु..... जैसे तुम्हारे पैंटी से स्मेल आ रही थी न. वैसे ही जब मैंने अपनी अंडरवियर उतार दी तो आ रही है.. ये देखो ठीक वैसी ही स्मेल मेरे हाथ से भी आ रही होगी, (मैंने अपना हाथ लंड से हटा कर बहु की तरफ बढ़ाया)।
सपना -- (बहु मेरे हाथ को स्मेल करते हुवे.. -- हाँ बाबूजी.. ये तो वैसे ही स्मेल है.. लेकिन ये आपके हाथ से क्यों? इसका मतलब आप अपने हाथ से क्या कर रहे थे..
मैं -- अरे बहु वो मैंने जब अंडरवियर उतारा तो साथ में वो...आआ... मेरा मतलब... वो.... स्किन खुल गया और फिर हाथ लगाने से स्मेल मेरे हाथ में भी आ गई.
सपना -- ओह बाबूजी.. आपको दर्द तो नहीं हुवा..??
मैं -- नहीं बहु..
मैं -- बहु एक बात पूछूं?
सपना -- हाँ बाबूजी पूछिये।
मै -- तुम्हारी पैंटी गीली क्यों थी.. -- और तुम्हारी पैंटी में स्मेल कैसी थी?
सपना -- (शर्माते हुवे..) ओह पापा.. वो ऐसा ही होता है.. वहां नीचे स्मेल तो होती है न जैसे आपकी है.. तो पैंटी में भी वही स्मेल थी..
मैं -- (बहु का जवाब सुनकर मैं तेज़ी से लंड हिलाने लगा और भारी सांस लेते हुवे फिर से पूछा..) क्या तुम नीचे अभी भी गीली हो..??
सपना -- (शर्माते हुवे -- जी बाबूजी.. मैं -- क्या तुम्हारे नीचे ज्यादा पानी आ रहा है या कम?
सपना -- जी बाबूजी ज्यादा आ रहा है..
मैं -- ओह्ह्ह बहु.. अपना एक हाथ नीचे ले जाओ और अंदर से पानी पोंछ लो।
सपना -- क्यों बाबूजी?
मैं -- बहुउउउउउउउउ जैसा मैं कह रहा हूँ करो..
सपना -- ठीक है बाबूजी.. (बहु अपना हाथ अपने बुर पे ले गई और 2 उँगलियों से पानी को साफ़ कर अपना हाथ बाहर ले आयी)
मैंने पहले बहु का हाथ पकड़ करीब से स्मेल किया और फिर उसकी बुर के पानी से चिपचिपी ऊँगली को मुँह में ले चाटने लगा..
सपना -- आआह बाबूजी ये क्या कर रहे हैं??
मैं -- बहु.. मैं सोच रहा था के जब इसकी स्मेल इतनी अच्छी है तो इसे चाटने में कितना मज़ा आएगा..
सपना -- बाबूजी.. ये आप क्या कह रहे हैं.. आपने मेरे... वहां के पानी को... ओहह!
मै -- हाँ बहु तुम्हारी बुर का पानी चाटने में बहुत मज़ा आ रहा है बहु..
(मैंने बेशर्मी से बहु के बुर की बात कह डाली... बहु मेरे मुँह से बुर वर्ड सुन कर शॉक हो गई.. और मेरा मुँह बंद करने के लिए उसने अपना हाथ मेरे मुँह पे रख दिया। लेकिन ये वही हाथ था जिससे बहु ने अपनी चूत में ऊँगली की थी. मैं पागलों की तरह बहु के हाथ चाटने लगा. बहु शर्मा गई..)
सपना -- बाबूजी.. हमे साथ नहीं सोना चाहिए.. ये आपको क्या हो रहा है.. प्लीज रुक जाइये.
मैं -- मैं रुक जाऊंगा बहु बस एक बार मुझे अपनी गरम बुर (चूत) छूने दो।
सपना -- नहीं बाबूजी..
मैं -- प्लीज बहु मैं जानता हूँ ये गलत है लेकिन मुझे बस एक बार अपनी गरम जवान बहु का बुर छूना है।
सपना -- नहीं बाबूजी.. मैं नहीं कर सकती अगर आपको मेरे बुर का पानी पीना है तो मैं अपनी ऊँगली डाल के आपके मुँह में देती हूँ बस. ये ठीक है?
बहु के मुँह से बुर वर्ड सुन मैं पागलों की तरह लंड हिलाने लगा.. और बोला.. मैं बहु को खुलता देख और गन्दी बातें करने लगा।
मै -- ठीक है बहु मैं नहीं छूऊँगा, लेकिन फिर तुम्हे मेरे लंड से पानी निकालना होगा..
सपना -- मैं कैसे कर सकती हूँ बाबूजी..?
मैं -- देखो बहु झूट मत बोलो मुझे पता है तुम्हे भी मेरे लंड का स्मेल पसंद है और शाम को तो रूम साफ़ करते वक़्त मेरे लंड का पानी तुम्हारे चेहरे पे गिर गया था.
सपना -- वो सब अचानक हुवा था बाबूजी.. प्लीज मैं आपका लंड नहीं छूवूँगी.. प्लीज आप मेरे ससुर हैं.
मैं -- ठीक है बहु फिर मैं तुम्हारे सामने मास्टरबेट करूँगा और शाम की तरह तुम्हारे चेहरे पे अपने लंड का पानी निकालूंगा. बोलो बहु..
सपना -- ठीक है बाबूजी.. लेकिन जल्दी कीजिये .
(मैं अपना लंड हाथ में लेकर बहु के पास बैठ गया बहु की चूचि से चादर हटा दिया और बहु की बड़ी बड़ी चूचि और निप्पल देख मुट्ठ मारने लगा. मेरा लंड बहु के होठ के काफी करीब था और बहु बेशर्मी से कभी मुझे तो कभी मेरे लंड को देख रही थी)। थोड़ी देर बाद मेरे लंड से गाढ़ा सफ़ेद पानी बहु के होठ पे गिरा और फिर उसके पूरे चेहरे पे.. आज मुझे अपनी ही बहु के मुँह पे मुठ मार कर बहुत सैटिस्फैक्शन मिला. बहु ने अपना मुँह पोंछा और बोली..
सपना -- बाबूजी.. आपने तो मेरा पूरा मुँह गन्दा कर दिया कितना सारा पानी निकला है आपका?
मैं -- हाँ बहु.. तुम्हारी जैसी बहु हो तो किस ससुर का नहीं निकलेगा.
सपना -- मुस्कुराते हुवे बोली.. आपको बहु पसंद है ना? लेकिन प्लीज वादा कीजिये आज के बाद आप ऐसा नहीं करेंगे.
मैं -- बहु को आँख मारते हुवे.. ठीक है बहु.. लेकिन अगर बहु का मन करे तो?
सपना -- (हँसते हुवे.. -- नहीं होगा बहु कंट्रोल कर लेगी।
बहु के मुँह पे अपना माल निकाल के मुझे काफी सैटिस्फैक्शन हुवा, मैं रिलैक्स होने के बाद वहीँ बहु के बगल में सो गया. बहु भी अपना मुँह पोंछ अपना पेटीकोट पहन मेरे बगल में लेट गई. सुबह जब मेरी नींद खुली तो बहु कमरे में नहीं थी शायद वो किच
मै -- चलो अब हम लोग मॉर्निंग वाक के लिए चलते हैं, मैं सपना को भी बुलाता हूँ.
मैं -- बहुउउउ.....सपना -- जी बाबूजी आयी..
सपना पहले से ही एक पिंक कलर का मिड ड्रेस पहनी हुई थी। उसकी गोरी और मोटी जांघें सुबह-सुबह हमे पागल बना रही थी..
सपना -- बाबूजी मैं तैयार हूँ चलिये!